विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली


जब से मानव पृथ्वी पर आया है, तभी से वह स्वयं को भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता रहा है। प्रारम्भ में वह संकेतों या ध्वनि के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुँचाता रहा, समय बीतते उसने भाषा की खोज की और आसानी से अपनी बात कहने लगा। जैसे-जैसे मानव का विकास होता गया उसने परिवार बसाया, समाज का अंग बना। फिर उसकी दुनिया और बड़ी होती चली गई, और उसे अपनी बात ज्यादा दूर तक पहुँचाने की जरूरत पड़ने लगी। मनुष्य में अपनी आवाज को दूर तक पहुँचाने की चाह न जाने कब से रही है, और न … पढ़ना जारी रखें विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली

देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन


Coverनैनीताल। अमेका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट व परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता तथा पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. गिरीश रंजन तिवारी आदि के हाथों पत्रकार नवीन जोशी की पुस्तक देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन किया गया। लेखक नवीन जोशी ने बताया कि पुस्तक कुमाऊं -उत्तराखंड की भावी पीढि़यों और यहां आने वाले वाले सैलानियों को इस उम्मीद के साथ समर्पित है कि उन्हें इस पुस्तक के माध्यम से इस अंचल को समग्रता में समझने में मदद मिलेगी। पुस्तक तीन खंडों- देवभूमि उत्तराखंड व कुमाऊं के इतिहास, यहां के धार्मिक, आध्यात्मिक व पर्यटन महत्व के स्थलों तथा यहां के तीज-त्योहारों, लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और विशिष्टताओं का वर्णन करती है। यह देवभूमि के खास तौर पर ‘देवत्व’ को एक अलग अंदाज में देखने का प्रयास है। उनका मानना है कि देवभूमि का देवत्व केवल देवताओं की धरती होने से नहीं, वरन इस बात से है कि यह भूमि पूरे देश को स्वच्छ हवा, पानी, जवानी व उर्वरा भूमि के साथ प्राकृतिक व आध्यात्मिक शांति के साथ और भी बहुत कुछ देती है, और वास्तव में देवता शब्द देता या दाता शब्दों का विस्तार है। पढ़ना जारी रखें “देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन”

इंटरनेट की दुनिया की ताजा खबरें


नए मीडिया के आने से परंपरागत प्रिंट मीडिया के समक्ष बड़ी चुनौती समय से अधिक तेजी से हो रहे मौजूदा बदलाव के दौर में परंपरागत या प्रिंट पत्रकारिता के करीब दो हजार वर्ष तक रहे एकाधिकार को 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि, ‘ई-सूचना हाईवे’ के रूप में अस्तित्व में आये इंटरनेट के माध्यम से जुड़े साइबर मीडिया, साइबर जर्नलिज्म, ऑनलाइन जर्नलिज्म, इंटरनेट जर्नलिज्म, कम्प्यूटराइज्ड जर्नलिज्म, वेबसाइट पत्रकारिता व वेब पत्रकारिता सहित कई समानार्थी नामों से पुकारे जाने वाले ‘कलम रहित’ नये मीडिया और इसके प्रमुख घटक सोशल मीडिया ने पिछले करीब दो दशकों में बेहद कड़ी चुनौती दी है। … पढ़ना जारी रखें इंटरनेट की दुनिया की ताजा खबरें

उत्तराखंड की ‘फील गुड टाइप’ ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबरें


पानी की बूंद-बूंद पर रहेगी नजर: प्रदेश में लगेंगे पानी के वाई-फाई वाले ऑटोमैटेड डिजिटल मीटर -मीटर रीडिंग के लिये रीडर को घर-घर भी नहीं आना पड़ेगा, बल्कि पास से गुजरते हुए सभी मीटरों की रीडिंग मिल जायेगी -नैनीताल व देहरादून में एशियाई विकास बैंक के माध्यम से योजना स्वीकृत, आगे रामनगर व रुड़की में भी योजना होगी लागू -उपभोक्ताओं को नये मीटरों के लिये कोई शुल्क नहीं देना होगा, मीटर लगाने वाली संस्था की ही अगले सात वर्षों तक इन मीटरों के रखरखाव की जिम्मेदारी नवीन जोशी। नैनीताल। प्रदेश में पेयजल की बरबादी अब बीते समय की बात होने … पढ़ना जारी रखें उत्तराखंड की ‘फील गुड टाइप’ ‘गा’, ‘गे’ व ‘गी’ की खबरें

