एशिया का पहला जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और ब्याघ्र अभयारण्य


Elephants by Balbeer Singh
जिम कॉर्बेट पार्क में हाथियों का झुण्ड 

देश में राष्ट्रीय पशु-बाघों की ताजा गणना के अनुसार बाघों को बचाने के मामले में देश में नंबर-एक घोषित तथा भारत ही नहीं एशिया के पहले राष्ट्रीय पार्क-जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और ब्याघ्र अभयारण्य को 1973 से देश का ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत पहला राष्ट्रीय वन्य जीव अभयारण्य होने का गौरव भी प्राप्त है। उत्तराखंड राज्य की तलहटी में समुद्र सतह से 400 (रामनगर) से 1100 मीटर (कांडा) तक की ऊंचाई तक, पातली दून, कोसी व रामगंगा नदियों की घाटियों और राज्य के दोनों मंडलों कुमाऊं और गढ़वाल के नैनीताल व पौड़ी जिलों में 1288 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले दुनिया के इस चर्चित राष्ट्रीय उद्यान में प्रकृति ने दिल खोल कर अपनी समृद्ध जैव विविधता का वैभव बिखेरा है। हरे-भरे वनों से आच्छादित पहाडियां, कल-कल बहते नदी नाले, चौकड़ी भरते हिरनों के झुंड, संगीत की तान छेडते पंछी, नदी तट पर किलोल भरते मगर, चिंघाड़ते हुए हाथियों के समूह और सबसे रोमांचक रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड की गूंज जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व की सैर को अविस्मरणीय बना देते हैं।

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पंचाचूली की गोद में ‘सात संसार-एक मुनस्यार’


Panchachuli with Nanda Devi Temple1

नवीन जोशी नैनीताल । देवभूमि कुमाऊं में एक स्थान ऐसा भी है, जिसके बारे में कोई कहता है-‘सार संसार-एक मुनस्यार’, और कोई ‘सात संसार-एक मुनस्यार’ तो कोई ‘आध संसार-एक मुनस्यार’। लेकिन इन तीनों कहावतों का मूलतः एक ही अर्थ है सारे अथवा सारे अथवा आधे अथवा सात महाद्वीपों युक्त संसार एक ओर और मुन्स्यारी एक ओर। यानी आप पूरी दुनियां देख लें, लेकिन यदि आपने मुन्स्यारी नहीं देखा तो फिर पूरी दुनिया भी नहीं देखी। मुनस्यारी में कुदरत अपने आंचल में तमाम खूबसूरत नजारों के साथ अमूल्य पेड़-पौधे व तमाम जड़ी-बूटियों को छुपाए हुए बताती है कि वह उस पर खासतौर पर मेहरबान है। देशी-विदेशी सैलानियों को बेहद पसंद समुद्र सतह से 2,200 मीटर की ऊंचाई पर बसा मुन्स्यारी देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में तिब्बत और नेपाल सीमा से लगा हुआ एक छोटा का कस्बा है, किंतु इसकी पूरी खूबसूरती इसके सामने खड़ी हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं और नजदीकी खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों और यहां की सांस्कृतिक खूबसूरती में निहित है। खासकर सामने की विस्मयकारी हिमालय की पांच चोटियांे वाली पंचाचूली पर्वतमाला, जिसे कोई पांच पांडवों के स्वर्गारोहण करने के दौरान प्रयोग की गई पांच चूलियां या रसोइयां कहते हैं तो कोई साक्षात हिमालय पर रहने वाले पंचमुखी देवाधिदेव महादेव। कहते हैं पांडवों ने स्वर्ग की ओर बढ़ने से पहले यहीं आखिरी बार खाना बनाया था।  पढ़ना जारी रखें “पंचाचूली की गोद में ‘सात संसार-एक मुनस्यार’”

