मोदी राज में कमाल-शीर्ष पदों पर उत्तराखंड के लाल


डा. मुरली मनोहर जोशी हो सकते हैं भारत के अगले राष्ट्रपति !

पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, फिर सेनाध्यक्ष, फिर रॉ प्रमुख और फिर डीजीएमओ के बाद अब देश के राष्ट्रपति पद की दौड़ में एक और उत्तराखंडी सबसे आगे है। वे हैं भारतीय जनता पार्टी में कभी ‘भारत मां की तीन धरोहर, अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर’ कहे जाने वाले और सार्वजनिक जीवन में अपनी बेदाग छवि, बौद्धिकता और संघनिष्ठ वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी। विदित हो की भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। केंद्र में भाजपा पूरे बहुमत के साथ सत्तासीन है। ऐसे में तय है कि देश के अगले राष्ट्राध्यक्ष भाजपा की ही पसंद के होंगे। बताया गया है कि जोशी भाजपा के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भी पहली पसंद हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा नेतृत्व को अवगत करा दिया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भारतीय गणराज्य का नया राष्ट्रपति देखना चाहता है।

गौरतलब है कि जुलाई माह में देश को नया राष्ट्रपति मिलना तय है। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। हालांकि लंबे अर्से से चर्चा चल रही थी कि मुखर्जी एक कार्यकाल और चाहते हैं। एनडीए की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उनकी नरमी इस चर्चा को बल देती नजर आ रही थी। किंतु अब स्पष्ट हो चला है कि प्रणव दा दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनने जा रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें उनकी मनपसंद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का आवास रहा राजाजी मार्ग स्थित आवास नंबर 10 आवंटित कर दिया है। वर्तमान में केंद्रीय संस्कूति राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा को यह आवास आवंटित है। बताया गया है कि लुटियंस दिल्ली के गलियारों से लेकर नागपुर में संघ मुख्यालय तक इन दिनों नए राष्ट्रपति को लेकर जबरदस्त कयासबाजियों का दौर चालू है। आजादी के बाद पहली बार ऐसी संभावना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नीति और सिद्धांत को मानने वाले और उत्तराखंड निवासी व्यक्ति भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति बन सकते हैं।

उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना

 

-देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं

-अब चाहें तो ये अधिकारी स्थानीय लोकभाषाओं में भी ‘कोडवर्ड’ की तरह बात करके दुश्मन को दाल सकते हैं मुश्किल में 

नवीन जोशी, नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये हमेशा से अपना सर्वाेच्च बलिदान देने के लिये प्रसिद्ध ‘देश के मस्तक’ कहे जाने वाले छोटे से राज्य उत्तराखंड के लोग हालाँकि हमेशा से अनेक क्षेत्रों में शीर्ष पदों पर रहते रहे हैं, किन्तु इधर उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व से ‘सर ऊंचा’ और ‘सीना चौड़ा’ होने के अनेक कारण एक साथ आ गए हैं। उत्तराखंड के तीन सपूतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एकमुश्त देश के तीन सर्वाेच्च पदों के जरिये देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोंपी गयी है। देश के ‘जेम्स बांड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद अब लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना ‘टीम मोदी’ में भारतीय सेना के शीर्ष पदों पर नियुक्त किये गये हैं। इससे उत्तराखंड में हर्ष होना स्वाभाविक ही है।
लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को उनसे दो वरिष्ठ अधिकारियों पर वरीयता देते हुए देश का थल सेना प्रमुख बनाने की घोषणा हुई है। वे आगामी 31 दिसंबर को दोपहर बाद इस पद को ग्रहण करेंगे। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकास खंड के ग्राम सैणा निवासी लेफ्टिनेंट जनरल रावत को आईएमए देहरादून से ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ सम्मान मिला था। उल्लेखनीय है कि उन्होंने यह पद अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत से ‘दो कदम आगे’ बढ़ते हुए प्राप्त किया है, जो भारतीय सेना से उप थल सेनाध्यक्ष के पद से रिटायर हुए थे। यह संयोग ही है कि उनसे पूर्व उन्हीं के नाम के लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन चंद्र जोशी को ही उत्तराखंड से भारतीय थल सेना अध्यक्ष पद तक पहुंचने का गौरव हासिल हुआ था। इनके अलावा उत्तराखंड के एडमिरल डीके जोशी देश के नौ सेना प्रमुख बने थे।

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वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की तरह ही एक और ‘बांड’ कहे जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन पद पर नियुक्ति दी गई है। मेजर जनरल के रूप में अति विशिष्ट सेवा मैडल प्राप्त, उत्तराखंड के टिहरी जिले के कीर्तिनगर विकास खंड के ग्राम खतवाड़ निवासी भट्ट की पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा पांच जगहों पर सर्जिकल स्ट्राइक यानी लक्षित हमले किये जाने में उल्लेखनीय भूमिका रही है। वर्तमान में उनका परिवार मसूरी में रहता है। उनके पिता सत्यप्रसाद भट्ट ने भी फौज में रह देश की सेवा की है।

