आधुनिक विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध और प्रामाणिक था भारतीय ज्ञान


[untitled1.bmp]विज्ञान के वर्तमान दौर में आस्था व विश्वास को अंधविश्वास कहे जाने का चलन चल पड़ा है। आस्था और विज्ञान को एक दूसरे का बिल्कुल उलट-विरोधाभाषी कहा जा रहा है। यानी जो विज्ञान नहीं है, वैज्ञानिक नियमों और आज के वैज्ञानिक दौर के उपकरणों से संचालित नहीं है, जो मनुष्य की आंखों और वैज्ञानिक ज्ञान से प्राप्त बुद्धि-विवेक के अनुसार सही नहीं ठहरता, अंधविश्वास है। और आस्था का भी चूंकि वर्तमान ज्ञान-विज्ञान के अनुसार कोई आधार नहीं है, इसलिए वह भी अंधविश्वास ही है।

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12 ज्योर्तिलिंगों में प्रथम ज्योर्तिलिंग है जागेश्वर, यहीं से शुरू हुई दुनिया में शिव लिंग की पूजा


Jageshwar (13)

देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवत्व की बात कही जाती है। प्रदेश के अनेक धर्म स्थलों में एक भगवान शिव के प्रथम ज्योर्तिलिंग जागेश्वर के बारे में स्कंद पुराण के मानसखंड में कहा गया है-‘मा वैद्यनाथ मनुषा व्रजंतु, काशीपुरी शंकर बल्ल्भावां। मायानगयां मनुजा न यान्तु, जागीश्वराख्यं तू हरं व्रजन्तु।’ अर्थात मनुष्य वैद्यनाथ, शंकर प्रिय काशी और माया नगरी हरिद्वार, भी न जा सके तो जागेश्वर धाम में शिवदर्शन अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि देवाधिदेव महादेव शिव सुर, नर, मुनि आदि की सेवा से प्रसन्न होकर इस स्थान पर जाग्रत हुए और इसलिए ही इस स्थान का नाम जागेश्वर पड़ा। मानस खंड में इसके लिए ‘नागेशं दारुकावने…’ शब्द का प्रयोग भी किया गया है। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि अल्मोड़ा जनपद मुख्यालय से पिथौरागढ़ राजमार्ग पर 34 किमी की दूरी पर समुद्र तल से 1860 मीटर की ऊंचाई पर जटा गंगा तथा दो छोटी जलधाराओं नंदिनी व सुरभि के संगम पर स्थित महादेव का यह धाम ‘दारुका’ यानी देवदारु यानी विशाल देवदार के वृक्षों के घने मनोरम वन में स्थित हैं, तथा यह क्षेत्र आदि-अनादि काल से ही नागों का स्थान कहा जाता है। इसके आस-पास ही बेरीनाग, धौलीनाग, कालियानाग व गरूड़ जैसे नामों के स्थान इसकी पुष्टि करते हैं। इसलिए माना जाता है कि कभी इसे ‘नागेश्वर’ भी कहा जाता होगा। इसे देश-दुनिया के सबसे बड़े मंदिर समूहों में भी गिना जाता है।

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सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत है कुमाउनी शास्त्रीय होली


-पौष माह के पहले रविवार से ही शुरू हो जाती हैं शास्त्रीय रागों में होलियों की बैठकें और सर्वाधिक लंबे समय चलती हैं होलियां
-प्रथम पूज्य गणेश से लेकर पशुपतिनाथ शिव की आराधना और राधा-कृष्ण की हंसी-ठिठोली से लेकर स्वाधीनता संग्राम व उत्तराखंड आंदोलन की झलक भी दिखती है
नवीन जोशी, नैनीताल। देश भर में जहां रंगों से भरी और मौज-मस्ती के त्यौहार पर होली फाल्गुन माह में गाई व खेली जाती है, वहीं कुमाऊं की परंपरागत कुमाउनी होली की एक विशिष्टता बैठकी होली यानी अर्ध शास्त्रीय गायकी युक्त होली है, जिसकी शुरुआत पौष माह के पहले रविवार से ही विष्णुपदी होली गीतों के साथ हो जाती है। शास्त्रीयता का अधिक महत्व होने के कारण शास्त्रीय होली भी कही जाने वाली कुमाऊं की शास्त्रीय होली की शुरुआत करीब 10वीं शताब्दी में चंद शासनकाल से मानी जाती है। कुछ विद्वानों के अनुसार चंद शासनकाल में बाहर से ब्याह कर आयीं राजकुमारियां अपनी परंपराओं व रीति-रिवाजों के साथ होली को भी यहां साथ लेकर आयीं। वहीं अन्य विद्वानों के अनुसार प्राचीनकाल में यहां के राजदरबारों में बाहर के गायकों के आने से यह परंपरा आई है। कुमाऊं के प्रसिद्ध जनकवि स्वर्गीय गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के अनुसार कुमाऊं की शास्त्रीय गायकी होली में बृज व अवध से लेकर दरभंगा तक की परंपराओं की छाप स्पष्ट रूप से नजर आती है तो नृत्य के पद संचालन में ठेठ पहाड़ी ठसक भी मौजूद रहती है। इस प्रकार कुमाउनी होली कमोबेश शास्त्र व लोक की कड़ी तथा एक-दूसरे से गले मिलने में ईद जैसे आपसी प्रेम बढ़ाने वाले त्यौहारों की झलक भी दिखाती है। साथ ही कुमाउनी होली में प्रथम पूज्य गणेश से लेकर गोरखा शासनकाल से पड़ोसी देश नेपाल के पशुपतिनाथ शिव की आराधना और ब्रज के राधा-कृष्ण की हंसी-ठिठोली से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और उत्तराखंड आंदोलन की झलक भी दिखती है, यानी यह अपने साथ तत्कालीन इतिहास की सांस्कृतिक विरासत को भी साथ लेकर चली हुई है।
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कुछ खास होगा 2015