तीसरी कोशिश में बन पाया था बकिंघम पैलेस जैसा नैनीताल राजभवन


Governor House, Nainital
Governor House, Nainital

नवीन जोशी नैनीताल। लंदन के बकिंघम पैलेस की प्रतिकृति के रूप में 1899 में गौथिक शैली में बने नैनीताल राजभवन का नाम अपने अद्भुद शिल्प के लिये न केवल नगर की प्रसिद्ध इमारतों में सबसे ऊपर आता है, वरन इसकी गिनती देश ही नहीं दुनिया की सबसे सुंदर और बेजोड़ इमारतों में की जाती है, अपने कुल करीब 220 एकड़ क्षेत्रफल में से आठ एकड़ क्षेत्रफल में बने इसके मुख्य भवन के साथ 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैला विश्व का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित 18 होल का गोल्फ मैदान और गोल्फ क्लब तथा शेष 160 एकड़ भूमि पर घना खूबसूरत जंगल भी है। इसका निर्माण गहन भूगर्भीय जांचों के उपरांत बड़ी मजबूती के साथ किया गया, क्योंकि इससे पूर्व नैनीताल में दो और राजभवन बनाए गए थे, जिनमें नगर और उनके स्थानों की कमजोर भूगर्भीय स्थितियों की वजह से की बहुत कम समय में ही दरारें आने लगीं। लिहाजा यह तीसरी कोशिश में बन पाया।

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‘पथरीली पगडंडियों पर’ अपने साथ दुनिया के इतिहास की सैर भी कराते हैं वल्दिया


Pathrili Pagdandiyon par-पद्मभूषण प्रो. वल्दिया की आत्मकथात्मक पुस्तक-पथरीली पगडंडियों पर का चंडी प्रसाद भट्ट व अन्य गणमान्य जनों के हाथों हुआ विमोचन
-पुस्तक में लालित्य युक्त गद्य के साथ एक वैज्ञानिक के भीतर कहीं-कहीं कवित्व के भी होते हैं दर्शन
नवीन जोशी, नैनीताल। पद्मभूषण प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया की आत्मकथात्मक पुस्तक-पथरीली पगडंडियों पर का रविवार (12.04.2015) को पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट व अन्य गणमान्य जनों के हाथों विमोचन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रो. वल्दिया की एक वैज्ञानिक के हिंदी लेखक के रूप में स्थापित होने को लेकर प्रशंशा की, वहीं विज्ञान को देश के जन-जन की भाषा हिंदी के जरिए आम जन तक पहुंचाने के लिए उनके द्वारा पूर्व से किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि वल्दिया अपनी पुस्तक ‘पथरीली पगडंडियों पर” के जरिए पाठकों को अपने साथ दुनिया के इतिहास की सैर भी कराते हैं। पढ़ना जारी रखें “‘पथरीली पगडंडियों पर’ अपने साथ दुनिया के इतिहास की सैर भी कराते हैं वल्दिया”

नैनीताल जनपद में एक साथ बने सर्वाधिक उम्र तक जीवित रहने के पांच विश्व रिकार्ड !


-126 वर्षीय बताए गए हैं जिले के सबसे बुजुर्ग मतदाता परमानंद पुरी महाराज
-जनपद में कुल 38 शतायु मतदाता
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल जनपद गौरवान्वित हो सकता है कि उसके यहां न केवल 38 शतायु मतदाता हैं, वरन एक मतदाता-परमानंद पुरी महाराज की उम्र 126 वर्ष बताई गई है। यही नहीं यहां विश्व रिकार्ड उम्रदराज व्यक्तियों के मामले में एक साथ पांच विश्व रिकार्ड बनने जा रहे हैं। जी हां, कोई विश्वास करे, अथवा नहीं, लेकिन जनपद के भरोसेमंद निर्वाचन विभाग के आंकड़े यही कहानी बयां कर रहे हैं।  पढ़ना जारी रखें “नैनीताल जनपद में एक साथ बने सर्वाधिक उम्र तक जीवित रहने के पांच विश्व रिकार्ड !”

कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की भी मिलती है झलक


Aipan
नवीन जोशी, नैनीताल। लोक कलाएं संबंधित क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ ही उस संस्कृति के उद्भव और विकास की प्रत्यक्षदर्शी भी होती हैं। उनकी विकास यात्रा में आने-जाने वाली अन्य संस्कृतियों के प्रभाव भी उनमें समाहित होती हैं इसलिए वह अपनी विकास यात्रा की एतिहासिक दस्तावेज भी होती हैं। कुमाऊं के लोकशिल्प के रूप में ऐपण तथा पट्टालेखन का भी ऐसा ही विराट इतिहास है, जिसमें करीब चार हजार वर्ष पुरानी शक व हूण जैसी प्राचीन सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की झलक भी मिलती है। पढ़ना जारी रखें “कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की भी मिलती है झलक”

दुनिया भर के वैज्ञानिक मिलकर दुनिया के ‘तीसरे ध्रुव’ हिमालय पर जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाएंगे जीवन


-भारत के अलावा अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका व आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक होंगे शामिल -कुमाऊं विवि के भूगोल विभाग को हिमालय पर जलवायु परिवर्तनों से अनुकूलता तथा जल के संरक्षण एवं जल के उपयोग, जल विद्युत परियोजनाओं पर एक साथ मिली तीन अंतराष्ट्रीय परियोजनाएं

नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन व ग्लोबलवार्मिंग से सर्वाधिक प्रभावित हिमालय और वहां रहने वाले लोग हो रहे हैं। लेकिन मानव की जिजीविषा है कि वह कैसी भी परिस्थितियों में स्वयं के जीवन को अपने पारंपरिक ज्ञान से अनुकूल बना लेता है। जैसे पहाड़ों पर उसने बदलते मौसम के साथ लगातार आ रही आपदाओं से अपना सब कुछ खो देने के बावजूद जीना कमोबेश सीख लिया है। इधर विश्व के वैज्ञानिक समुदाय ने पहाड़ के लोगों को ऐसी स्थितियों के अनुकूल बनाने और उनके नुकसान को बचाने के प्रति अपनी चिंता को कार्य रूप में परिणत करने की तैयारी कर ली है। कुमाऊं विवि के भूगोल विभाग को इन्हीं चिंताओं के समाधान के लिए अलग-अलग तीन अंतराष्ट्रीय परियोजनाओं का हिस्सा बनाया गया है, जो अपने निश्कर्षों से सीधे तौर पर आम जन के हाथ मजबूत करेंगे तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ मिलकर नीतिगत निर्णय भी लेंगे। पढ़ना जारी रखें “दुनिया भर के वैज्ञानिक मिलकर दुनिया के ‘तीसरे ध्रुव’ हिमालय पर जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाएंगे जीवन”

नैनीताल में फिल्म थिएटर के अन्दर और बाहर ‘मिशन टाइगर’


नरभक्षियों को जिम की तरह मारने नहीं बचाने के लिए मारते थे ‘मिनी कॉर्बेट’ ठाकुर दत्त जोशी भी -अब तक 20 बाघ व 30 गुलदारों को मार तथा 20 को जिंदा दबोच चुके थे ठाकुर दत्त जोशी, 22 दिसंबर 2016 को 82 वर्ष की उम्र में हुआ देहावसान  -कुमाऊं के आदमखोर व देवी शेर तथा कुमाऊं के अन्य नरभक्षी नाम से पुस्तकें भी लिख चुके हैं कार्बेट टाइगर रिजर्व के पूर्व वाइल्ड लाइफ वार्डन नवीन जोशी, नैनीताल। जिस तरह जिम कार्बेट की पहचान आदमखोर वन्य जीवों के एक शिकारी के साथ ही एक पर्यावरण व वन्य जीव प्रेमी की भी, करीब-करीब … पढ़ना जारी रखें नैनीताल में फिल्म थिएटर के अन्दर और बाहर ‘मिशन टाइगर’

नैनीताल देखने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया हाथियों का झुंड


