देश-दुनिया में नाम कमा पहाड़ के लिए काम कर रहे पहाड़ के बेटे


अंडर द स्काई का पार्ट-2 भी उत्तराखंड में फिल्माएंगे डा. एहसान

नवीन जोशी, नैनीताल। कम ही लोग होते हैं जो अपने घर से दूर, दुनिया में प्रसिद्ध होते हैं, लेकिन बाद में घर लौटकर अपनी प्रतिभा का लाभ अपनी मिट्टी को दिलाते हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से निकलकर मुंबई फिल्म उद्योग में देश-दुनिया में अनेक फिल्म फेस्टिवल में आखिरी मुनादी व अंडर द स्काई जैसी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता स्तर की फिल्म बनाने तथा छोटे पर्दे पर ससुराल सिमर का, प्रतिज्ञा व माता की चौकी जैसे चर्चित शो लिख कर नाम कमाने वाले प्रदेश के बेटे, राष्ट्रीय नाटय़ विद्यालय से स्नातक व उत्तराखंड के इतिहास विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त डा. एहसान बख्श फिर उत्तराखंड में काम करने जा रहे हैं। उत्तराखंड के बच्चों को ही लेकर उत्तराखंड में ही बनायी गयी फिल्म अंडर द स्काई को देश के साथ ही दुनिया के फिल्म मेलों में मिली अपार सफलता से उत्साहित एहसान एक बार फिर उत्तराखंड के बच्चों को लेकर इसी फिल्म का पार्ट-2 बनाने जा रहे हैं। पढ़ना जारी रखें “देश-दुनिया में नाम कमा पहाड़ के लिए काम कर रहे पहाड़ के बेटे”

कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का इतिहास


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नाटक प्रतियोगिता 20 के विजेता रहे नाटक 'उरुभंगम' के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार
नाटक प्रतियोगिता 2017 के विजेता रहे नाटक ‘उरुभंगम’ के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार

सरोवरनगरी को कला की नगरी भी कहा जाता है। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती सरोवर नगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक नगर में 1882 में (वर्तमान कैपिटॉल सिनेमा की जगह पर) बने नाचघर में लानटेनों की रोशनी में नाटक खेले जाते थे, जिसे तक अनेकों कमियों की वजह से दुनिया का सबसे खराब स्टेज भी कहा गया था। सचिवालय में तैनात बंगाली मूल के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 1894 में ‘बंगाली एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब’ की नींव रखी थी, जिसके तहत वे बंगाली नाटक करते थे।

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