‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’


Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • राष्ट्रपति ने किए शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश पर हस्ताक्षर
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की ‘शत्रु संपत्ति’ के मालिक राजा महमूदाबाद यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा देश के राष्ट्रपति द्वारा केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा पेश किये गये 47 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी शत्रु-संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 को पर हस्ताक्षर करने से हुआ है। इस संशोधन अध्यादेश के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों जिन्हें शत्रु संपत्ति कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे। नए अध्यादेश से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें हो सकती हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों की लागत वाले 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्तियों सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को 10 सितंबर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था।

जिन्ना के मित्र थे पूर्व राजा महमूदाबाद और प्यारे थे अमीर

नैनीताल। बताया जाता है कि आजादी से पूर्व अवध रियासत के सबसे बड़े जमींदार राजा महमूदाबाद मोहम्मद अली मोहम्मद खान पाकिस्तान के संस्थापक ‘कायदे आजम’ मोहम्मद अली जिन्ना के मित्र और मुस्लिम लीग के सदस्य थे। उन्हें अंग्रेजों ने ‘सर’ की उपाधि दी थी। 1962 में वह पाकिस्तान चले गए। ऐसे में सरकार ने उनकी करीब 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर कब्जे में ले लिया। लंदन में उनके निधन के बाद उनके पुत्र अमीर मोहम्मद खान ने अपनी संपत्ति को वापस लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। कहते हैं कि जिन्ना अमीर मोहम्मद को भी बेहद प्यार करते थे। 16 जुलाई 1984 को उन्होंने सिविल जज लखनऊ के न्यायालय में उत्तराधिकार का एक मुकदमा दायर किया। न्यायालय ने 8 जुलाई, 1986 को राजा महमूदाबाद को कुछ संपत्तियों का उत्तराधिकारी घोषित किया। इसी बीच राजा ने मुंबई में भी अपनी संपत्तियों पर कब्जा पाने के लिए याचिका दायर की, जिस पर मुंबई हाईकोर्ट ने 2002 में राजा के पक्ष में निर्णय दिया। इसी बीच यूपी की संपत्तियों के संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में राजा के पक्ष में फैसला दिया कि राजा की जो संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित की गई है, वह राजा मोहम्मद अमीर खान को सौंप दी जाए। इसके बाद राजा ने सभी संपत्तियों पर 2005 तक कब्जा ले लिया। इस पर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की और केंद्र सरकार ने 2010 में शत्रु संपत्ति पर कब्जा बरकरार रखने के लिए एक अध्यादेश जारी कर दिया, जिससे मामला फिर असमंजस में उलझ गया। पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने अध्यादेश को कानून में परिवर्तितत करने के लिए शत्रु-संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 को संसद से पारित कराने का फैसला किया। इससे शत्रु संपत्ति पर सरकारी कब्जा बरकरार रहता। उस समय मुस्लिम सांसदों तथा सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव आदि के विरोध के कारण विधेयक पारित नहीं हो पाया था।

राजा अमीर मोहम्मद की संपत्तियां

वर्तमान में राजा महमूदाबाद के वारिस राजा अमीर मोहम्मद खान के कब्जे में नैनीताल के करीब 10 हजार करोड़ रुपये मूल्य के मेट्रोपोल होटल व इससे लगी संपत्तियों के अलावा यूपी के लखनऊ में हलवासिया मार्केट, बटलर पैलेस, कपूर होटल, जहांगीराबाद मेंशन, इमामबाड़े के पीछे का हिस्सा, जामा मस्जिद के पास का इलाका सहित सीतापुर, बाराबंकी व लखीमपुर के अलावा दिल्ली में हजारों करोड़ की संपत्तियां हैं।

अब क्या होगा संपत्तियों का

ताजा अध्यादेश के अनुसार उनकी संपत्ति संबंधित जिले के डीएम के अधिकार में चली जायेंगी। अध्यादेश की एक धारा के अनुसार इन शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को भी मालिकाना हक मिल सकता है। अलबत्ता, केंद्र सरकार के इस अध्यादेश के बावजूद यह मामला आगे भी विवादों में रह सकता है, क्योंकि इस बाबत अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में वाद लंबित है तथा इस अध्यादेश के कानून बनने की राह में वर्ष 2010 की तरह अभी भी मुस्लिम सांसद एवं कई दल इस पर विरोध में आ सकते हैं और मामले में राजनीति गरमा सकते हैं।

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One thought on “‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’

  1. मै छत्तीसगढ़ के एक कस्बे से हु मै ये जानना चाहता हु की मेरे चाचा जी जो अभी पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके है लेकिन 1986 तक वो भारत में थे उनको यहाँ बटवारे में जो जमीन मिली है उनको वो बेच सकते है क्या जमीन उन्ही के नाम में है उनके नाम से रिकार्ड में भी दर्ज है नगरपालिका बिजलिबिल राशन कार्ड सब है वो अपने हक़ की जमीं अपने भाई या किसी को दान कर सकते है क्या और कैसे बेच सकते है इसका क्या उपाय है कृपया मुझे इसका समाधान बताए कौन से कानून के तहत इस जमीन की खरीदी बिक्री हो सकती है क्योकि इसका सौदा हो चूका है बयाना भी ले चुके है लेकिन पंजीयन नहीं हो रहा है मेरा मो. no. 08717960666 है

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