एरीज में रिकार्ड 16 वर्ष लंबी सल्तनत रही है विवादित निदेशक प्रो. रामसागर की


Pr. Ram Sagar
Pr. Ram Sagar

-१९९६ से २०१२ तक उत्तर प्रदेश राजकीय वेधशाला के उत्तराखंड वेधशाला और एरीज बनने के बाद तक रहा निदेशक के रूप में सर्वाधिक लंबा कार्यकाल
नवीन जोशी, नैनीताल। सूर्य एवं चांद सितारों के प्रेक्षण, वायुमंडलीय एवं मौसमी शोधों के साथ देश की सबसे बड़ी ३.६ मीटर व्यास की दूरबीन स्थापित करने और दुनिया की सबसे बड़ी ३० मीटर व्यास की दूरबीन में सहभागिता के लिए पहचाने जाने वाला एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान इस बार अपने पूर्व निदेशक प्रो. रामसागर २००८ के एक मामले में सीबीआई द्वारा की गई जांच के बाद जेल जाने को लेकर सुर्खियों में है। उन्होंने मंगलवार को देहरादून स्थित सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

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मानव सैलानियों के लिये सीजन ‘ऑफ”, पर पक्षी सैलानियों के लिये ‘ऑन”


नैनी झील में विचरण करते ग्रेट कॉमोरेंट और सुर्खाब पक्षी के जोड़े।
नैनी झील में विचरण करते ग्रेट कॉमोरेंट और सुर्खाब पक्षी के जोड़े।

नैनी झील में पहुंचने लगे ग्रेट कॉर्माेरेंट, सुर्खाब, बार हेडेड गीज आदि प्रवासी पक्षियों के भी जल्द पहुंचने की संभावना
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, जहां दीपोत्सव के बाद ठंड बढ़ने के साथ आमतौर पर पहाड़ों और खासकर सरोवरनगरी में मानव सैलानियों के लिए पर्यटन सीजन को ‘ऑफ” माना जाता है, वहीं यही समय है जब पक्षी सैलानियों के लिए सीजन ‘ऑन” हो गया है। आश्चर्य न करें, अब समय शुरू हो गया है जब पहाड़ों एवं खासकर नैनीताल एवं इसके करीब की जल राशियों पर हजारों मील दूर उच्च हिमालयी देशों के प्रवासी पक्षियों का लंबे प्रवास के लिए आना प्रारंभ होने जा रहा है। नैनीताल में ग्रेट कॉर्मोरेंट यानी पन कौव्वे के करीब आधा दर्जन जोड़े और अपने सुनहरे पंखों के लिए प्रसिद्ध सुर्खाब पक्षी के जोड़े सोमवार को पहुंच गए हैं, और इनके बार हेडेड गीज सहित अन्य अनेकों प्रवासी पक्षियों के साथ शीघ्र ही पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। पढ़ना जारी रखें “मानव सैलानियों के लिये सीजन ‘ऑफ”, पर पक्षी सैलानियों के लिये ‘ऑन””

‘एक्सन जैक्सन’ से रुपहले पर्दे पर पदार्पण करेगी पहाड़ की बेटी ‘मनस्वी


फिल्म एक्सन जैक्सन के एक दृश्य में नायिका मनस्वी ममगई।
फिल्म एक्सन जैक्सन के एक दृश्य में नायिका मनस्वी ममगई।

