सर्जिकल स्ट्राइक : जिसे सबूत चाहिए , यहाँ देखे


सर्जिकल स्ट्राइक : पक्के वैज्ञानिक http://tpc.googlesyndication.com/safeframe/1-0-5/html/container.html#xpc=sf-gdn-exp-1&p=http%3A//m.navbharattimes.indiatimes.comसबूत हैं, मगर देंगे नहीं !

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राष्ट्रीय सहारा 06 अक्टूबर 2016

-वैज्ञानिकों ने कहा भारत उपग्रह आधारित सुदूर संवेदी में विश्व में अग्रणी, मगर पाकिस्तान कहीं ठहरता नहीं, सामरिक दृष्टिकोण से सबूत देना हो सकता है आत्मघाती
नवीन जोशी, नैनीताल। बीती 29 मई को भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में किये गये ‘सर्जिकल स्ट्राइक” के बाद देश के चंद नेताओं द्वारा सबूत मांगने की स्थितियों के बीच वैज्ञानिक पूरी तरह सेना की कार्रवाई के साथ ही सेना व सरकार के पास कार्रवाई के पक्के वैज्ञानिक सबूत होने के प्रति भी मुतमईन हैं। बहुत संभावना है कि यह सबूत मानव द्वारा की गई फोटोग्राफी या वीडियो ग्राफी से इतर उपग्रह आधारित पृथ्वी पर निगरानी रखने वाले उपकरणों आधारित सुदूर संवेदी यानी रिमोट सेंसिंग के भी हो सकते हैं, जिसमें भारत विश्व में अग्रणी है। भारत अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अपने उपग्रहों से एक फिट तक के रिजोल्यूशन के फोटो और वीडियो खींचने में सक्षम हैं। अलबत्ता, यह सबूत किसी भी कीमत पर, नेताओं के कैसे भी आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद सार्वजनिक नहीं किये जा सकते हैं, क्योंकि इनसे देश की सामरिक रणनीति आदि बेपर्दा हो सकती है, और यह देश की सुरक्षा के लिये आत्मघाती हो सकता है।