Elephants by Balbeer Singh
(इस पोस्ट में प्रतीकात्मक तौर पर जोड़ा जा रहा यह चित्र मूलतः दिवंगत, देश के अपनी तरह के इकलौते विकलांग छायाकार बलवीर सिंह द्वारा जिम कार्बेट पार्क में लिया गया है। )

-पूर्व में भी सूखाताल एवं नैनी झील के पास हाथियों के पहुंचने हैं प्रमाण
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, आश्चर्य होगा। किंतु क्षेत्रीय ग्रामीणों के दावों पर यकीन किया जाए तो यह सच है।

नैनीताल के निकटवर्ती बल्दियाखान क्षेत्र में समुद्र सतह से करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बसगांव के बुड़ भूमिया मंदिर के पास गत दिवस हाथियों का झुंड देखे जाने का दावा किया गया है। वन विभाग के आला अधिकारी भी इस दावे पर न केवल यकीन कर रहे हैं, वरन पूर्व के संदर्भों व प्रमाणों के आधार पर इसे हाथियों का यहां पहली बार आना नहीं वरन अपने पुराने रास्तों पर वापस लौटना मान रहे हैं। यानि, कह सकते हैं कि हाथियों का झुंड नैनीताल को देखने अथवा पुरानी यादें ताजा करने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया होगा।

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नैनीताल से सांसद बनना चाहता था दिल्ली में कारतूसों के साथ पकड़ा गया हिस्ट्रीशीटर फईम


Faiem Miyanनैनीताल लोकसभा सीट से भरा था 2014 में परचा, पोल खुलने पर पीस पार्टी ने नहीं दिया टिकट , बरेली के थाना किला व बारादरी में हत्या सहित 14 केस दर्ज हैं फईम पर’ उसके आतंकवादी संबंधों की पड़ताल भी की जा रही है। भवाली व हल्द्वानी में लम्बे समय अपनी पहचान छुपाकर रह चुका है, प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में भी रहा है सक्रिय। 

नैनीताल। रविवार (19.01.2015) को दिल्ली में चल रही दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र दिवस तथा दुनिया के सबसे बड़े मेहमान, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्वागत की तैयारियों के बीच दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को 1000 से अधिक कारतूसों के साथ पकड़ा है। पकड़े गए लोगों में बरेली, उत्तर प्रदेश निवासी फईम मियां उर्फ बंटी भी शामिल है, जिसने दिल्ली पुलिस को अपना पता घोड़ाखाल रोड नैनीताल बताया है। फईम ने 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में संसद में पहुंचने का ख्वाब देखा था। उसने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से खुद को पीस पार्टी का प्रत्याशी बताते हुए लोकसभा के लिए नामांकन भी कराया था।  इस दौरान उसकी कलई खुल जाने से पीस पार्टी ने उसे टिकट नहीं दिया। इससे उसका परचा निरस्त हो गया। पढ़ना जारी रखें “नैनीताल से सांसद बनना चाहता था दिल्ली में कारतूसों के साथ पकड़ा गया हिस्ट्रीशीटर फईम”

साकार होगा ‘वाकिंग पैराडाइज”, माल रोड पर बनेगा 10 फीट चौड़ा पाथ-वे


-एडीबी के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि से होगा निर्माण
-माल रोड को अतिक्रमण मुक्त करने से खुलेगी राह
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी को ‘वाकिंग” या ‘वॉकर्स पैराडाइज” भी कहा जाता है। इसका कारण है कि यहां कमोबेस हर मौसम में, (मूसलाधार बारिश को छोड़कर) दिन से देर रात्रि तक किसी भी वक्त घूमा जा सकता है। लेकिन हालिया वर्षों में माल रोड पर हुए अतिक्रमण और सड़कों पर वाहनों की अधिकता की वजह से खासकर माल रोड की ओर घूमना संभव नहीं हो पाता। इसका समाधान होने जा रहा है। कुमाऊं आयुक्त अवनेंद्र सिंह नयाल की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा एडीबी के माध्यम से पहले से ही उपलब्ध करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि से माल रोड पर सड़क से एक फीट ऊंचा और करीब 10 फीट चौड़ा पाथ-वे बनाने का खाका खींच लिया गया है, लिहाजा नगर की ‘वाकिंग” या ‘वॉकर्स पैराडाइज” के रूप में बनी पहचान के साकार होने की उम्मीद की जा रही है। पढ़ना जारी रखें “साकार होगा ‘वाकिंग पैराडाइज”, माल रोड पर बनेगा 10 फीट चौड़ा पाथ-वे”