-‘मिस इंडिया वर्ल्ड-2010″ मनस्वी ममगई की मल्टी स्टारर फिल्म ‘एक्सन जैक्सन” प्रदर्शन को तैयार
नवीन जोशी, नैनीताल। पहाड़ चढ़ने के लिए पहाड़ सा होंसला, विश्वास व काबिलियत होनी चाहिऐ, यह आज तक सिर्फ सुना जाता है, मन, मस्तिष्क और मानस की सुंदरता की समन्वय पहाड़ की बेटी मनस्वी ममगई नाम की लड़की ने इस कथन को सही साबित करते हुऐ देश भर की मध्यमवर्गीय समाज की लड़कियों के लिए एक नयी राह खोल दी है। देश की सबसे प्रतिष्ठित पेंटालून फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2010 (पीएफएमआई) का खिताब जीतने वाली पहाड़ की पहली बेटी मनस्वी अब रुपहले परदे के नए आसमान पर अजय देवगन, सरीखे ‘सितारों” के साथ अवतरित होने को तैयार हैं। उनकी मल्टी स्टारर फिल्म ‘एक्सन जैक्सन” प्रदर्शन को तैयार है। इसका पहला पोस्टर रिलीज हो चुका है, और फिल्म दिसंबर को रिलीज होने वाली है। इसके साथ ही उनका नाम भी देहरादून की हिमानी शिवपुरी व चित्रांशी रावत (चक दे इंडिया) नैनीताल की सुकृति कांडपाल, डोईवाला की उदिता गोस्वामी, मिस उत्तराखंड-2006 रही मूलत: अयोध्या यूपी की लावण्या त्रिपाठी व उर्वशी रौतेला (सिंह साहब द ग्रेट) जैसी हिंदी फिल्म उद्योग में स्थापित पहाड़ की गिनी-चुनी हीरोइनों में शाामिल हो जाएगा। पढ़ना जारी रखें “‘एक्सन जैक्सन’ से रुपहले पर्दे पर पदार्पण करेगी पहाड़ की बेटी ‘मनस्वी”

सूर्य पर ‘महाविस्फोट’ का खतरा, उभरा 10 लाख किमी व्यास का ‘सौर कलंक’


राष्ट्रीय सहारा, 10 फ़रवरी 2015,पेज-1

एक साथ उभरे हैं चार बड़े सौर कलंक, पृथ्वी के उपग्रह और संचार प्रणाली पर पड़ सकते हैं दुष्प्रभाव सूर्य पर बनी ‘सौर सुनामी’ और इससे पृथ्वी और इसके उपग्रहों को नुकसान की आशंका से वैज्ञानिक चिंतित

नवीन जोशी नैनीताल। दक्षिणायन से उत्तरायण में आये सूर्य पर एक साथ चार बड़े सौर कलंक (सन स्पॉट) उभर आए हैं। इनमें लगातार ‘एम-श्रेणी’ की सौर भभूकाएं (ज्वालाएं) निकल रही हैं और वैज्ञानिक अगले एक-दो दिनों में ‘एक्स-श्रेणी’ की सौर भभूकाओं के साथ सूर्य पर ‘महाविस्फोट’ होने जैसा अंदेशा जता रहे हैं। परेशानी की बात यह भी है कि सूर्य के दक्षिण पश्चिमी गोलार्ध में करीब आठ से 10 लाख किमी यानी पृथ्वी से चंद्रमा के बीच की दूरी के मुकाबले दो से ढाई गुना और पृथ्वी के व्यास के मुकाबले 62 से 78 गुना बड़ा सौर कलंक बन गया है, जो यदि असंतुलित हुआ तो इससे पृथ्वी तक भी प्रभाव पड़ सकता है। खासकर धरती से भेजे गए कृत्रिम उपग्रहों एवं धरती पर मौजूद संचार पण्राली को बड़ा नुकसान हो सकता है। पढ़ना जारी रखें “सूर्य पर ‘महाविस्फोट’ का खतरा, उभरा 10 लाख किमी व्यास का ‘सौर कलंक’”

कुमाऊं में ‘च्यूड़ा बग्वाल” के रूप में मनाई जाती थी परंपरागत दीपावली


Aipan (3)

-ऐपण और च्यूड़ों का होता था प्रयोग नवीन जोशी, नैनीताल। वक्त के साथ हमारे परंपरागत त्योहार अपना स्वरूप बदलते जाते हैं, और बहुधा उनका परंपरागत स्वरूप याद ही नहीं रहता। आज जहां दीपावली का अर्थ रंग-बिरंगी चायनीज बिजली की लड़ियों से घरों-प्रतिष्ठानों को सजाना, महंगी से महंगी आसमानी कान-फोड़ू ध्वनियुक्त आतिषबाजी से अपनी आर्थिक स्थिति का प्रदर्शन करना और अनेक जगह सामाजिक बुराई-जुवे को खेल बताकर खेलने और दीपावली से पूर्व धनतेरस पर आभूषणों और गृहस्थी की महंगी इलेक्ट्रानिक वस्तुओं को खरीदने के अवसर के रूप में जाना जाता है, वैसा अतीत में नहीं था। खासकर कुमाऊं अंचल में दीपावली का पर्व मौसमी बदलाव के दौर में बरसात के बाद घरों को गंदगी से मुक्त करने, साफ-सफाई करने, घरों को परंपरागत रंगोली जैसी लोक कला ऐपण से सजाना तथा तेल अथवा घी के दीपकों से प्रकाशित करने का अवसर था। मूलत: ‘च्यूड़ा बग्वाल” के रूप से मनाए जाने वाले इस त्योहार पर कुमाऊं में बड़ी-बूढ़ी महिलाएं नई पीढ़ी को सिर में नए धान से बने च्यूड़े रखकर आकाश की तरह ऊंचे और धरती की तरह चौड़े होने जैसी शुभाशीषें देती थीं।

