उत्तराखंड में अब शिक्षा महकमे के लिए ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबर


-प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर चलेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूल, 500 मॉडल स्कूल बनेंगे, नर्सरी कक्षाएं भी होंगी, स्मार्ट क्लासें भी लगेंगी -हर ब्लॉक में होंगे पांच मॉडल स्कूल, यहां प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर होगी पढ़ाई व अन्य आयोजन -शिक्षकों-प्रधानाध्यापकों कोे दिया जाएगा प्रशिक्षण, गणित-विज्ञान व भाषाओं के अतिरिक्त शिक्षक होंगे तैनात नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में हालांकि अधिकांश सरकारी खबरें ‘गा, गे व गी” की ही यानी भविष्य के लिए बेहतर उम्मीदें जगाने वाली आती हैं, पर यह वर्तमान के धरातल पर उतरती हैं या नहीं, यह अलग बात है। अब प्रदेश सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा … पढ़ना जारी रखें उत्तराखंड में अब शिक्षा महकमे के लिए ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबर

प्रयोगशाला में दुनिया की इकलौती बची प्रजाति-पटवा के क्लोन तैयार


Rashtriya Sahara 15.12.15-सरोवरनगरी के निकट इसी प्रजाति के नाम पर स्थित है पटवाडांगर नाम का कस्बा
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के जैव प्रोद्योगिकी संस्थान भीमताल स्थित प्लांट एंड मॉलीक्यूलर बायलॉजी प्रयोगशाला ने एक अनूठा कारनामा कर डाला है। प्रयोगशाला में दुनिया की एक ऐसी प्रजाति का प्रयोगशाला में क्लोन तैयार करने में सफलता प्राप्त की है, जो पूरी तरह से विलुप्त होने की कगार पर है, और जिसके दुनिया में 100 से भी कम आखिरी पौधे ही बचे हैं, और इसके प्राकृतिक तौर पर नए पौधे उगने की प्रक्रिया भी समाप्त हो चुकी है। जैव पारिस्थितिकी के लिहाज से यह वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता आंकी गई है, और अमेरिका की शोध पत्रिका-अमेरिकन जर्नल ऑफ प्लांट साइंस व एशियन जर्नल ऑफ माईक्रोबायोलॉजी एंड इन्वायरमैंटल साइंस एवं इण्डियन जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में भी इस बाबत शोध पत्र प्रकाशित किये गये हैं।

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पर्यटन, हर्बल के बाद अब जैविक प्रदेश बनेगा उत्तराखंड


विभिन्न प्रकार के बीज
विभिन्न प्रकार के बीज

-प्रदेश के जैविक उत्पादों का बनेगा अपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
-उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के प्रस्ताव को मुख्य मंत्री ने दी हरी झंडी
-राज्य में ही पहली बार लगने जा रही कलर सॉर्टिंग मशीनों से स्थानीय ख्याति प्राप्त उत्पाद राजमा, चौलाई, गहत, भट्ट आदि के जियोग्रेफिकल इंडेक्स बनेंगे
-इस हेतु रुद्रपुर में मंडी परिषद के द्वारा एक वर्ष के भीतर बनाया जाएगा 1500 टन क्षमता का कोल्ड स्टोर और तीन हजार टन क्षमता का गोदाम

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी सुकून देने वाली हो सकती है। अभी भी अपेक्षाकृत सस्ती मिल रहीं उत्तराखण्ड की जैविक दालें (मौंठ 50, भट्ट 70 तथा गहत और राजमा 120 रुपये प्रति किग्रा.) देश की महँगी दालों का विकल्प हो सकती हैं। पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित उत्तराखंड एक नए स्वरूप में स्वयं को ढालने की राह पर चलने जा रहा है। यह राह है हर्बल प्रदेश बनने की, जिस पर अब तक पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित किये जा रहे उत्तराखण्ड ने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड, मंडी परिषद, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद एवं कृषि एवं उद्यान आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश को जैविक प्रदेश यानी जैविक उत्पादों का प्रदेश बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में राज्य के सभी पर्वतीय जिलों के 10 ब्लॉकों को जैविक ब्लॉक घोषित कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला जैविक जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है, और आगे चमोली व पिथौरागढ़ को भी जैविक जनपद बनाने की तथा अगले चरण में सभी पर्वतीय जिलों को जैविक जिलों के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। साथ ही प्रदेश के जैविक उत्पादों के लिए प्रदेश में ही बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने को मुख्यमंत्री के स्तर से हरी झंडी मिल गई है। प्रस्तावित जैविक प्रदेश में जैविक खाद्यान्नों के साथ जैविक दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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अरब सागर पर अपना दावा ठोक सकेगा भारत!


