नैनीताल नगरपालिका के हाथ से रिक्शे भी ‘जायेंगे’, तभी ई-रिक्शा आयेंगे


02NTL-1-पूर्व में शरदोत्सव का आयोजन, फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगी भी जा चुकी है हाथ से, होगा आर्थिक नुकसान
नवीन जोशी, नैनीताल। नगरवासियों, यहां आने वाले सैलानियों के लिये यह खबर अच्छी है कि नगर में मौजूदा तीन पहिया रिक्शों की जगह बैटरी से चलने वाले ईको-फ्रेंडली ई-रिक्शा चलेंगे। इनमें अपेक्षाकृत तेज गति से एक साथ दो की जगह चार से अधिक सवारियां एक से दूसरे स्थान पर पहुंच पायेंगे, वहीं कुछ हद तक यात्रियों को महंगी टैक्सियों की जगह सस्ता और प्रदूषण मुक्त यातायात का साधन भी उपलब्ध होगा। लेकिन देश की दूसरी प्राचीनतम नगर पालिका नैनीताल के लिये यह खबर इतनी अच्छी शायद न हो। उसके हाथ से रिक्शों का नियंत्रण, लाइसेंस, नियमों का पालन न करने पर चालान आदि करने का अधिकार चला जायेगा। यह खबर इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि यह सरकार के आय बढ़ाने की उलाहनाओं और 74वें संविधान संसोधन के जरिये पालिकाओं को अधिक स्वतंत्र व मजबूत बनाने के संकल्प के विपरीत होगा। साथ ही पूर्व में वन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत व पेयजल आदि विभागों और हालिया दौर में फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगियों व शरदोत्सव के आयोजन को खोने के बाद पालिका वर्तमान में नगर में चलने वाले 82 पंजीकृत रिक्शों के संचालन का अधिकार भी खो देगी।

Rashtriya Sahara 4th Feb 2015उल्लेखनीय है कि सोमवार को डीएम की अध्यक्षता वाली डीटीए यानी जिला परिवहन प्राधिकरण की बैठक में नगर में 56 ई-रिक्शा संचालित किये जाने, तथा इनके लाइसेंस नगर में संचालित 82 रिक्शों को संचालित करने वाले 112 रिक्शा मालिकों में दो को एक परमिट दिये जाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा तय हुआ कि नगरपालिका के पीछे स्थित पूर्व का घोड़ा स्टैंड, जिसे इधर कई बार तोड़ते व बनाते हुये वर्तमान में हाईकोर्ट के आदेशों पर पार्क का स्वरूप दिया गया है, ई-रिक्शा का पार्किंग स्थल होगा। ई-रिक्शा के टिकट का निर्धारण एसटीए द्वारा किया जायेगा, जबकि इसकी परमिट व लाइसेंस व्यवस्था निश्चित तौर पर इसके मोटर वाहन होने की वजह से आरटीओ के द्वारा की जायेगी। लिहाजा साफ है कि इनके संचालन में नगर पालिका का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

यह खाशियतें हैं ई-रिक्शा में

E Rickshawनैनीताल। नगर में प्रस्तावित लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के ई-रिक्शा के बारे में कंपनी के जोनल हेड सुनित अवस्थी ने बताया कि मोटर और कंट्रोलर को छोड़कर यह पूरी तरह भारत में एक प्रदेश के ही काशीपुर में स्थित फैक्ट्री में बना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया” का बेहतरीन नमूना भी बताया गया है। ई-रिक्शा की बैटरी करीब सात-आठ घंटे में सात-आठ यूनिट बिजली की खपत के साथ पूरी चार्ज होती है, यह चार सवारियों को लेकर अधिकतम 25 किमी प्रति घंटा की गति से अधिकतम करीब 90 किमी चलती है। बैटरी को करीब 20-25 फीसद शेष बचने पर दुबारा पूरा चार्ज करना होगा। इसमें मोटरसाइकिल के तीलियों युक्त पहिये लगे हैं और बैक गियर में चलने की सुविधा भी है। इसमें ब्रेक लगाने पर ऑटोमैटिक एक्सीलरेटर ऑफ हो जाता है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि जिस तरह रिक्शे वाले मदिरा पान करके भी रिक्शे चला लेते हैं, यदि इन्हें भी वैसे ही चलायेंगे तो दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ी रहेगी। यह अधिकतम चार डिग्री की ऊंचाई पर ही चढ़ने योग्य है।

यह आयेगा खर्चा

नैनीताल। लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के हल्द्वानी डीलर नैनी मोटर्स के भुवन पांडे के अनुसार आज प्रस्तुत किये गये ई-रिक्शा की कीमत 1.25 लाख है। इसके अलावा इसके तीन वर्ष के रोड परमिट पर 400 रुपये, पंजीकरण पर 2,930 रुपये एवं चार सवारियों के 25-25 हजार एवं चालक के एक लाख के बीमा की वार्षिक किस्त के रूप में 5,560 रुपये देने होंगे। इसके अलावा नगर पालिका कमर्शियल वाहन के रूप में माल रोड पर चलने के लिये लेक ब्रिज चुंगी पास निर्धारित 1,525 रुपये में बनायेगी। इसके अलावा पार्किंग शुल्क भी लिया जा सकता है।