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देश को आपस में जोड़ेगा और अपनेपन का भाव भी जगाएगा ‘स्वच्छ भारत अभियान”


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नवीन जोशी, नैनीताल। देश में गंदगी-भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, सरकारी लूट-खसोट जैसे अनेक प्रकारों की ही नहीं खासकर कूड़े की, कितनी बड़ी समस्या बन गई है इसे समझने के लिए यह याद करना ही काफी होगा कि इसे साफ करने के उपकरण-झाड़ू को एक नई पार्टी ने अपना चुनाव चिन्ह बनाया, और सत्ता भी प्राप्त कर ली, वहीं वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी झाड़ू को न केवल अपने वरन देश के अलग-अलग क्षेत्रों के शीर्ष नवरत्नों के हाथ में भी थमा दिया। और तीसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय को टिप्पणी करनी पड़ी कि केंद्र सरकार (पूरा देश भी उसमें समाहित है) सफाई के मामले में ‘कुंभकर्णी” नींद सोया हुआ है।

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‘डायलिसिस’ से बाहर आ सकती है नैनी झील


Good Morning Nainital
Good Morning Nainital

-लगातार सुधर रही नैनी झील की सेहत, घटेगा एयरेशन का समय
-2007 से शुरू हुआ था 24 घंटे कृत्रिम ऑक्सीजन चढ़ाने का कार्य, अब केवल 16 घंटे ही होगा एयरेशन
-पहले दो तिहाई झील में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य थी, अब पूरी झील में 8.5से 9 मिलीग्राम प्रति लीटर तक है ऑक्सीजन, पारदर्शिता भी 0.6 से बढ़कर तीन मीटर तक हुई
नवीन जोशी, नैनीताल। सात वर्ष पूर्व ‘दो तिहाई मौत” के बाद ‘डायलिसिस” पर डाली गई नैनी झील की सेहत में सुधार हो रहा है। झील को कृत्रिम रूप से 24 घंटे दी जाने वाली ऑक्सीजन की जरूरत अब केवल 16 घंटे की रह गई है, और इसे धीरे-धीरे पूरी तरह हटाए जाने की ओर कदम बढ़ गए हैं। यह तब संभव हुआ है जबकि पूर्व में झील की दो तिहाई गहराई में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य हो गई थी, अब पूरी झील में 8.5 से नौ मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, तथा झील में केवल 0.6 मीटर तक रह गई पारदर्शिता बढ़कर तीन मीटर तक पहुंच गई है। पढ़ना जारी रखें “‘डायलिसिस’ से बाहर आ सकती है नैनी झील”

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी: जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान


कोटगाड़ी मंदिर
कोटगाड़ी मंदिर

नवीन जोशी, नैनीताल। कण-कण में देवत्व के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में कोटगाड़ी (कोकिला देवी) नाम की एक ऐसी देवी हैं, जिनके दरबार में कोर्ट सहित हर दर से मायूस हो चुके लोग आकर अथवा बिना आए, कहीं से भी उनका नाम लेकर न्याय की गुहार लगाते (स्थानीय भाषा में विरोधी के खिलाफ ‘घात” डालते) हैं। माता ‘कोट” यानी कोर्ट में भी उद्घाटित न हो पाए न्याय को भी बाहर ‘गाड़” यानी निकाल देती हैं। यानी जो फैसला कोर्ट में भी नहीं हो पाता, वह माता के दरबार में बिना दलील-वकील के हो जाता है। विरोधी दोषी हुआ तो वह उसे बेहद कड़ी सजा देती हैं। दोषी ही नहीं उसके प्रियजनों, पशुओं की जान तक ले लेती हैं, लेकिन यदि फरियादी ही दोषी हो और किसी अन्य पर झूठा दोष या आरोप लगा रहा हो, तो उसकी भी खैर नहीं। वह स्वयं भी माता के कोप से बच नहीं सकता। इसलिए लोग बहुत सोच समझकर ही माता के दरबार में न्याय की गुहार लगाते हैं। और जब हर ओर से हार कर उनका नाम लेते हैं, तो उन्हें अवश्य ही न्याय मिलता है।

