शिक्षा एवं रोजगार समग्र

अपने ‘सुपर-डुपर जूनियर’ के ‘जबरा फैन’ हुए सदी के महानायक, अपूर्व ने कुछ ‘अपूर्व’ कर बढ़ाया ‘गौरव’

अपूर्व गौरव शाह
अपूर्व गौरव शाह

-शेरवुड कॉलेज के छात्र अपूर्व की कविता से अभिभूत होकर मांगा वीडियो, कहा अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर करेंगे कविता का प्रचार
नवीन जोशी, नैनीताल। व्यक्ति की महानता अपनी नहीं दूसरों में प्रशंसा में निहित होती है। एक दिन पूर्व ही फिल्म ‘ठग ऑफ हिंदुस्तान’ के लिये स्वयं के बजाय अपने सह कलाकार आमिर खान को ‘महान’ बताने वाले सदी के महानायक-बिग बी यानी अमिताभ बच्चन अब अपने एक ‘सुपर-डुपर जूनियर” के मानो ‘जबरा फैन’ हो गये हैं। एक राष्ट्रीय चैनल द्वारा सीधे प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम में अमिताभ को उनके पूर्व विद्यालय रहे शेरवुड कॉलेज नैनीताल के नौवीं कक्षा के छात्र अपूर्व गौरव शाह ने स्वच्छता अभियान पर लिखी हुई कविता सुनाते हुए कुछ ऐसा ‘अपूर्व’ कर ‘गौरव’ बढ़ाया कि उसकी प्रशंशा करते हुये अमिताभ ने टिप्पणी की-ऐसी कविता उन्होंने आज तक कभी नहीं सुनी। उन्होंने अपूर्व का उत्साहवर्धन करते हुए उनसे उनकी कविता का वीडियो भी मांगा और कहा कि वह अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर इस कविता को अपलोड कर इसका प्रचार करेंगे।

अपूर्व की अमिताभ के सम्मुख प्रस्तुत कविता को यहाँ क्लिक कर के देख सुन सकते हैं।

भूलना न होगा कि अमिताभ अपने दौर के महान कवि हरवंश राय बच्चन के पुत्र हैं। वह स्वयं भी कविता करते रहे हैं, और कई बार फिल्मों तथा अन्य मंचों पर स्वयं की तथा अपने पिता की प्रसिद्ध कविता मधुशाला के कई छंदों को खास अंदाज में स्वर भी देते रहे हैं। फिल्म ‘कभी-कभी’ में शीर्षक गीत ‘कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है’ हो या फिल्म अग्निपथ का शीर्षक गीत, उसे कविता के रूप में अमिताभ ने अपने स्वर देकर हमेशा के लिये अपने प्रशंसकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन उनकी वास्तविक महानता अपने प्रशंसकों की प्रशंसा करने में भी निहित है, जो यहां लाइव प्रसारित हो रहे टीवी कार्यक्रम के दौरान दिखी। उन्होंने अपूर्व की कविता के शब्दों-‘यदि निकला सफाई करने, संकल्प कड़ा मानें हम, कचरा उठाने की शर्मिंदगी से, देश बड़ा मानें हम।” को एकटक सुनते हुये आखिर में अपने खास अंदाज में जमकर तालियां बजायीं। अमिताभ ने कहा, ‘उन्होंने ऐसी कविता न कभी सुनी और न ही कभी बनाई। उन्होंने अपूर्व से पूछा, कहां से उसने यह सब सीखा और कहां से इतना आत्म विश्वास उसके अंदर आया। हमारे जमाने में तो ऐसा कुछ भी नहीं होता था।’ साथ ही उन्होंने गर्व जताया कि वह खुद शेरवुड कलेज के विद्यार्थी रहे हैं। इसके बाद अमिताभ से प्रशंसा के बोल सुनकर गदगद हुये मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के रामनगर निवासी अपूर्व ने कहा कि उनके क्षेत्र के एक दशरथ मांझी जब पहाड़ काट सकते हैँ तो हजारों-लाखों लोग भारत को स्वच्छ क्यों नहीं बना सकते। उसने बताया कि वह बचपन से ही कविता का शौक रहा है। वह पहले भी वाद विवाद समेत कई अन्य प्रतियोगिताएं जीतकर विद्यालय का नाम रोशन कर चुका है। अपूर्व के प्रधानाचार्य अमनदीप संधु ने कहा कि अमिताभ द्वारा उनके विद्यालय के छात्र की सराहना करना बेहद गर्व की बात है। इधर डीएम दीपक रावत ने अपूर्व को स्वच्छता अभियान के लिये नैनीताल जिले का ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की।