प्रयोगशाला में दुनिया की इकलौती बची प्रजाति-पटवा के क्लोन तैयार


Rashtriya Sahara 15.12.15-सरोवरनगरी के निकट इसी प्रजाति के नाम पर स्थित है पटवाडांगर नाम का कस्बा
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के जैव प्रोद्योगिकी संस्थान भीमताल स्थित प्लांट एंड मॉलीक्यूलर बायलॉजी प्रयोगशाला ने एक अनूठा कारनामा कर डाला है। प्रयोगशाला में दुनिया की एक ऐसी प्रजाति का प्रयोगशाला में क्लोन तैयार करने में सफलता प्राप्त की है, जो पूरी तरह से विलुप्त होने की कगार पर है, और जिसके दुनिया में 100 से भी कम आखिरी पौधे ही बचे हैं, और इसके प्राकृतिक तौर पर नए पौधे उगने की प्रक्रिया भी समाप्त हो चुकी है। जैव पारिस्थितिकी के लिहाज से यह वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता आंकी गई है, और अमेरिका की शोध पत्रिका-अमेरिकन जर्नल ऑफ प्लांट साइंस व एशियन जर्नल ऑफ माईक्रोबायोलॉजी एंड इन्वायरमैंटल साइंस एवं इण्डियन जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में भी इस बाबत शोध पत्र प्रकाशित किये गये हैं।

पढ़ना जारी रखें “प्रयोगशाला में दुनिया की इकलौती बची प्रजाति-पटवा के क्लोन तैयार”

भारत एवम् विश्व


अरब सागर पर अपना दावा ठोक सकेगा भारत! -अमेरिका की अगुआई में चल रहा है अध्ययन, अरब सागर और भारतीय प्रायद्वीप की चट्टानों में समानता मिलने की है संभावना -परियोजना में भारत के आठ वैज्ञानिक शामिल, जिनमें कुमाऊं विवि के भूविज्ञानी एवं वाडिया संस्थान के शोध छात्र भी -सामरिक दृष्टिकोण से भारत के लिए हो सकता है अत्यधिक महत्वपूर्ण नवीन जोशी, नैनीताल। अमेरिका की एक परियोजना के तहत हो रहे भू-वैज्ञानिक महत्व के शोध भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस परियोजना के तहत प्रारंभिक आकलनों के अनुसार अरब सागर भारतीय प्रायद्वीप की चट्टानों से … पढ़ना जारी रखें भारत एवम् विश्व

विश्व योग दिवस के साथ युग परिवर्तन की शुरुआत, विश्व गुरु बनने की राह पर भारत


प्रकृति योग
प्रकृति योग

Image result for योग दिवस के साथ युग परिवर्तनबात कुछ पुराने संदर्भों से शुरू करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 1836 में उनके गुरु आचार्य रामकृष्ण परमहंस के जन्म के साथ ही युग परिवर्तन गया है काल प्रारंभ हो। यह वह दौर था जब देश में 700 वर्षों की मुगलों की गुलामी के बाद अंग्रेजों के अधीन था, और पहले स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल भी नहीं बजा था।
बाद में महर्षि अरविन्द ने प्रतिपादित किया कि युग परिवर्तन का काल, संधि काल कहलाता है और यह करीब 175 वर्ष का होता है …

पढ़ना जारी रखें “विश्व योग दिवस के साथ युग परिवर्तन की शुरुआत, विश्व गुरु बनने की राह पर भारत”

गुदड़ी के लाल ने किया कमाल, घनमूल निकालने का खोजा फॉर्मूला


Jitendra Joshi-17 वीं शताब्दी में स्कॉटलेंड व स्विटजरलेंड के वैज्ञानिकों द्वारा इसके हल के लिए प्रयोग की जारी वाली 1200 शब्दों की जगह केवल 50 शब्दों की लॉग टेबल खोजने का किया है दावा
नवीन जोशी, नैनीताल। प्रतिभा उम्र सहित कैसी भी परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। कॉलेज की पढ़ाई में लगातार ह्रास की आम खबरों के बीच कुमाऊं विवि के एक बीएससी द्वितीय वर्ष के सामान्य पारिवारिक स्थिति वाले छात्र जितेंद्र जोशी का दावा यदि सही है, तो उसने ऐसा कमाल कर डाला है, जो उससे पहले 17 वीं शताब्दी में स्कॉटलेंड के गणितज्ञ जॉन नेपियर ने 1614 में और स्विटजरलेंड के जूस्ट बर्गी ने 1620 में किया था। इन दोनों विद्वान गणितज्ञों से भी छात्र जितेंद्र की उपलब्धि इस मामले में बड़ी है कि इन विद्वानों ने जो लॉग टेबल खोजी थी, वह करीब 1 9 00 शब्दों की है, लिहाजा उसे याद करना किसी के लिए भी आसान नहीं है, और परीक्षाओं में भी इस लॉग टेबल को छात्रों की सहायता के लिए उपलब्ध कराए जाने का प्राविधान है। जबकि जितेंद्र की लॉग टेबल केवल 50 शब्दों की है। इसे आसानी से तैयार तथा याद भी किया जा सकता है। लिहाजा यदि उसकी कोशिश सही पाई गई तो परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को लॉग टेबल देने से निजात मिल सकती है, तथा गणित के कठिन घनमूल आसानी से निकाले जा सकते हैं। पढ़ना जारी रखें “गुदड़ी के लाल ने किया कमाल, घनमूल निकालने का खोजा फॉर्मूला”

