बड़े परदे की हालत खस्ता, छोटे परदे पर भारी शोषण : तिवारी


Lalit Tiwari1-वर्ष में एक एक्टर की दर्जन भर फिल्में आती थीं, अब आती हैं एक या दो
-छोटे परदे पर हर सीरियल में आते हैं नए एक्टर और 14-16 घंटे काम के बाद भी दूसरे सीरियल में नहीं मिलता उन्हें काम
नवीन जोशी, नैनीताल। एक जमाने के मेगा सीरियल महाभारत में संजय के पात्र के रूप में बेबाक, बिना लाग-लपेट आंखों-देखी बयां करने वाले नैनीताल निवासी सिने कलाकार ललित तिवारी निजी जिंदगी में भी संजय जैसे ही जाने जाते हैं। एक अभिनेता के लिए भी उनका मानना है कि वह समाज पर अपनी ‘गिद्ध दृष्टि” रखता है, और अपने ‘अंतर्मन” को विभिन्न चरित्रों में खोलकर रख देता है। इन दिनों अपने घर आए ललित ने शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय सहारा” से सिनेमा व राजनीति सहित अनेक मुद्दों पर खुलकर बातचीत की, और वह इन दोनों क्षेत्रों से काफी भीतर तक व्यथित दिखे। उन्होंने कहा कि चीजें आगे बढ़नी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। हर ओर गिरावट आ रही है, तथा पढ़ने, आगे बढ़ने के बजाय पैंसे की दौड़ नजर आ रही है।

Rashtriya Sahara, 23rd May 2015, Dehradun Edition

Lalit Tiwariभारतीय सिनेमा उद्योग की स्थितियों पर उनका कहना था कि बड़े परदे की हालत बेहद खस्ता है। बीते दौर में जहां एक कलाकार वर्ष में दर्जन भर फिल्में बनाता था, अब बड़े से बड़े कलाकारों की भी वर्ष में एक या अधिकतम दो फिल्में आ पाती हैं। जो फिल्में आती हैं, उनमें भी कहानी, गीत-संगीत जैसा कुछ नहीं होता। उनमें कुछ यहां-कुछ वहां से उठाकर ठूंसा गया होता है। अधिकांश स्टार कलाकार खुद ही प्रोड्यूसर हो गए हैं, और अपने लिए खुद फिल्में बना रहे हैं। इस गिरावट का कारण छोटा परदा यानी टीवी, इंटरनेट और फिल्मों के सैकड़ों रुपए में हो गए टिकट हैं। दूसरी ओर बकौल ललित छोटा परदा किसी कोण से सिनेमा नहीं है। वहां या तो फूहड़ कॉमेडी शो हैं, अथवा हर सीरियल में एक-दो प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ पूरी नई स्टार कास्ट ली जाती है। इन कलाकारों से सुबह सात बजे से रात के 10 और कई बार 12-1 बजे तक भी लगातार हफ्ते के सातों दिन काम लिया जाता है, बावजूद उन्हें अगला सीरियल नहीं मिलता, क्योंकि नए सीरियल में फिर नए कलाकार लिए जाते हैं। ऐसे में अनेक कलाकार आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। बताया कि वर्तमान 90 फीसद एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कलाकार यूं ही गुजारा कर रहे हैं। उन्होंने सिने कलाकार संघ यानी सिन्टा में कलाकारों का प्रवेश सीमित करने पर भी बल दिया। साथ ही तीन-चार माह में एक्टिंग का कोर्स सिखाने वाले संस्थानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें गैरकानूनी बताया तथा उन्हें बंद कर दिए जाने की जरूरत बताई, क्योंकि बकौल ललित एक्टिंग तीन-चार माह में सीखी जाने वाली चीज नहीं है। इसके लिए जिंदगी लगानी पड़ती है। बावजूद ललित कहते हैं सिनेमा और अभिनय उनकी जिंदगी है। इसके लिए ही वह जीते हैं। उनके अनुसार सिनेमा-‘ट्रू टु लाइफ” यानी जिंदगी के करीब और ‘क्रिएटिव आर्ट” यानी रचनात्मक कला है, लेकिन आज वह तिलस्मी हो गया है, जहां अपनी छवि भी रंगीन परंतु बेचैनी से भरी हुई दिखती है।

Rashtriya Sahara, 23rd May 2015, Dehradun Edition

आंचलिक व भाषाई सिनेमा की प्रखर वकालत करते हुए ललित बताते हैं कि सत्यजीत रे को बंगाली सिनेमा के लिए पुरस्कार मिले। दक्षिण भारतीय सिनेमा भी बहुत आगे हैं। उत्तराखंड में भी अपने सिनेमा की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए स्थानीय लोगों को सही मंच, प्रोत्साहन देने की जरूरत है। लेकिन राज्य सरकारें अपने लोगों का उपयोग करने, उन्हें जिम्मेदारी देने की बजाय बड़े नामों या ऐसे लोगों, जिन्हें विषय का ज्ञान भी नहीं होता, उन्हें ‘ब्रांड एंबेसडर” बनाती या महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देती है, जो जिम्मेदारी लेने के बाद राज्य में झांकने नहीं आते हैं।

फिल्मों से संबंधित अन्य आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें :

  1. नैनीताल-कुमाऊं में फिल्माई गई फिल्में

  2. क्या आपको पता है नैनीताल में कहां है देवगुरु बृहस्पति का मंदिर, और किस गांव में हुई थी मधुमती फिल्म की शूटिंग

  3. वाह क्या खूब, मोबाइल फोन से बना डाली पूरी फिल्म

  4. अब उत्तराखंड सरकार के मुरीद हुए सिने अभिनेता हेमंत पांडे

Advertisements

5 responses to “बड़े परदे की हालत खस्ता, छोटे परदे पर भारी शोषण : तिवारी

  1. पिंगबैक: विभिन्न विषयों पर अधिक पसंद किए गए ब्लॉग पोस्ट | हम तो ठैरे UTTARAKHAND Lovers, हम बताते हैं नैनीताल की खिड़की स·

  2. पिंगबैक: उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी – नवीन समाचार : हम बताएंगे नैन·

  3. पिंगबैक: इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के नाम-उपनाम व एतिहासिक घटनायें – नवीन समाचार : हम बता·

  4. पिंगबैक: विभिन्न विषयों पर पुराने अधिक पसंद किए गए पोस्ट – नवीन समाचार : नवीन दृष्टिकोण से समाचार·

  5. पिंगबैक: मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पड़ी भारी – नवीन समाचार : समाचार नवीन·

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s