शीघ्र 350 सीसी की ई-बाइक होगी लॉंच

नैनीताल। लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के जोनल हेड सुनित अवस्थी ने बताया कि कंपनी शीघ्र ही बुलेट के मुकाबला की 350 सीसी की ई-बाइक भी लॉंच करने जा रही है। छह माह के भीतर यह पर्यावरण मित्र ई-बाइक बाजार में होगी। वहीं कंपनी की स्कूटी की तरह के दो पहिया वाहन पहले से बाजार में हैं। यह भी एक बार में बैटरी चार्ज करने के बाद करीब 90 किमी चल सकते हैं। इन पर केंद्र सरकार 7,500 रुपये का अनुदान देती है, जिसके बाद यह 30 से 37 हजार रुपये में उपलब्ध है।

नगर में 1858 से रिक्शे चलने का इतिहास, पूर्व विधायक ने भी चलाये रिक्शे, रिक्शे वालों का चलता था अपना ‘सिक्का’

hath-rickshawनैनीताल। यूं रिक्शे देश में हर शहर में चलते हैं, किंतु नैनीताल के रिक्शों की बात ही अलग है। इसकी महत्ता इस तरह भी समझ सकते हैं कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने पिछले नैनीताल दौरे पर नाव से यहां आये थे और रिक्शे से लौटे थे। पाल नौकाओं की तरह रिक्शे भी कमोबेश नैनीताल की पहचान से जुड़े हैं। नैनीताल में माल रोड के पास से गुजरते हुये तल्ली से मल्लीताल के बीच रिक्शे पर बैठना दूरी तय करने की एक सवारी से इतर शान की सवारी माना जाता है। नैनीताल शायद इकलौता शहर भी हो जहां रिक्शों पर बैठने के लिये लोग घंटे भर भी लाइन में खड़े होकर टिकट लेने को उतावले रहते हैं। यहां के रिक्शों का इतिहास भी डेढ़ सदी पुराना है। यहां 1858 में हाथ के रिक्शे चलने प्रारंभ हुए। बाद में नगर के अल्का होटल के स्वामी स्व. बांके लाल साह को 1948 के बाद पहली बार नगर में तिपहिया रिक्शों की की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने छत व अच्छी गद्दी युक्त दो लग्जरी रिक्शे खरीदे थे, जिन्हें आज के संभ्रांत लोगों की कार चलाने वाले शोफरों की तरह काले ब्लेजर की वर्दी पहने चालक चलाते थे, और अंग्रेज ही इन रिक्शों में बैठ पाते थे। बाद में टायर पंक्चर जोड़ने जैसी सुविधा भी न होने की वजह से यह बंद हो गए, तथा आजादी के बाद मौजूदा तरह के सामान्य साइकिल रिक्शे चले। कहा जाता है कि शुरुआत में बाद में विधायक बने स्वर्गीय बिहारी लाल ने भी ऐसे रिक्शे चलाये थे। एक दौर में यहां रिक्शे वालों का अपना ‘सिक्का” भी चला करता है। जब रिक्शों का किराया आठ रुपये सवारी था, तब रिक्शे वालों ने दो रुपये का अपना सिक्का चला दिया था, जिसे वे 10 का नोट देने पर लौटाते थे, तथा अगली बार किराये में ले लेते थे। यह भी उल्लेखनीय है कि 1969 में तल्ली-मल्ली का किराया 25 पैंसे था, जो क्रमश: 30, 40 व 50 पैंसे के बाद एक, दो, तीन, चार, पांच, आठ होते हुये अब 10 रुपये है।

पालिकाध्यक्ष देखेंगे, विरोध के स्वर भी उठने शुरू

नैनीताल। इस बाबत पूछे जाने पर पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण ने कहा कि वह कल की बैठक का लिखित मसौदा आने पर ही कोई प्रतिक्रिया करेंगे। नगरवासियों के हित में ई-रिक्शा संचालन पर जरूरत पड़ेगी तो पालिका बोर्ड में प्रस्ताव भी लायेंगे। माना भी अब तक वसूले जाने वाले रिक्शों के लाइसेंस शुल्क, चालान आदि से प्राप्त होने वाली आय का नुकसान होगा। वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्य आंदोलनकारी राजीव लोचन साह ने कहा कि सरकार को 74वें संविधान संसोधन के लिये नगर पालिका को और अधिकार देकर उसके हाथ मजबूत करने चाहिये थे, लेकिन यहां लगातार छीना जा रहा है, जो चिंताजनक है। वहीं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने उम्मीद जगाई कि ई-रिक्शा से माल रोड पर संचालन के लिये नगर पालिका लेकब्रिज चुंगी वसूलेगी, जिससे उसे होने वाले आय के नुकसान की भरपाई हो जायेगी।

पालिका को प्रति वर्ष 67600 से अधिक का होगा आर्थिक नुक्सान

नगर पालिका को वर्तमान में 82 रिक्शों के लाइसेंस से प्रति वर्ष प्रति रिक्शे 1200 की दर से 98,400 रुपये प्राप्त होते हैं, जबकि अब लेक ब्रिज चुंगी से प्रति स्थानीय वाहन 550 की दर से केवल 30,800 रुपये ही मिलेंगे, यानी सीधे 67600 का नुक्सान होगा। वहीँ चालान-जुर्माने आदि का नुक्सान अलग से होगा। जनता ई-रिक्शा चालकों द्वारा की जाने वाली किसी मनमानी की शिकायत स्थानीय स्तर पर पालिका या किसी और से नहीं कर पायेगी।

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