Page 1, RASHTRIYA SAHARA, DEHRADUN, 19.12.2014

2015 में सरकारी कर्मियों के लिए ज्यादा छुट्टियों की बहार

अनोखे संयोग :

4/4, 6/6, 8/8, 10/10 व 12/12 की तिथियों को होंगे शनिवार, फरवरी, मार्च व नवम्बर शुरू होंगे रविवार से मार्च, मई, अगस्त व नवम्बर में होंगे पांच रविवार

नवीन जोशी नैनीताल। यूं तो हर नया वर्ष हम सभी के लिए नई उम्मीदें और नई आशाएं लेकर आता है, मगर वर्ष 2015 सरकारी कर्मियों के लिए कुछ खास होगा। सरकारी कर्मियों को इस साल ज्यादा छुट्टियां मिलेंगी और उन्हें अपने परिजनों के साथ वक्त व्यतीत करने का ज्यादा मौका मिलेगा। वर्ष 2015 में 4/4 यानी चार अप्रैल, 6/6 यानी छह जून, 8/8 यानी आठ अगस्त, 10/10 यानी 10 अक्टूबर और 12/12 यानी 12 दिसम्बर की तिथियों को शनिवार होंगे। वहीं तीन महीने फरवरी, मार्च व नवम्बर रविवार से शुरू होंगे। यानी माह का पहला दिन अवकाश से शुरू होगा और माह का पहला सप्ताह आधा-अधूरा नहीं वरन पूरा होगा, जबकि चार माह-मार्च, मई, अगस्त व नवम्बर में पांच रविवार यानी पांच छुट्टियां होंगी। पढ़ना जारी रखें “कुछ खास होगा 2015”

डल झील की तरह जमा नैनीताल का सूखाताल


Page 1, Rashtriya Sahara, Dehradun 19.12.2014

झील के जमे पानी पर घूम रहे हैं सैलानी

नैनीताल (एसएनबी)। कश्मीर की डल झील की तरह ही सरोवरनगरी की सूखाताल झील भी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड से पूरी तरह जम गई है। दिलचस्प बात यह है कि बच्चे झील पर जमी बर्फ की मोटी चादर पर हॉकी जैसा खेल खेल रहे हैं। साथ ही सैलानी भी इस पर मजे से घूम रहे हैं। कुछ लोग कुदरत की इस नेमत की शक्ति को मापने के लिए बर्फ पर पांव से जोर के प्रहार कर रहे हैं, मगर बर्फ कहीं से भी चटकती नजर नहीं आ रही है। गौरतलब है कि सामान्यत: सूखाताल झील वर्ष में अधिकांश समय सूखी ही रहती है और यहां पानी नहीं होता है, मगर इस वर्ष बारिश के समय में यह काफी भरी थी और हालिया बर्फवारी से पहले दो दिन हुई बारिश से यह अपने सिरे पर पानी से भरी हुई थी। स्थानीय चंद्रशेखर कार्की ने बताया कि बर्फवारी से पहले झील के उत्तर-पश्चिमीछोर पर काफी पानी था। बहरहाल यह सैलानियों, बच्चों व नगरवासियों के लिए तो आनंद का माध्यम बनी हुई है। इस तरह बीती 14 दिसम्बर को हुई बर्फबारी के चार दिन बाद बर्फ से भरे रहने को नैनी झील के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से काफी लाभप्रद माना जा रहा है, क्योंकि यह झील नैनी झील की सर्वाधिक (70%) जलप्रदाता झील है। पढ़ना जारी रखें “डल झील की तरह जमा नैनीताल का सूखाताल”

गैस बुकिंग अब फोन से ही होगी….


