नैनीताल एनआरएचएम में घोटाले की बू !


  • प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव को किया निर्देशित
  • नैनीताल डीएम के आदेश पर दिसंबर 2014 में संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर से की गयी प्रारंभिक जांच में 4.67 करोड़ रुपये के दुर्विनियोग एवं एक करोड़ रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाने का है रिपोर्ट में उल्लेख

नवीन जोशी, नैनीताल। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नैनीताल जनपद के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्य कार्यक्रम के बाबत संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर पर हुई एक जांच में उजागर हुए तथ्यों के आधार पर मिली एक शिकायत पर संज्ञान लिया है, और राज्य के मुख्य सचिव से इस मामले में आवेदक की शिकायत पर कार्रवाई करने एवं कृत कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराने एवं वेब पोर्टल पर भी जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश दिये हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार मिशन के तहत खातों में चार करोड़ 67 लाख 39 हजार 389 रुपये अधिक दिखाये गये हैं, तथा नौ लाख 53 हजार 563 रुपये से अधिक की शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने की बातें कही गयी हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में शिकायतकर्ता के वाहन भी चलते रहे हैं, तथा इसी सम्बन्ध में चेकों से छेड़छाड़ के आरोप में शिकायतकर्ता के घर की कुर्की हो चुकी है।

राष्ट्रीय सहारा 14 फरवरी 2016
राष्ट्रीय सहारा 14 फरवरी 2016

उल्लेखनीय है कि हालिया जनपद के निगलाट और मूलत: बागेश्वर जिले के ग्राम बघर निवासी कुंवर सिंह देव ने दिसंबर 2014 में डीएम नैनीताल के आदेश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट एसडीएम आशीष कुमार चौहान द्वारा नैनीताल जनपद के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्य कार्यक्रम की जांच रिपोर्ट में प्रकाश में आये तयों को प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रेषित करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इस जांच रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2011-12 में समस्त योजनाओं का कुल अंतिम अवशेष 2,30,88,877 रुपये, जबकि वर्ष 2012-13 का प्रारंभिक शेष रुपये 2,40,79,138 यानी 9,90,261 रुपये अधिक और इसी तरह 2012-13 का अंतिम अवशेष रुपये 4,96,35,497 जबकि वर्ष 2013-2014 का प्रारंभिक शेष रुपये 4,97,56,417 यानी 1,20,920 रुपये तथा दोनों को मिलाकर 11 लाख 11 हजार 181 रुपये अधिक दिखाया गया है। इस अतिरिक्त धनराशि का स्वास्य विभाग के खातों में कोई उल्लेख नहीं है। इसी तरह आरसीएच फ्लैक्सीपूल, एनआरएचएम एडीशनलिटीज व इम्युनाइजेशन योजनाओं में भी व्यय धनराशि एवं बैंकों में उपलब्ध धनराशि में 46 लाख 73 हजार 938 रुपये का अंतर जांच में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार अंतिम अवशेष चार करोड़ दो लाख 430 रुपये है, जबकि बैंक खातों में तीन करोड़ 55 लाख 26 हजार 492 रुपये ही जमा हैं। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2010-11 से वर्ष 2012-13 तक उपलब्ध कराये गये आंकड़ों में भी इन तीनों वर्षो में क्रमश: 41452467, 17773458 एवं 29660141 रुपये का अधिक व्यय दिखाया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय बाल स्वास्य कार्यक्रम के तहत किराये पर लिये गये वाहनों के परिचालन में 5,26,469 रुपये की अधिक धनराशि की शासकीय क्षति उद्घाटित हुई है। वाहनों के संचालन में रुपये 2,93,112 के औचित्य पर भी सवाल उठाये गये हैं, जिसमें शिकायतकर्ता के वाहन भी संचालित बताये गये हैं। साथ ही वाहनों के 27,313 किमी अनौचित्यपूर्ण तरीके से चलने और इस कारण 1,33,982.68 रुपये का अधिक भुगतान किये जाने की बात रिपोर्ट में कही गयी है। वाहन संचालक द्वारा वाहन उपलब्ध न कराने की दशा में अर्थदंड के रूप में 99,375 की वसूली न करके भी शासकीय क्षति किये जाने की बात रिपोर्ट में है। इसके अलावा रिपोर्ट में राष्ट्रीय बाल स्वास्य कार्यक्रम के तहत नियुक्त चिकित्सकों की टीमों द्वारा दायित्वों का निर्वहन न किये जाने की बात भी कही गयी है। चिकित्सकों के मोबाइल हेल्थ रजिस्टरों और वाहन ठेकेदारों की रिपोटरे व वाहन लॉग बुक में समानता नहीं है। कार्यक्रम में फार्मासिस्ट की नियुक्ति में कम्प्यूटर कार्य में कुशलता संबंधित निर्धारित पात्रता की तथा स्टाफ नर्स की नियुक्ति में नर्सेज एंड मिडवाइफ काउंसिल में पंजीकरण कराये बिना की किये जाने जैसी भी तमाम अनियमितताओं की बात कही गयी है। जांच रिपोर्ट में बिलों के भुगतान, सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां देने आदि में भी तमाम अनियमिततायें उजागर की गई हैं।

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