सेटिंगबाज ठेकेदारों पर मेहरबान हुई उत्तराखंड सरकार, इकलौती निविदा से भी हो सकेंगे करोड़ों के कार्य


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-असीमित धनराशि के कार्य केवल एक निविदा के माध्यम से भी कराए जा सकेंगे

-कार्यालय अध्यक्ष मनमर्जी से बिना निविदा कर सकेंगे 50 हजार रुपए तक की खरीदें

-वहीं राज्य के छोटे ठेकेदारों की मांगें सरकार ने की अनसुनी

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, प्रदेश सरकार सरकारी विभागों में सामानों की बिक्री करने वाले व कार्य कराने वाले खासकर अधिकारियों के मुंह लगे ठेकेदारों पर मेहरबान हो गई लगती है। इसके लिए सरकार ने उन्हीं नौकरशाहों-विभागीय अधिकारियों पर अधिक भरोसा करने का रास्ता चुना है, जिन पर अभी सूचना आयोग के जरिए खुले मामले में वर्ष 2013 में राज्य में आई महाप्रलयकारी आपदा के राहत कार्यों में ‘चिकन-मटन” खाने से राज्य सरकार की बड़ी किरकिरी हुई है, और राज्य में हमेशा से जिन पर बेलगाम होने के आरोप लगते रहते हैं। विभागीय अधिकारी अब बिना निविदा के 50 हजार रुपए तक की खरीदें कर सकेंगे, जबकि डेढ़ करोड़ रुपए तथा इससे अधिक असीमित धनराशि के कार्य केवल एक निविदा के माध्यम से भी कराए जा सकेंगे। आने वाले समय में इस शासनादेश से राज्य में निर्माण कार्यों और खरीद की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। वहीं राज्य के छोटे ठेकेदारों की उन्हें कार्यों में प्राथमिकता देने, बड़े कार्यों के बजाय कार्यों को छोटे टुकड़ों में कराकर अधिकाधिक लोगों को कार्य में शामिल करने जैसी लंबे समय से चली आ रही मांगें सरकार ने अनसुनी कर दी हैं।

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आपदा राहत के नाम पर अब नहीं उड़ा सकेंगे चिकन, मटन, बिरयानी…..


-केंद्र सरकार ने पहली बार तय किए राज्य आपदा मोचन निधि यानी एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं की तात्कालिक मरम्मत के मानक
-अब तक नहीं थे कोई मानक, होती थी मनमानी
-राज्य सरकार ने अनुग्रह राहत वाले हिस्से को तो सार्वजनिक किया, परंतु राहत के हिस्से को नहीं किया है सार्वजनिक
नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश में वर्ष 2013 में आई दैवीय आपदा के राहत कार्यों में जिस तरह अधिकारियों के चिकन खाने और मनमाना धन उड़ाने की खबरें आई हैं, वह भविष्य के लिए बीती बात हो सकती हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने देश के इतिहास में पहली बार वर्ष 2015 2020 से की अवधि के लिए राज्य आपदा मोचन निधि यानी एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया निधि यानी एनडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं तात्कालिक मरम्मत के मानक तय कर दिए हैं। इन मानकों के आने के बाद तय कर दिया गया है कि आपदा आपदा आने के बाद राहत के नाम पर राज्य के नौकरशाह और सियासतदां क्या करते और क्या नहीं, तथा अधिकतम कितनी धनराशि खर्च कर सकते हैं। इन मानकों के बाद आपदा राहत के नाम पर होने वाली मनमानी और लूट पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद की जा रही है।

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विश्व योग दिवस के साथ युग परिवर्तन की शुरुआत, विश्व गुरु बनने की राह पर भारत


प्रकृति योग
प्रकृति योग

Image result for योग दिवस के साथ युग परिवर्तनबात कुछ पुराने संदर्भों से शुरू करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 1836 में उनके गुरु आचार्य रामकृष्ण परमहंस के जन्म के साथ ही युग परिवर्तन गया है काल प्रारंभ हो। यह वह दौर था जब देश में 700 वर्षों की मुगलों की गुलामी के बाद अंग्रेजों के अधीन था, और पहले स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल भी नहीं बजा था।
बाद में महर्षि अरविन्द ने प्रतिपादित किया कि युग परिवर्तन का काल, संधि काल कहलाता है और यह करीब 175 वर्ष का होता है …