नैनीताल (एसएनबी)। इंडेन गैस की बुकिंग अब फोन से ही की जाएगी। इसके लिए इंडेन कंपनी द्वारा प्रदत्त मोबाइल नंबर 9012554411 पर घर बैठे फोन करके बुकिंग की जा सकती है। केएमवीएन के गैस प्रबंधक आरएस बिष्ट ने बताया कि इंडेन कंपनी के प्राविधानों के तहत केवल दिए गए मोबाइल नंबर पर पहली बार में पूछी जाने वाली जानकारियां देकर अगली बार से बहुत आसानी से गैस बुकिंग की जा सकती है। अलबत्ता, बहुत जरूरी होने पर फिलहाल गैस एजेंसी से बुकिंग की सुविधा भी जारी रखी गई है। पढ़ना जारी रखें “गैस बुकिंग अब फोन से ही होगी….”

क्या आपको पता है नैनीताल में कहां है देवगुरु बृहस्पति का मंदिर, और किस गांव में हुई थी मधुमती फिल्म की शूटिंग


Bhumiyadhar on NH87
Bhumiyadhar on NH87

-जनपद के ऐसे 10 गांव बनेंगे पर्यटन गांव, मिलेगा पर्यटन योजनाओं का लाभ -सैलानी जान सकेंगे कहां है नैनीताल में देवगुरु बृहस्पति मंदिर, कहां हो सकती हैं एेंगलिंग और किस गांव में हुई थी फिल्म मधुमति की शूटिंग

नवीन जोशी, नैनीताल। सैलानी क्या, नैनीताल जनपद वासी भी कम ही जानते होंगे कि नैनीताल जनपद में कहीं देश के गिने-चुने देवगुरु बृहस्पति के मंदिरों में से एक स्थित है। यह भी कम ही लोग जानते होंगे कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य से बॉलीवुड फिल्म उद्योग को सर्वप्रथम मुख्यालय नैनीताल से भी पहले एक गांव ने रिझाया था। जनपद में मछलियों को पकड़ने के खेल-एंगलिंग की भी अपार संभावनाएं हैं। लेकिन आगे ऐसा ना होगा। विकास की दौड़ में पीछे छूट गए गांवों के देश भारत के इन गांवों में अब पर्यटन की राह खुलने जा रही है, जिसके बाद इन गांवों में सैलानियों के पहुंचने के लिए ढांचागत सुविधाओं का विस्तार होगा, तथा सैलानी और स्थानीय लोग न केवल इन गांवों के बारे में जान पाएंगे, वरन यहां आकर इनकी विशिष्टताओं से रूबरू भी हो पाएंगे। पढ़ना जारी रखें “क्या आपको पता है नैनीताल में कहां है देवगुरु बृहस्पति का मंदिर, और किस गांव में हुई थी मधुमती फिल्म की शूटिंग”

कैसे-कैसे कायदे कानून-कोयला-लकड़ी लेने को पैनकार्ड हुआ जरूरी, कीमतें भी आसमान चढ़ी


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-ऐसे में लोगों को मजबूरन करना पड़ता है जंगलों का अवैध और अनियंत्रित  कटान 

नैनीताल। जी हां, यह ऐसे प्राविधान करने वालों के दिमाग का फितूर ही कहा जाएगा कि बिना आयकर के पैन कार्ड और राशन कार्ड के जलौनी लकड़ी और कोयला देने का प्राविधान नहीं है। आज के समय में जबकि गरीब व कमजोर तबके के लोग ही कोयले व लकड़ी का प्रयोग ईधन या जलौनी लकड़ी के लिए करते हैं, वह राशन कार्ड और पैन कार्ड नहीं होने की वजह से लकड़ी-कोयला नहीं ले पा रहे हैं। इसके अलावा भी विभाग ने कोयले की दर 1500 रुपए मूल तथा पांच फीसद वैट मिलाकर कुल 1575 रुपए प्रति कुंतल तथा जलौनी बांज की लकड़ी की दर 475 में ढाई फीसद मंडी शुल्क,पांच फीसद वैट व 2.64 फीसद आयकर मिलाकर 520 रुपए तय की है। जानकारों के अनुसार यह दर बिजली, गैस या केरोसीन के मुकाबले काफी अधिक है। उल्लेखनीय है कि इन दरों के बाद भी वर्ष भर निगम के टालों में कोयला व जलौनी लकड़ी उपलब्ध नहीं होती। साफ है कि ऐसे में व्यवस्था ने उनके समक्ष छुप-छुपाकर जंगलों में कीमती वन संपदा का अवैधानिक दोहन करने का विकल्प ही शेष रख छोड़ा है। इस कारण बीते वर्षों में लगातार कोयला व जलौनी लकड़ी की खपत भी घट रही है। पढ़ना जारी रखें “कैसे-कैसे कायदे कानून-कोयला-लकड़ी लेने को पैनकार्ड हुआ जरूरी, कीमतें भी आसमान चढ़ी”