देश में चल रही सर्जिकल स्ट्राइक के सबूतों की बहस के बीच जहाँ सेना ने सरकार को 90 मिनट का विडियो सौंपने और एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विडियो को पेश न करने तथा दूसरी ओर अगले सप्ताह देश के चुनिन्दा नेताओं को यह विडियो दिखने की खबरें आ रहीं है, वहीँ इस बारे में स्थानीय आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक बिना किसी ‘किंतु-परंतु’ के एकमत हैं कि सेना ने 29 सितंबर की रात्रि पीओके में घुसकर आतंकियों के लांच पैड्स को ध्वस्त कर आतंकियों से मुंबई, संसद, पठानकोट एवं उड़ी सहित आतंकी घटनाओं की लंबी फेहरिस्त का एकमुस्त जोरदार बदला लिया है। सरकार और सेना के पास सर्जिकल स्ट्राइक के पुख्ता वैज्ञानिक सबूत मौजूद भी हैं, लेकिन सरकार को किसी भी सूरत में इन्हें सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार देश का उपग्रह आधारित नक्शों के माड्यूल ‘भुवन’ का रेजोल्यूशन ‘गूगल अर्थ’ से भी बेहतर है। इससे पृथ्वी पर किसी सैन्य अधिकारी के कन्धों के फीतों पर लगे रैंक तक देखे जा सकते हैं। करीब 35 मीटर प्रति सेकेंड की गति से चलने के बावजूद ये पृथ्वी के बहुत अच्छे रेजोल्यूशन के वीडियो भी ले सकते हैं। दुनिया का अग्रणी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो पहले ही पृथ्वी पर कृषि, जल संसाधन, नगरीय नियोजन, ग्रामीण विकास, खनिजों की खोज, पर्यावरण, वन विज्ञान, सामुद्रिकी एवं आपदा प्रबंधन आदि के मद्देनजर निगरानी रखने की श्रेणी में रिसोर्ससेट-1 व 2, कार्टोसेट-1, 2, 2ए व 2बी, रिसेट-1 व 2, ओसिएनसेट-2, मेघा-ट्रॉपिक्यूस एवं सरल आदि हैं। वहीं इधर संयोग कहें कि कुछ और, 18 सितंबर को उड़ी में हुए भयावह आतंकी हमले से ठीक 10 दिन पूर्व ही आठ सितंबर को भारत ने इस दिशा में एक बहुत ऊंची उड़ान भरते हुये इनसेट-३डीआर नाम का उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था, जो कि मूलत: पृथ्वी के वातावरण की धुंध आदि के प्रभावों से अप्रभावित रह कर फोटो-वीडियो खींचने की सुविधा युक्त मौसमी उपग्रह है, लेकिन इसके आतंकियों पर नजर रखने की क्षमता से वैज्ञानिक इंकार नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा भी भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक से केवल तीन दिन पूर्व स्कैटसेट-1 नाम का उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजा है, जोकि चक्रवातों संबंधी मौसमी भविष्यवाणियां करने के साथ ही किसी लक्ष्य की ‘ट्रेकिंग” करने वाला देश का पहला मिनियेचर सेटेलाइट है। एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक ब्रजेश कुमार ने कहा कि रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के मामले में जहां भारत विश्व में अग्रणी है, वहीं पाकिस्तान उसके समक्ष कहीं भी नहीं ठहरता है। इसलिये कहा जा सकता है कि देश की सेना के साथ ही इसरो के पास भी सर्जिकल स्ट्राइक के पुख्ता सबूत उपलब्ध हैं। बावजूद वैज्ञानिकों का मानना है, कि देश की सुरक्षा के लिये इन सबूतों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। अमेरिका ने भी पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ किये गये ऐसे ही सर्जिकल हमले के बाद भी कोई सबूत दुनिया को नहीं दिखाये थे।

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surgical strikes, surgical strike proof, surgical strike eyewitness, surgical strikes truth, indian army, surgical strike proved, india-pakistan, line of control, pakistan occupied kashmir, surgical strike proved, surgical strike video, surgical strike photoसर्जिकल स्ट्राइक पर जारी सियासत और उसे लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने बड़ा खुलासा किया है। अखबार में छपी रिपोर्ट में नियंत्रण रेखा के पार रहने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने पिछले सप्ताह आतंकवादी कैंपों पर हुई भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक का आंखों देखा हाल बताया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने विस्तार से बताया है कि किस तरह सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों के शव को 29 सितंबर की अल सुबह, ट्रकों में बी कर ले जाया गया। चश्मदीदों के मुताबिक कम वक्त में हुई सेना की ताबड़तोड़ फायरिंग में आतंकवादी कैंप नेस्तेनाबूद हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रहा पाकिस्तान फिर बेनकाब हो गया है। खास बात यह है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान निशाना बनाई गईं कुछ ऐसी जगहों के बारे में भी बताया है जिन्हें भारत और पाकिस्तान सरकार की ओर से

