डा. मुरली मनोहर जोशी हो सकते हैं भारत के अगले राष्ट्रपति !


  • गौरतलब है कि जुलाई माह में देश को नया राष्ट्रपति मिलना तय है। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। हालांकि लंबे अर्से से चर्चा चल रही थी कि मुखर्जी एक कार्यकाल और चाहते हैं। एनडीए की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उनकी नरमी इस चर्चा को बल देती नजर आ रही थी। किंतु अब स्पष्ट हो चला है कि प्रणव दा दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनने जा रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें उनकी मनपसंद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का आवास रहा राजाजी मार्ग स्थित आवास नंबर 10 आवंटित कर दिया है। वर्तमान में केंद्रीय संस्कूति राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा को यह आवास आवंटित है। बताया गया है कि लुटियंस दिल्ली के गलियारों से लेकर नागपुर में संघ मुख्यालय तक इन दिनों नए राष्ट्रपति को लेकर जबरदस्त कयासबाजियों का दौर चालू है। आजादी के बाद पहली बार ऐसी संभावना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नीति और सिद्धांत को मानने वाले और उत्तराखंड निवासी व्यक्ति भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति बन सकते हैं।

    उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

    -देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं

    -अब चाहें तो ये अधिकारी स्थानीय लोकभाषाओं में भी ‘कोडवर्ड’ की तरह बात करके दुश्मन को दाल सकते हैं मुश्किल में 

    नवीन जोशी, नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये हमेशा से अपना सर्वाेच्च बलिदान देने के लिये प्रसिद्ध ‘देश के मस्तक’ कहे जाने वाले छोटे से राज्य उत्तराखंड के लोग हालाँकि हमेशा से अनेक क्षेत्रों में शीर्ष पदों पर रहते रहे हैं, किन्तु इधर उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व से ‘सर ऊंचा’ और ‘सीना चौड़ा’ होने के अनेक कारण एक साथ आ गए हैं। उत्तराखंड के तीन सपूतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एकमुश्त देश के तीन सर्वाेच्च पदों के जरिये देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोंपी गयी है। देश के ‘जेम्स बांड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद अब लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना ‘टीम मोदी’ में भारतीय सेना के शीर्ष पदों पर नियुक्त किये गये हैं। इससे उत्तराखंड में हर्ष होना स्वाभाविक ही है।

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उत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सीएम कैंडीडेट के तौर पर पसंद हो सकते हैं पूर्व नौकरशाह सूर्यप्रताप सिंह


  • कैग में एकमात्र आईएएस अधिकारी के तौर पर भी हैं तैनात, प्रधानमंत्री मोदी हैं इनकी इमानदारी से प्रभावित और उनके करीब भी हैं सिंह
  • बेहद चर्चित आईएएस अधिकारी रहे हैं एसपी सिंह, नैनीताल व हल्द्वानी में रहा 90 के दशक में जलवा, जीएमवीएन के एमडी भी रहे
  • भाजपा उत्तराखंड के साथ ही यूपी में भी कर सकती है उपयोग, हल्द्वानी और अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की संभावना
  • आरएसएस के साथ ही यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं

