‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’


  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • 14 मार्च 2017  को संसद में ध्वनिमत से पारित हुआ 49 वर्ष पुराने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी विधेयक
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की शत्रु संपत्ति के मालिक ‘राजा महमूदाबाद’ यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा संसद में पास हुए विधेयक के बाद हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से 49 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। इस संशोधन विधेयक के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों (जिन्हें शत्रु संपत्ति) कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे।नए विधेयक से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें होनी तय हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों के 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्ति सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की सहित उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 10 सितम्बर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित देश की कुल 1519 में से करीब 936 संपत्तियां हैं। ताजा विधेयक के अनुसार उनकी संपत्तियां संबंधित जिले के डीएम के अधिकार में चली जाएंगी। विधेयक की एक धारा के अनुसार इन शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को मालिकाना हक मिलने की बात भी कही जा रही है। इसलिए काबिज लोगों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। अलबत्ता केंद्र सरकार के इस विधेयक के बावजूद यह मामला आगे भी विवादों में रह सकता है, क्योंकि आगे राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर होने और विधेयक के कानून बनने के बावजूद संबंधित पक्षों को सर्वोच्च न्यायालय जाने का समय दिया जा रहा है, तथा सर्वोच्च न्यायालय में पहले से भी कई वाद लंबित हैं।

जिन्ना के मित्र थे पूर्व राजा महमूदाबाद और प्यारे थे अमीर, मुहम्मद बिन तुगलक ने जागीर में दी थी संपत्ति

नैनीताल। बताया जाता है कि आजादी से पूर्व अवध रियासत के सबसे बड़े जमींदार राजा महमूदाबाद मोहम्मद अमीर अहमद खान पाकिस्तान के संस्थापक ‘कायदे आजम’ मोहम्मद अली जिन्ना के बेहद करीबी मित्र और मुस्लिम लीग के सक्रिय सदस्य थे। उन्हें अंग्रेजों ने भी ‘‘सर’ की उपाधि से नवाजा था। उन्हें बगदाद के खलीफा के मुख्य काजी, काजी नसरुल्लाह का वंशज माना जाता है, जो साल 1316 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शादिह-उद-दिन ओमर खिलजी के दरबार में बतौर राजदूत भारत आये थे। बाद में वह मुहम्मद तुगलक की सेना में कमांडर की तरह लड़े। जिसके एवज में उन्हें अवामें इनाम के तौर पर महमूदाबाद रियासत कही जाने वाली बड़ी जागीर दी गयी। 1957 में राजा मोहम्मद अमीर अहमद खान पाकिस्तान चले गये थे, ऐसे में सरकार ने उनकी करीब 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को ‘‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर कब्जे में ले लिया। 1973 लंदन में उनके निधन के बाद अपनी मां रानी कनीज आबिद के साथ भारत में ही रहे उनके पुत्र मोहम्मद अमीर मोहम्मद खान ने अपनी संपत्ति को वापस लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। 16 जुलाई 1984 को उन्होंने सिविल जज लखनऊ के न्यायालय में उत्तराधिकार का एक मुकदमा दायर किया। न्यायालय ने 8 जुलाई, 1986 को राजा महमूदाबाद को कुछ संपत्तियों का उत्तराधिकारी घोषित किया।इसी बीच राजा ने मुंबई में भी अपनी संपत्तियों पर कब्जा पाने के लिए याचिका दायर की, जिस पर मुंबई हाईकोर्ट ने 2002 में राजा के पक्ष में निर्णय दिया। इसी बीच यूपी के संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में राजा के पक्ष में फैसला दिया कि राजा की जो संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित की गई है, उसे राजा मोहम्मद अमीर खान को सौंप दी जाए। इसके बाद राजा ने सभी संपत्तियों पर 2005 तक कब्जा ले लिया। इस पर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की और केंद्र सरकार ने 2010 में शत्रु संपत्ति पर कब्जा बरकरार रखने के लिए एक अध्यादेश जारी कर दिया, जिससे मामला फिर उलझ गया। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने अध्यादेश को कानून में परिवर्तितत करने के लिए शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं पुनपरुष्टिकरण) विधेयक 2010 को संसद से पारित कराने का फैसला किया। इससे शत्रु संपत्ति पर सरकारी कब्जा बरकरार रहता। मुस्लिम सांसदों तथा सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव व भाजपा आदि के विरोध के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका था। इधर पिछले वर्ष जनवरी 2016 में केंद्र की एनडीए सरकार ने इस बाबत अध्यादेश भी जारी किया था, जिस पर अब विधेयक भी पारित हो गया था।

