पंजाब में आतंकवाद खत्म करने व तहलका जांच सहित अनेक उपलब्धियां जुड़ी हैं उत्तराखण्ड के मनोनीत राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल के नाम


छः फरवरी उन्नीस सौ अड़तालीस (06.02.1948) को जन्मे अखिल भारतीय पुलिस सेवा, 1970 बैच के अधिकारी डा. कृष्ण कांत पॉल के नाम के नाम पंजाब में आतंकवाद खत्म करने सहित अनेक उपलब्धियां जुड़ी हैं। एम.एस.सी में आनर्स व पीएचडी डा. पॉल के कई वैज्ञानिक शोध अनेक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी के रूप में वह जनवरी 2004 से जुलाई 2007 तक दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के पद पर साढ़े तीन वर्ष का सर्वाधिक लम्बा कार्यकाल पूरा करने के बाद 26 जुलाई, 2007 से संघ लोक सेवा आयोग में संवैधानिक पद पर सदस्य के रूप में पाँच वर्ष और छः माह तक आपने अपनी सेवाएं दी। भारत सरकार के लिए 37 वर्षों की उत्कृष्ट लोक सेवा, जनसामान्य तथा सामाजिक संगठनों के लिए की गई उल्लेखनीय सेवाओं के लिए भारत सरकार से उन्हें विशेष सेवा मेडल (अंडमान और निकोबार), विशिष्ट सेवाओं के लिए पुलिस मेडल, अतिविशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति का पुलिस मेडल, विशेष सेवा मेडल (बार) अरूणाचल एव आन्तरिक सुरक्षा मेडल के अलावा संग्राम मेडल, पश्चिम स्टार आदि सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।

उन्हें भारत सरकार के उच्च स्तर के विभिन्न संस्थानों में 42 वर्षों से अधिक समय तक दी गई उत्कृष्ट लोक सेवाओ के तहत प्रशासन, कानून व्यवस्था और खुफिया सुरक्षा का विशाल अनुभव है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के रूप में उनके द्वारा 70,000 से अधिक पुलिस कर्मियों का मार्गदर्शन करते हुए कानून-व्यवस्था, खुफिया सुरक्षा तथा राष्ट्रीय राजधानी से सम्बन्धित कई संवेदनशील एवं अत्यन्त महत्वपूर्ण मामलों में केन्द्रीय भूमिका का उत्कृष्ट ढ़ग से निर्वहन किया गया। दो वर्ष से अधिक समय तक अरूणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य के पुलिस प्रमुख भी रहे।

संवेदनशील जाँचें

डा. पॉल ने कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों की जाँच को बखूबी पूर्ण किया। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी की हत्या मामले की जाँच के लिए इन्हें विशेष तौर पर चुना गया। इसके अतिरिक्त क्रिकेट मैच फिक्सिंग, कई बम विस्फोटों, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी अपराधों की जांच का दायित्व इन्हंे सौंपा गया था, जिन्हें इनके निरीक्षण में सफलतापूर्वक सुलझाया गया।

आतंकवाद विरोधी उत्तरदायित्व

डा. पॉल को पंजाब व अन्य क्षेत्रों की आतंकवादी गतिविधियों का गहरा ज्ञान है। दिल्ली में इनके मार्गदर्शन व पर्यवेक्षण में बहुत से आतंकवादियों को पकड़ा गया। इन्होंने, पंजाब के मुख्यमंत्री एस बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी जगतार सिंह हवारा को गिरफ्तार करके आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा के पूरे नेटवर्क को 2005 में पूरी तरह से ध्वस्त किया।

कानून -व्यवस्था

डा. पॉल के द्वारा कानून व्यवस्था से संबंधित जटिल समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न सामाजिक समूहों की साझेदारी का एक विशेष तरीका विकसित किया गया। अपनी त्रुटिहीन, अविवादित व ईमानदार छवि तथा उत्कृष्ट कार्यप्रणाली से ये विभिन्न सामाजिक समुदायों, अल्पसंख्यक वर्ग के समूहों व संगठनों का समर्थन पाने में सफल रहे जिससे इनके कार्यकाल में दिल्ली में सामाजिक सद्भाव का वातावरण बना रहा।