नवीन जोशी, नैनीताल। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत से सत्तारूढ़ होने के बाद से हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा अनपेक्षित निर्णय करती रही है, और बिहार व दिल्ली को छोड़कर उसके ये निर्णय सफल भी रहे हैं। ऐसे ही किसी निर्णय की उत्तराखंड में भी पार्टी रणनीति बना सकती है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री के करीबी, कैग में तैनात एकमात्र प्रशासनिक अधिकारी, 1982 बैच के आईएएस अधिकारी, पूर्ववर्ती यूपी के दौर में 1990 के दशक में तत्कालीन नैनीताल जनपद (वर्तमान ऊधमसिंह नगर जनपद भी शामिल) के डीएम रहते उस दौर में भी मजबूत व राज्य की मौजूदा काबीना मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से टकराने तथा गढ़वाल में जीएमवीएन के एमडी रहते गढ़वाल में एक तत्कालीन मंत्री (जिनके पुत्र वर्तमान में भी मंत्री हैं) के ससुर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बेहद दबंग और चर्चित रहे आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह भाजपा में शीघ्र शामिल हो सकते हैं, और आगामी विस चुनावों में पहले से घोषित अथवा बाद में मुख्यमंत्री के रूप में पेश किये जा सकते हैं। हालांकि बकौल सिंह अभी तक उनकी भाजपा नेताओं से कोई बात नहीं हुई है, और वे यह भी मानते हैं कि किसी भी दल के नेता उन्हें स्वीकार नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने इतना स्पष्ट कहा कि वे उनके एजेंडे को स्वीकार करने वाले किसी भी दल में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल विधायक बनने या सत्ता का आनंद प्राप्त करने के लिये नहीं वरन राजनीति में सुधार करने, समाज के लिये कुछ बेहतर करने के लिये राजनीति में आना चाहते हैं। उनकी ख्वाहिश है कि शिक्षा या किसी क्षेत्र विशेष में मौका मिले तो वे उसे सुधार कर रख दें। उन्होंने यूपी में सपा व बसपा को सांपनाथ व नागनाथ की संज्ञा देने के साथ भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी के विचारों के प्रति स्पष्ट तौर पर झुकाव भी प्रदर्शित किया है।
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500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !


2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी
2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी

एक 9/11  (यानी 11 सितंबर 2001) को हुए आतंकवादी हमले से न सिर्फ यह महाशक्ति अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ‘ट्विन टावर्स’ पर हुए आतंकवादी हमले से दहल गई थी। वहीँ इस 9/11  यानी नौ सितम्बर 2016 को भी वाकई बड़ा अद्भुत हुआ है। यहाँ भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर की रात (इससे पूर्व 28 सितम्बर 2016 की रात्रि पाक अधिकृत कश्मीर में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर,) काले धन पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ की तो वहां अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ‘वर्ल्ड आर्डर’ को बदलते हुए राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

कुछ भी कहिये, आज देश में साम्यवाद आ गया..
सबकी जेब में बराबर पैसे ! 😄

आज देश में रामराज भी आ गया !
जेल के दरवाजे भी खोल दो तो कोई बाहर जाने को तैयार नहीं 😜
तिजोरी खोल कर रख दो, कोई लूटने को तैयार नहीं 😝 पढ़ना जारी रखें “500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !”

रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !


रोहित शेखर -करीब एक वर्ष से राहुल-सोनिया को भी साधने के बावजूद कांग्रेस से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने से हैं नाखुश, कहा था-पिता के जन्म दीं के बाद होंगे ‘खुले पंछी’ -भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट व सांसद भगत सिंह कोश्यारी के हुई है बात, लालकुआ, भीमताल, किच्छा और काशीपुर सीटों से चुनाव लड़ने के दिए हैं विकल्प, समाजवादी पार्टी से भी हैं बेहतर संबंध नवीन जोशी, नैनीताल। कभी प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति के शीर्ष पुरुष रहे यूपी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर पिता की 80 वर्ष से सेवित … पढ़ना जारी रखें रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !

15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !


Gaurav Siddarth
बाइकर गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का उत्साह बढ़ाने उन्हें बाइक पर पीछे बैठाकर चलते योगगुरु बाबा रामदेव।

-एक देश में सर्वाधिक बाइकिंग का अमेरिकी बाइकर डेनेल लिन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा

-आगे अप्रैल 2017 तक 1.2 लाख किमी का अजेय रिकॉर्ड बनाने की है योजना
-बाइक, ग्लब्स व सुरक्षा उपकरणों से लेकर जीपीएस व हाईवे पर स्थानों की पहचान के लिए मोबाइल ऐप सहित सबकुछ भारतीय प्रयोग कर ‘मेक इन इंडिया’ को भी दे रहे बढ़ावा
नवीन जोशी, नैनीताल। देश के खिलाड़ी आज जहां रियो ओलंपिक में विश्व के खिलाड़ियों से रिकॉर्डों के लिए जूझ रहे हैं, वहीं देश में 70वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नैनीताल के गौरव सिद्धार्थ बिष्ट  एक विश्व रिकार्ड को तोड़कर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया है। एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। गौरव ने इस रिकॉर्ड को स्वतंत्रता दिवस पर तोड़ दिया है, साथ ही यह  भी साफ़ कर दिया है कि वह रिकॉर्ड बनाकर थमने वाले नहीं हैं, वरन आगे उनका इरादा फरवरी 2017 तक 1.2लाख किमी चलकर अजेय रिकार्ड बनाने का भी है। पढ़ना जारी रखें “15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !”

पहाड़ से ऊंचा तो आसमान ही हैः क्षमता


क्षमता बाजपेई
क्षमता बाजपेई

महिला दिवस पर एयर  इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाने वाली प्रदेश की पहली व इकलौती तथा देश की तीसरी कामर्शियल महिला पायलट कैप्टन क्षमता बाजपेई ने कहा-पहाड़ की होने के कारण ऊंचाइयों से डर नहीं लगता, क्योंकि पहाड़ से आगे तो ‘स्काई इज द लिमिट’ (यानी असीमित आसमान की सीमाएं ही हैं)

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, सही बात ही तो है, पहाड़ों से अधिक ऊंचा तो आसमान ही है। कोई पहाड़ से भी अधिक ऊंचे जाना चाहे तो कहां जाए, आसमान पर ही नां। पर कितने लोग सोचते हैं इस तरह से ?। लेकिन पहाड़ की एक बेटी क्षमता जोशी ने 1986 के दौरान ही जब वह केवल 18 वर्ष की थीं, अपने पहाड़ों की ऊंचाई से भी अधिक ऊंचा उड़ने का जो ख्वाब संजोया और उसे पूरा करने में जिस तरह परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अपनी पूरी ‘क्षमता’ लगा दी, नतीजे में वह प्रदेश की पहली और इकलौती कामर्शियल महिला पायलट ही नहीं, एयर इंडिया में प्रोन्नति पाकर सात वर्ष से कमांडर हैं, और न केवल स्वयं बल्कि हजारों लोगों को रोज पहाड़ों से कहीं अधिक ऊंचाइयों से पूरी दुनिया की सैर कराती हैं। इधर उन्होंने बीते महिला दिवस पर एयर  इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाकर देश-प्रदेश वासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

‘द ग्रेट खली’ के बनने में नैनीताल की नयना देवी का भी रहा है आशीर्वाद


Khali Nainital
नैनीताल की माल रोड पर जुलूस के साथ खली और स्वर्गीय निर्मल पांडे

-नैनीताल से रहा है खली का दो दशक पुराना नाता, शायद इसीलिये यहां से ‘द ग्रेट खली रिटर्न रेस्लिंग मेनिया’ के जरिये कर रहे हैं रिंग पर वापसी
-यहां 1998 में पहले कुमाऊं महोत्सव में सिने अभिनेता निर्मल पांडे के साथ पहुंचे थे
नवीन जोशी, नैनीताल। 24 फरवरी 2016 को नैनीताल जनपद के हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम से रिंग पर लौट कर रिंग पर करीब एक दशक बाद वापसी करने वाले दुनिया के ‘द ग्रेट खली’ का नैनीताल से रिश्ता करीब दो दशक पुराना रहा है। वह यहां ‘द ग्रेट खली’ नहीं ‘खली’ या ‘महाबली’ भी नहीं वरन अपने मूल नाम ‘दलीप सिंह राणा’ के रूप में पहुंचे थे। यहां उन्होंने नगर की आराध्य देवी नयना देवी के दरबार में शीश नवाया था और यहां से लौटने के तत्काल बाद ही मुंबई में आयोजित हो रही ‘मिस्टर इंडिया’ प्रतियोगिता के लिये आशीर्वाद लिया था। वह यह प्रतियोगिता जीत कर ‘मिस्टर इंडिया’ बने, और इसी के बाद वह ‘जॉइंट सिंह’ और ‘खली’ बनते हुये आखिर ‘द ग्रेट खली’ बनकर यहां लौटे हैं, और शायद इसीलिये उन्होंने यहीं से ‘कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट’  यानि सीडब्ल्यूई के जरिये अपने करियर की दूसरी पारी की शुरूआत की।