-अमेरिका की अगुआई में चल रहा है अध्ययन, अरब सागर और भारतीय प्रायद्वीप की चट्टानों में समानता मिलने की है संभावना -परियोजना में भारत के आठ वैज्ञानिक शामिल, जिनमें कुमाऊं विवि के भूविज्ञानी एवं वाडिया संस्थान के शोध छात्र भी -सामरिक दृष्टिकोण से भारत के लिए हो सकता है अत्यधिक महत्वपूर्ण नवीन जोशी, नैनीताल। अमेरिका की एक परियोजना के तहत हो रहे भू-वैज्ञानिक महत्व के शोध भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस परियोजना के तहत प्रारंभिक आकलनों के अनुसार अरब सागर भारतीय प्रायद्वीप की चट्टानों से ही बना हो सकता है। यदि यह आकलन … पढ़ना जारी रखें अरब सागर पर अपना दावा ठोक सकेगा भारत!

उत्तराखंड राज्य के प्रतीकों-बुरांश, मोनाल व कस्तूरा से लैस होगा नैनीताल जू


-राज्य वृक्ष बुरांश के बाद शीघ्र यहां दिखाई देंगे राज्य पक्षी मोनाल और राज्य पशु कस्तूरा मृग
-हिमांचल प्रदेश से चीड़ फीजेंट व काला भालू के नर लाए जाने की भी योजना
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, नैनीताल स्थित भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल जू शीघ्र उत्तराखंड राज्य के तीन प्रमुख प्रतीकों-राज्य वृक्ष बुरांश, राज्य पक्षी मोनाल और राज्य पशु कस्तूरा से लेस होगा। वर्ष 2013 की आपदा में उखड़े मृतप्राय राज्य वृक्षों को यहां रोपने का अभिनव प्रयास किया गया था, जिनमें से कुछ पर इस वर्ष भी फूल खिले हैं, तथा शेष सभी पर अगले वर्ष तक फूल खिलने की उम्मीद है। वहीं राज्य पक्षी मोनाल के इसी माह हिमाचल प्रदेश से यहां पहुंचने के आसार हैं, जबकि राज्य पशु कस्तूरा को बागेश्वर जिले के कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र से यहां लाने की औपचारिकताएं भी शुरू हो गई हैं। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड राज्य के प्रतीकों-बुरांश, मोनाल व कस्तूरा से लैस होगा नैनीताल जू”

कामयाबी: देवस्थल में एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन ‘डॉट’ स्थापित, आइएलएमटी की तैयारी


Rashtriya Sahara 24 April 15

Rashtriya Sahara 24 April 15

-सफलता से लिए गए शनि व बृहस्पति के प्रारंभिक प्रेक्षण नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, देश ही नहीं एशिया की अपनी तरह की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन-डॉट यानी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप जनपद के देवस्थल नाम के स्थान पर स्थापित हो गई है। इस दूरबीन से प्रायोगिक तौर पर शनि एवं बृहस्पति ग्रहों के चित्र सफलता पूर्वक ले लिए गए हैं। इसे तेजी से अंतरिक्ष, ब्रह्मांड व विज्ञान जगत में लगातार आगे बढ़ रहे देश के लिए बड़ा कदम माना जा सकता है। दूरबीन का औपचारिक तौर पर शुभारंभ इस वर्ष अक्टूबर माह में होने की उम्मीद है। पढ़ना जारी रखें “कामयाबी: देवस्थल में एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन ‘डॉट’ स्थापित, आइएलएमटी की तैयारी”

नाथुला से कहीं अधिक है उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्रेज