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उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त


-प्रति एक हजार की जनसंख्या पर आउटसोर्सिंग से अधिकतम दो पर्यावरण मित्र ही होंगे तैनात नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के नगर निकायों के लिए बताए नए ढांचे में सफाई कर्मचारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों, सहायक अध्यापिका एवं लाइब्रेरियन सहित करीब डेढ़ दर्जन पद नामों को समाप्त कर दिया है। इनमें से सफाई कर्मचारियों का नाम परिवर्तित कर उन्हें पर्यावरण मित्र नाम देकर उनकी नियुक्ति केवल मृतक आश्रित कोटे से अथवा आउटसोर्सिंग से करने की नई व्यवस्था कर दी है, जबकि अन्य पद नामों को गैर जरूरी बताते हुए समाप्त कर दिया गया है। चतुर्थ श्रेणी के मृत संवर्ग … पढ़ना जारी रखें उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त

योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?


-क्योंकि इनसे बेहतर सुधर रही उत्तराखंड व इसके चुनिंदा लोगों की आर्थिक सेहत शीर्षक पढ़कर चौंकिएगा नहीं। विश्व के 47 मुस्लिम देशों सहित कुल 192 देशों के द्वारा आगामी 21 जून को मनाए जा रहे ‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाने पर उत्तराखंड राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी की ‘नां’ के बाद यही पहला सवाल मन में उठता है। यदि उत्तराखंड कोई अलग राष्ट्र नहीं वरन भारतीय संघ का एक अंग या राज्य होता तो उसके मुख्यमंत्री कदापि केंद्रीय सरकार की एक वैश्विक पहल पर अपने कदम पीछे नहीं खींचते, और 21 जून को तय अपने ‘जागेश्वर योग महोत्सव’ … पढ़ना जारी रखें योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?

उत्तराखंड राजकाज : अनियमितताओं की नींव पर खड़ी उत्तराखंड शासन की दूसरी लाइन !


  • Rashtriya Sahara, 15th June 2015, Dehradun Edition
  • प्रोन्नति और सीधी भर्ती तथा बैचों में नियमानुसार सामंजस्य न बना पाने से आपस में लड़-झगड़ रहे हैं पीसीएस अधिकारी
  • प्रदेश सरकार का रवैया भी ढीला-ढाला, अनियमितताओं के तमाम मामले पहुंच गए हैं अदालतों की चौखट पर

नवीन जोशी, नैनीताल। पीसीएस संवर्ग को आईएएस के बाद किसी भी राज्य की शासन व प्रशासनिक व्यवस्था की दूसरी लाइन कहा जाता है, लेकिन इस संवर्ग के अधिकारियों की तैनाती में राज्य बनने के बाद से यानी नींव बनाने से ही लगातार अनियमितताएं बरती गई हैं। खासकर प्रोन्नति और सीधी भर्ती की प्रक्रिया जो साथ-साथ होनी चाहिए, ताकि किसी एक वर्ष के अधिकारियों का बैच एक हो तथा उनमें वरिष्ठता का कोई विवाद न हो और राज्य को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था मिले। इसके उलट उत्तराखंड में प्रोन्नत और सीधी भर्ती के ही नहीं, एक ही वर्ग के पीसीएस अधिकारियों में भी शासन ने अनियमितताओं की ऐसी चौड़ी खाइयां खोदी हुई हैं कि कई मामले न्यायालयों में चल रहे हैं और अनेक अधिकारी आपस में कोई व्यक्तिगत द्वेष न होने के बावजूद व्यवस्था की बेहद पेचीदा खाइयों के इस और उस पार खड़े हैं। स्थिति यहां तक भयावह है कि अनेक अधिकारी बिना पद तथा संवर्ग में स्वीकृत पदों से भी अधिक पर इस अनिश्चितितता के साथ कार्य कर रहे हैं कि उन्हें आगे कौन सा बैच मिलेगा।

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गुदड़ी के लाल ने किया कमाल, घनमूल निकालने का खोजा फॉर्मूला


