अब हर कोई दे सकेगा देश की सीमाओं की सुरक्षा में योगदान


-चीन सीमा पर स्थित कुटी गांव की सफलता के बाद अब केएमवीएन शुरू करने जा रहा है दार्मा और ब्यांस घाटियों में भी ‘होम स्टे’ की सुविधा

-ग्रामीणों के साथ घर पर रहकर सैलानी अनुभव कर सकेंगे वहां के जनजीवन का रोमांच

-सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार के साथ ग्रामीणों का पलायन रोककर सीमाओं को सशक्त करने में भी होगी बड़ी भूमिका

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राष्ट्रीय सहारा, 25 अप्रैल 2017, देहरादून संस्करण।

नवीन जोशी, नैनीताल। क्या हम बिना भारतीय सेना में शामिल हुए देश की सीमाओं की रक्षा और सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं ? शायद इस प्रश्न का उत्तर हम ‘नां’ में दें, किंतु कुमाऊं मंडल विकास निगम इस प्रश्न का उत्तर हमारे मुंह से ‘हां’ में देने का प्रबंध करने जा रहा है। निगम के एमडी धीराज गर्ब्यांल अपनी महत्वाकांक्षी ‘सीमांत गांवों की होम स्टे’ योजना के तहत यह प्रबंध करने जा रहे हैं, जिसके तहत सैलानी अब कुमाऊं मंडल के तिब्बत सीमा से लगे प्राकृतिक सुंंदरता से लबरेज हिमालय की गोद में सजी दारमा व ब्यांस घाटियों में जाकर वहां के गांवों में ग्रामीणों के साथ उनके घरों में रहकर न केवल वहां के जनजीवन का अनुभव व रोमांच ले पाएंगे। वरन इन सीमांत गांवों के ग्रामीणों की आर्थिकी में वृद्धि कर उनके समक्ष रोजगार के अभाव में खड़ी पलायन व बेरोजगारी की समस्या का समाधान कर पाएंगे, जिससे अन्तत: यहां के ग्रामीण पलायन करने को मजबूर नहीं होंगे, और देश की सीमाओं पर सेना में रहे बिना भी मानव दीवार के रूप में सीमा के सशक्त प्रहरी की भूमिका का निर्वाह करते रहेंगे, और इसमें इन गांवों में जाने वाले सैलानियों का भी योगदान होगा।

उल्लेखनीय है कि केएमवीएन ने पूर्व में निगम के एमडी धीराज गर्ब्यांल की अगुवाई में देश के कैलाश-मानसरोवर यात्रा के समानांतर चलने वाली आदि कैलाश यात्रा के मार्ग पर चीन-तिब्बत सीमा सीमा से लगे ब्यांस घाटी के कुटी गांव में दो वर्ष पूर्व सामुदायिक सहभागिता पर आधारित होम-स्टे की यह योजना शुरू की थी, जिसमें इस यात्रा पर पिछले दो वर्षों में गये 300 व 278 यानी कुल 578 यात्री आते व जाते हुए रुके, जिससे उन्हें घर पर ही रोजगार प्राप्त हुआ। योजना की सफलता से उत्साहित निगम अब इसी यात्रा मार्ग पर दारमा घाटी के नाबी, सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, दातू, फिलम व सीपू गांवों में इस योजना को लागू करने जा रही है। अच्छी बात यह है कि इन गांवों के पास तक सड़क भी पहुंच चुकी है।

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श्री गर्ब्यांल ने बताया कि इन सभी गांवों के 10 से 15 परिवारों के समूहों यानी करीब 100 परिवारों को निगम धारचूला में सैलानियों के आतिथ्य सत्कार का प्रशिक्षण देने जा रहा है। इन परिवारों से अपेक्षा होगी कि वे अपने घरों के यथा संभव एक-दो कक्ष सैलानियों के लिये साफ-सुथरा करके रखें। आगे आदि कैलाश यात्रा पर जाने वाले और अन्यथा भी यहां आने वाले सैलानी इन गांवों में आकर ग्रामीणों के साथ उनके घरों में सीमांत क्षेत्र की संस्कृति से जुड़ते हुए रहकर, उनके द्वारा ही तैयार परंपरागत व्यंजन व भोजन आदि का अनुभव ले पाएंगे। खास बात यह भी कि सैलानियों से मिलने वाली पूरी धनराशि ग्रामीणों को ही मिलेगी। श्री गर्ब्यांल ने कहा कि निगम का दायित्व पर्यटन विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के उन्नयन का भी है। निगम को यह लाभ जरूर होगा कि उसके द्वारा अपने स्तर से शुरू की जा रही प्राकृतिक ‘ॐ पर्वत’ के दर्शन कराने वाली आदि कैलाश यात्रा के मार्ग पर इस तरह यात्रियों को रात्रि विश्राम की सुविधा मिल पायेगी। बताया कि अब तक करीब 300 यात्रियों की आदि कैलाश यात्रा के लिये बुकिंग हो चुकी हैं, जिनके जाते व लौटते इन गांवों में 600 होम-स्टे प्राप्त हो जाएंगे। आगे यह संख्या एक हजार होने की उम्मीद है।

80 फीसद तक हो चुका है सीमांत क्षेत्र में पलायन

नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये दु:खद स्थिति है कि तिब्बत-चीन सीमा के इन गांवों में 70 से 80 फीसद तक पलायन हो चुका है। उदाहरण के लिये कभी 400 से 500 परिवारों के गांव रहे गर्ब्यांग में अब 70-80 परिवार ही बचे हैं। नौकरी-रोजगार के लिये बाहर गये करीब इतने ही अन्य परिवार वर्ष में एकाध बार पूजा-पाठ के लिये गांव आ पाते हैं। ऐसे में उनके घर वर्ष भर खाली पड़े रहते हैं। होम-स्टे योजना से इन खाली पड़े घरों की भी देखभाल हो पायेगी, और वे ग्रामीणों के लिये लाभकारी साबित होंगे।

New Doc 2017-04-25_2
राष्ट्रीय सहारा, 26 अप्रैल 2017।
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2 विचार “अब हर कोई दे सकेगा देश की सीमाओं की सुरक्षा में योगदान&rdquo पर;

  1. निश्चय ही केएमवीएन का यह प्रयास सराहनीय हैं और सीमांत वासियों के सर्वान्गीय विकास के लिये एक अवसर। सभी ग्रामवासियों को आगे आकर इसका लाभ उठाना चाहिए । केएमवीएन तथा इसके प्रमुख को क्षेत्र के जनता का साधुवाद !

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