उत्तराखंड में ‘दावानल’ की राष्ट्रीय आपदा : न खुद भड़की आग, न उकसाया हवा ने


  पूरी तरह मानव जनित थी आग  !

-सभी आग कहीं न कहीं लोगों द्वारा ही लगाई गई हैं, तापमान कम होने से प्राकृतिक कारणों से आग लगने का अभी कोई कारण नहीं
-आग को भड़काने में प्राकृतिक हालात बने मददगार, अलबत्ता लकड़ी माफिया द्वारा आग लगाने की संभावनाओं से इन्कार
नवीन जोशी, नैनीताल। पहली बार ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित उत्तराखंड की वनाग्नि पूरी तरह मानव जनित है, और इसके प्राकृतिक कारणों से शुरू होने के कहीं कोई सबूत या स्थितियां नहीं हैं। अलबत्ता पिछले तीन-चार दिनों में जब यह आग दावानल के रूप में दिखाई दी, तब प्राकृतिक हालातों ने जरूर इसे इस हद तक भड़काने में ‘आग में घी डालने’ जैसा कार्य किया। वहीं वन माफिया द्वारा आग लगाने के दावों को खारिज तो नहीं किया जा रहा है, पर इसकी स्पष्ट वजह भी नहीं बताई जा रही है।

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नैनीताल एनआरएचएम में घोटाले की बू !


  • प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव को किया निर्देशित
  • नैनीताल डीएम के आदेश पर दिसंबर 2014 में संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर से की गयी प्रारंभिक जांच में 4.67 करोड़ रुपये के दुर्विनियोग एवं एक करोड़ रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाने का है रिपोर्ट में उल्लेख

नवीन जोशी, नैनीताल। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नैनीताल जनपद के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्य कार्यक्रम के बाबत संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर पर हुई एक जांच में उजागर हुए तथ्यों के आधार पर मिली एक शिकायत पर संज्ञान लिया है, और राज्य के मुख्य सचिव से इस मामले में आवेदक की शिकायत पर कार्रवाई करने एवं कृत कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराने एवं वेब पोर्टल पर भी जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश दिये हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार मिशन के तहत खातों में चार करोड़ 67 लाख 39 हजार 389 रुपये अधिक दिखाये गये हैं, तथा नौ लाख 53 हजार 563 रुपये से अधिक की शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने की बातें कही गयी हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में शिकायतकर्ता के वाहन भी चलते रहे हैं, तथा इसी सम्बन्ध में चेकों से छेड़छाड़ के आरोप में शिकायतकर्ता के घर की कुर्की हो चुकी है।

राष्ट्रीय सहारा 14 फरवरी 2016
राष्ट्रीय सहारा 14 फरवरी 2016

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नैनीताल नगरपालिका के हाथ से रिक्शे भी ‘जायेंगे’, तभी ई-रिक्शा आयेंगे


02NTL-1-पूर्व में शरदोत्सव का आयोजन, फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगी भी जा चुकी है हाथ से, होगा आर्थिक नुकसान
नवीन जोशी, नैनीताल। नगरवासियों, यहां आने वाले सैलानियों के लिये यह खबर अच्छी है कि नगर में मौजूदा तीन पहिया रिक्शों की जगह बैटरी से चलने वाले ईको-फ्रेंडली ई-रिक्शा चलेंगे। इनमें अपेक्षाकृत तेज गति से एक साथ दो की जगह चार से अधिक सवारियां एक से दूसरे स्थान पर पहुंच पायेंगे, वहीं कुछ हद तक यात्रियों को महंगी टैक्सियों की जगह सस्ता और प्रदूषण मुक्त यातायात का साधन भी उपलब्ध होगा। लेकिन देश की दूसरी प्राचीनतम नगर पालिका नैनीताल के लिये यह खबर इतनी अच्छी शायद न हो। उसके हाथ से रिक्शों का नियंत्रण, लाइसेंस, नियमों का पालन न करने पर चालान आदि करने का अधिकार चला जायेगा। यह खबर इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि यह सरकार के आय बढ़ाने की उलाहनाओं और 74वें संविधान संसोधन के जरिये पालिकाओं को अधिक स्वतंत्र व मजबूत बनाने के संकल्प के विपरीत होगा। साथ ही पूर्व में वन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत व पेयजल आदि विभागों और हालिया दौर में फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगियों व शरदोत्सव के आयोजन को खोने के बाद पालिका वर्तमान में नगर में चलने वाले 82 पंजीकृत रिक्शों के संचालन का अधिकार भी खो देगी।