Rashtriya Sahara. 07.04.2015, Page-1

-निर्मूल साबित हुई नाथुला का मार्ग खुलने पर उत्तराखंड की चिंता
-उत्तराखंड के पौराणिक मार्ग से 1100 और सिक्किम के रास्ते जाने के लिए केवल 800 यात्रियों ने दी है पहली वरीयता
-सिक्किम की वरीयता वालों ने भी दिया है उत्तराखंड का विकल्प
-उत्तराखंड के रास्ते उपलब्ध सीटों से अधिक आ चुके हैं आवेदन
-10 अप्रैल तक उपलब्ध हैं ऑनलाइन आवेदन
नवीन जोशी, नैनीताल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात के बाद केंद्र सरकार के द्वारा प्रतिष्ठित कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के नाथुला दर्रे से नया मार्ग खोलने पर उत्तराखंड द्वारा व्यक्त की गई चिंता निर्मूल साबित हुई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वयं इस बारे में आशंका व्यक्त की थी, और केंद्र सरकार को भी अपनी चिंता से अवगत कराया था। किंतु इस यात्रा के लिए जिस तरह से आवेदन आ रहे हैं, और तीर्थ यात्री अभी भी नाथुला के अपेक्षाकृत सुगम व सुविधाजनक बताए जा रहे मार्ग की बजाय पुरातन व पौराणिक दुर्गम मार्ग को ही तरजीह दे रहे हैं, इसके बाद स्वयं सीएम रावत ने स्वीकारा है कि उनकी चिंता गैर वाजिब थी। अलबत्ता, उन्होंने जोड़ा कि चिंता गैरवाजिब ही सही किंतु राज्य हित में थी। पढ़ना जारी रखें “नाथुला से कहीं अधिक है उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्रेज”

उत्तराखंड में 50 वर्षों के बाद होंगे ‘भूमि बंदोबस्त”, साथ में चकबंदी भी


-पांच करोड़ तक के कार्यों में राष्ट्रीय निविदा नहीं होगी
-मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं के समक्ष मुख्यमंत्री रावत ने प्रकट की राज्य की व्यवस्थाएं, कहा-2017 नहीं राज्य की चिंता
नवीन जोशी, नैनीताल । उत्तराखंड राज्य में जमीनों की 1965 के बाद पहली बार ‘भूमि बंदोबस्ती” की जाएगी। इसकी शुरुआत अल्मोड़ा व पौड़ी जिलों से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। इस हेतु राज्य सरकार ने सलाहकारों की नियुक्ति कर दी है। इसके अलावा राज्य सरकार राज्य के खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के जमीनों की ‘चकबंदी” भी करने जा रही है। इसके लिए सलाहकारों की तलाश शुरू कर दी गई है। राज्य में चकबंदी के लिए अलग कैडर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने ठेकेदारों के एक शिष्टमंडल को उनकी सात करोड़ तक की मांग पर हल्का संसोधन करते हुए पांच करोड़ रुपए तक के कार्य राष्ट्रीय निविदा के बिना ही कराने की व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड में 50 वर्षों के बाद होंगे ‘भूमि बंदोबस्त”, साथ में चकबंदी भी”

उत्तराखंड से 1.5 और सिक्किम से 1.7 लाख में होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा


kailash mansarovar
कैलाश पर्वत
  • -उत्तराखंड से 1080 और सिक्किम से 250 यात्री जा पाएंगे यात्रा पर
  • -उत्तराखंड के पौराणिक मार्ग से 25 तो सिक्किम से 23 दिनों में पूरी होगी यात्रा
  • -उत्तराखंड के रास्ते पहला बैच 12 जून को और सिक्किम के रास्ते 18 जून को दिल्ली से रवाना होंगे पहले दल
  • -उत्तराखंड के रास्ते नौ सितंबर तक 60 यात्रियों के 18 दल और सिक्किम के रास्ते 22 अगस्त तक 50 यात्रियों के पांच दल पूरी कर लेंगे यात्रा
  • -10 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

नवीन जोशी, नैनीताल। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कार्यक्रम जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है। इससे पहली बार उत्तराखंड के पांडवों द्वारा भी प्रयुक्त पौराणिक लिपुपास दर्रे के साथ ही सिक्किम के नाथुला दर्रे से होने जा रही यात्रा से संबंधित सभी किंतु-परंतु और संशयों से परदा उठ गया है। इसके साथ ही दोनों मार्गों से प्रस्तावित यात्रा का अंतर भी साफ हो गया है। यात्रा के लिए 10 अप्रैल से पूर्व ऑनलाइन माध्यम से विदेश मंत्रालय की वेबसाइट-केएमवाई डॉट जीओवी डॉट इन पर आवेदन किए जा सकते हैं। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड से 1.5 और सिक्किम से 1.7 लाख में होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा”