राजा अमीर मोहम्मद की संपत्तियां

वर्तमान में राजा महमूदाबाद के वारिस राजा अमीर मोहम्मद खान के कब्जे में नैनीताल के करीब 10 हजार करोड़ रुपये मूल्य के मेट्रोपोल होटल व इससे लगी संपत्तियों के अलावा यूपी के लखनऊ में हलवासिया मार्केट, बटलर पैलेस, कपूर होटल, जहांगीराबाद मेंशन, इमामबाड़े के पीछे का हिस्सा, जामा मस्जिद के पास का इलाका सहित सीतापुर, बाराबंकी व लखीमपुर के अलावा दिल्ली में हजारों करोड़ की संपत्तियां हैं। नैनीताल में 5.72 एकड़ में बना 40 कमरों का मेट्रोपोल होटल, 12 व 26 कमरों के अन्य आवास, छह सुइट तथा चार व सात कमरों के नवीनीकृत आवास तथा नाले से लगी भूमि पर 116 आवासीय भूमि सहित कुल 8.72 एकड़ भूमि है। इस संपत्ति को पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 30 दिसम्बर 2010 को कब्जेदारों से मुक्त कराकर राजा को सौंप दिया गया था तथा पांच अगस्त 2010 को शत्रु संपत्ति संबंधी कानून में हुए संशोधनों के बाद जिला प्रशासन ने अपने नियंतण्रमें ले लिया था।

नैनीताल के सनी बैंक में भी है एक और शत्रु संपत्ति

नैनीताल। मेट्रोपोल होटल के अलावा नैनीताल में राजभवन रोड पर अम्तुल्स पब्लिक स्कूल के पास सनी बैंक कहे जाने वाले क्षेत्र में एक और शत्रु संपत्ति है। काशना अहमद की यह संपत्ति करीब 716.81 वर्ग मीटर भूमि की है। इस पर कुछ लोग किराये पर काबिज हैं।

अब क्या होगा संपत्तियों का

ताजा विधेयक के अनुसार उनकी संपत्ति संबंधित जिले के डीएम के अधिकार में चली जायेंगी। अध्यादेश की एक धारा के अनुसार इन शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को भी मालिकाना हक मिल सकता है। अलबत्ता, केंद्र सरकार के इस अध्यादेश के बावजूद यह मामला आगे भी विवादों में रह सकता है, क्योंकि इस बाबत अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में वाद लंबित है तथा इस अध्यादेश के कानून बनने की राह में वर्ष 2010 की तरह अभी भी मुस्लिम सांसद एवं कई दल इस पर विरोध में आ सकते हैं और मामले में राजनीति गरमा सकते हैं।

Advertisements

One response to “‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’

  1. मै छत्तीसगढ़ के एक कस्बे से हु मै ये जानना चाहता हु की मेरे चाचा जी जो अभी पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके है लेकिन 1986 तक वो भारत में थे उनको यहाँ बटवारे में जो जमीन मिली है उनको वो बेच सकते है क्या जमीन उन्ही के नाम में है उनके नाम से रिकार्ड में भी दर्ज है नगरपालिका बिजलिबिल राशन कार्ड सब है वो अपने हक़ की जमीं अपने भाई या किसी को दान कर सकते है क्या और कैसे बेच सकते है इसका क्या उपाय है कृपया मुझे इसका समाधान बताए कौन से कानून के तहत इस जमीन की खरीदी बिक्री हो सकती है क्योकि इसका सौदा हो चूका है बयाना भी ले चुके है लेकिन पंजीयन नहीं हो रहा है मेरा मो. no. 08717960666 है

    Like

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s