सुरेंद्र सिंह, नई दिल्ली
दुश्मन पर आसमान से सटीक हमले करने के लिए मशहूर भारतीय सेना की विशिष्ट सैन्य टुकड़ी ‘पैराशूट रेजिमेंट’ की बहादुरी की अनगिनत कहानियों में अब एक और पन्ना जुड़ गया है। दरअसल, बीते साल 29 सितंबर को लाइन ऑफ कंट्रोल के दूसरी ओर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को तबाह करने गई टीम में इस रेजिमेंट के जवान भी शामिल हैं। पैरा कमांडोज और पैराट्रूपर्स से लैस इस टीम को इस साल 26 जनवरी को सम्मानित किया गया। कई अफसरों को मेडल्स से नवाजा गया है।
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इस ऑपरेशन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने में बहुत सारे लोगों का हाथ है। हालांकि, फील्ड में जाकर दुश्मनों पर मौत बनकर बरसे इन कमांडोज को मेडल्स क्यों मिले, यह बताने के लिए सरकार ने इस ऑपरेशन के डिटेल्स शेयर किए हैं । इससे जुड़े दस्तावेज द टाइम्स ऑफ इंडिया के पास हैं। दस्तावेज से पता चलता है कि सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने में 19 पैरा कमांडोज का अभिन्न योगदान है। डॉक्युमेंट्स में इस ऑपरेशन को फील्ड में अंजाम देने की पूरी कहानी दर्ज है। इसके मुताबिक, पैरा रेजिमेंट के 4th और 9th बटैलियन के एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सूबेदार, दो नायब सूबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैराट्रूपर्स ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।

4th पैरा के अफसर मेजर रोहित सूरी को कीर्ति चक्र और कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हरप्रीत संधू को युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया है। इस टीम को चार शौर्य चक्र और 13 सेवा मेडल भी दिए गए हैं। कर्नल हरप्रीत संधू को लॉन्च पैड्स पर दो लगातार हमले करने का काम सौंपा गया था। हमले की योजना बनाने और उसके सफल क्रियान्यवन के लिए ही उन्हें युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया है।

जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर स्थित टेरर लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की योजना बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि, मिशन को अंजाम देने के लिए अमावस्या की रात का इंतजार किया गया।
आखिरकार वह घड़ी आ ही गई। 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात को मेजर रोहित सूरी की अगुआई में आठ कमांडोज की एक टीम आतंकियों को सबक सिखाने के लिए रवाना हुई।

मेजर सूरी की टीम ने पहले इलाके की रेकी की। सूरी ने टीम को आदेश दिया कि वे आतंकियों को उनके एक लॉन्चपैड पर खुले इलाके में चुनौती दें। सूरी और उनके साथी टार्गेट के 50 मीटर के दायरे के अंदर तक पहुंच गए और वहां दो आतंकियों को ढेर कर दिया। इनको ठिकाने लगाते ही मेजर सूरी ने पास के जंगलों में हलचल देखी। यहां दो संदिग्ध जिहादी मौजूद थे। उनके मूवमेंट पर एक यूएवी के जरिए भी नजर रखी जा रही थी। सूरी ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए दोनों आतंकियों को नजदीक से चुनौती दी और उन्हें भी ढेर कर दिया।

एक अन्य मेजर को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि इन लॉन्चपैड्स पर नजदीक से नजर रखे। यह अफसर अपनी टीम के साथ हमले के 48 घंटे पहले ही एलओसी पार कर गया। इसके बाद से हमले तक इस टीम ने टार्गेट पर होने वाले हर मूवमेंट पर नजर रखी। उनकी टीम ने इलाके का नक्शा तैयार किया। दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियारों की तैनाती की जगह का पता लगाया। उन जगहों की भी जानकारी जुटाई, जहां से हमारे जवान मिशन के दौरान सुरक्षित रहकर दुश्मन पर फायरिंग कर सकें।

इस अफसर ने एक हथियार घर को तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए। हमले के दौरान यह अफसर और उनकी टीम नजदीक स्थित एक अन्य हथियार घर से हो रही फायरिंग की जद में आ गए। अपनी टीम पर मंडरा रहे खतरे को भांपते हुए इस मेजर ने बड़ा साहसिक कदम उठाया। वह अकेले ही रेंगते हुए इस हथियार घर तक पहुंचा और फायरिंग कर रहे उस आतंकी को भी खत्म कर दिया। इस अफसर को शौर्य चक्र से नवाजा गया है।

