उत्तराखंड की ‘फील गुड टाइप’ ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबरें


पानी की बूंद-बूंद पर रहेगी नजर: प्रदेश में लगेंगे पानी के वाई-फाई वाले ऑटोमैटेड डिजिटल मीटर

-मीटर रीडिंग के लिये रीडर को घर-घर भी नहीं आना पड़ेगा, बल्कि पास से गुजरते हुए सभी मीटरों की रीडिंग मिल जायेगी
-नैनीताल व देहरादून में एशियाई विकास बैंक के माध्यम से योजना स्वीकृत, आगे रामनगर व रुड़की में भी योजना होगी लागू
-उपभोक्ताओं को नये मीटरों के लिये कोई शुल्क नहीं देना होगा, मीटर लगाने वाली संस्था की ही अगले सात वर्षों तक इन मीटरों के रखरखाव की जिम्मेदारी
नवीन जोशी। नैनीताल। प्रदेश में पेयजल की बरबादी अब बीते समय की बात होने वाली है। अब प्रदेश में पेयजल की एक-एक बूंद पर संबंधित विभाग की नजर होगी। उपभोक्ता पेयजल का कितना उपयोग कर रहे हैं, और कितना पानी पेयजल लाइनों से लीक होकर बरबाद हो रहा है, यह सब कुछ संबंधित विभाग की निगरानी में रहेगा। ऐसा प्रदेश में पेयजल उपभोक्ताओं के पेयजल संयोजनों पर लगने जा रहे ऑटोमेटेड डिजिटल मीटरों से संभव होगा, जिनकी पहली चरण की योजना नैनीताल व देहरादून के लिये स्वीकृत हो गयी है, तथा आगे रामनगर व रुड़की कस्बों में भी यह मीटर लगाने की योजना है। खास बात यह भी है कि यह ‘ऑटोमेटेड डिजिटल मीटर वाई-फाई’ सुविधा से युक्त होंगे। इसका लाभ यह होगा कि मीटर रीडरों को पेयजल के उपयोग की रीडिंग लेने के लिये घर-घर भी नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि मोटर साइकिल या पैदल टहलते हुए ही उनके पास मौजूद ‘हैंड हेल्ड यूनिट’ पर उस क्षेत्र में मौजूद सभी मीटरों की रीडिंग स्वयं दर्ज हो जायेगी। साथ ही यह भी पता चल जायेगा कि उस क्षेत्र में कोई मीटर खराब अथवा बंद तो नहीं हो गया है। इसके साथ ही यह भी पता चल जायेगा कि किसी क्षेत्र में पेयजल की कितनी जरूरत अथवा उपयोग है, तथा मीटर रीडरों पर दर्ज हो रही रीडिंग से इतर कोई लीकेज तो नहीं है।
एशियाई विकास बैंक से संबद्ध उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के प्रोग्राम मैनेजर अभियंता दुर्गेश पंत ने प्रदेश में लगने जा रहे ‘ऑटोमैटेड मीटरिंग सिस्टम’ के बारे में बताया कि इसके तहत नैनीताल व देहरादून नगरों में ‘डिजिटल वाई-फाई ओरिएंटेड’ पेयजल मीटर लगने जा रहे हैं। नैनीताल के सभी 20 जोनों में यह कार्य अप्रैल माह के आखिर से धरातल पर आना शुरू हो जायेगा। मीटरों के सात वर्ष तक रखरखाव, मरम्मत की जिम्मेदारी इन्हें लगाने वाली संस्था की होगी। उपभोक्ताओं को इन्हें लगाने के लिये कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। इन मीटरों के लगने से नगर के सभी 20 जोनों में अलग-अलग व कुल मिलाकर उपयोग हो रहे पेयजल की पूरी जानकारी मिल जायेगी। इन आंकड़ों का पंप हाउस में लगे ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर’ के आंकड़ों से मिलाकर जोनों में आपूर्ति किये जाने वाले व उपयोग हो रहे आंकड़ों से मिलान कर पानी की लीकेज से बरबादी के साथ ही अवैधानिक संयोजनों पर खर्च हो रहे पेयजल के सही-सही आंकड़े व स्थान का भी पता लग सकेगा।

खर्च के मुताबिक ही देना पड़ सकता है बिल भी

नैनीताल। अभी प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को बिना मीटर रीडर के कितना भी पानी की बरबादी करने पर नियत बिल का ही भुगतान करना होता है, लेकिन नये मीटर लगने के बाद बहुत संभव है कि पानी के उपयोग की मात्रा के आधार पर ही बिल निर्धारित हो सकते हैं। साथ ही पेयजल के खर्च के आंकड़े उपलब्ध होने पर सरकार कोई अन्य नीतिगत निर्णय भी आसानी से ले सकती है।

प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर चलेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूल, 500 मॉडल स्कूल बनेंगे, नर्सरी कक्षाएं भी होंगी, स्मार्ट क्लासें भी लगेंगी