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यूसेट परीक्षा का परिणाम घोषित, 1024 बने पात्र

-पात्रता प्रमाण पत्र के लिए दो माह तक देने होंगे प्रमाण पत्र, दो वर्ष में पूरी करनी होगी परास्नातक होने की शर्त

Sherwoodनैनीताल। कुमाऊं विवि ने राज्य के महाविद्यालयों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा-यूसेट के परिणाम घोषित कर दिए हैं। 1024 अभ्यर्थियों को यूसेट की पात्रता हासिल हुई है। अब इन्हें अपने यूसेट पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए ठीक दो माह यानी आगामी नौ मई तक अपने आवेदन पत्र, हाईस्कूल के सर्टिफिकेट, स्नातक परीक्षा का अंक पत्र व जाति संबंधी प्रमाणपत्रों की प्रमाणित छाया प्रतियां विवि के यूसेट परीक्षा अनुभाग को उपलब्ध करानी होंगे। साथ ही यूसेट पात्रता का लाभ लेने के लिए अगले दो वर्ष के भीतर स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। 

परिणाम परीक्षा की वेबसाईट-यूसेटऑनलाइनडॉटओआरजी (https://usetonline.org) व विवि की आधिकारिक वेबसाईट-केयूनैनीतालडॉटइन (https://www.kunainital.ac.in) पर

उल्लेखनीय है कि यह समय सीमा अब तक एक वर्ष की थी, लेकिन यूजीसी ने अभी हाल ही में इसे बढ़ा दिया है। बृहस्पतिवार को कुमाऊं विवि के प्रशासनिक भवन में यूसेट परीक्षा का परिणाम जारी करने वाली मॉडरेशन कमेटी और परिणाम घोषित करने वाली स्टीयरिंग कमेटी की बैठकों के बाद परीक्षा सचिव प्रो. पीडी पंत ने परिणामों की घोषणा की। बताया कि 27 विषयों के लिए हुई परीक्षा के लिए 17,397 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे और इनमें से 14,329 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 4324 अभ्यर्थियों ने तीनों प्रश्नपत्रों में न्यूनतम अंक अर्जित किये हैं, जबकि हर वर्ग व विषय में तय 15 फीसद की पात्रता के आधार पर 1024 अभ्यर्थियों ने पात्रता प्राप्त की है। इनमें सामान्य वर्ग के 699, अन्य पिछड़ी जाति के 130, एससी के 137, एसटी के 37 व विकलांग श्रेणी के 21 अभ्यर्थी शामिल हैं। बताया कि बृहस्पतिवार रात्रि तक पात्र अभ्यर्थियों की सूची, परीक्षा परिणाम एवं संशोधन का विवरण यूसेट ऑनलाइन डॉट ओआरजी व केयूनैनीताल डॉट एसी डॉट इन वेबसाइटों पर जारी कर दिये जाएंगे। बैठक में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, जामिया मिलिया इस्लामिया विवि के कुलपति प्रो. तलत अहमद, प्रो. बीसी मेलकानी, डा. सुरेंद्र सिंह, प्रो. आरपी पंत, प्रो. आरसी मिश्रा, प्रो. डीसी पांडे, डीएस बोनाल व प्रो. पीडी पंत आदि समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