तीसरा मेजर अपने साथी के साथ एक आतंकी शेल्टर के नजदीक पहुंचा और उसे तबाह कर दिया। इस वजह से वहां सो रहे सभी जिहादी मारे गए। इसके बाद, उसने हमला करने वाली दूसरी टीमों के सदस्यों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। यह अफसर ऑपरेशन के दौरान आला अधिकारियों को ताजा घटनाक्रम के बारे में लगातार अपडेट देता रहा। इस मेजर को भी शौर्य चक्र मिला है।चौथे मेजर को सेना मेडल मिला है। उसने दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियार से लैस एक ठिकाने को बेहद नजदीक से एक ग्रेनेड हमले में तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए।

यह सर्जिकल स्ट्राइक इतना आसान ऑपरेशन भी नहीं था। हमला करने वाली एक टीम आतंकियों की जोरदार गोलाबारी में घिर गई। पांचवें मेजर ने तीन आतंकियों को रॉकेट लॉन्चर्स के साथ देखा। ये आतंकी चौथे मेजर की अगुआई में ऑपरेशन को अंजाम दे रही टीम को निशाना बनाने वाले थे। हालांकि, इससे पहले कि ये आतंकी कुछ कर पाते, पांचवें मेजर ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए इन आतंकियों पर हमला बोल दिया। दो को उसने ढेर कर दिया, जबकि तीसरे आतंकी को उसके साथी ने मार गिराया।

इस मिशन में न केवल अफसरों, बल्कि जूनियर अफसरों और पैराट्रूपर्स ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। शौर्य चक्र से सम्मानित एक नायब सूबेदार ने आतंकियों के एक ठिकाने को ग्रेनेड बरसाकर तबाह कर डाला। इसमें दो आतंकी मारे गए। जब उसने एक आतंकी को अपनी टीम पर फायरिंग करते देखा तो उसने अपने साथी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद उसने आतंकी पर हमला बोल दिया और उसे ठिकाने लगा दिया।

इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी भारतीय जवान को अपनी शहादत नहीं देनी पड़ी। हालांकि, निगरानी करने वाली टीम का एक पैराट्रूपर ऑपरेशन के दौरान घायल हो गया। उसने देखा कि दो आतंकी हमला करने वाली एक टीम की ओर बढ़ रहे हैं। पैराट्रूपर ने उनका पीछा किया, लेकिन गलती से उसका पांव एक माइन पर पड़ गया। इस धमाके में उसका दायां पंजा उड़ गया। अपनी चोटों की परवाह न करते हुए इस पैराट्रूपर ने आतंकियों से मोर्चा लिया और उनमें से एक को ढेर कर दिया।

(कुछ सैनिकों के नाम उनकी पहचान छिपाने के मकसद से नहीं छापे गए हैं।)

 

सोशल मीडिया पर यह मामला :

