विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली


जब से मानव पृथ्वी पर आया है, तभी से वह स्वयं को भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता रहा है। प्रारम्भ में वह संकेतों या ध्वनि के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुँचाता रहा, समय बीतते उसने भाषा की खोज की और आसानी से अपनी बात कहने लगा। जैसे-जैसे मानव का विकास होता गया उसने परिवार बसाया, समाज का अंग बना। फिर उसकी दुनिया और बड़ी होती चली गई, और उसे अपनी बात ज्यादा दूर तक पहुँचाने की जरूरत पड़ने लगी। मनुष्य में अपनी आवाज को दूर तक पहुँचाने की चाह न जाने कब से रही है, और न … पढ़ना जारी रखें विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली

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नए मीडिया के आने से परंपरागत प्रिंट मीडिया के समक्ष बड़ी चुनौती समय से अधिक तेजी से हो रहे मौजूदा बदलाव के दौर में परंपरागत या प्रिंट पत्रकारिता के करीब दो हजार वर्ष तक रहे एकाधिकार को 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि, ‘ई-सूचना हाईवे’ के रूप में अस्तित्व में आये इंटरनेट के माध्यम से जुड़े साइबर मीडिया, साइबर जर्नलिज्म, ऑनलाइन जर्नलिज्म, इंटरनेट जर्नलिज्म, कम्प्यूटराइज्ड जर्नलिज्म, वेबसाइट पत्रकारिता व वेब पत्रकारिता सहित कई समानार्थी नामों से पुकारे जाने वाले ‘कलम रहित’ नये मीडिया और इसके प्रमुख घटक सोशल मीडिया ने पिछले करीब दो दशकों में बेहद कड़ी चुनौती दी है। … पढ़ना जारी रखें इंटरनेट की दुनिया की ताजा खबरें