तहलका मामले की जाँच

तहलका मामले की जांच में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आपने तहलका कांड की जांच हेतु गठित विशेष जांच दल, वेंकटास्वामी जांच आयोग तथा फूंकन जांच आयोग के निदेशक के रूप में कार्य किया। भ्रष्टाचार निरोधक दृष्टिकोण तथा सर्तकता की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण इस मामले में आपके द्वारा की गई पड़ताल पर सी.बी.आई को विस्तृत जांच हेतु कई महत्वपूर्ण तथ्य प्राप्त हुए।

पुलिस के आधुनिकीकरण एवं विकास कार्य

दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण व नवीनतम तकनीकों का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने की व्यवस्था का श्रेय भी आपको जाता है। आपने अपराधों की जांच के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग व अन्य राज्यों के साथ ऑनलाईन समन्वयन हेतु दिल्ली में साइबर लैब की स्थापना की। इन्होंने पुलिस में कई आधुनिक पद्धतियों की शुरूआत की। जिसके अन्तर्गत लाईसेंसिंग व भर्ती जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणामों से पाँच ISO प्रमाणपत्र हासिल किए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर नियंत्रण आपकी प्राथमिकता रही। इसके लिए जनसहभागिता के आधार पर नई योजना ‘परिवर्तन‘ को लागू किया गया।

अनुसंधान एवं शिक्षा

डा. पॉल ने फ्लोरीन रसायनशास्त्र में पीएचडी की जिसे अत्यधिक सराहा गया। 15 शोधों को अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया। शैक्षिक गतिविधियों से निरन्तर संबद्ध रहने के कारण इनके द्वारा लिखे गए वैज्ञानिक व प्रसिद्ध लेख ख्याति प्राप्त समाचार पत्र/पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।

संवैधानिक पद

संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में मानव संसाधन विकास तथा भारत सरकार में कार्मिक प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं का आपके पास अद्वितीय अनुभव है। इन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों तथा प्रतिष्ठित बुद्विजीवियों से वार्ता कर प्रशासनिक सेवा परीक्षा के साक्षात्कारों तथा उच्च स्तर पर पदोन्नति की प्रक्रियाओं में ईमानदारी तथा दक्षता सुनिश्चित करके चयन प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक तथा विश्वसनीय बनाने में आपका विशेष योगदान रहा है।

अनुभव में विविधता

अडंमान निकोबार के पुलिस अधीक्षक (1973-75)के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने आदिवासियों के साथ सम्पर्क स्थापित करने के नये माध्यम विकसित किए। अरूणाचल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी उन्होंने आदिवासी समुदाय के साथ अत्यन्त मधुर सम्बन्ध स्थापित किये। आदिवासियों के आन्तरिक क्षेत्रों में सघन भ्रमण करके उन्होंने आदिवासियों की समस्याओं को सुलझाने की गहरी समझ विकसित की।

राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

  • 08 जुलाई, 2013 को मेघालय के राज्यपाल बने।
  • 02 जुलाई, 2014 से 19 जुलाई, 2014 तक नागालैंड के राज्यपाल का कार्यभार भी संभाला।
  • 15 सितम्बर, 2014 को मणिपुर के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार भी ग्रहण किया जो राष्ट्रपति के अग्रिम आदेशों तक जारी रहेगा।
  • 16 सितम्बर, 2014 को मिजोरम के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया।
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2 responses to “पंजाब में आतंकवाद खत्म करने व तहलका जांच सहित अनेक उपलब्धियां जुड़ी हैं उत्तराखण्ड के मनोनीत राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल के नाम

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