  • USA ने वीडियो नही माँगा, चीन ने वीडियो नहीं माँगा, हाफिज सईद ने भी वीडियो नही माँगा, और न ही UN ने माँगा, पर देश के कुछ लोगों (पता नहीं इन्हें देश का कहना भी उचित होगा या नहीं) को चाहिये, ये तभी यकीन करेंगे…!!!! बेहतर हो सेना जब अगली बार ऐसा कोई आपरेशन करने जाये, इन्हें अपने आगे ले जाये। तब शायद ये पाकिस्तान को दिखाने के लिए कुछ रोमांचक दृश्य (जिन्दा बचे तो) ला पाएं…!!
  • पाकिस्तान के पीएम की जो सुबूत मांगने की हिम्मत नहीं पड़ी, अरविन्द केजरीवाल मांग रहे हैं, ये कैसे ‘हमारी तरफ’ हैं ‘आप सर जी’…????
  • कसाब को फासी दी थी या चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया था जबाब दे काग्रेंस हम तभी मानेंगे जब काग्रेंस कसाब का वीडियो दिखाएगी वर्ना हमे तो काग्रेंस कार्यकाल पर शक है…!!!! : केजरीवाल, संजय निरुपम
  • भारत द्वारा किये गए सर्जिकल अटैक के बाद से पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए गोलाबारी कर रहा है, और अपने देश में भी कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं।
  • पाकिस्तान का हाफिज सईद मान रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है, पर भारत के हाफिज सईद नहीँ मान रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है।
  • आरोप लगाने वालों का कहना है- सरकार सर्जिकल अटैक का प्रचार कर रही है, इसलिए जवाब भी देना होगा. मैंने तो सिर्फ रक्षा मंत्री को 2 दिन बाद कहते सुना कि पाकिस्तान सर्जरी के बाद बेहोशी की स्थिति में है. जबकि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों ने तो शेखी बघारना दूर आज तक इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोला… फिर क्यों है पेट में दर्द ?
  • यहाँ भी ये गन्दी राजनीति से बाज़ नहीं आयेंगे।इनको यहाँ भी वोट चाहिये, ख़ैर ग़लती इनकी नही है इनको यहाँ तक पहुँचाने वाले भी हम लोग ही है,इनको ऐसा सबक़ सिखाना चाहिये की इनको पता लगे की हमने क्या कह दिया।
  • चीते की चाल, बाज़ की नज़र, और सेना की बहादुरी पर कभी संदेह नहीं करते👏😄👍
  • …और जिसको भी सेना की बहादुरी पर संदेह है मुझे भी उस पर संदेह है उसकी DNA testing होनी चाहिये।
  • एक सर्जिकल स्ट्राइक उन माओवादियों पर भी बनता है… जो हाफिज सईद और नवाज शरीफ पर तो भरोसा करते हैं…. लेकिन अपने देश की सेना पर नहीं….
  • क्यों भाई ओसामा बिन लादेन की लाश किसी ने देखी है क्या? हम कैसे मान लें कि मर गया? कहाँ दफनाया, बताओ? सबको बताओ….

….हालांकि अखबार की तरफ से यह भी कहा गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 38-50 से कम हो सकती है, जैसा कि कई सूत्र दावा कर रहे थे। अखबार ने बताया है कि उसने नियंत्रण रेखा के पार रह रहे पांच प्रत्यक्षदर्शियों से भारत में रह रहे उनके परिजनों के जरिए संपर्क किया। इनमें से दो चश्मदीदों ने विस्तृत जानकारी दी। उनके मुताबिक नियंत्रण रेखा से 4 किलोमीटर दूर दुधनियाल नाम से छोटे से गांव में अल-हावी ब्रिज के पास उन्होंने हमले में बर्बाद हुई एक बिल्डिंग को देखा। अल-हावी ब्रिज के पास एक मिलिटरी पोस्ट और लश्कर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला एक कंपाउंड है। वहां के स्थानीय लोगों ने बताया कि अल-हावी ब्रिज के पास उन्होंने उस रात तेज धमाके की आवाजें सुनीं, ये आवाजें शायद 84 मिमी कार्ल गुस्तव रायफल की थीं। साथ ही कुछ छोटे हथियारों से फायर किए जाने की भी काफी आवाजें आ रही थीं। लोग यह देखने के लिए बाहर नहीं आए कि क्या हो रहा है इसलिए किसी ने भारतीय सैनिकों को तो नहीं देखा पर अगले दिन लश्कर से जुड़े लोगों ने बताया कि उन पर हमला हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अगली सुबह पांच या शायद छह शवों को ट्रक के जरिए संभवत: पास ही चलहाना में मौजूद लश्कर के कैंप में ले जाया गया। भारतीय सेना ने मारे गए आतंकवादियों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक दावा नहीं किया है पर डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया था कि काफी संख्या में आतंकवादी और उन्हें सपोर्ट देने वाले लोग सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए हैं।

आप को इस विषय में क्या लगता है, जरूर टिपण्णी के रूप में अपने विचार दें…

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