साकार होगा ‘वाकिंग पैराडाइज”, माल रोड पर बनेगा 10 फीट चौड़ा पाथ-वे


-एडीबी के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि से होगा निर्माण
-माल रोड को अतिक्रमण मुक्त करने से खुलेगी राह
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी को ‘वाकिंग” या ‘वॉकर्स पैराडाइज” भी कहा जाता है। इसका कारण है कि यहां कमोबेस हर मौसम में, (मूसलाधार बारिश को छोड़कर) दिन से देर रात्रि तक किसी भी वक्त घूमा जा सकता है। लेकिन हालिया वर्षों में माल रोड पर हुए अतिक्रमण और सड़कों पर वाहनों की अधिकता की वजह से खासकर माल रोड की ओर घूमना संभव नहीं हो पाता। इसका समाधान होने जा रहा है। कुमाऊं आयुक्त अवनेंद्र सिंह नयाल की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा एडीबी के माध्यम से पहले से ही उपलब्ध करीब ढाई करोड़ रुपए की धनराशि से माल रोड पर सड़क से एक फीट ऊंचा और करीब 10 फीट चौड़ा पाथ-वे बनाने का खाका खींच लिया गया है, लिहाजा नगर की ‘वाकिंग” या ‘वॉकर्स पैराडाइज” के रूप में बनी पहचान के साकार होने की उम्मीद की जा रही है। पढ़ना जारी रखें “साकार होगा ‘वाकिंग पैराडाइज”, माल रोड पर बनेगा 10 फीट चौड़ा पाथ-वे”

ग्लोबल वार्मिग की वजह से ही होती है बेमौसम व कम-ज्यादा बारिश


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क्या आपको पता है नैनीताल में कहां है देवगुरु बृहस्पति का मंदिर, और किस गांव में हुई थी मधुमती फिल्म की शूटिंग


Bhumiyadhar on NH87
Bhumiyadhar on NH87

-जनपद के ऐसे 10 गांव बनेंगे पर्यटन गांव, मिलेगा पर्यटन योजनाओं का लाभ -सैलानी जान सकेंगे कहां है नैनीताल में देवगुरु बृहस्पति मंदिर, कहां हो सकती हैं एेंगलिंग और किस गांव में हुई थी फिल्म मधुमति की शूटिंग

नवीन जोशी, नैनीताल। सैलानी क्या, नैनीताल जनपद वासी भी कम ही जानते होंगे कि नैनीताल जनपद में कहीं देश के गिने-चुने देवगुरु बृहस्पति के मंदिरों में से एक स्थित है। यह भी कम ही लोग जानते होंगे कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य से बॉलीवुड फिल्म उद्योग को सर्वप्रथम मुख्यालय नैनीताल से भी पहले एक गांव ने रिझाया था। जनपद में मछलियों को पकड़ने के खेल-एंगलिंग की भी अपार संभावनाएं हैं। लेकिन आगे ऐसा ना होगा। विकास की दौड़ में पीछे छूट गए गांवों के देश भारत के इन गांवों में अब पर्यटन की राह खुलने जा रही है, जिसके बाद इन गांवों में सैलानियों के पहुंचने के लिए ढांचागत सुविधाओं का विस्तार होगा, तथा सैलानी और स्थानीय लोग न केवल इन गांवों के बारे में जान पाएंगे, वरन यहां आकर इनकी विशिष्टताओं से रूबरू भी हो पाएंगे। पढ़ना जारी रखें “क्या आपको पता है नैनीताल में कहां है देवगुरु बृहस्पति का मंदिर, और किस गांव में हुई थी मधुमती फिल्म की शूटिंग”

राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी


Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898
Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898