रानीखेत में सात से नौ अप्रैल के बीच आयोजित होगी सेना की भर्ती रैली

Press Release (Hindi) नैनीताल। आगामी सात से नौ अप्रैल 2015 तक कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर रानीखेत में यूनिट हेडक्वार्टर्स कोटा के तत्वावधान में सैनिक सामान्य ड्यूटी, सैनिक लिपिक तथा सैनिक ट्रेड्समैन पद हेतु भर्ती रैली आयोजित की जायेगी। यह भर्ती रैली युद्ध विधवाओं के पुत्रों, कुमाऊं, नागा व अन्य रेजीमेंटों के भूतपूर्व एवं सेवारत सैनिकों, युद्ध के दौरान शहीद एवं घायल सैनिकों के पुत्रों तथा सगे भाइयों के साथ ही कानूनी रूप से गोद लिये हुए बच्चों सहित सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भाग ले सकते हैं ।
सेना के लखनऊ मुख्यालय से बुधवार को जारी जानकारी के अनुसार इस भर्ती रैली के तहत सैनिक सामान्य ड्यूटी पद के लिए यूपी और उत्तराखंड के अभ्यर्थियों के लिये सात अप्रैल को जबकि शेष राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए आठ अप्रैल 2015 को भर्ती रैली आयोजित की जायेगी। सैनिक लिपिक एवं सैनिक ट्रेड्समैन पदों के लिए सभी राज्यों व देश के केंद्र शासित प्रदेशों के अभ्यर्थियों के लिए एवं लिपिक पद हेतु केवल कुमाऊं व नागा रेजीमेंट के सेवारत एवं भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित अभ्यर्थियों के लिए नौ अप्रैल को होगी। इसके अलावा म्यूजिशियन के लिए ट्रेड्समैन एप्टीट्यूट टेस्ट 09 अप्रैल को जबकि शेष अन्य ट्रेडों के लिए ट्रेड्समैन एप्टीट्यूट टेस्ट 10 अप्रैल को होगा। वहीं सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए लिखित सामान्य प्रवेश परीक्षा आगामी 31 मई को आयोजित की जायेगी। योग्य अभ्यर्थियों को रैली में अपने समस्त शैैक्षिक एवं वांछित अंक एवं प्रमाण पत्र, निवास एवं जाति, चरित्र प्रमाण पत्र, एनसीसी/कम्प्यूटर/खेलकूद प्रमाण पत्र आदि प्रमाण पत्रों, 15 नवीनतम रंगीन फ़ोटो, सैनिक सामान्य ड्यूटी के अभ्यर्थियों के लिए अविवाहित प्रमाण पत्र सेवारत एवं भूतपूर्व सैनिको के आश्रित अभ्यर्थियों के लिए डिस्चार्ज बुक/पेंशन बुक की मूल प्रति के साथ आना होगा। सैनिक सामान्य ड्यूटी के पदों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 10वीं पास, सैनिक सामान्य ड्यूटी व अन्य पदों के लिए प्रत्येक विषय में 33 फीसद एवं कुल 45 फीसद अंकों के साथ 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, जबकि स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को यह अनिवार्यता नहीं है। वहीं सैनिक सामान्य ड्यूटी के पदों के लिए अनुसूचित जन जाति के अभ्यर्थी की शैक्षिक योग्यता 8वीं पास तथा सैनिक टे्रड्समेन पद के लिए 10वीं पास जबकि हाउस कीपर एवं मेस कीपर के लिए 8वीं पास होना एवं सैनिक लिपिक पद के लिए सभी विषयों में कम से कम 40 फीसद अंकों एवं कुल 50 फीसद अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण होना चाहिए। सैनिक सामान्य ड्यूटी के पद के लिए आवेदकों की आयु परीक्षा की तिथि को 17.5 से 21 वर्ष जबकि अन्य पदों के लिए 17.5 से 23 के बीच होनी चाहिए। अधिक जानकारी कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर रानीखेत से प्राप्त की जा सकती है।

ऑनलाइन मिलेगी एससी, एसटी व ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति

नैनीताल। एआईसीटीई, एमसीआई, एनसीटीई तथा तकनीकी शिक्षा परिषद उत्तराखण्ड के अंतर्गत मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत अनुसूचितजाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को पोस्ट मैट्रिक यानी हाईस्कूल के बाद मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए वर्ष 2014-15 से ऑनलाइन स्कॉलरशिप योजना लागू की गई है। जानकारी देते हुये जिला समाज कल्याण अधिकारी जगमोहन सिंह कफोला ने बताया कि पात्र छात्र इन योजनाओं के लिए समाज कल्याण विभाग की बेबसाइट-http://esclarship.uk.gov.in पर आखिरी तिथि 31 दिसम्बर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। माता-पिता अथवा अभिभावक की ढाई लाख तक वार्षिक आय तक के एससी, एसटी एवं डेढ़ लाख रुपए तक आय वाले ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी योजना के लिए पात्र हैं। आवेदन के साथ आवेदनकर्ता को पासपोर्ट साइज का नवीनतम फोटो, सक्षम अधिकारी द्वारा निर्गत मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति व आय प्रमाण पत्र एवं संबंधित शिक्षण संस्थान द्वारा निर्गत बोनाफाईड सर्टिफिकेट, अंतिम उत्तीर्ण परीक्षा का प्रमाण पत्र व मार्कशीट तथा छात्र के नाम, पते व आईएफसी कोड सहित बैंक एकाउंट नंबर युक्त किसी भी सीबीएस बैंक की पास बुक की फोटो कापियां स्व-प्रमाणित प्रतियां कर अपलोड करनी हैं। अधिक जानकारी जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से किसी भी कार्यदिवस पर जाकर प्राप्त की जा सकती है।