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इंटरनेट की दुनिया की ताजा खबरें


नए मीडिया के आने से परंपरागत प्रिंट मीडिया के समक्ष बड़ी चुनौती समय से अधिक तेजी से हो रहे मौजूदा बदलाव के दौर में परंपरागत या प्रिंट पत्रकारिता के करीब दो हजार वर्ष तक रहे एकाधिकार को 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि, ‘ई-सूचना हाईवे’ के रूप में अस्तित्व में आये इंटरनेट के माध्यम से जुड़े साइबर मीडिया, साइबर जर्नलिज्म, ऑनलाइन जर्नलिज्म, इंटरनेट जर्नलिज्म, कम्प्यूटराइज्ड जर्नलिज्म, वेबसाइट पत्रकारिता व वेब पत्रकारिता सहित कई समानार्थी नामों से पुकारे जाने वाले ‘कलम रहित’ नये मीडिया और इसके प्रमुख घटक सोशल मीडिया ने पिछले करीब दो दशकों में बेहद कड़ी चुनौती दी है। … पढ़ना जारी रखें इंटरनेट की दुनिया की ताजा खबरें

Independence Day Celebration in Nainital

उत्तराखंड के पहाड़ी बच्चे नहीं मनाते गणतंत्र दिवस, जानिए क्यों ?


-शीतकालीन विद्यालय रहते हैं बंद, अधिकांश बच्चों को नहीं पता कैसे मनाते हैं गणतंत्र दिवस
नवीन जोशी, नैनीताल। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में अधिकांश बच्चों को गणतंत्र दिवस मनाने के बारे में जानकारी नहीं है। कारण, उनके विद्यालय गणतंत्र दिवस के दौरान शीतकालीन अवकाश के लिए बंद होते हैं, इसलिए न स्कूलों में गणतंत्र दिवस का आयोजन होता है, और न ही बच्चों को ही देश के अपने संविधान के साथ वास्तविक स्वतंत्रता के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के आयोजन की जानकारी हो पाती है। इसलिये वे गणतंत्र दिवस आयोजनों में भी भागेदारी नहीं कर पाते हैं।

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अब बनाइये ऐसे बंबू हट, जिन पर गोली, आग व भूकंप का भी असर न होगा


Bamboo Huts at Maheshkhan
महेशखान में वन विभाग के बम्बू हट
Interior of Bamboo Huts at Maheshkhan
महेशखान में वन विभाग के बम्बू हट का इंटीरियर

-नैनीताल स्थित चिड़ियाघर में ऐसा ही एक बंबू हट, जो है पूरी तरह ईको फ्रेंडली तथा बारिश, सर्दी-गर्मी व बारिश के प्रभावों से भी सुरक्षित
नवीन जोशी, नैनीताल। पहाड़ों पर सीमेंट, सरिया की जगह हल्की संरचना के, पारिस्थितिकी के अनुकूल यानी ईको-फ्रेंडली घर बनाने की जरूरत तो बहुत जतायी जाती है, और इसके लिये बंबू हट यानी बांश के बनों घरों का विकल्प सुझाया भी जाता है, लेकिन बंबू हट एक सुरक्षित घरों की जरूरतों को पूरा नहीं करते। उनमें जल्द बारिश-नमी की वजह से फफूंद लग जाती है। बांश की लकड़ी को दीपक भी कुछ वर्षों के भीतर चट कर जाती है, और बांश की खपच्चियों के बीच से सर्द हवायें भीतर आकर बाहर जैसी ही ठंड कर देती हैं। वहीं ऐसे घरों में आग लगने, हल्के धक्कों में भी इसकी दीवारों को तोड़कर किसी के भी भीतर घुस जाने जैसे अन्य तमाम खतरे भी बने रहते हैं। लेकिन अब आप चाहें तो बांश से ही पूरी तरह ईको फ्रेंडली के साथ ही पूरी तरह सुरक्षित बंबू हट बनाने की अपनी ख्वाहिश आम घरों से कम कीमत में पूरी कर सकते हैं। ऐसा ही एक बंबू हट मुख्यालय स्थित नैनीताल जू में रिसेप्सन, टिकट काउंटर व सोविनियर शॉप के लिये इन दिनों निर्मित किया जा रहा है।