ग्लोबल वार्मिग की वजह से ही होती है बेमौसम व कम-ज्यादा बारिश


पढ़ना जारी रखें “ग्लोबल वार्मिग की वजह से ही होती है बेमौसम व कम-ज्यादा बारिश”

आधुनिक विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध और प्रामाणिक था भारतीय ज्ञान


[untitled1.bmp]विज्ञान के वर्तमान दौर में आस्था व विश्वास को अंधविश्वास कहे जाने का चलन चल पड़ा है। आस्था और विज्ञान को एक दूसरे का बिल्कुल उलट-विरोधाभाषी कहा जा रहा है। यानी जो विज्ञान नहीं है, वैज्ञानिक नियमों और आज के वैज्ञानिक दौर के उपकरणों से संचालित नहीं है, जो मनुष्य की आंखों और वैज्ञानिक ज्ञान से प्राप्त बुद्धि-विवेक के अनुसार सही नहीं ठहरता, अंधविश्वास है। और आस्था का भी चूंकि वर्तमान ज्ञान-विज्ञान के अनुसार कोई आधार नहीं है, इसलिए वह भी अंधविश्वास ही है।

पढ़ना जारी रखें “आधुनिक विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध और प्रामाणिक था भारतीय ज्ञान”

कुमाऊं विवि में विकसित हो रही भविष्य की ‘नैनो दुनिया’, एक साथ दो पेटेंट फाइल कर रचा इतिहास


राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1
राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन’ परियोजना से भी जुड़ी है यह सफलता
-कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपने उपकरण-‘स्वयंभू-2021’ को कराया पेटेंट
-साथ ही एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ भी कराया पेटेंट
नवीन जोशी, नैनीताल। 1972 में स्थापित कुमाऊं विवि ने अपने 44 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक साथ अपने दो अनुसंधानों को पेटेंट कराकर इतिहास रच डाला है। कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपनी स्वयं बनाये गये प्रबंध-‘स्वयंभू-2021’ के साथ ही कालातीत यानी एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने के ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम” का पेटेंट फाइल कर दिया है। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन” परियोजना से भी जुड़ी है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

पढ़ना जारी रखें “कुमाऊं विवि में विकसित हो रही भविष्य की ‘नैनो दुनिया’, एक साथ दो पेटेंट फाइल कर रचा इतिहास”

अब भारतीय कूड़े पर यूरोप की नजर


DSCN2358

-यहां प्रति वर्ष 625 मिलियन टन कृषि क्षेत्र का सहित हजारों टन कूड़ा हो रहा बरबाद
नवीन जोशी, नैनीताल। कभी सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत देश की समृद्धि एक यूरोपीय देश-इंग्लेंड की आंखों में इस तरह चुभी थी कि उसने ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत को गुलाम ही बना डाला था। आज उसी यूरोप को भारत के कूड़े में ऐसा कुछ नजर आ रहा है, कि उसके कदम एक बार फिर भारत की ओर लौट रहे हैं। यूरोपियन यूनियन के एक देश इटली के इटेलियन नेशनल एजेंसी फॉर न्यू टेक्नॉलॉजीज में कार्यरत डा. नीता शर्मा की अगुवाई में यूरोपियन यूनियन के इटली, बेल्जियम, नीदरलेंड और जर्मनी के सात संस्थान तथा भारत के जवाहर लाल नेहरू, पंतनगर विवि, आईआईसीटी हैदराबाद, तेजपुर कृषि विवि आसोम, एनजीओ-पुणे महाराष्ट्र की आरती व टेरी आदि संस्थान ‘स्ट्रेंथनिंग नेटवर्किंग ऑफ बायो-मास एवं बायो-वेस्ट टेक्नोलॉजी फॉर यूरोप-इंडिया इंटीग्रेशन” यानी ‘सहयोग” प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। पढ़ना जारी रखें “अब भारतीय कूड़े पर यूरोप की नजर”

राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी


Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898
Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898