Jitendra Joshi-17 वीं शताब्दी में स्कॉटलेंड व स्विटजरलेंड के वैज्ञानिकों द्वारा इसके हल के लिए प्रयोग की जारी वाली 1200 शब्दों की जगह केवल 50 शब्दों की लॉग टेबल खोजने का किया है दावा
नवीन जोशी, नैनीताल। प्रतिभा उम्र सहित कैसी भी परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। कॉलेज की पढ़ाई में लगातार ह्रास की आम खबरों के बीच कुमाऊं विवि के एक बीएससी द्वितीय वर्ष के सामान्य पारिवारिक स्थिति वाले छात्र जितेंद्र जोशी का दावा यदि सही है, तो उसने ऐसा कमाल कर डाला है, जो उससे पहले 17 वीं शताब्दी में स्कॉटलेंड के गणितज्ञ जॉन नेपियर ने 1614 में और स्विटजरलेंड के जूस्ट बर्गी ने 1620 में किया था। इन दोनों विद्वान गणितज्ञों से भी छात्र जितेंद्र की उपलब्धि इस मामले में बड़ी है कि इन विद्वानों ने जो लॉग टेबल खोजी थी, वह करीब 1 9 00 शब्दों की है, लिहाजा उसे याद करना किसी के लिए भी आसान नहीं है, और परीक्षाओं में भी इस लॉग टेबल को छात्रों की सहायता के लिए उपलब्ध कराए जाने का प्राविधान है। जबकि जितेंद्र की लॉग टेबल केवल 50 शब्दों की है। इसे आसानी से तैयार तथा याद भी किया जा सकता है। लिहाजा यदि उसकी कोशिश सही पाई गई तो परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को लॉग टेबल देने से निजात मिल सकती है, तथा गणित के कठिन घनमूल आसानी से निकाले जा सकते हैं। पढ़ना जारी रखें “गुदड़ी के लाल ने किया कमाल, घनमूल निकालने का खोजा फॉर्मूला”

मानसून : उत्तराखंड-हिमांचल में और भी बुरे रहेंगे हालात


डा. बीएस कोटलिया
डा. बीएस कोटलिया

–पिछले वर्षों में अतिवृष्टि के रूप में अपना प्रभाव दिखा चुके ‘भाई” अल-नीनो के बाद अब ‘बहन” ला-नीना की बारी

-यूजीसी के दीर्घकालीन मौसम विशेषज्ञ डा. बीएस कोटलिया का दावा-ला नीना के प्रभाव में आईटीसीजेड को पर्वतीय राज्यों तक नहीं धकेल पाएगा दक्षिण-पश्चिमी मानसून

-इन राज्यों में सामान्य से 80 फीसद से भी कम मानसूनी बारिश होने और सितंबर तक गर्मी पड़ने की जताई आशंका

नवीन जोशी, नैनीताल। केंद्रीय मौसम विभाग की इस वर्ष देश में सामान्य से 88 फीसद से भी कम मानसून आने की घोषणा के बीच उत्तराखंड व हिमांचल प्रदेश आदि पर्वतीय राज्यों के लिए इससे भी बुरी और समय पूर्व प्रबंध करने के लिए चेतावनी युक्त खबर है। यूजीसी के दीर्घकालीन मौसम विशेषज्ञ डा. बहादुर सिंह कोटलिया ने दावा किया है कि उत्तराखंड के साथ ही दूसरे पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में हालात इस आशंका से भी बदतर हो सकते हैं। यहां सामान्य से 80 फीसद से भी कम बारिश हो सकती है। डा. कोटलिया ने यहां तक दावा किया है कि इस वर्ष सितंबर माह तक भी इन दोनों राज्यों मानसून की बेहद क्षींण संभावनाओं के साथ सूखा व गर्मी झेलनी पड़ सकती हैं। इन दोनों राज्यों ने पिछले वर्षों में जैसी अतिवृष्टि, जल प्रलय झेली है, अब उन्हें वैसे ही सूखे और अनावृष्टि को भुगतने के लिए तैयार होना चाहिए। पढ़ना जारी रखें “मानसून : उत्तराखंड-हिमांचल में और भी बुरे रहेंगे हालात”