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‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’


Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • राष्ट्रपति ने किए शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश पर हस्ताक्षर
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की ‘शत्रु संपत्ति’ के मालिक राजा महमूदाबाद यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा देश के राष्ट्रपति द्वारा केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा पेश किये गये 47 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी शत्रु-संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 को पर हस्ताक्षर करने से हुआ है। इस संशोधन अध्यादेश के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों जिन्हें शत्रु संपत्ति कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे। नए अध्यादेश से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें हो सकती हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों की लागत वाले 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्तियों सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को 10 सितंबर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था।

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‘काले-मैकालों’ का नया साल सबको मुबारक हो यारो !


KC Pantभारत में अंग्रेजी शिक्षा के प्रवर्तक ‘लॉर्ड मैकाले’ ने कभी अपने पिता को पत्र लिखा था-‘आप आस्वस्त रहें, हमें भारत को छोड़ना भी पड़े तो हम यहां ऐसे काले अंग्रेजों को छोड़ जाएंगे, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति, स्वाभिमान और शर्म तक भले छोड़ दें पर अंग्रेजियत नहीं छोड़ेंगे… इसकी जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं।” जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए तो मैकाले को पता नहीं था कि जो काले अंग्रेज, भारत में रहेंगे वे धर्म व संस्कृति के ठेकेदार बन देश को लूटने में बढ़-चढ़ कर भाग भी लेंगे। शायद भारत की ऐसी हालत देख लॉर्ड विलियम वेंटिंग के जमाने में पकड़े गए ठग पिण्डारियों की रूह भी कॉंप रही होगी। इस आंग्ल नव वर्ष पर महाकवि तुलसी की एक चौपाई “बिछुड़त एक प्राण हर लेहीं, मिलत एक दारुण दु:ख देहीं”  के साथ यादों के इन्हीं गलियारों से निकली है केसी पंत ‘किसन” सेवानिवृत्त अध्यापक, हरी निवास, सूखाताल, नैनीताल की यह कविता- पढ़ना जारी रखें “‘काले-मैकालों’ का नया साल सबको मुबारक हो यारो !”

प्रयोगशाला में दुनिया की इकलौती बची प्रजाति-पटवा के क्लोन तैयार


Rashtriya Sahara 15.12.15-सरोवरनगरी के निकट इसी प्रजाति के नाम पर स्थित है पटवाडांगर नाम का कस्बा
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के जैव प्रोद्योगिकी संस्थान भीमताल स्थित प्लांट एंड मॉलीक्यूलर बायलॉजी प्रयोगशाला ने एक अनूठा कारनामा कर डाला है। प्रयोगशाला में दुनिया की एक ऐसी प्रजाति का प्रयोगशाला में क्लोन तैयार करने में सफलता प्राप्त की है, जो पूरी तरह से विलुप्त होने की कगार पर है, और जिसके दुनिया में 100 से भी कम आखिरी पौधे ही बचे हैं, और इसके प्राकृतिक तौर पर नए पौधे उगने की प्रक्रिया भी समाप्त हो चुकी है। जैव पारिस्थितिकी के लिहाज से यह वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता आंकी गई है, और अमेरिका की शोध पत्रिका-अमेरिकन जर्नल ऑफ प्लांट साइंस व एशियन जर्नल ऑफ माईक्रोबायोलॉजी एंड इन्वायरमैंटल साइंस एवं इण्डियन जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में भी इस बाबत शोध पत्र प्रकाशित किये गये हैं।

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पर्यटन, हर्बल के बाद अब जैविक प्रदेश बनेगा उत्तराखंड