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देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खाती


Vijay Mohan Singh Khati
Vijay Mohan Singh Khati

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की पर्यटन संस्था वाईटीडीओ (यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) के स्वामी श्री विजय मोहन सिंह खाती को यदि देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन का इनसाइक्लोपीडिया या जीता जागता ज्ञानकोष कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। देश-दुनिया के किस शहर में क्या-क्या दर्शनीय है, के साथ ही वहां के दर्शनीय स्थल सप्ताह में किस दिन बंद रहते हैं, और वहां प्रवेश का क्या शुल्क है, यह उन्हें मुंह जुबानी याद रहता है। साथ ही वह बस, टैक्सी या हवाई जहाज से उस स्थान की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार किसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय की भी सटीक जानकारी दे सकते हैं। पढ़ना जारी रखें “देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खाती”

नगर पालिका के हाथों से छिना ‘शरदोत्सव’, अब ‘सत्ता’ कराएगी ‘नैनीताल शीतोत्सव’


वर्ष 1890 के शरदोत्सव के दौरान विशाल हवा के गुब्बारे को उड़ाने के दौरान जमा भीड़।

‘शीतोत्सव’ के नए अवतार में परिवर्तित हो जाएगी 1890 से जारी ‘शरदोत्सव’परंपरा
-नगर पालिका से राज्य की ‘सत्ता’ के हाथ में चला जायेगा आयोजन
नवीन जोशी, नैनीताल। 1890 से होते आ रहे नैनीताल ‘शरदोत्सव” को इस वर्ष न करा पाना नगर पालिका को महंगा पड़ने जा रहा है। जिला प्रशासन ने ‘शीतोत्सव” या ‘नैनीताल विंटर कार्निवाल” के नए रंग-रूप में इस आयोजन को करने का ऐलान कर दिया है, और बड़ी सफाई से पालिका को इसके आयोजन से कमोबेश दूर रखकर स्थानीय विधायक को आयोजन समिति की मुख्य कार्यकारिणी का अध्यक्ष बना दिया है। इस प्रकार तय माना जा रहा है कि इस प्रकार शरदोत्सव इतिहास की बात हो जाएगा, और इसकी जगह शीतोत्सव ले लेगा, और उसका मुख्य आयोजक राज्य का सत्तारूढ़ दल होगा।
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कैंब्रिज विवि का दल जुटा सूखाताल झील के परीक्षण में


सूखाताल झील की तलहटी के सैंपल लेते सीडार और कैंब्रिज विवि के वैज्ञानिक।
सूखाताल झील की तलहटी के सैंपल लेते सीडार और कैंब्रिज विवि के वैज्ञानिक।

-उत्तराखंड के नैनीताल के अलावा मसूरी तथा हिमाचल प्रदेश के राजगढ़ और पालनपुर एवं नेपाल के बिदुर व धूलीखेत शहरों में भी हो रहे हैं ऐसे अध्ययन 

-पता लगाएंगे झील की जल को सोखने व छानने की क्षमता

नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध जल के लिए ही होने की भविश्यवाणियों के बीच दुनिया के शीर्ष विवि में शुमार कैंब्रिज विवि ने भी जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता दी है। कैंब्रिज विवि के इंजीनियरों व भूवैज्ञानिकों आदि के एक अध्ययन दल ने “सेंटर फॉर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च” यानी सीडार के साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल के दो-दो शहरों को ‘वाटर सिक्योरिटी एंड ईको सिस्टम सर्विसेज” पर शोध के लिए चुना है। इसमें विश्व प्रसिद्ध नैनी सरोवर की सर्वाधिक ७० फीसद जल प्रदाता सूखाताल झील को भी चुना गया है। अध्ययन के तहत सूखाताल झील की सतह की मिट्टी का इसकी जल को सोखने व साफ करने, छानने की क्षमता का परीक्षण किया जाना है। पढ़ना जारी रखें “कैंब्रिज विवि का दल जुटा सूखाताल झील के परीक्षण में”

