नैनीताल की लतिका ने 12वें दक्षिण एशियाई खेलों में जीता स्वर्ण पदक


शिलांग में दक्षिण एशियाई खेलों के पोडियम पर पदक के साथ राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी।
शिलांग में दक्षिण एशियाई खेलों के पोडियम पर पदक के साथ राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी।

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी ने 12वें दक्षिण एशियाई खेल 2016 में खेलते हुये देश 53 किग्रा भार वर्ग में पदक जीतकर शहर तथा देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है। शिलांग के निग्रिमस इंडोर स्टेडियम में 13 से 15 फरवरी तक आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता में लतिका ने अपने पंचों का दम दिखाते हुये स्वर्ण पदक को अपने नाम किया। सोमवार को खेले गये प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने नेपाल की नीमा गुरंग को 17-6 से हराकर सोने का पदक अपने नाम किया, जबकि इससे पूर्व सेमी फाइनल में उन्होंने भूटान की मेरीडोना को 17-3 के अंतर से पटखनी दी।

लतिका भंडारी
लतिका भंडारी

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लतिका मई 2014 में उज्बेकिस्तान में आयोजित हुई 21वीं एशियन ताइक्वांडो चैंपियनशिप में भी 53 किग्रा से अधिक के भार वर्ग में कांश्य पदक जीत चुकी हैं। वह मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी में भी ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेती रही हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके कोच सुनील थापा, उत्तराखंड राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव सीवीएस बिष्ट, नैनीताल जिला ताइक्वांडो संघ के संरक्षक दिग्विजय बिष्ट, उपाध्यक्ष हरीश नयाल, सचिव ललित आर्या तथा ताइक्वांडो से जुड़े दीपेंद्र थापा, कमलेश तिवारी, राजेंद्र मेहरा, चेतना आर्या, ज्योति दुर्गापाल, अमित बिष्ट व संदीप थापा आदि ने हर्ष जताते हुये उन्हें बधाइयां दी हैं।

उल्लेखनीय है की लतिका नैनीताल के राजमहल कम्पौंड निवासी असम रायफल्स में जेसीओ के रूप में कार्यरत महेंद्र अधिकारी और नीमा भंडारी की पुत्री हैं। यहाँ मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर से पढ़ी हैं। चार वर्ष की आयु से सुनील थापा से ताइक्वांडो सीखती रही हैं। वर्तमान में मध्य प्रदेश के बरकतुल्ला विश्व विद्यालय भोपाल के चाणक्य कॉलेज से पढ़ एवं मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी से ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके भाई पीयूष भी ताइक्वांडो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत चुके हैं।

उधर बागेश्वर जिले के गरुड़ के निकट उडल गाँव के निवासी गजेन्द्र सिंह परिहार ने भी इन्ही सैफ खेलों में 54-58 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीतकर कुमाऊँ और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

लतिका की पूरी ताइक्वांडो प्रोफाइल व उपलब्धियों के लिए यहाँ क्लिक करें।

ऊन से रंग-बिरंगे पक्षी बनाने में माहिर हैं दिनेश

नैनीताल। रंग-बिरंगे पक्षियों को हम सब रोज देखते हैं, लेकिन कभी सोचा है कि अगर ये नहीं रहेंगे तो हम उन्हें कैसे देख पायेंगे। नाटककार, कलाकार, कवि और लेखन सहित अनेक विधाओं में माहिर नगर के दिनेश उपाध्याय ने उत्तराखंड में पाये जाने वाले पक्षियों को संरक्षित करने का एक अलग तरह का माध्यम खोज निकाला है। दिनेश रंग-बिरंगे ऊन के धागों की मदद से रंग-बिरंगे पक्षियों को रचने का अनूठा हुनर रखते हैं। उनका मानना है कि यदि इस तरह प्रदेश में पाये जाने वाले सभी 650 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों के बुतों को विशेष संग्रहालय में रखकर संरक्षित किया जा सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां-बच्चे और यहां आने वाले सैलानी इन्हें देख सकें। यह एक अलग तरह का आकर्षण भी होगा।केएमवीएन में सहायक प्रबंधक दिनेश प्रदेश के जनकवि स्वर्गीय गिरीश तिवारी गिर्दा के साथ अनेक नाटकों में सहायक निर्देशक एवं नाटक लेखन के साथ ही अभिनय में भी सक्रिय रहे हैं तथा कविता लेखन के साथ होम्योपैथी सहित अनेक अन्य विधाओं में भी दखल रखते हैं। इधर वह पक्षियों को रंग-बिरंगे ऊन से बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं, तथा राज्य पक्षी मोनाल, निल्टावा, फ्लाई कैचर, मैगपाई व ग्रीन बैक्ड टिट सहित अनेक पक्षियों को इस तरह बना चुके हैं। इन्हें बनाने के लिए रुई, शादी के पुराने कार्ड आदि की फेवीबांड की मदद से लुगदी बनाकर उसे पक्षियों का स्वरूप दिया जाता है और बाहर से रंग-बिरंगे ऊन से उन्हें आकर्षक बना दिया जाता है। उनका कहना है कि बच्चों को यह विधा सिखाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने और आगे इन पक्षियों के लिए संग्रहालय स्थापित करने की जरूरत है।

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