27 विषयों के लिए यूसेट प्रवेश परीक्षा आयोजित

पहली बार ऑनलाइन भरे जा सकेंगे परीक्षा फार्म, एसएमएस से मिलेगी फार्म स्वीकृत होने एवं योग्यता हासिल करने की सूचना, पांच नए केंद्रों हल्द्वानी, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, गोपेश्वर व हरिद्वार में भी दी जा सकेगी परीक्षा, प्रदेश के विवि व डिग्री कॉलेजों में एक हजार से अधिक रिक्त पदों के लिए मिलेंगे पात्र अभ्यर्थी

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड राज्य के लिए प्रदेश सरकार ने यूजीसी के अनुमोदन पर कुमाऊं विवि को यूसेट यानी राज्य स्तरीय सहायक प्राध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए अधिकृत संस्था-कुमाऊं विवि ने पहले वर्ष की सफलता के बाद लगातार दूसरे वर्ष यूसेट प्रवेश परीक्षा का कार्यक्रम एवं परीक्षा तिथि एक मार्च 2015 घोषित कर दी है। पहली बार परीक्षा के फार्म ऑनलाइन भरे जा सकेंगे, तथा फार्म स्वीकृत होने एवं अर्हता हासिल करने (क्वालीफाई होने) की सूचना एसएमएस से अभ्यर्थियों को मिल सकेगी। हल्द्वानी, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, गोपेश्वर व हरिद्वार में नए परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड राज्य के विश्व विद्यालयों के परिसरों एवं राजकीय महाविद्यालयों में कुल मिलाकर 1,013 पद रिक्त हैं। इनमें से 796 पद राज्य के राजकीय महाविद्यालयों में एवं शेष 217 विश्व विद्यालयों के परिसरों में रिक्त हैं। वहीं कुमाऊं विवि में रिक्त पदों की संख्या 43 बताई गई है। इन रिक्त पदों को जल्द भरने की उम्मीद की जा सकती है। यूसेट के सदस्य सचिव डा. पीडी पंत ने बताया कि दूसरी बार में ही यूसेट परीक्षा को नेट परीक्षा की तरह ऑनलाइन भरने का प्रबंध कर दिया गया है। आगामी 14 दिसंबर से जारी होने जा रही यूसेट परीक्षा की वेबसाईट-यूसेटऑनलाइनडॉटओआरजी (https://usetonline.org) पर परीक्षा का आवेदन फार्म भरा जा सकता है। इसका लिंक विवि की आधिकारिक वेबसाईट-केयूनैनीतालडॉटइन (https://www.kunainital.ac.in) पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को पहले दिशा-निर्देश पढ़ने के उपरांत पहले ऑनलाइन फीस (सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए रुपए 900 एवं आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए रुपए 500) जमा करनी होगी। खास बात यह भी है कि केवल उत्तराखंड राज्य के ही आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को ही आरक्षण का लाभ मिलेगा। बाहरी राज्यों के सभी अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के तहत ही परीक्षा देंगे। परीक्षा में अर्हता हासिल करने (क्वालीफाई) के लिए पहले तीनों प्रश्न पत्रों में उत्तीर्ण होना होगा, जबकि आगे यूजीसी के मानकों के अनुरूप उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में से शीर्ष 15 फीसद अभ्यर्थी (सामान्य व आरक्षित वर्ग के अलग-अलग) ही अर्हता हासिल कर पाएंगे। सामान्य वर्ग के अभ्यथियों को पहले सामान्य ज्ञान एवं दूसरे संबंधित विषय संबंधी प्रश्न पत्र में 40-40, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 35-35 तथा तीसरे विषय संबंधी प्रश्न पत्र में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 तथा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 40 फीसद अर्हता अंक हासिल करने होंगे। परीक्षा हल्द्वानी, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, गोपेश्वर व हरिद्वार में नए तथा अल्मोड़ा, नैनीताल, पंतनगर, श्रीनगर व देहरादून के पहले से तय, यानी कुल मिलाकर 11 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा के फार्म संबंधित वेबसाइट पर 15 दिसंबर से 30 जनवरी तक ही उपलब्ध रहेंगे।