ढाई हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक थाती से रूबरू कराएगा हिमालय संग्रहालय


हिमालय संग्रहालय के ऐतिहासिक भवन में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरें।
हिमालय संग्रहालय के ऐतिहासिक भवन में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरें।

-ईशा से तीन सदी पूर्व की कुषाण कालीन स्वर्ण मुद्रा सहित उत्तराखंड में मिली और यहां की ऐतिहासिक विरासतें हैं संजोई कुमाऊं विवि के इस संग्रहालय ने
-एशियाई विकास बैंक की ‘हैरिटेज पाथ वॉक” योजना से जुड़ेगा
नवीन जोशी, नैनीताल। ईशा से तीन सदी पूर्व की कुषाण कालीन स्वर्ण मुद्रा सहित उत्तराखंड में मिली और यहां की ऐतिहासिक विरासतें संजोए बैठा कुमाऊं विवि का हिमालय संग्रहालय अब सैलानियों को अधिक बेहतर स्वरूप में सैलानियों को ढाई हजार वर्ष पुरानी प्रदेश ही नहीं देश की ऐतिहासिक थाती और हिमालय की ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू कराएगा। ऐसा संभव होगा एशियाई विकास बैंक की ‘हैरिटेज पाथ वॉक” योजना से, जिसमें हिमालय संग्रहालय को पहले फेस में बाहर-भीतर दोनों स्वरूपों में संजोने-संवारने के लिए शामिल कर लिया गया है। पढ़ना जारी रखें “ढाई हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक थाती से रूबरू कराएगा हिमालय संग्रहालय”

इतिहास होने की ओर शेरशाह सूरी के जमाने की ‘गांधी पुलिस’ पर अब ‘नो वर्क-नो पे’ की तलवार


08NTL-5पटवारियों के लिए ‘नो वर्क-नो पे’ लागू करने में सरकार भी आएगी कटघरे में

-‘तदर्थ” आधार पर चल रही प्रदेश की राजस्व व्यवस्था
नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजों से भी पहले मुगल शासक शेर शाह सूरी के शासनकाल से देश में शुरू हुई और खासकर उत्तराखंड में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर से सफलता से चल रही ‘गांधी पुलिस” के रूप में शुरू हुई राजस्व पुलिस व्यवस्था कमोबेश ‘तदर्थ” आधार पर चल रही है। प्रदेश के संपूर्ण राजस्व क्षेत्रों में पुलिस कार्य संभालते आ रहे पटवारियों ने बीते वर्ष दो अक्टूबर से पुलिस कार्यों का बहिस्कार किया हुआ है, जबकि उनसे ऊपर के कानूनगो, नायब तहसीलदार व तहसीलदार के अधिसंख्य पद रिक्त हैं। और जो भरे हैं वह, तदर्थ आधार पर भरे हैं। शुक्रवार (22.01.2015) को उत्तराखंड सरकार के इस मामले में पटवारियों के लिए ‘नो वर्क-नो पे” की कार्रवाई करने के फरमान से व्यवस्था की कलई खुलने के साथ ही सरकार की कारगुजारी भी सामने आने की उम्मीद बनती नजर आ रही है।
कुमाऊं मंडल की बात करें तो यहां 325 लेखपालों में से 204 एवं पटवारियों के 410 पदों में से 82 रिक्त हैं। आज से भी उनकी भर्ती की कवायद शुरू हो तो वह 30 जून 2016 के बाद ही मिल पाएंगे, और तब तक रिक्तियां क्रमश: 212 और 123 हो जानी हैं। इसी तरह नायब तहसीलदारों के 60 में से 14 तथा तहसीलदारों के 49 में से 33 पद रिक्त पड़े हैं। यही नहीं इन पदों पर जो लोग कार्यरत हैं, वह भी पिछले दो वर्ष से डीपीसी न हो पाने के कारण तदर्थ आधार पर कार्य करने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि उनकी तदर्थ नियुक्ति में डीपीसी होने पर दो वर्ष पुरानी ही तिथि से नियुक्ति माने जाने का उल्लेख है, किंतु इस दौरान नई नियुक्ति पर आए कर्मी उन्हें खुद से जूनियर बता रहे हैं। ऐसे में उनका मनोबल टूट रहा है। प्रदेश में 2006 से पटवारियों की नई भर्तियां नहीं हुई हैं, जबकि इनका हर वर्ष, अगले दो वर्ष की रिक्तियों का पहले से हिसाब लगाकर भर्ती किये जाने का प्राविधान है।