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इनके अलावा केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड के एक और लाल अनिल धस्माना को रॉ यानी रिसर्च एंड एनैलिसिस विंग के प्रमुख की जिम्मेदारी सोंपी है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के निकट तोली गांव निवासी धस्माना अब तक रॉ में नंबर दो की हैसियत रखते हैं, और उन्हें बलूचिस्तान और आतंकवाद निरोधी अभियानों का लंबा अनुभव है। अपने गांव से पढ़ाई करने वाले मध्य प्रदेश कैडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी धस्माना की पहचान भी एक ‘बांड’ के रूप में रही है। वे अजीत डोभाल के करीबी व विश्वासपात्र भी हैं। माना जा रहा है कि अब इन दोनों की जुगलबंदी फिर कोई नया गुल खिला सकती है। उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तानाक के साथ ही लंदन सार्क में काम करने का भी लंबा अनुभव है। बताया जाता है कि अपनी पहली नियुक्ति में ही एक दबंग एसपी के रूप में उन्होंने माफिया राज के लिये लिये कुख्यात मध्य प्रदेश के इंदौर की बंबई बजार में, जहां पुलिस घुस भी नहीं पाती थी, केवल 20 मिनट की कार्रवाई कर पुलिस का इकबाल बुलंद किया था, और बंबई बाजार को एक ‘पिकनिक स्पॉट’ में तब्दील कर दिया।
इस बारे में करगिल युद्ध के दौरान डिप्टी डीजीएमओ व भारतीय सेना के प्रवक्ता रहे लेफ्टिनेंट जनरल मोहन सिंह भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड के इन तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पर पहुंचने से उत्तराखंड का मान बढ़ा है, साथ ही हर उत्तराखंडी का सिर गर्व से ऊंचा और सीना चौड़ा हो गया है। इससे साबित हो गया है कि उत्तराखंड देश का मस्तक और मस्तिष्क है। 13 लाख सैनिकों वाली विश्व की सबसे बड़ी भारतीय सेना के बल पर ही देश सुरक्षित है, और उत्तराखंड के वीरों के हाथों में देश की सेना के शीर्ष पद आ रहे हैं, इससे हम कह सकते हैं कि देश की सीमाएं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित हाथों में हैं।

अब रक्षा मंत्रालय के वार रूम (गोपनीय कक्ष जहां योजना बनती है) मे high level meetings काल्पनिक तौर पर गढवाली मे ऐसे हो सकती हैं :

डीजीएमओ भट्ट : भैजी ब्याली उ कमिना नवाज शरीफ’न 25 आदिम भेजया छया बोडर पर, आतंकवाद फैलाण का वास्ता।

एनएसए डोभाल  : यार भुला तू भी न, चुप किलै रै तू ये तरफा बे गोली बारूद चलाण छा तुमून पिछनै बे लात्ती की यन चोट मान्न छै कि वैकु बुबा याद रखदु।

रॉ के प्रमुख धस्माना : अरे भैजी हमारू आदिम बताणू छ कराचि बटिन, कि यों सुंगरूं कु बडू ट्रैनिग सैंटर खोलयू च बोडर पार, बडू हमला कन चाणा च मिल्यौम्यरा खूब जासूस लगाया छन वख, मुशर्रफ का  मामाक्वोट मा भी 9 आदिम भेज्यां छन म्येरा ।

थल सेनाध्यक्ष जनरल रावत : भैजि अब मि भि ऐ ग्यौं, कारगिल अर 71 मा यन भंजोड्या छया मिन इ पाकिस्तानी कि यों ते अपड़ु बुबा याद एगि छो…

एनएसए डोभाल : अर सुण भुला रावत, पाकिस्तान मा एक बटैलियन गढवाल रैफल का खुफिया जवान भेजी कि वख नरसिंग भैरों भी थोपी द्येण, पूरी पाकिस्तान फौज पर छौल लगे द्यौण । अर ऊं जु दाणी दाणी 3 -3 फुट का चीनी छन ऊं का भी घुण्डा फोड़ द्येण अबेरी दौं हमून।

रक्षा मंत्री परिकर जी : ??? 🤔

प्रधानमंत्री मोदी जी : 😯 खंडूरी जी, आ सू बोले छे ??