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नैनीताल की लतिका ने 12वें दक्षिण एशियाई खेलों में जीता स्वर्ण पदक


शिलांग में दक्षिण एशियाई खेलों के पोडियम पर पदक के साथ राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी।
शिलांग में दक्षिण एशियाई खेलों के पोडियम पर पदक के साथ राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी।

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी ने 12वें दक्षिण एशियाई खेल 2016 में खेलते हुये देश 53 किग्रा भार वर्ग में पदक जीतकर शहर तथा देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है। शिलांग के निग्रिमस इंडोर स्टेडियम में 13 से 15 फरवरी तक आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता में लतिका ने अपने पंचों का दम दिखाते हुये स्वर्ण पदक को अपने नाम किया। सोमवार को खेले गये प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने नेपाल की नीमा गुरंग को 17-6 से हराकर सोने का पदक अपने नाम किया, जबकि इससे पूर्व सेमी फाइनल में उन्होंने भूटान की मेरीडोना को 17-3 के अंतर से पटखनी दी।

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नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद

भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका तलाश रहे उन्मुक्त ने नैनीताल में गोल्फ स्टिक से उड़ाये छक्के


नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद

नवीन जोशी, नैनीताल। अपने कॅरियर की शुरुआत में दिल्ली के लिए ओपनर के रूप में 425 रनों की पारी और अंडर-19 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 रनों की नाबाद व कप्तानी पारी खेलकर आस्ट्रेलियाई दिग्गज पूर्व कप्तान इयान चैपल से प्रशंसा प्राप्त कर चुके उत्तराखण्ड मूल के युवा क्रिकेटर उन्मुक्त चंद भारतीय क्रिकेट टीम में ओपनर के रूप में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। बीती 5 फ़रवरी 2016 की शाम नैनीताल पहुंचे थे, और 6 की सुबह नैनीताल राजभवन स्थित गोल्फ कोर्स में उन्होंने गोल्फ खेलकर अपना दैनिक अभ्यास करते हुए पसीना बहाया। इस दौरान उन्होंने यहाँ नैनीताल राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक (क्लब) पर पहली बार हाथ आजमाते हुए कई ‘उन्मुक्त छक्कों’ सरीखे लम्बे शॉट भी खेले। साथ ही अपने दोस्तों के साथ नगर की प्राकृतिक सुंदरता में खोकर कई सेल्फी लीं। इस दौरान उन्होंने अपने कॅरियर, भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने की संभावनाओं, इसके लिए की जा रही मेहनत आदि पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन के अवकाश पर अपने घर-कुमाऊं आये हैं।

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पीसी तिवारी का मुख्यमंत्री हरीश रावत के नाम जेल से खुला ख़त


हरीश रावत
हरीश रावत

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री हरीश रावत जी,
उत्तराखण्ड सरकार,
देहरादून।

माननीय मुख्यमंत्री जी,
एक स्थानीय चैनल ईटीवी पर कल रात व आज सुबह पुनः नानीसार पर आपका विस्तृत पक्ष सुनने का मौका मिला। आपकी इस मामले में चुप्पी टूटने ये यह साबित हुआ कि उत्तराखण्ड में संघर्षरत जनता की आवाज आपकी पार्टी की सियासी सेहत को नुकसान पहुंचाने लगी है।

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अपने मरीजों ही नहीं, दुनिया को बचाने चला है यह डॉक्टर


