::युवा दिवस 12 जनवरी, 152वीं जयंती पर पर विशेष: नैनीताल से ही नरेंद्र बना था शिकागो का राजर्षि विवेकानंद


-नैनीताल जनपद के काकड़ीघाट में ‘बोधि वृक्ष’ सरीखे पीपल का पेड़ के नीचे स्वामी विवेकानंद को हुऐ थे अणु में ब्रह्मांड के दर्शन -स्वामी विवेकानंद व देवभूमि का संबंध तीन चरणों, […]

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चंद राजाओं की विरासत है कुमाऊं का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य


नवीन जोशी, नैनीताल। आधुनिक भौतिकवादी युग के मानव जीवन में सैकड़ों-हजारों वर्ष पुरानी कम ही सांस्कृतिक परंपराएं शेष रह पाई हैं। इन्हीं में एक आज कुमाऊं ही नहीं उत्तराखंड राज्य की सांस्कृतिक […]

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इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के नाम-उपनाम व एतिहासिक घटनायें


वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली – पेशावर कांड के नायक इन्द्र मणि बडोनी: उत्तराखंड का गाँधी देवकी नंदन पांडे: कुमाऊँ का गाँधी अनुसुया प्रसाद बहुगुणा: गढ़ केसरी बद्री दत्त पांडे: कुमाऊँ […]

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आधुनिक विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध और प्रामाणिक था भारतीय ज्ञान


पांच विज्ञान के वर्तमान दौर में आस्था व विश्वास को अंधविश्वास कहे जाने का चलन चल पड़ा है। आस्था और विज्ञान को एक दूसरे का बिल्कुल उलट-विरोधाभाषी कहा जा रहा है। […]

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सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत है कुमाउनी शास्त्रीय होली


-पौष माह के पहले रविवार से ही शुरू हो जाती हैं शास्त्रीय रागों में होलियों की बैठकें और सर्वाधिक लंबे समय चलती हैं होलियां -प्रथम पूज्य गणेश से लेकर पशुपतिनाथ […]

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पाषाण युग से यायावरी का केंद्र रहा है कुमाऊं


-पाषाणयुगीन हस्तकला को संजोए लखु उडियार से लेकर रामायण व महाभारत काल में हनुमान व पांडवों से लेकर प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग, आदि गुरु शंकराचार्य, राजर्षि विवेकानंद, महात्मा गांधी व […]

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बैरन (18 नवंबर 1841) से पहले ही 1823 में नैनीताल आ चुके थे कमिश्नर ट्रेल


-नैनीताल की आज के स्वरूप में स्थापना और खोज को लेकर ऐतिहासिक भ्रम की स्थिति नवीन जोशी, नैनीताल। इतिहास जैसा लिख दिया जाए, वही सच माना जाता है, और उसमें […]

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अंग्रेजों के आगमन (1815) से ही अपना अलग अस्तित्व तलाशने लगा था उत्तराखंड


-अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी थी अस्तित्व की तलाश -सिगौली की संधि में किया गया था उत्तराखंड को अपने परंपरागत कानूनों के साथ अलग इकाई के रूप में माने […]

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कुमाऊं में ‘च्यूड़ा बग्वाल” के रूप में मनाई जाती थी परंपरागत दीपावली


-ऐपण और च्यूड़ों का होता था प्रयोग नवीन जोशी, नैनीताल। वक्त के साथ हमारे परंपरागत त्योहार अपना स्वरूप बदलते जाते हैं, और बहुधा उनका परंपरागत स्वरूप याद ही नहीं रहता। […]

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नगर पालिका के हाथों से छिना ‘शरदोत्सव’, अब ‘सत्ता’ कराएगी ‘नैनीताल शीतोत्सव’


‘शीतोत्सव’ के नए अवतार में परिवर्तित हो जाएगी 1890 से जारी ‘शरदोत्सव’परंपरा -नगर पालिका से राज्य की ‘सत्ता’ के हाथ में चला जायेगा आयोजन नवीन जोशी, नैनीताल। 1890 से होते आ […]

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ढाई हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक थाती से रूबरू कराएगा हिमालय संग्रहालय


-ईशा से तीन सदी पूर्व की कुषाण कालीन स्वर्ण मुद्रा सहित उत्तराखंड में मिली और यहां की ऐतिहासिक विरासतें हैं संजोई कुमाऊं विवि के इस संग्रहालय ने -एशियाई विकास बैंक […]

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इतिहास होने की ओर शेरशाह सूरी के जमाने की ‘गांधी पुलिस’ पर अब ‘नो वर्क-नो पे’ की तलवार


पटवारियों के लिए ‘नो वर्क-नो पे’ लागू करने में सरकार भी आएगी कटघरे में -‘तदर्थ” आधार पर चल रही प्रदेश की राजस्व व्यवस्था नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजों से भी पहले […]

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उत्तराखंड : सर्वप्रथम 1897 में उठी थी अलग राज्य की मांग


-एक शताब्दी से अधिक लम्बे संघर्ष से नसीब हुआ उत्तराखंड राज्य -सर्वप्रथम 1897 में इंग्लेंड की महारानी विक्टोरिया के समक्ष रखी गई थी कुमाऊं को प्रांत का दर्जा देने की […]

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1830 में मुरादाबाद से हुई कुमाउनी रामलीला की शुरुआत


Kumaoni Ramlila -कुमाऊं की रामलीला की है देश में अलग पहचान नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश के कुमाऊं मंडल में होने वाली कुमाउनी रामलीला की अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं राग-रागिनियों […]

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स्कॉटलेंड से गहरा नाता रहा है कुमाऊं और उत्तराखंड का 


132 वर्ष के अंग्रेजी राज में 70 वर्ष रहे स्कॉटिश मूल के कमिश्नर ट्रेल, बेटन व रैमजे, अपने घर की तरह मानते थे उत्तराखंड को, उन्होंने परंपरागत कानूनो को दी […]

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