भारत की रक्षा समिति के अध्यक्ष खंडूरी जी : भुला इन च, तुम लोग अपडू काम करा, मौक़ा मिल्यू च देश सेवा करा, अर भुला विपिन जादा सोचण नी, सिदा टमकै द्येण जखिमु दिख्यंदा ई कुकूरा ग बच्चा। मोदी – परिकर तैं मि समझै ल्येलू।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव खुल्बे, भारतीय कोस्टगार्ड के डीजी राजेंद्र और एयरक्राफ्ट के डीजी भी उत्तराखंड के

नैनीताल। छोटे से राज्य उत्तराखंड के लिये यह भी गर्व की बात है कि तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पदों पर सुशोभित होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं। वहीँ उत्तराखंड के एक ‘कुलदीप’, उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के सुल्तानपुर पट्टी के करीब ग्राम पिपलिया निवासी एयर मार्शल कुलदीप शर्मा अपने नाम के अनुरूप अपने परिवार और देश-प्रदेश के कुलदीपक साबित हुए हैं। उन्हें दो जनवरी 2017 को भारतीय वायुसेना में एयरक्राफ्ट का डायरेक्टर जनरल बनाया गया है। सुल्तानपुर पट्टी के राइंका से हाइस्कूल, काशीपुर के उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज से इंटर और पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक कर 1981 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले कुलदीप को विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है।

अल्मोड़ा के केसी पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजीअल्मोड़ा के खज़ान पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजी

भारतीय समुद्री सीमाओं की कमान देवभूमि उत्तराखंड के जांबाजों के हाथ में है। अल्मोड़ा निवासी खज़ान चन्द्र पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। पिछले वर्ष देहरादून जिले के चकराता निवासी राजेंद्र सिंह भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के महानिदेशक (डीजी) बने थे। राजेंद्र सिंह के डीजी बनने के बाद पिथौरागढ़ निवासी डीआइजी सुरेंद्र सिंह डसीला को देश के सबसे आधुनिक पोत आइएनएस सूर की कमान दी गई। अब अल्मोड़ा के केसी पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। चेन्नई में क्षेत्रीय मुख्यालय (पूर्व) और कोलकाता में क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तर-पूर्व) के तटीय-पूर्वी समुद्र तट की कमान उनके पास रहेगी। उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया है।

ऋषभ पंत बने भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सा

नैनीताल। इधर पांच जनवरी 2017 को (स्वयं को कभी भी उत्तराखंड का बताने से परहेज करने वाले) महेंद्र सिंह धौनी ने सीमित ओवरों की भारतीय क्रिकेट टीम से इस्तीफा दिया, वहीं अगले दि नही उत्तराखंड का एक और लाल-हरिद्वार में जन्मे ऋषभ पंत भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गये। 1997 में जन्मे ऋषभ के खाते में 2005 में अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत करते ही दिल्ली की ओर से नेपाल के विरुद्ध रिकार्ड सबसे तेज अर्धशतक, फिर नामीबिया के खिलाफ शतक, आगे आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स द्वारा 10 लाख आधारमूल्य के बावजूद 1.9 करोड़ रुपये में खरीदे जाने, इधर हाल में रणजी ट्राफी मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ 308 रनों की पारी खेलकर तिहरा शतक बनाने वाले सबसे युवा और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसा करने वाले देश के चौथे क्रिकेटर बनने के अलावा नवंबर 2016 में रणजी में झारखंड के खिलाफ 48 गैंदों पर रणजी के इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ने जैसी अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं।

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उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बल्लेबाज मनीष पांडे पहले ही श्रीलंका के खिलाफ देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। वहीं पिथौरागढ़ के उन्मुक्त चंद कप्तानी करते हुए देश को अंडर-19 विश्व कप-2012 का खिताब दिला चुके हैं। इनके अलावा रानीखेत के निवासी पवन नेगी भी देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। यह तब है, जबकि उत्तराखंड में प्रथम श्रेणी क्रिकेट ही नहीं खेला जाता है।

योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड के अजय सिंह से योगी बनने की रोचक कहानी

यूपी के नए सीएम बने योगी आदित्यनाथ किसी परिचय के मोहताज नहीं, बहुत कम उम्र में ही उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं वो बेमिसाल हैं।मूल रूप से उत्तराखंड के राजपूत परिवार में जन्मे आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। योगी गोरखपुर से लगातार पांचवीं बार बीजेपी के सांसद हैं. पहली बार उन्होंने 1998 में लोकसभा का चुनाव जीता तब उनकी उम्र महज 26 साल थी। इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने जाते रहे। वे गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के महंत हैं। योगी आदित्यनाथ का एक धार्मिक संगठन भी है-हिंदू युवावाहिनी जिसका पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासा दबदबा है। 5 जून 1972 उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गांव के राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था। 1977 में टिहरी जिले के गजा स्कूल से स्कूल में पढ़ाई शुरू की, और 1987 में यहीं से  दसवीं की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए एबीवीपी से जुड़े। उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी किया है। पढ़ाई के बाद वो गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ (संभवतया उनके मामा) के संपर्क में आए। मंहत ने दीक्षा देकर अजय को योगी आदित्यनाथ का नाम दिया। अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया तो योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

 

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अब मोदी की बारी है….   अब मोदी की बारी है….

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2 responses to “मोदी राज में कमाल-शीर्ष पदों पर उत्तराखंड के लाल

  1. पिंगबैक: इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के नाम-उपनाम व एतिहासिक घटनायें – नवीन समाचार : हम बता·

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