विभिन्न प्रकार के बीज
विभिन्न प्रकार के बीज

-प्रदेश के जैविक उत्पादों का बनेगा अपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
-उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के प्रस्ताव को मुख्य मंत्री ने दी हरी झंडी
-राज्य में ही पहली बार लगने जा रही कलर सॉर्टिंग मशीनों से स्थानीय ख्याति प्राप्त उत्पाद राजमा, चौलाई, गहत, भट्ट आदि के जियोग्रेफिकल इंडेक्स बनेंगे
-इस हेतु रुद्रपुर में मंडी परिषद के द्वारा एक वर्ष के भीतर बनाया जाएगा 1500 टन क्षमता का कोल्ड स्टोर और तीन हजार टन क्षमता का गोदाम

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी सुकून देने वाली हो सकती है। अभी भी अपेक्षाकृत सस्ती मिल रहीं उत्तराखण्ड की जैविक दालें (मौंठ 50, भट्ट 70 तथा गहत और राजमा 120 रुपये प्रति किग्रा.) देश की महँगी दालों का विकल्प हो सकती हैं। पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित उत्तराखंड एक नए स्वरूप में स्वयं को ढालने की राह पर चलने जा रहा है। यह राह है हर्बल प्रदेश बनने की, जिस पर अब तक पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित किये जा रहे उत्तराखण्ड ने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड, मंडी परिषद, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद एवं कृषि एवं उद्यान आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश को जैविक प्रदेश यानी जैविक उत्पादों का प्रदेश बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में राज्य के सभी पर्वतीय जिलों के 10 ब्लॉकों को जैविक ब्लॉक घोषित कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला जैविक जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है, और आगे चमोली व पिथौरागढ़ को भी जैविक जनपद बनाने की तथा अगले चरण में सभी पर्वतीय जिलों को जैविक जिलों के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। साथ ही प्रदेश के जैविक उत्पादों के लिए प्रदेश में ही बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने को मुख्यमंत्री के स्तर से हरी झंडी मिल गई है। प्रस्तावित जैविक प्रदेश में जैविक खाद्यान्नों के साथ जैविक दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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भगवान राम की नगरी के समीप माता सीता का वन ‘सीतावनी’


Pictures of Sitabani Imagesदेवभूमि कुमाऊं-उत्तराखंड में रामायण में सतयुग, द्वापर से लेकर त्रेता युग से जुड़े अनेकों स्थान मिलते हैं। इन्हीं में से एक है त्रेता युग में भगवान राम की धर्मपत्नी माता सीता के निर्वासन काल का आश्रय स्थल रहा वन क्षेत्र-सीतावनी, जो अपनी शांति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ मनुष्य को गहरी आध्यात्मिकता के साथ मानो उसी त्रेता युग में लिए चलता है। नैनीताल जनपद में भगवान राम के नाम के नगर-रामनगर से करीब 20 किमी दूर घने वन क्षेत्र में जिम कार्बेट नेशनल पार्क के निकट मौजूद सीतावनी माता सीता, लव-कुश व महर्षि बाल्मीकि के मंदिरों, सीता व लव-कुश के प्राकृतिक जल-धारों के साथ ही सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों को देखने के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए यहां जंगल सफारी के साथ ही पौराणिक महत्व के स्थल की आनंद दायक सैर को दोहरा आनंद लिया जा सकता है।
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सेटिंगबाज ठेकेदारों पर मेहरबान हुई उत्तराखंड सरकार, इकलौती निविदा से भी हो सकेंगे करोड़ों के कार्य