प्रदेश के विश्वविद्यालयों के परिसरों व महाविद्यालयों में विषयवार रिक्त पदों की सूची

उच्च शिक्षा निदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 सितंबर तक प्रदेश में हिंदी-90, अंग्रेजी-92, संस्कृत-37, भूगोल-46, अर्थशास्त्र-74, राजनीति विज्ञान-64, समाजशास्त्र-64, इतिहास-36, शिक्षाशास्त्र-39, मनोविज्ञान-9, शारीरिक शिक्षा-7, गृह विज्ञान-21, डिफेंस एंड स्ट्रेटजिक स्टडीज-8, संगीत-6, भू एवं वायुमंडलीय विज्ञान-10, गणितीय विज्ञान-50, विधि-9, शारीरिक विज्ञान-54, रसायनिक विज्ञान-54, लाइफ साइंस-124, वाणिज्य-60, कम्प्यूटर साइंस एंड एप्लाइंसेज-10, पर्यावरण विज्ञान-5, प्रबंधन-16, ड्राइंग एंड पेंटिंग-5, फिलोसॉफी-6 व लाइब्रेरी एंड इन्फार्मेशन साइंस-24।

इंजीनियरिंग व मेडिकल छात्रों के लिए विदेशी आर्थिक सहयोग का अवसर

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नैनीताल। अमेरिका में अनिवासी भारतीयों की संस्था फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस यानी एफएफई संस्था ने प्रदेश के 100 मेधावी गरीब बच्चों को इंजीनियरिंग व मेडिकल क्षेत्र में 40 हजार रुपए प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है। संस्था के प्रतिनिधि बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बीई-बीटेक के लिए राज्य स्तर पर 2500, मेडिकल परीक्षा में 500 एवं एआईईईई में एक लाख तक की रैंक प्राप्त करने वाले एवं माता-पिता की तीन लाख रुपए वार्षिक आय वाले मेधावी बच्चे आखिरी तिथि 30 नवंबर से पूर्व आवेदन कर सकते हैं। सरकारी स्कूलों से हाईस्कूल-इंटर करने वाले मेडिकल परीक्षा में 750 एवं एआईईईई में सवा लाख तक की रैंक प्राप्त करने वाले बच्चे भी आवेदन कर सकते हैं। संस्था 2005 से अब तक उत्तराखंड के 750 बच्चों को छात्रवृत्तियां दे चुकी है।

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नैनीताल के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान

शिक्षा नगरी के रूप में नैनीताल

नैनीताल को यूं ही शिक्षा नगरी के रूप में नहीं जाना जाता है। दरअसल, इसके अंग्रेज निर्माताओं ने यहां की शीतल व शांत जलवायु को देखते हुऐ इसे विकसित ही इसी प्रकार किया। शिक्षा नगरी के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि यहां से अपनी शिक्षा की शुरुआत करने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले थल सेनाध्यक्ष सैम मॉनेकशॉ , देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, बिहार के पूर्व राज्यपाल एएन किदवई, कबीर वेदी, पूर्व जलसेनाध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी, ध्यान चंद्र अवार्ड प्राप्त सय्यद अली सहित दर्जनों लोगों ने नैनीताल से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर देश की सेवा की और आज भी कर्इं लोग देश के कोने-कोने में प्रमुख स्थानों में रहकर देश का नाम ऊंचा कर रहे हैं।