डा.आशुतोष पन्त
डा.आशुतोष पन्त

15 फरवरी तक अखरोट के तीन हजार पौधे लगायेंगे पेड़ लगाने के जुनूनी डा. पंत
-अपने पिता की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लाखों औषधीय एवं फलदार पौधे लगा चुके हैं पेशे से चिकित्सक पर्यावरण प्रेमी
-प्रतिवर्ष न्यूनतम 10 हजार पौधे लगाने का है लक्ष्य
नवीन जोशी, नैनीताल। इस वर्ष शीतकाल में अपेक्षित बर्फ नहीं गिरने से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के साथ आसमान में ओजोन परत के छिद्र में लगातार वृद्धि होने, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन आदि पर चिंता तो सभी करते हैं, लेकिन विरले लोग ही हैं जो इन स्थितियों से स्वयं की चिंता किये बिना पूरी धरती को बचाने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। पेशे से हल्द्वानी में चिकित्सक डा. आशुतोष पंत जैसा कार्य राज्यों की पूरी सरकारें भी कर लें तो कम है। डा. पंत अपने पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लगातार अपने स्वयं के संसाधनों से यथासंभव अधिक से अधिक संख्या में औषधीय और फलदार पेड़ लगाते आ रहे हैं, और अब तक लाखों पौधे लगा चुके हैं। उनका लक्ष्य प्रतिवर्ष कम से कम दस हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह भी है कि इसके लिये अब तक उन्होंने किसी भी संस्था या व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया है, तथा आगे भी ऐसी कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं। इधर उन्होंने आगामी जनवरी से 15 फरवरी 24 के बीच प्रदेश के नैनीताल, चम्पावत और टिहरी जिलों के पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट की अच्छी प्रजातियों के तीन हजार पौधे लगाने का ऐलान किया है। बताया कि अखरोट के पेड़ों की आयु बहुत लंबी होती है, तथा इनके रोपण से पर्यावरण को लाभ के साथा ही ग्रामीणों की अच्छी आय भी होगी। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपनी भूमि पर लगाने के लिए उनसे नि: शुल्क पौधे प्राप्त कर सकता है।

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‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’


Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • राष्ट्रपति ने किए शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश पर हस्ताक्षर
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की ‘शत्रु संपत्ति’ के मालिक राजा महमूदाबाद यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा देश के राष्ट्रपति द्वारा केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा पेश किये गये 47 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी शत्रु-संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 को पर हस्ताक्षर करने से हुआ है। इस संशोधन अध्यादेश के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों जिन्हें शत्रु संपत्ति कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे। नए अध्यादेश से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें हो सकती हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों की लागत वाले 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्तियों सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को 10 सितंबर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था।

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Rashtriya Sahara 19 01 2016

नैनीताल के नवीन समाचार 



केन्द्रीय बजट में सुनी जाएगी नैनीताल की आवाजें ?


केवल आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही वास्तव में लौटाए पुरस्कार

Brajendra
डा. बृजेंद्र त्रिपाठी

-इनसे से भी आधों ने लौटाई पुरस्कार की राशि
नैनीताल (एसएनबी)। पिछले दिनों साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने की खूब चर्चाएं रहीं, और अनेक साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने की खबरें मीडिया में आर्इं। लेकिन सच्चाई यह है कि मुश्किल से आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही साहित्य अकादमी को औपचारिक तौर पर अपने पुरस्कार लौटाने के पत्र भेजे, वहीं इनमें से भी करीब आधों ने ही साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रुपए की धनराशि लौटाने की हिम्मत दिखाई।

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दिलीप कुमार की वजह से प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे एनडी, और किस्मत से बन गए थे नरसिम्हा राव