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कुमाऊं का ऋतु पर्व ही नहीं ऐतिहासिक व सांस्कृतिक लोक पर्व भी है घुघुतिया-उत्तरायणी


Ghughute1

  • 1921 में इसी त्योहार के दौरान बागेश्वर में हुई प्रदेश की अनूठी रक्तहीन क्रांति, कुली बेगार प्रथा से मिली थी निजात
  • घुघुतिया के नाम से है पहचान, काले कौआ कह कर न्यौते जाते हैं कौए और परोसे जाते हैं पकवान

नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया को रोशनी के साथ ऊष्मा और ऊर्जा के रूप में जीवन देने के कारण साक्षात देवता कहे जाने वाले सूर्यदेव के धनु से मकर राशि में यानी दक्षिणी से उत्तरी गोलार्ध में आने का उत्तर भारत में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाने वाला पर्व पूरे देश में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। पूर्वी भारत में यह बीहू, पश्चिमी भारत (पंजाब) में लोहणी और दक्षिणी भारत (कर्नाटक, तमिलनाडु आदि) में पोंगल तथा देवभूमि उत्तराखंड में यह उत्तरायणी के रूप में मनाया जाता है। उत्तराखंड के लिए यह पर्व न केवल मौसम परिवर्तन के लिहाज से एक ऋतु पर्व वरन बड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लोक पर्व भी है। पढ़ना जारी रखें “कुमाऊं का ऋतु पर्व ही नहीं ऐतिहासिक व सांस्कृतिक लोक पर्व भी है घुघुतिया-उत्तरायणी”

बेमौसम के कफुवा, प्योंली संग मुस्काया शरद, बसंत शंशय में


Buransh2भवाली के निकट श्याम खेत के जंगलों में खिला बसंत ऋतु का प्रतीक राज्य वृक्ष बुरांश, आगे बसंत रह सकता है फूलों के बिना

नवीन जोशी, नैनीताल। ‘…वारा डाना, पारा डाना, कफुवा फुली रै, मैं कैहुं टिपूं फूला मेरि हंसि रिसै रै” पहाड़ी जंगलों में पशु चारण करते हुऐ यह गीत गाते ग्वाल बालों द्वारा आम तौर पर बसंत के मौसम में फूलदेई (पहाड़ का एक त्योहार) के करीब गाया जाने वाला यह गीत प्रतीक होता है कि कफुवा यानी राज्य वृक्ष बुरांश खिलकर ऋतुराज वसंत के आने का संदेश दे रहा है। Pyonliफूलदेई पर नन्हे बच्चों द्वारा गांवों में द्वार पूजा के दौरान बुरांश के साथ साथ इसी दौरान खिलने वाले दूसरे नन्हे प्यारे पीले रंग के ‘प्योंली’ (गढ़वाल में फ्योंली शब्द प्रयोग किया जाता है) भी प्रयोग किये जाते हैं। लेकिन इधर सरोवरनगरी के पास बुरांश और प्योंली के फूल जनवरी के पहले पखवाड़े यानी बसंत ऋतु में ही खिल आए हैं। इससे पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं कि समय से पूर्व इन फूलों का खिलना किसी खतरे अथवा बड़े मौसमी परिवर्तन का संकेत तो नहीं, जबकि बच्चे भी चिंताग्रस्त हैं कि कहीं फूलदेई पर, जब उन्हें इन फूलों की जरूरत होगी, तब उन्हें यह प्राप्त होंगे या नहीं। वनस्पति विज्ञानी भी इस बारे में शंशय में हैं। पढ़ना जारी रखें “बेमौसम के कफुवा, प्योंली संग मुस्काया शरद, बसंत शंशय में”