18 नवंबर 1841 को आधिकारिक रूप से खोजा गया यह नगर अंग्रेजों को अपने घर जैसा लगा और उन्होंने इसे ‘छोटी बिलायत” के रूप में बसाया। सर्वप्रथम 1857 में अमेरिकी मिशनरियों के आने से यहां शिक्षा का सूत्रपात हुआ। उन्होंने मल्लीताल में एशिया का पहला मैथोडिस्ट चर्च बनाया, तथा इसके पीछे ही नगर के पहले अमेरिकन मिशनरी स्कूल की आधारशिला रखी, जो वर्तमान में सीआरएसटी स्कूल के रूप में नऐ गौरव के साथ मौजूद है। 1869 में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में वर्तमान के शेरवुड कालेज एवं लड़कियांे के लिए यूरोपियन डायसन गल्र्स स्कूल भी खुला, जो वर्तमान में ऑल सेंट्स कालेज के रूप में विद्यमान है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन शेरवुड कालेज व सैम बहादुर जनरल मानेकशॉ जैसी हस्तियां यहां के छात्र रहे। इसके अलावा 1877 में ओक ओपनिंग हाइस्कूल के रूप में वर्तमान बिड़ला विद्या मंदिर, 1878 में वेलेजली गल्र्स हाइस्कूल के रूप में वर्तमान कुमाऊं विश्व विद्यालय का डीएसबी परिसर, 1886 में सेंट एन्थनी कान्वेंट ज्योलीकोट तथा 1888 में सेंट जोजफ सेमीनरी के रूप में वर्तमान सेंट जोजफ कालेज की स्थापना हुई। इस दौर में यहां रहने वाले अंग्रेजों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते थे, और उन्हें अपने देश से बाहर होने या कमतर शिक्षा लेने का अहसास नहीं होता था। इस प्रकार आजादी के बाद २०वीं सदी के आने से पहले ही यह नगर शिक्षा नगरी के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। खास बात यह भी रही कि यहां के स्कूलों ने आजादी के बाद भी अपना स्तर न केवल बनाऐ रखा, वरन ‘गुरु गोविंद दोउं खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद बताय” की विवशता यहां से निकले छात्र छात्रााओं में कभी भी नहीं दिखाई दी। आज भी दशकों पूर्व यहां से निकले बच्चे वृद्धों के रूप में जब यहां घूमने भी आते हैं तो नऐ शिक्षकों में अपने शिक्षकों की छवि देखते हुऐ उनके पैर छू लेते हैं। नगर के ओकवुड, रामा मांटेसरी, द होली अकेडमी, द मदर्स हर्ट, वृंदावन पब्लिक स्कूल आदि प्रिपरेटरी स्कूल, वसंत वैली पब्लिक स्कूल, कुमाऊं विवि के यूजीसी अकादमिक स्टॉफ कालेज के अंतर्गत चलने वाले आईडियाज, पंतनगर विवि के पटवाडांगर स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, हिल्ट्रान कैल्क, रॉयल कालेज ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट आदि स्कूल व संस्थान भी शिक्षा नगरी की इस प्रतिष्ठा को बढ़ाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं।

गौरवशाली शेरवुड कालेज

शेरवुड कालेज को नगर के सबसे पुराने प्रतिश्ठित पब्लिक स्कूल के रूप में जाना जाता है। 1859 में इस विद्यालय की स्थापना यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में हुई थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानेकशॉ सहित कई जानी मानी हस्तियों को शिक्षा व अनुशासन के साथ चर्तुर्दिक ज्ञान की दीक्षा देने वाले इस विद्यालय का अपना करीब डेढ़ शताब्दी लंबा गौरवशाली इतिहास रहा है। एटकिंसन लिखित प्रतिष्ठित ‘हिमालयन गजेटियर” में विद्यालय का उल्लेख है, जिससे इसकी प्रतिश्ठा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अपनी प्रतिश्ठा के अनुरूप दिनों दिन अत्याधुनिकता से कदमताल करता हुआ विद्यालय पठन पाठन के साथ विद्यार्थियों के चतुर्दिक विकास के महायज्ञ में जुटा हुआ है। इस प्रगति का श्रेय नि:संदेह विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू की नेतृत्व क्षमता और अनुशासन प्रियता को जाता है, जिन्होंने ‘ब्रांड” बन चुके ‘शेरवुडियन्स” में पुरानी बेहतरीन छवि के साथ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का नयां जज्बा और जोश भरा है। विगत वर्ष विद्यालय में पत्नी जया, पुत्र अभिषेक, बहु ऐश्वर्या के साथ पधारे महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ही इस वर्ष उनके भाई अजिताभ बच्चन, बॉलीवुड-हॉलीवुड कलाकार कबीर बेदी से भी श्री संधू को इन्हीं गुणों के लिए दिल खोलकर मिली प्रशंशा से इसकी पुष्टि हो गई।

Sherwood College: Principal’s Message

It is not by dependence on the horses and chariots in the army that the fate of the war is decided. The headcount, optimum use of resources to their fullest, perennial supply lines – all are decisive towards the final outcome.