-नगर के नए खतरनाक स्थानों की पहचान के लिए होगा सर्वेक्षण, नगर की नई महायोजना बनेगी, पुरानी महायोजना का समय पहले ही हो चुका है पूरा
नवीन जोशी, नैनीताल। नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली एवं 1869 एवं 1873 में सरोवरनगरी की सुरक्षा के बाबत महत्वपूर्ण सिफारिशें देने वाली हिल साइड सेफ्टी कमेटी (पूरा नाम रेगुलेशन इन कनेक्शन विद हिल साइड सेफ्टी एंड लेक कंट्रोल, नैनीताल) आखिरी नींद से जाग उठी है। डीएम दीपक रावत ने राज्य बनने के बाद पहली बार नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक के लंबे विराम को तोड़ते हुए १६ वर्षों बाद यह बैठक ली। पूर्व में यह बैठक १९९८ में आयोजित हुई थी, और तभी से आयोजित न होने के कारण जिला प्रशासन नगर के पर्यावरण प्रेमियों के निशाने पर रहता था। इस अवसर पर डीएम ने नगर में नए खतरनाक स्थलों (वल्नरेबल जोन) की जीएसआई व आईआईटी रुड़की से सर्वेक्षण कर पहचान करने, बलियानाला, टूटा पहाड़, राजभवन के पीछे निहाल नाले व आम पड़ाव तथा पर्यटन कार्यालय के पास धंस रही माल रोड जैसे भूस्खलन के हिसाब से सक्रिय खतरनाक स्थानों में सीमेंट-कंक्रीट के बचाव कार्यों में इस कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट-सीएसआईआर व टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन-टीएचडीसी ने अनिवार्य रूप से सलाह लेने तथा साथ पेड़-पौधों के प्रयोग से बायो-सेफ्टी के प्रबंध भी करने के निर्देश दिए।  पढ़ना जारी रखें “राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी”

वन भूमि हस्तांतरण: सिविल सोयम की भूमि समाप्त होने से उत्तराखंड में विकास कार्य ठप हो जाने की आशंका !


-राज्य में समाप्त हुई विकास कार्यों के बदले दोगुनी दी जाने वाली सिविल सोयम की भूमि

नवीन जोशी नैनीताल। देश-दुनिया को अपने 60 फीसद से अधिक वनों से प्राणवायु व जलरूपी जीवन से समृद्ध करने वाले उत्तराखंड के विकास कायरे की राह ठप होने के आसार उत्पन्न हो गए हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में वन भूमि पर होने वाले विकास कार्यों के बदले दोगुनी दी जाने वाली सिविल सोयम की जमीन समाप्त हो गई है इसलिए राज्य सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद विकास कार्यों के लिए सिविल सोयम की भूमि नहीं मिल पा रही है। ऐसे में नैनीताल, चंपावत व ऊधमसिंह नगर सहित कई जिले दूसरे जनपदों से जरूरी भूमि मांग रहे हैं और कमोबेश राज्य के सभी जिलों में अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी सिविल सोयम की भूमि के लैंड बैंक कंगाल हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में केवल 38 फीसद ही गैर वन भूमि उपलब्ध है। मौजूदा नियमों के अनुसार वन भूमि पर विकास कराने वाले विभागों को वन भूमि के बदले वन विभाग को क्षतिपूरक पौधरोपण के लिए सिविल सोयम की दोगुनी भूमि न केवल लौटाने वरन इस भूमि को राजस्व दस्तावेजों में वन विभाग को नामांतरित करने का प्रावधान है। बीते वर्ष अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार वन भूमि हस्तांतरण के 268 मामले केंद्र सरकार के स्तर पर, जबकि 15 अगस्त 2014 से पूर्व केंद्र सरकार से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बावजूद 267 मामले राज्य की ओर से औपचारिकताएं पूर्ण न होने के कारण लंबित हैं। इनमें 45 मामले नैनीताल जनपद, 32 मामले बागेश्वर, 31 टिहरी, अल्मोड़ा व देहरादून के 30-30, पौड़ी के 28 और चमोली के 27 मामले शामिल हैं। वर्तमान में भी कमोबेश यही स्थिति बताई गई है। इनमें अधिकांश मामलों में दोगुनी सिविल सोयम की वन भूमि का न मिलना प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