 D Senthil Pandian-हर ब्लॉक में होंगे पांच मॉडल स्कूल, यहां प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर होगी पढ़ाई व अन्य आयोजन
-शिक्षकों-प्रधानाध्यापकों कोे दिया जाएगा प्रशिक्षण, गणित-विज्ञान व भाषाओं के अतिरिक्त शिक्षक होंगे तैनात
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में हालांकि अधिकांश सरकारी खबरें ‘गा, गे व गी” की ही यानी भविष्य के लिए बेहतर उम्मीदें जगाने वाली आती हैं, पर यह वर्तमान के धरातल पर उतरती हैं या नहीं, यह अलग बात है। अब प्रदेश सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को सुधारने की ओर सकारात्मक कदम उठाने का दावा कर रही है। प्रदेश के शिक्षा महानिदेशक एवं शिक्षा सचिव की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी की पढ़ाई कराने की भी योजना है। साथ ही राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर पहले चरण में प्रदेश के सभी ब्लॉकों में बेहतर चल रहे कम से कम पांच-पांच और कुल मिलाकर 500 स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में परिवर्तित करने जा रही है। इसके अलावा हर स्कूल का अपना वार्षिकोत्सव होगा और पढ़ाई से इतर खेल, नृत्य, गीत व वाद-विवाद आदि की प्रतियोगिताएं भी होंगी। साथ ही इन विद्यालयों में हर कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों का अपना एक अलग ऐसा मानक भी होगा, जितनी जानकारी बच्चों को होनी जरूरी होगी।
श्री पांडियन ने बताया कि प्रदेश के सभी स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से मॉडल स्कूल बनाने की योजना है। योजना के तहत सभी स्कूलों की स्थानीय आवश्यकताओं को देखते हुए अपनी अलग ‘स्कूल विकास योजना” बनाई जाएगी। योजना के लिए प्रदेश सरकार से शिक्षा विभाग को अगले शैक्षणिक सत्र यानी 2015-16 के लिए 20 करोड़ रुपए प्राप्त हो गए हैं। इससे अगले दो-तीन माह में जरूरी ढांचागत सुविधाएं तैयार कर ली जाएंगी। योजना के तहत हर ब्लॉक में दो-दो प्राथमिक एवं माध्यमिक तथा एक जूनियर हाईस्कूल को चिन्हित किया जाएगा। स्मार्ट क्लास आईआईटी मुंबई द्वारा तैयार किए गए उपकरण की मदद से चलाई जाएंगी। इन उपकरणों व सॉफ्टवेयर का प्रयोग करने के लिए चिन्हित मॉडल स्कूलों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही हिंदी-अंग्रेजी भाषाओं तथा गणित व विज्ञान के पूरे शिक्षक दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो गेस्ट टीचर भी नियुक्त किये जायेंगे।

नई नीति में स्कूलों की सफाई के प्रबंध का प्रस्ताव तैयार

नैनीताल। अक्सर सरकारी स्कूलों में बच्चों द्वारा सफाई का कार्य कराए जाने पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं। इस बाबत ‘राष्ट्रीय सहारा’ द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में प्रदेश के शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि स्कूलों में सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस हेतु स्कूलों में अलग कर्मचारियों की तैनाती की जा सकती है। प्रदेश में शून्य अथवा 10 से कम छात्र संख्या वाले अनेक स्कूल होने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत हर बच्चे को एक किमी के दायरे में शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। संभव है कि किसी स्थान पर बच्चे उपलब्ध ही ना हों, ऐसे स्कूलों के ‘रिडिप्लाइमेंट प्लान” तैयार किया जा रहा है।

प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही होगा 2014 में भर्ती हुए शिक्षकों का स्थायीकरण

नैनीताल। शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि वर्ष 2014 में भर्ती हुए शिक्षकों में से अनेक शिक्षकों कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। नैनीताल जनपद में भी ऐसे पांच शिक्षक चिन्हित हुए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही 2014 के सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इन शिक्षकों के स्थायीकरण की कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग आधारित स्थानांतरण नीति का परीक्षण किया जा रहा है। बताया कि 2015 के बात बीएड की जगह डी.एल.एड.  यानी ‘डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन’ प्रशिक्षितों की ही प्राइमरी शिक्षकों के रूप में तैनाती की जाएगी। उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि ‘उत्तराखण्ड में शिक्षकों का ध्यान केवल ‘सुगम’ स्थानों पर तैनाती प्राप्त करने पर है।’ उल्लेखनीय है महकमे के एक अन्य पूर्व महानिदेशक व सचिव ने शिक्षा विभाग पर टिप्पणी की थी-‘उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग को स्वयं भगवान भी नहीं सुधार सकते।’

यह भी पढ़ें : बच्चों ने खोल कर रख दी उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की पोल 

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One thought on “उत्तराखंड की ‘फील गुड टाइप’ ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबरें

  1. उत्तराखंड की सरकार ही निकम्मी है कुछ करना नहीं चाहती एक तरफ कहती है की हमारी शिक्षा की स्थिति बेकार है, वही इतनी बड़ी तादाद मैं प्रशिक्षित है बीएड टेट वाले वही इतनी बड़ी संख्या मैं पद भी रिक्त है और बेरोजगारों के पास 2016 मार्च तक का ही समय है और अधिकारी भी अंधे है न्यूज़ मैं आने के लिए बड़ी बड़ी बातें करते है और जमीन पर सब जीरो है और बोलते है प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूल बनाएंगे पब्लिक को मुर्ख बनाना छोड़ दो और बेरोजगारों के साथ अन्याय मत करो

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