In the present context, no amount of infrastructure, hardware, software. IIM and MBA graduates can lift the graph to a higher degree for any corporate business house. It is the commitment, integrity and the belonging-ness to a group, or a cause. That can make a young seventeen year old soldier with his bouncing eyes twinkling with innocence, and very recent signs of black hair surfacing under the chin, armed with bright ideas to change the world and make it a better place, and with high plans to settle down with a charming lass over unfurrowed fields, suddenly emerge to the call of duty and lay down his youthful life.

At Sherwood, pupils are motivated by this deep moral conviction that runs through the fraternity – a shared commitment for higher purposes and courage in the face of adversity and challenges of daily life that are far more difficult than those offered by cataclysmic events. It is here these courageous future-leaders imbibe the will to change, to grow, and to make a difference in our inter-personal relationships that provide them with the tools necessary to improve productivity and self-esteem and to be on the “winners platform”. Truly there is no limit….

Living in the era of transition, the way we face challenges is what gives me the confidence  to say that it seems Sherwood’s future is bright; as we take the talents, contributions and leadership of everyone of us to achieve the quality of life all of us want for ourselves and for the generations to come.

We strive to seek what is best in us and shall never stop re-affirming years after year that all real education is the architecture of the soul – and we just endeavor to unlock the extraordinary power that lies within – to succeed, and, be armed with life on our side and a lifetime to experiment with. The odds, which perhaps, I assume, shall always be in our favour, and being  God’s master-piece…can we ask for more ?

American Kids School : A Home away from Home

At American Kids School, we believe in the age old saying, “The Home is child’s first school and the school is child’s second home.” So we take every care that we provide the best possible ambience coupled with international standard infrastructure to provide the best stimulating atmosphere for the budding minds. Perfect furniture as per the age-specific needs of kids, toys, puppets, introduction with attractive and thought provoking books which help them to develop a liking for books which ultimately helps them grow with the healthy reading-habit. Every child has some special innate skills and we help the child develop that special skill in the right earnest and inculcate it for a lifetime. We know that children are the future of every nation. We help make the future of your child and indirectly help make the future of the nation as well but it is not done in a conventional manner like earlier teaching methodology which used to emphasize upon “Play while you play and learn while you learn.” We have changed this cliché and our motto is “Learn while you play” – which reflects the very essence of play way education. For safety and security, we maintain hi-tech facilities and sophisticated infrastructure.

VRINDAVAN PUBLIC SCHOOL :

The School was established in the year 2009 under the guidance of Mrs. Rakhi Sah with the aim to impart an individual. All round. Healthy and moral value based education along with personally development of the child by the dedicated staff members.

Within a spam of 6 years it has become one of the best KINDER GARDEN school of Nainital with students coming from all areas of Nainital. Being a play way and preparatory school our good number of students are also qualifying the entrance exams of various reputed schools. The school has well maintained spacious campus, colorful class rooms, play hall with many toys and a big playground. The clean and green environment of the school provides a healthy atmosphere. We believe that the learning is an art and at VRINDAVAN we teach our children the art of learning. In this competitive time, a child needs that extra edge in any field it may be so. In our school education is not confined to classrooms. It holds and encourages competitions and extra curricular activities such as dancing, singing, taekwondo and many more to showcase the child’s talent. The students teacher ratio is 10:1. Apart from all round development of the child more emphasis is laid on English conversation and reading skills. The school also organizes nature walks and picnics too.

The school Principal thanks all the parents, colleagues and staff members for believing and motivating us to do even much better in future.

(Long View Public School) LPS: A Center of excellence

Longview Public School (LPS) is one of the finest CBSE Day Cum Boarding schools of Nainital, situated in Longview – a pristine property below Rajbhawan, a stone through away from city center. The school had its origin in 2001 and today it has emerged as a first choice for many parents as a center of excellence in many aspects of education. We are a happy school with staff dedicated in bringing out the best in every individual and instilling in each pupil a real sense of belonging, we do that by providing high standards of teaching and first class facilities.