डीएम नैनीताल ने पौड़ी व कुमाऊं आयुक्त ने गढ़वाल आयुक्त को भेजी अर्जी

नैनीताल। नैनीताल जनपद को 118.484 हेक्टेयर वन भूमि पर प्रस्तावित 28 सड़कों के निर्माण के लिए 240.876 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि नहीं मिल पा रही है। नैनीताल डीएम दीपक रावत ने कुमाऊं आयुक्त से भूमि उपलब्ध कराने की गुहार लगाई और अब पौड़ी के डीएम से संपर्क साधा है। वहीं कुमाऊं आयुक्त अवनेंद्र सिंह नयाल के हवाले से अपर आयुक्त जगदीश चंद्र कांडपाल ने बताया कि नैनीताल, ऊधमसिंह नगर व चंपावत जिले अपने यहां सिविल सोयम भूमि न होने से दूसरे जिलों से गुहार लगा चुके हैं। कुमाऊं आयुक्त ने गढ़वाल मंडल आयुक्त से वहां उपलब्ध सिविल सोयम भूमि की जानकारी मांगी है और उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। नैनीताल जिले की 45 सड़कें वन भूमि हस्तांतरण संबंधी फाइलें लटकी हुई हैं। इनमें 36 सड़कें याचक विभागों में लटकी हैं। नैनीताल दो से ढाई हजार हेक्टेयर भूमि विकास कायरे के बदले वन विभाग के नियंतण्रमें दे चुका है। अक्टूबर में नैनीताल ने चंपावत में बन रही टनकपुर- जौलजीबी मोटरमार्ग के ककराली गेट से ठुलीगाड़ तक के 12 किमी हिस्से को डेढ़ लेन करने के लिए 3.8 हेक्टेयर वन भूमि के बदले चंपावत जिले द्वारा मांगे जाने पर कोश्यां- कुटौली तहसील के छ्योड्ीधूरा गांव में 7.8 हेक्टेयर वन भूमि उपलब्ध कराई थी। जनपद की अपनी पूरी सिविल सोयम का लैंड बैंक पर्यटन विभाग द्वारा टूरिस्ट कॉटेजों के निर्माण के लिए कोरड़ पट्टी में वन विभाग के नाम दो हेक्टेयर भूमि नामांतरित करने के साथ खाली हो गया है।

याचक विभागों को ही शायद जरूरत नहीं अनुमति की !

  • नैनीताल जनपद की कुल 45 सड़कों पर वन भूमि हस्तांतरण का पेंच, इनमें सर्वाधिक 36 सड़कें याचक विभाग पर ही लंबित
  • वन भूमि हस्तांतरण संबंधी फाइलें लंबित, लटकीं सड़कें

नवीन जोशी नैनीताल। प्रदेश के लिए पर्यावरण की रक्षा क्षेत्र के विकास पर बाधक साबित हो रही है। अकेले नैनीताल जनपद की 45 सड़कें अलग-अलग स्तरों पर वन भूमि हस्तांतरण संबंधी फाइलें लंबित होने की वजह से लटकी हुई हैं। हालांकि यह भी सच्चाई है कि इनमें सर्वाधिक 36 सड़कें याचक विभागों में ही यानी प्राथमिक स्तर पर लटकी हुई हैं। केवल तीन सड़कें केंद्र सरकार के स्तर पर जबकि पांच सड़कें नोडल अधिकारी के स्तर पर लंबित हैं। पढ़ना जारी रखें “वन भूमि हस्तांतरण: सिविल सोयम की भूमि समाप्त होने से उत्तराखंड में विकास कार्य ठप हो जाने की आशंका !”

अब बच्चों को लगेगा केवल एक “पेंटावैलेंट टीका”


  • प्रदेश में योजना की शुरुआत आगामी एक जनवरी को  होगी मुख्यमंत्री के हाथों
  • एक टीके से ही हो जायेगा पांच बीमारियों का इलाज
  • बाजार से नहीं खरीदना पड़ेगा हिब का महंगा टीका
  • नौ की जगह बच्चों को लगानी पड़ेंगी सिर्फ तीन सुइयां

नैनीताल। एक वर्ष के बच्चों को अब तक नौ सुइयां लगाकर तीन टीके लगाए जाते हैं तथा इनमें से भी एक महंगा (करीब 700-800 रुपये का) हिब यानी हिमोफिलिस इंफ्लूऐंजा-बी का टीका बाजार से खरीदकर लगाना पड़ता है। लेकिन अब बच्चों को वर्ष भर में नौ की जगह केवल तीन बार ही पेंटावैलेंट टीके की एक-एक सुइयां लगानी पड़ेंगी। हर बार एक सुई से लगने वाले टीके से बच्चे पांच खतरनाक बीमारियों- गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलस इंफ्लूएंजा टाइप-बी से सुरक्षित हो जाएंगे। यह टीके बच्चों को जन्म के छह, 10 व 14 सप्ताह होने पर लगाए जाएंगे। प्रदेश में योजना की शुरुआत आगामी एक जनवरी को मुख्यमंत्री के हाथों हो सकती है। पढ़ना जारी रखें “अब बच्चों को लगेगा केवल एक “पेंटावैलेंट टीका””