::युवा दिवस 12 जनवरी, 152वीं जयंती पर पर विशेष: नैनीताल से ही नरेंद्र बना था शिकागो का राजर्षि विवेकानंद


Kakadighat
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-नैनीताल जनपद के काकड़ीघाट में ‘बोधि वृक्ष’ सरीखे पीपल का पेड़ के नीचे स्वामी विवेकानंद को हुऐ थे अणु में ब्रह्मांड के दर्शन -स्वामी विवेकानंद व देवभूमि का संबंध तीन चरणों, यानी उनके नरेंद्र होने से लेकर स्वामी विवेकानंद और फिर राजर्षि विवेकानंद बनने तक का था

नवीन जोशी, नैनीताल। उस दौर में सपेरों के देश माने जाने वाले भारत को दुनिया के समक्ष आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रवर्तित करने वाले युगदृष्टा राजर्षि विवेकानंद को आध्यात्मिक ज्ञान नैनीताल जनपद के काकड़ीघाट नाम के स्थान पर प्राप्त हुआ था। यानी सही मायनों में बालक नरेंद्र के राजर्षि विवेकानंद बनने की यात्रा देवभूमि के इसी स्थान से प्रारंभ हुई थी, और काकड़ीघाट ही उनका ‘बोध गया’ था। यहीं उनके अवचेतन शरीर में अजीब सी सिंहरन हुई, और वह वहीं ‘बोधि वृक्ष’ सरीखे पीपल का पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठ गऐ। इस बात का जिक्र करते हुऐ बाद में स्वामी जी ने कहा था, यहां (काकड़ीघाट) में उन्हें पूरे ब्रह्मांड के एक अणु में दर्शन हुऐ। यही वह ज्ञान था जिसे 11 सितंबर 1893 को शिकागो में आयोजित धर्म संसद में स्वामी जी ने पूरी दुनिया के समक्ष रखकर विश्व को चमत्कृत करते हुए देश का मानवर्धन किया। सम्भवतः स्वामी जी को अपने मंत्र ‘उत्तिष्ठ जागृत प्राप्यवरान्निबोधत्’ के प्रथम शब्द ‘उत्तिष्ठ’ की प्रेरणा भी अल्मोड़ा में ही मिली थी। उन्होंने हिन्दी में अपना पहला भाषण राजकीय इण्टर कालेज अल्मोड़ा में दिया था।  पढ़ना जारी रखें “::युवा दिवस 12 जनवरी, 152वीं जयंती पर पर विशेष: नैनीताल से ही नरेंद्र बना था शिकागो का राजर्षि विवेकानंद”

नहीं रहे 11 गोरखा रेजीमेंट के संस्थापक सदस्य मेजर जीआई पुनवानी


Major Govind Idimal Punwani
Major Govind Idimal Punwani

नैनीताल। अगले सप्ताह 19 जनवरी को अपना 92वें जन्म दिन मनाने की तैयारी कर रहे, और उम्र के इस पड़ाव पर भी किसी युवा की तरह सार्वजनिक कार्यक्रमों में फिल्मी गीत गुनगुनाकर अपनी जवां और जिंदा दिली का परिचय कराने वाले हर दिल अजीज मेजर जीआई पुनवानी नहीं रहे। रानीबाग में संचालित रॉयल कॉलेज ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट व नगर के जनहित संगठन के संरक्षक और 11 गोरखा रेजीमेंट के संस्थापक सदस्यों में से एक मेजर पुनवानी का शनिवार सुबह लखनऊ के सहारा अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें तीन जनवरी को हुए ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन का समाचार मुख्यालय पहुंचते ही उनके परिचितों और समाज के विभिन्न वर्गों में शोक की लहर छा गई। पढ़ना जारी रखें “नहीं रहे 11 गोरखा रेजीमेंट के संस्थापक सदस्य मेजर जीआई पुनवानी”