नारायण दत्त तिवारी
नारायण दत्त तिवारी

-पूर्व सीएम के दिल में अभी भी है 1991 का लोक सभा चुनाव हारने की टीस
नवीन जोशी, नैनीताल। दो प्रदेशों-यूपी (1976-1977, 1984-1985, 1988-1989) एवं उत्तराखंड (2002-2007) का मुख्यमंत्री रहने के रिकार्डधारक एवं देश की राजनीति में विदेश (1986-87) व उद्योग सहित अनेक मंत्रालयों में मंत्री तथा आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल (22 अगस्त 2007 – 26 दिसम्बर 2009) रहे पंडित नारायण दत्त तिवारी ने जिंदगी में अनेक चुनाव जीते और हारे भी, लेकिन 1991 का चुनाव हारने की टीस आज भी उनके मन में गहरे तक पैठी हुई है। यह टीस शनिवार को अपने विद्यालय में पहुंचने के दौरान उनकी जुबान पर आ गई। उन्होंने 1991 के चुनाव की पूरी कहानी बयां की और कहा कि दिलीप कुमार की वजह से वह यह चुनाव हारे और प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, जबकि हैदराबाद के लिए अपना (राजनीतिक तौर पर) ‘बोरिया-बिस्तर’ बांध चुके पीवी नरसिम्हाराव अपनी किस्मत से प्रधानमंत्री बन गए। उनके सामने बिना मेहनत थाली में सजा हुआ सा प्रधानमंत्री का पद आ गया।

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कैंची धाम से निकली थी एप्पल और फेसबुक की तरक्की और ओबामा की जीत की राह


कैंची में उत्तर वाहिनी शिप्रा नदी पर स्थित (आज भी मौजूद ) पुलिया पर बैठे बाबा नीब करौरी का एक दुर्लभ चित्र .

-सिलिकॉन वैली में जुकरबर्ग ने मोदी से किया था इस मंदिर का जिक्र, कहा था-फेसबुक को खरीदने के लिए फोन आने के दौर में इस मंदिर ने दिया था परेशानियों से निकलने का रास्ता
नवीन जोशी, नैनीताल। गत दिवस फेसबुक के संस्थापक व प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक मुख्यालय में मोदी से सवाल पूछने के दौरान अपने बुरे दिन याद करते हुए मोदी को बताया था, ‘जब 2011 के दौर में फेसबुक को खरीदने के लिए अनेक लोगों के फोन आ रहे थे, और वह परेशानी में थे । तब वे अपने गुरु एप्पल (दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी) के संस्थापक स्टीव जॉब्स से मिले। जॉब्स ने उन्हें कहा कि भारत जाओ तो उत्तराखंड स्थित बाबा नीब करौरी (अपभ्रंश नीम करोली) के कैंची धाम जरूर जाना। इस पर उन्होंने 2013 में एप्पल कंपनी के तत्कालीन प्रमुख टिम कुक के साथ कैंची धाम के दर्शन किए थे। इसी दौरान करीब एक वर्ष भारत में रहकर उन्होंने यहां लोगों के आपस में जुड़े होने को नजदीकी से देखा, और इससे उनका फेसबुक को एक-दूसरे को जोड़ने के उपकरण के रूप में और मजबूत करने का संकल्प और इरादा और अधिक मजबूत हुआ और उन्होंने फेसबुक को किसी को न बेचकर खुद ही आगे बढ़ाया।
वहीं एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की बात करें तो स्टीव स्वयं अवसाद के दौर से गुजरने के दौर में 1973 में एक बेरोजगार युवा-हिप्पी के रूप में अपने मित्र डैन कोटके के साथ बाबा नीब करोलीके दर्शन करने आये थे, किंतु इसी बीच 11 सितम्बर 1973 को बाबा के शरीर त्यागने के कारण वह दर्शन नहीं कर पाए, लेकिन यहां से मिली प्रेरणा से उन्होंने अपने एप्पल फोन से 1980 के बाद दुनिया में मोबाइल क्रांति का डंका बजा दिया। यहां तक ​​कहा जाता है की स्टीव ने अपने मशहूर मोनोग्राम (एक बाइट खाये सेब) को कैंची धाम से ही प्रेरित होकर ही बनाया है।

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