-नगर के नए खतरनाक स्थानों की पहचान के लिए होगा सर्वेक्षण, नगर की नई महायोजना बनेगी, पुरानी महायोजना का समय पहले ही हो चुका है पूरा
नवीन जोशी, नैनीताल। नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली एवं 1869 एवं 1873 में सरोवरनगरी की सुरक्षा के बाबत महत्वपूर्ण सिफारिशें देने वाली हिल साइड सेफ्टी कमेटी (पूरा नाम रेगुलेशन इन कनेक्शन विद हिल साइड सेफ्टी एंड लेक कंट्रोल, नैनीताल) आखिरी नींद से जाग उठी है। डीएम दीपक रावत ने राज्य बनने के बाद पहली बार नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक के लंबे विराम को तोड़ते हुए १६ वर्षों बाद यह बैठक ली। पूर्व में यह बैठक १९९८ में आयोजित हुई थी, और तभी से आयोजित न होने के कारण जिला प्रशासन नगर के पर्यावरण प्रेमियों के निशाने पर रहता था। इस अवसर पर डीएम ने नगर में नए खतरनाक स्थलों (वल्नरेबल जोन) की जीएसआई व आईआईटी रुड़की से सर्वेक्षण कर पहचान करने, बलियानाला, टूटा पहाड़, राजभवन के पीछे निहाल नाले व आम पड़ाव तथा पर्यटन कार्यालय के पास धंस रही माल रोड जैसे भूस्खलन के हिसाब से सक्रिय खतरनाक स्थानों में सीमेंट-कंक्रीट के बचाव कार्यों में इस कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट-सीएसआईआर व टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन-टीएचडीसी ने अनिवार्य रूप से सलाह लेने तथा साथ पेड़-पौधों के प्रयोग से बायो-सेफ्टी के प्रबंध भी करने के निर्देश दिए।  पढ़ना जारी रखें “राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी”

अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य


Rashtriya Sahara, 06 Dec 2014, Page-1

-हर पांच वर्ष में संबंधित बार से लगातार वकालत करने का प्रमाण पत्र ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना होगा, तभी मिलेगा बार काउंसिल से वकालत करने का लाइसेंस
-छह माह के भीतर हासिल करना होगा वकालत करने का लाइसेंस
नवीन जोशी, नैनीताल। देश-प्रदेश के ऐसे अधिवक्ताओं के लिए बुरी खबर है जो पार्ट टाइम वकालत करते हैं। अब लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ता आगे वकालत नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल आफ इंडिया के ताजा राजपत्र से ऐसे अधिवक्ताओं में हड़कंप मचना तय है। गत 30 अक्टूबर को जारी ताजा राजपत्र-सर्टिफिकेट आफ प्रेक्टिस तथा नवीनीकरण नियम 2014 को उत्तराखंड बार काउंसिल ने भी बीती 22 नवंबर को सर्वसम्मति से स्वीकृति दे दी है, जिसके अनुसार 12 जून 2010 के बाद विधि स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले या इसके बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं को अभी छह माह के भीतर और आगे हर पांच वर्ष में बार काउंसिल से ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना होगा। गौरतलब है कि ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए उन्हें संबंधित बार एसोसिएशन से प्राप्त इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनके लगातार प्रेक्टिस यानी वकालत करने की पुष्टि की गई हो। साफ है कि लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ताओं का लाइसेंस आगे नवीनीकृत नहीं हो पाएगा, और वह किसी मामले में अपने नाम का वकालतनामा नहीं लगा पाएंगे। पढ़ना जारी रखें “अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य”

पूरे कुमाऊं के बिना कैसा कुमाऊं विश्वविद्यालय, चल रही राजनीतिक कारणों से तोड़ने की तैयारी


  • KUv Logoकभी भी हो सकती है घोषणा
  • कुमाऊं विवि को तोड़कर नए पर्वतीय विवि की स्थापना पर खुश नहीं प्राध्यापक
  • सरकार के निर्देशों पर कुमाऊं विवि की कार्य परिषद ने पारित किया है प्रस्ताव
  • प्राध्यापकों ने कहा शिक्षा के साथ नहीं होनी चाहिए राजनीति, केंद्रीय विवि के मुद्दे पर सभी पक्षों के मौन साधने पर भी चिंता
  • कहा अल्मोड़ा परिसर को कुमाऊं विवि से काटना गलत, बेहतर है तराई क्षेत्र के लिए बने अलग विवि
    नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश सरकार के निर्देशन पर कुमाऊं विवि की कार्य परिषद ने कुमाऊं विवि को काटकर पर्वतीय विवि बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। इस पर कुमाऊं विवि के भीतर ही वरिष्ठ प्राध्यापकों की ओर से नाराजगी और विरोध सामने आने लगा है। कुमाऊं विवि के अल्मोड़ा परिसर के निदेशक प्रो. आरएस पथनी एवं वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. बीडी कविदयाल ने विवि के 41वें स्थापना दिवस (एक दिसंबर) के अवसर पर खुलकर इस पर नाराजगी जताई। पढ़ना जारी रखें “पूरे कुमाऊं के बिना कैसा कुमाऊं विश्वविद्यालय, चल रही राजनीतिक कारणों से तोड़ने की तैयारी”