Uttarakhand Map

-असीमित धनराशि के कार्य केवल एक निविदा के माध्यम से भी कराए जा सकेंगे

-कार्यालय अध्यक्ष मनमर्जी से बिना निविदा कर सकेंगे 50 हजार रुपए तक की खरीदें

-वहीं राज्य के छोटे ठेकेदारों की मांगें सरकार ने की अनसुनी

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, प्रदेश सरकार सरकारी विभागों में सामानों की बिक्री करने वाले व कार्य कराने वाले खासकर अधिकारियों के मुंह लगे ठेकेदारों पर मेहरबान हो गई लगती है। इसके लिए सरकार ने उन्हीं नौकरशाहों-विभागीय अधिकारियों पर अधिक भरोसा करने का रास्ता चुना है, जिन पर अभी सूचना आयोग के जरिए खुले मामले में वर्ष 2013 में राज्य में आई महाप्रलयकारी आपदा के राहत कार्यों में ‘चिकन-मटन” खाने से राज्य सरकार की बड़ी किरकिरी हुई है, और राज्य में हमेशा से जिन पर बेलगाम होने के आरोप लगते रहते हैं। विभागीय अधिकारी अब बिना निविदा के 50 हजार रुपए तक की खरीदें कर सकेंगे, जबकि डेढ़ करोड़ रुपए तथा इससे अधिक असीमित धनराशि के कार्य केवल एक निविदा के माध्यम से भी कराए जा सकेंगे। आने वाले समय में इस शासनादेश से राज्य में निर्माण कार्यों और खरीद की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। वहीं राज्य के छोटे ठेकेदारों की उन्हें कार्यों में प्राथमिकता देने, बड़े कार्यों के बजाय कार्यों को छोटे टुकड़ों में कराकर अधिकाधिक लोगों को कार्य में शामिल करने जैसी लंबे समय से चली आ रही मांगें सरकार ने अनसुनी कर दी हैं।

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आपदा राहत के नाम पर अब नहीं उड़ा सकेंगे चिकन, मटन, बिरयानी…..


-केंद्र सरकार ने पहली बार तय किए राज्य आपदा मोचन निधि यानी एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं की तात्कालिक मरम्मत के मानक
-अब तक नहीं थे कोई मानक, होती थी मनमानी
-राज्य सरकार ने अनुग्रह राहत वाले हिस्से को तो सार्वजनिक किया, परंतु राहत के हिस्से को नहीं किया है सार्वजनिक
नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश में वर्ष 2013 में आई दैवीय आपदा के राहत कार्यों में जिस तरह अधिकारियों के चिकन खाने और मनमाना धन उड़ाने की खबरें आई हैं, वह भविष्य के लिए बीती बात हो सकती हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने देश के इतिहास में पहली बार वर्ष 2015 2020 से की अवधि के लिए राज्य आपदा मोचन निधि यानी एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया निधि यानी एनडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं तात्कालिक मरम्मत के मानक तय कर दिए हैं। इन मानकों के आने के बाद तय कर दिया गया है कि आपदा आपदा आने के बाद राहत के नाम पर राज्य के नौकरशाह और सियासतदां क्या करते और क्या नहीं, तथा अधिकतम कितनी धनराशि खर्च कर सकते हैं। इन मानकों के बाद आपदा राहत के नाम पर होने वाली मनमानी और लूट पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद की जा रही है।

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विश्व योग दिवस के साथ युग परिवर्तन की शुरुआत, विश्व गुरु बनने की राह पर भारत


प्रकृति योग
प्रकृति योग

Image result for योग दिवस के साथ युग परिवर्तनबात कुछ पुराने संदर्भों से शुरू करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 1836 में उनके गुरु आचार्य रामकृष्ण परमहंस के जन्म के साथ ही युग परिवर्तन गया है काल प्रारंभ हो। यह वह दौर था जब देश में 700 वर्षों की मुगलों की गुलामी के बाद अंग्रेजों के अधीन था, और पहले स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल भी नहीं बजा था।
बाद में महर्षि अरविन्द ने प्रतिपादित किया कि युग परिवर्तन का काल, संधि काल कहलाता है और यह करीब 175 वर्ष का होता है …

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उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त


-प्रति एक हजार की जनसंख्या पर आउटसोर्सिंग से अधिकतम दो पर्यावरण मित्र ही होंगे तैनात नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के नगर निकायों के लिए बताए नए ढांचे में सफाई कर्मचारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों, सहायक अध्यापिका एवं लाइब्रेरियन सहित करीब डेढ़ दर्जन पद नामों को समाप्त कर दिया है। इनमें से सफाई कर्मचारियों का नाम परिवर्तित कर उन्हें पर्यावरण मित्र नाम देकर उनकी नियुक्ति केवल मृतक आश्रित कोटे से अथवा आउटसोर्सिंग से करने की नई व्यवस्था कर दी है, जबकि अन्य पद नामों को गैर जरूरी बताते हुए समाप्त कर दिया गया है। चतुर्थ श्रेणी के मृत संवर्ग … पढ़ना जारी रखें उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त