रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !


रोहित शेखर

रोहित शेखर

-करीब एक वर्ष से राहुल-सोनिया को भी साधने के बावजूद कांग्रेस से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने से हैं नाखुश, कहा था-पिता के जन्म दीं के बाद होंगे ‘खुले पंछी’
-भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट व सांसद भगत सिंह कोश्यारी के हुई है बात, लालकुआ, भीमताल, किच्छा और काशीपुर सीटों से चुनाव लड़ने के दिए हैं विकल्प, समाजवादी पार्टी से भी हैं बेहतर संबंध
नवीन जोशी, नैनीताल। कभी प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति के शीर्ष पुरुष रहे यूपी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर पिता की 80 वर्ष से सेवित कांग्रेस पार्टी का ‘हाथ’ झटक सकते हैं। पहले से ही यूपी सरकार में ट्रांसपोर्ट सलाहकार के पद का ‘लुत्फ़’ ले रहे रोहित के लिए पिता एनडी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट व नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से सांसद भगत सिंह कोश्यारी के बात हो चुकी है। बताया गया है की भाजपा को लालकुआ, भीमताल, किच्छा और काशीपुर सीटों से चुनाव लड़ने के विकल्प दिए गए हैं। इन सीटों का एनडी पिछले दिनों खुद जायजा भी ले गए हैं। वहीँ समाजवादी पार्टी भी एनडी के पुराने दौर के करिश्मे की उम्मीद और ब्राह्मण चेहरे के साथ अब से पहले कभी न चढ़ पाई ‘साइकिल’ को उनके सहारे पहाड़ चढ़ाने की फिराक में है। रोहित ने भी साफ़ कह दिया है कि वे एक वर्ष के असफल इंतज़ार के बाद कांग्रेस से अब ‘भीख’ माँगने वाले नहीं हैं।

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राष्ट्रीय सहारा 4 नवंबर 2016

गौरतलब है की एनडी एक बार फिर, लगातार दूसरे वर्ष अपना जन्मदिन मनाने पत्नी उज्जवला शर्मा और जैविक पुत्र रोहित शेखर के साथ आगामी 18 अक्टूबर को हल्द्वानी आये। इससे पूर्व समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सचान ने हल्द्वानी में यह कहकर चर्चाओं को हवा दे दी थी कि यदि उनके पुत्र रोहित शेखर समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेते हैं तो पार्टी उन्हें कुमाऊं मंडल की किसी भी सीट से टिकट देने के लिये तैयार है। इस तरह चर्चा जोरों पर है कि सपा प्रदेश में ब्राह्मण चेहरे को आगे कर अपनी डूबती-उतराती चुनावी नैया को नए माझी के साथ प्रदेश की राजनीति में उतार सकती है। इस पर 37 वर्षीय रोहित शेखर ने लखनऊ से बात करते हुये कहा कि वह अपने पिता द्वारा 80 वर्ष से सेवित कांग्रेस को ही अपनी पार्टी और सोनिया गांधी को अपनी मां के समान मानते हैं। उन्होंने ही इस वर्ष 13 जनवरी को अपने पिता को बचपन के बाद युवा राहुल गांधी से पहली बार मिलाया। फरवरी माह में सोनिया गांधी से भी अपने पिता के साथ मुलाकात हुई। इसके बाद से वे कांग्रेस पार्टी से जुड़ने के प्रति आशान्वित थे। लेकिन अक्टूबर माह तक कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने से वह इधर बीच में हताशा महसूस करने लगे हैं। उन्हें लगता है कि कांग्रेस पार्टी में ‘स्थानीय व प्रदेश स्तर पर’ कुछ लोग हैं, जो नहीं चाहते कि वह यानी एनडी की राजनीतिक विरासत संभालने आ रहे पुत्र उनकी दुनिया में कदम भी रखें। आखिर में वह दो-टूक बोले-18 के बाद उनके सभी विकल्प खुले हैं। इस दिन के बाद कोई भी निर्णय लेने के लिये वे ‘खुले पंछी’ हैं। साथ ही समाजवादियों से अपनी नजदीकी को खुलकर स्वीकारते हुए उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह उत्तराखंड आंदोलन के दौर के मतभेदों के बावजूद आज पिता एनडी को बड़े भाई और गुरू के रूप में पूरा सम्मान दे रहे हैं, और अखिलेश भी रोहित को छोटे भाई के रूप में पिता एनडी की तरह ही पूरा अपनापन और प्यार देते हैं। वहीँ भाजपा नेताओं के एनडी से मिलने के बाद उन्होंने कहा-उनके पिता का जो भी पार्टी सम्मान करेगी, उसमें जाने से उन्हें कोई गुरेज नहीं है।

राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, 30 सितम्बर 2016, पेज-2

लेकिन फिर से उन्होंने स्वयं को अपने पिता के जन्म दिन तक के लिये संयत रखा है। 18 अक्टूबर को हल्द्वानी आकर देखेंगे कि उन कांग्रेस जनों, जो आज भी उनके पिता से बात करते रहते हैं, तथा कांग्रेस पार्टी उन्हें कैसा ‘रिस्पॉंस’ देते हैं। कहा कि वे आज भी किसी पार्टी में नहीं हैं। आगे चुनाव के लिये काफी कम समय शेष रहते उनके लिये इस दिन के बाद आगामी विस चुनावों के लिये कोई न कोई निर्णय लेने की मजबूरी होगी। कहा-वह कांग्रेस पार्टी से कोई ‘भिक्षा’ मांगने वाले नहीं हैं। वह तो अपने पिता की राजनीतिक विरासत के साथ कहीं भी जा सकते हैं, पर उनके जाने से किसे वास्तव में नुकसान होगा, बताना कठिन नहीं है। कहा कि वह लखनऊ-देहरादून रहते भी हर रोज पूरे उत्तराखंड प्रदेश की समस्याओं से अवगत रहते हैं।

कहना जल्दबाजी नहीं होगा की रोहित के किसी भी कदम से कांग्रेस की प्रदेश और खासकर हल्द्वानी और नैनीताल जिले की राजनीति पर कुछ तो असर जरूर पड़ सकता है। आपका क्या विचार है ? नीचे लिखें जरूर…..

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