कुमाऊं विवि में विकसित हो रही भविष्य की ‘नैनो दुनिया’, एक साथ दो पेटेंट फाइल कर रचा इतिहास


राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1
राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन’ परियोजना से भी जुड़ी है यह सफलता
-कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपने उपकरण-‘स्वयंभू-2021’ को कराया पेटेंट
-साथ ही एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ भी कराया पेटेंट
नवीन जोशी, नैनीताल। 1972 में स्थापित कुमाऊं विवि ने अपने 44 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक साथ अपने दो अनुसंधानों को पेटेंट कराकर इतिहास रच डाला है। कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपनी स्वयं बनाये गये प्रबंध-‘स्वयंभू-2021’ के साथ ही कालातीत यानी एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने के ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम” का पेटेंट फाइल कर दिया है। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन” परियोजना से भी जुड़ी है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

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अब भारतीय कूड़े पर यूरोप की नजर


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-यहां प्रति वर्ष 625 मिलियन टन कृषि क्षेत्र का सहित हजारों टन कूड़ा हो रहा बरबाद
नवीन जोशी, नैनीताल। कभी सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत देश की समृद्धि एक यूरोपीय देश-इंग्लेंड की आंखों में इस तरह चुभी थी कि उसने ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत को गुलाम ही बना डाला था। आज उसी यूरोप को भारत के कूड़े में ऐसा कुछ नजर आ रहा है, कि उसके कदम एक बार फिर भारत की ओर लौट रहे हैं। यूरोपियन यूनियन के एक देश इटली के इटेलियन नेशनल एजेंसी फॉर न्यू टेक्नॉलॉजीज में कार्यरत डा. नीता शर्मा की अगुवाई में यूरोपियन यूनियन के इटली, बेल्जियम, नीदरलेंड और जर्मनी के सात संस्थान तथा भारत के जवाहर लाल नेहरू, पंतनगर विवि, आईआईसीटी हैदराबाद, तेजपुर कृषि विवि आसोम, एनजीओ-पुणे महाराष्ट्र की आरती व टेरी आदि संस्थान ‘स्ट्रेंथनिंग नेटवर्किंग ऑफ बायो-मास एवं बायो-वेस्ट टेक्नोलॉजी फॉर यूरोप-इंडिया इंटीग्रेशन” यानी ‘सहयोग” प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। पढ़ना जारी रखें “अब भारतीय कूड़े पर यूरोप की नजर”

राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी


Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898
Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898

-नगर के नए खतरनाक स्थानों की पहचान के लिए होगा सर्वेक्षण, नगर की नई महायोजना बनेगी, पुरानी महायोजना का समय पहले ही हो चुका है पूरा
नवीन जोशी, नैनीताल। नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली एवं 1869 एवं 1873 में सरोवरनगरी की सुरक्षा के बाबत महत्वपूर्ण सिफारिशें देने वाली हिल साइड सेफ्टी कमेटी (पूरा नाम रेगुलेशन इन कनेक्शन विद हिल साइड सेफ्टी एंड लेक कंट्रोल, नैनीताल) आखिरी नींद से जाग उठी है। डीएम दीपक रावत ने राज्य बनने के बाद पहली बार नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक के लंबे विराम को तोड़ते हुए १६ वर्षों बाद यह बैठक ली। पूर्व में यह बैठक १९९८ में आयोजित हुई थी, और तभी से आयोजित न होने के कारण जिला प्रशासन नगर के पर्यावरण प्रेमियों के निशाने पर रहता था। इस अवसर पर डीएम ने नगर में नए खतरनाक स्थलों (वल्नरेबल जोन) की जीएसआई व आईआईटी रुड़की से सर्वेक्षण कर पहचान करने, बलियानाला, टूटा पहाड़, राजभवन के पीछे निहाल नाले व आम पड़ाव तथा पर्यटन कार्यालय के पास धंस रही माल रोड जैसे भूस्खलन के हिसाब से सक्रिय खतरनाक स्थानों में सीमेंट-कंक्रीट के बचाव कार्यों में इस कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट-सीएसआईआर व टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन-टीएचडीसी ने अनिवार्य रूप से सलाह लेने तथा साथ पेड़-पौधों के प्रयोग से बायो-सेफ्टी के प्रबंध भी करने के निर्देश दिए।  पढ़ना जारी रखें “राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी”

