21 जून ‘विश्व योग दिवस’ को आएगा ऐसा अनूठा पल, गायब हो जाएगी आपकी छाया !


21 June

नवीन जोशी, नैनीताल। यूं माना जाता है कि जब भी सूर्य किसी लंबवत वस्तु या खड़े मनुष्य के ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तो उस वस्तु या मनुष्य की छाया सैद्धांतिक तौर पर नहीं दिखाई देती। किंतु ऐसा होता नहीं है। सूर्य कभी भी पूरी तरह ठीक सिर के ऊपर लंबवत नहीं होते, वरन थोड़ा-बहुत इधर-उधर होते हैं, और इस कारण लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया भी थोड़ी-बहुत दिखाई देती है। लेकिन आगामी 21 जून को जब पूरी दुनिया भारत वर्ष के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुमोदन पर विश्व योग दिवस मना रही होगी, तब कर्क रेखा पर स्थित स्थानों पर ऐसा अनूठा पल आएगा, जबकि लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया स्वयं उनमें ही समाहित हो जाएगी और दिखाई नहीं देगी।

यूं यह ‘अयनंत’ कहा जाने वाला पल भारतीय समय के अनुसार 21 जून को सुबह चार बजकर चार मिनट पर आएगा, और भारत में नहीं दिखाई देगा, बावजूद बताया जा रहा है कि दिन में कर्क रेखा पर स्थित उज्जैन जैसे स्थानों पर इसका काफी हद तक अनुभव किया जा सकेगा। दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे खास पलों पर ऐसे अध्ययनों में जुटेंगे। स्थानीय एरीज के वैज्ञानिकों की भी इस पर नजर रहेगी।

धरती झुकने की वजह से हैं दिन-रात, रंग-बिरंगे मौसम

नैनीताल। कहते हैं कि फलों से लदे पेड़ या ज्ञानवान व्यक्ति में झुकने का गुण होता है, जबकि उथले ज्ञान युक्त या आधे जल से भरी गगरी छलकती जाती है। अनेकों गुणों, रस-रसायनों से भरी धरती भी झुकी हुई है, इसीलिए इतने अधिक गुणों व विभिन्नताओं युक्त है। एरीज के सौर वैज्ञानिक वहाब उद्दीन कहते हैं कि धरती अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, इसीलिए पृथ्वी पर बड़े-छोटे दिन रात होते हैं, और मौसम बदलते रहते हैं। यदि धरती इस तरह झुकी ना होती तो वर्ष भर दिन और रात बराबर होते, तथा उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को सबसे बड़ा दिन, 23 दिसंबर को सबसे छोटा दिन, 25 दिसंबर को दिन बढ़ना शुरू होने का ‘बड़ा दिन’ और 21 मार्च व 22 सितंबर को दिन व रात बराबर तथा दक्षिणी गोलार्ध में इसका ठीक उलटा न होता। वहीं मौसम न बदलते तो वर्ष भर एक सा मौसम होने से पृथ्वी पर जीवन नीरस होता। एरीज के ही वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे इसी विषय में आगे कहते हैं कि पृथ्वी झुकी ना होती तो अंटार्कटिक और आर्कटिक यानी दक्षिणी व उत्तरी ध्रुवों पर बर्फ की जगह संभवतया रेगिस्तान होता।

21 को प्रदेश में 14.6 घंटे लंबा होगा दिन

नैनीताल। कर्क रेखा के सापेक्ष अक्षांश-देशांतरों के दूरी अंतर के आधार पर 21 जून को अलग-अलग स्थानों पर दिन-रात की अवधि अलग-अलग होगी। वैज्ञानिकों के अनुसार 21 जून को दिल्ली में दिन 13.58 घंटे का तथा उत्तराखंड में कुमाऊं में 14.2 घंटे का व गढ़वाल में 14.6 घंटे का, श्रीनगर में 14.25 घंटे का व बेंगलुरु में दिन 12.54 घंटे का होगा।

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