कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का इतिहास


नाटक प्रतियोगिता 20 के विजेता रहे नाटक 'उरुभंगम' के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार
नाटक प्रतियोगिता 2017 के विजेता रहे नाटक ‘उरुभंगम’ के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार

सरोवरनगरी को कला की नगरी भी कहा जाता है। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती सरोवर नगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक नगर में 1882 में (वर्तमान कैपिटॉल सिनेमा की जगह पर) बने नाचघर में लानटेनों की रोशनी में नाटक खेले जाते थे, जिसे तक अनेकों कमियों की वजह से दुनिया का सबसे खराब स्टेज भी कहा गया था। सचिवालय में तैनात बंगाली मूल के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 1894 में ‘बंगाली एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब’ की नींव रखी थी, जिसके तहत वे बंगाली नाटक करते थे।

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : अबकी बार किसकी सरकार ?


राजनीतिक दलों पर मेरे विचार:

किसी भी संगठन के राजनीतिक दल होने के लिये एक प्रमुख शर्त है, उसका चुनाव लड़ना। यदि कोई राजनीतिक दल चुनाव नहीं लड़ता है तो वह राजनीतिक दल ही नहीं है, वरन केवल एक संगठन है। दूसरी बात, लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल की असली परीक्षा उसकी चुनाव में जीत या हार से ही तय होती है। क्योंकि इसी से तय होता है कि उस दल की विचारधारा का कितनी जनता समर्थन या विरोध करती है। यदि कोई राजनीतिक दल बहुत अच्छी विचारधारा व सिद्धांतों वाला है, किंतु वह चुनाव नहीं जीत पाता है, तो उसका कोई मूल्य नहीं। एक और बात, हर राजनीतिक दल की कोई एक विचार धारा या सिद्धांत होते हैं। लेकिन मेरे विचार से उस दल के विचार या सिद्धांत उसके सत्ता में आने पर किये गये कार्यों से देखे और आंके जाने चाहिये, केवल चुनाव के दौरान वादों, वादों और दावों से नहीं। चुनाव के दौरान कई राजनीतिक नेता और जनता के लोग भी अपना दल या निष्ठा बदलते हैं। मेरे विचार से इसमें कुछ बुरा नहीं है। क्योंकि यही समय होता है जब लोकतंत्र में नेता हों अथवा जनता, किसी दल के पिछले कार्यकाल का मूल्यांकन कर सकते हैं, और दलीय निष्ठा बदल सकते हैं। बेशक, इसमें लोगों अथवा राजनीतिक नेताओं का स्वार्थ, राजनीतिक नफा-नुकसान छुपा हुआ हो। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : अबकी बार किसकी सरकार ?”