नैनीताल-कुमाऊं में फिल्माई गई फिल्में


नैनीताल में मधुमती फिल्म की शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों के साथ दिलीप कुमार
नैनीताल में मधुमती फिल्म की शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों के साथ दिलीप कुमार

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दुबई में 19 से 21 दिसंबर तक उत्तराखंडी कौथिग का सफलता पूर्वक मंचन


यूएई कौथिग २०१४ – दुबई में आयोजित दो दिवसीय कौथिग का सफलता पूर्वक मंचन हुआ. देवभूमि से आये प्रसिद्ध गायकों ने दोनों दिन अपने सुरों से यहाँ बसे उत्तराखंडियो को मन्त्र मुग्ध किया. मुख्य स्पोंसर्स गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म के श्री प्रयाग जोशी जी, श्रीमती सुनीता जोशी जी एवं उत्तराखंड एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री मनु रावत जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके तत्पश्चात यूएई में बसे उत्तराखंडी बच्चो ने अपने नृत्य और गीत की प्रस्तुति दी. अपनी संस्कृति से जुड़े इन बच्चो की प्रस्तुति काबिले तारीफ़ रही. अनिल गैरोला जी जो दुबई में रहते है उन्होंने अपने … पढ़ना जारी रखें दुबई में 19 से 21 दिसंबर तक उत्तराखंडी कौथिग का सफलता पूर्वक मंचन

नैनीताल में ‘ग्रीन’ नाम की आढ़ में ‘काला’ खेल


आयकर विभाग का चार रिजॉर्ट्स में छापा, छापे में 14 करोड़ की कर चोरी उजागर

नैनीताल। आयकर विभाग ने बुधवार को नैनीताल मुख्यालय और निकटवर्ती भवाली में बन रहे चार रिजॉर्ट्स में छापेमारी की कार्रवाई की। चारों रिजॉर्ट्स के नाम में ‘ग्रीन’ शब्द शामिल है और चारों में विभाग ने 14 करोड़ रुपये की कर चोरी के मामले होने की संभावना जताई है। चारों जगह छापेमारी सुबह 10 बजे से एक साथ की गई। इनमें से दो निर्माणकर्ताओं ने पिछले दो वर्ष से अपने आयकर रिटर्न दाखिल ही नहीं किए हैं। पढ़ना जारी रखें “नैनीताल में ‘ग्रीन’ नाम की आढ़ में ‘काला’ खेल”

अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य


Rashtriya Sahara, 06 Dec 2014, Page-1

-हर पांच वर्ष में संबंधित बार से लगातार वकालत करने का प्रमाण पत्र ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना होगा, तभी मिलेगा बार काउंसिल से वकालत करने का लाइसेंस
-छह माह के भीतर हासिल करना होगा वकालत करने का लाइसेंस
नवीन जोशी, नैनीताल। देश-प्रदेश के ऐसे अधिवक्ताओं के लिए बुरी खबर है जो पार्ट टाइम वकालत करते हैं। अब लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ता आगे वकालत नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल आफ इंडिया के ताजा राजपत्र से ऐसे अधिवक्ताओं में हड़कंप मचना तय है। गत 30 अक्टूबर को जारी ताजा राजपत्र-सर्टिफिकेट आफ प्रेक्टिस तथा नवीनीकरण नियम 2014 को उत्तराखंड बार काउंसिल ने भी बीती 22 नवंबर को सर्वसम्मति से स्वीकृति दे दी है, जिसके अनुसार 12 जून 2010 के बाद विधि स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले या इसके बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं को अभी छह माह के भीतर और आगे हर पांच वर्ष में बार काउंसिल से ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना होगा। गौरतलब है कि ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए उन्हें संबंधित बार एसोसिएशन से प्राप्त इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनके लगातार प्रेक्टिस यानी वकालत करने की पुष्टि की गई हो। साफ है कि लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ताओं का लाइसेंस आगे नवीनीकृत नहीं हो पाएगा, और वह किसी मामले में अपने नाम का वकालतनामा नहीं लगा पाएंगे। पढ़ना जारी रखें “अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य”