Rashtriya Sahara 19 01 2016

नैनीताल के नवीन समाचार 



केन्द्रीय बजट में सुनी जाएगी नैनीताल की आवाजें ?


केवल आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही वास्तव में लौटाए पुरस्कार

Brajendra
डा. बृजेंद्र त्रिपाठी

-इनसे से भी आधों ने लौटाई पुरस्कार की राशि
नैनीताल (एसएनबी)। पिछले दिनों साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने की खूब चर्चाएं रहीं, और अनेक साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने की खबरें मीडिया में आर्इं। लेकिन सच्चाई यह है कि मुश्किल से आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही साहित्य अकादमी को औपचारिक तौर पर अपने पुरस्कार लौटाने के पत्र भेजे, वहीं इनमें से भी करीब आधों ने ही साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रुपए की धनराशि लौटाने की हिम्मत दिखाई।

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नितीश के ‘महानायक’ होने का सच


d9125मीडिया में बहुप्रचारित हो रहा है-‘महागठबंधन की महाजीत, महानायक बने नितीश’। मानो एक प्रांत बिहार जीते नितीश में मोदी से खार खाए लोगों को उनके खिलाफ मोहरा मिल गया है। नितीश बाबू भी राष्ट्रीय चैनलों पर राष्ट्रीय नेता बनने के दिवास्वप्न देखते दिखाए जा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि चुनाव परिणाम की रात नितीश सो नहीं पाए हैं। सच है कि उन्हें महागठबंधन ने अपने नेता के रूप में पेश किया था, इसलिए उनकीं तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी तय है। लेकिन भीतर का मन सवाल कर कचोट रहा है, पिछली बार के मुकाबले सीटें और वोट दोनों कम मिले हैं। गठबंधन में ‘छोटे भाई’ लालू, अधिक सीटों (80)के साथ ‘बड़े भाई’ बनकर उभरे हैं। पीछे से मन कह रहा है, जिस भाजपा को पिटा हुआ बता रहे हैं, वह तो 24.8 फीसद वोटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मीडिया कह रहा है, उन (नितीश) का जादू चला है, जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें लोक सभा चुनाव (16.04फीसद)  से महज 0.76 फीसद अधिक ही और भाजपा से आठ फीसद से भी कम, महज 16.8 फीसद वोट मिले हैं, और उनके सहयोगी लालू व कांग्रेस को मिलाकर पूरे महागठबंधन का वोट प्रतिशत भी लोक सभा चुनाव के मुकाबले करीब पांच फीसद गिरा है। लोक सभा चुनाव में जहां लालू को 20.46 फीसद वोट मिले थे, वहीं अबकी 18.4 फीसद मिले हैं। चार से 27 सीटों पर पहुंचकर ‘बाल सुलभ’ बल्लियां उछल रही राहुल बाबा की कांग्रेस को भी लोक सभा के 8.56 फीसद के बजाय 6.7 फीसद वोट ही मिले हैं और कुल मिलाकर महागठबंधन को भी जहां लोक सभा चुनाव में 46.28 फीसद वोट मिले थे, वहीं इस बार महज 41.9 फीसद वोट ही मिले हैं।

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पर्यटन, हर्बल के बाद अब जैविक प्रदेश बनेगा उत्तराखंड


विभिन्न प्रकार के बीज
विभिन्न प्रकार के बीज

-प्रदेश के जैविक उत्पादों का बनेगा अपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
-उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के प्रस्ताव को मुख्य मंत्री ने दी हरी झंडी
-राज्य में ही पहली बार लगने जा रही कलर सॉर्टिंग मशीनों से स्थानीय ख्याति प्राप्त उत्पाद राजमा, चौलाई, गहत, भट्ट आदि के जियोग्रेफिकल इंडेक्स बनेंगे
-इस हेतु रुद्रपुर में मंडी परिषद के द्वारा एक वर्ष के भीतर बनाया जाएगा 1500 टन क्षमता का कोल्ड स्टोर और तीन हजार टन क्षमता का गोदाम

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी सुकून देने वाली हो सकती है। अभी भी अपेक्षाकृत सस्ती मिल रहीं उत्तराखण्ड की जैविक दालें (मौंठ 50, भट्ट 70 तथा गहत और राजमा 120 रुपये प्रति किग्रा.) देश की महँगी दालों का विकल्प हो सकती हैं। पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित उत्तराखंड एक नए स्वरूप में स्वयं को ढालने की राह पर चलने जा रहा है। यह राह है हर्बल प्रदेश बनने की, जिस पर अब तक पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित किये जा रहे उत्तराखण्ड ने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड, मंडी परिषद, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद एवं कृषि एवं उद्यान आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश को जैविक प्रदेश यानी जैविक उत्पादों का प्रदेश बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में राज्य के सभी पर्वतीय जिलों के 10 ब्लॉकों को जैविक ब्लॉक घोषित कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला जैविक जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है, और आगे चमोली व पिथौरागढ़ को भी जैविक जनपद बनाने की तथा अगले चरण में सभी पर्वतीय जिलों को जैविक जिलों के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। साथ ही प्रदेश के जैविक उत्पादों के लिए प्रदेश में ही बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने को मुख्यमंत्री के स्तर से हरी झंडी मिल गई है। प्रस्तावित जैविक प्रदेश में जैविक खाद्यान्नों के साथ जैविक दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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