पूर्व आलेख: अब पटवारी खुद नहीं चाहते खुद की व्यवस्था, चाहते हैं पुलिस की तरह थानेदार बनना

-1857 के गदर के जमाने से चल रही पटवारी व्यवस्था से पटवारी व कानूनगो पहले ही हैं विरत
-पहले आधुनिक संसाधनों के लिए थे आंदोलित, सरकार के उदासीन रवैये के बाद अब कोई मांग नहीं
-हाईटेक अपराधियों और सरकार की अनसुनी के आगे हुए पस्त
नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजों से भी पहले मुगल शासक शेर शाह सूरी के शासनकाल से देश में शुरू हुई और उत्तराखंड में खासकर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर से सफलता से चल रही ‘गांधी पुलिस” व्यवस्था बीती दो अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से कमोबेश इतिहास ही बन गई है। पूरे देश से इतर राज्य के 65 फीसदी पर्वतीय हिस्से में राजस्व संबंधी कार्यों के साथ ही अपराध नियंत्रण और पूर्व में वन संपदा की हकदारी का काम भी संभालने वाले पटवारियों ने अपने बस्ते अपने जिलों के कलक्ट्रेटों में जमा करा दिए हैं, और मौजूदा स्थितियों में खुद भी अपनी व्यवस्था के तहत कार्य करने से एक तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं। सवालिया तथ्य यह भी है कि इतनी बड़ी व्यवस्था के ठप होने के बावजूद शासन व सरकार में इस मामले में कोई हरकत नजर नहीं आ रही है।

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नैनीताल समग्र


मानसूनी बारिश से निखरा सरोवरनगरी का शमां
मानसूनी बारिश से निखरा सरोवरनगरी का शमां

नैनीताल क्या नहीं…क्या-क्या नहीं, यह भी…वह भी, यानी “सचमुच स्वर्ग”

छोटी बिलायत´ हो या `नैनीताल´, हमेशा रही वैश्विक पहचान 

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उत्तराखंड में बच्चों की होगी अपनी ‘सरकार”, हर जिले से चुने जाएंगे चार विधायक


Rashtriya Sahara News, Oct 3, 2014

-आगामी 14 नवंबर बाल दिवस को आयोजित होगा बाल विधानसभा का पहला सत्र -नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्र मतदान के जरिए करेंगे विधायकों का चयन नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, उत्तराखंड राज्य में स्कूली बच्चों की अपनी सरकार होंगे। हर जिले के स्कूली बच्चे आपस में से चार बाल विधायकों को चुनेंगे। चुने गए बाल विधायकों की बकायदा अपनी विधानसभा होगी, जहां उनके आने-जाने व ठहरने के लिए सरकारी व्यवस्था होगी। इस हेतु उन्हें मदद के लिए दो सहायक भी दिए जाएंगे, तथा पहचान पत्र भी जारी किए जाएंगे। आगामी 14 नवंबर यानी बाल दिवस को बाल विधानसभा का सत्र देहरादून के किसी होटल में आयोजित होगा। आगे वह अपने क्षेत्रों में बच्चों में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे तथा एनजीओ के माध्यम से गरीब छात्रों को मदद पहुचाएंगे। महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण का नियम यहां भी लागू होगा, यानी हर जिले से दो छात्र एवं दो छात्राएं ही बाल विधायक बन पाएंगे, और 18 वर्ष की आयु पूरी करने तक उनका कार्यकाल रहेगा। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड में बच्चों की होगी अपनी ‘सरकार”, हर जिले से चुने जाएंगे चार विधायक”