Though, young LPS has distinction of becoming the first 100% digital school of Nainital. LPS students have been high achievers in board exams, this is due to highly motivated able workforce which takes pride in the achievements in the school. The school promotes innumerable extracurricular activities both indoor and outdoor. In addition the school offers its students an opportunity to participate in inter-school competitions. LPS dedicated to helping students achieve their dreams provide annual scholarships to the tune of 1.2 lacs to eligible students. Students may receive merit scholarships, young mathematician awards, Dr. Giribala Pant Merit Awards for board toppers, Merit Cum Means ( One in each class), Most Regular Student Award to name a few. The bond between parents and the school is strengthened through the support and active participation of the parents in the school programme. The school welcomes parents to share its success story and to make a right choice for their child’s first step in the school.

 THE MOTHER’S HEART

The Mother’s Heart is an English Medium School, situated at Shanti Niketan, Mallital, Nainital. Established in the year 1999, under the guidance of Mrs. Naghma Parvez. Preparing children for all the prestigious schools of Nainital as well as other cities. Excellent results since last Twelve years.  Well qualified staff, teaching with play way method and HCL SMART CLASSES.

My 1st School: The Holy Academy

Established in 1990, The Holy Academy was started with a view to bridge the gap by providing pre-school education to the children of Nainital. The Academy is an independent pre-school and thus has a wide ranging curriculum covering all aspects of a child’s life and interests. Emphasis is laid on correct usage of languages, both English and Hindi, as also on familiarizing the child with numbers, environment, social skills and art in all forms. Personalized attention to child is the hallmark of education in this Academy. To ensure, the student/teacher ratio is maintained at around ten. For the purpose of close monitoring, all the class rooms are covered by close circuit cameras. The Academy emphasizes on all round personality development of the child. Accordingly various co-curricular activities such as picnic, nature walks, visit to the zoo are organized from time to time. Care is taken to draw out the best in each child laying emphasis on developing his aptitude for music, speech training, dance, art and craft. Principal Mrs. Madhu Vig says, “We believe that this alone will help the child develop confidence and train him in leadership and responsibilities”. “ We sincerely thank all our patrons, well wishers, Parents/Guardians for their continued support and feedback over the last two decades” she added.

OAKWOOD SCHOOL: The relevance of boarding Schools

Why Put your child in Boarding School when there are so many options available in your local town?

In Today world, deluged by technology, media accessibility etc, children start as young as three years with too many options to- “I WANT ”. Materialism has come to play an important role in young lives with television being a major contributor. Parents are at a loss on how much or how little is good for the child and, in this confusion, children are being subjected to conflicting values. Add to that the existence of the quintessential family. Dada, Dadi, Nana, Nani, Bua, Mama mausi… The line goes on, the child can grow up into a spoilt, defocused brat. Nuclear families, where Mom & Dad are working, leaves no option but to trust the child into the care of maids, television and doting grandparents, where no upmanship can confuse the child in his values and sensibilities.

A boarding School provides a holistic environment where class demarcation and conflicting instructions are minimalised . Mobile phones and other electronic gadgets are controlled as is the ugly head of brand, consciousness. A regimented life where timing are fixed for studies, play, eating & entertainment provide children with a clean, carefree environment where they are guided by dedicated teacher to differentiate between excessive and minimalistic. Focus is drawn to growing up with sharing and caring so that the I, Me , Myself is replaced by the more compassionate- “US”.

 राधा चिल्ड्रन अकेडमी : साकार हुआ शिक्षा का सपना

-राधा चिल्ड्रन अकेडमी की स्थापना दीपक साह व उसके युवा साथियों ने सन् 1999 में मंहगी शिक्षा से इतर सस्ती व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई। कम समय में ही स्नोभ्यू स्थित राधा चिल्ड्रन अकेडमी को गरीब बच्चों को अच्छी व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नगर भर में जाना जाता है। इस क्षेत्र में यह विद्यालय अभिभावकों की पहली पसंद बन गया है। यहां पर आसपास के क्षेत्रों के करीब ढाई सौ से अधिक बच्चों को कुशल व अनुभवी स्टाफ द्वारा पढ़ाया जाता है। बेहतर क्लासरुम, कंप्यूटर लेब आदि की सुविधाएं स्कूल में उपलब्ध कराई गई हैं। आज विद्यालय के बच्चें नगर में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ स्थानों पर अपना नाम दर्ज करा रहें हैं।

गौरवशाली इतिहास की थाती के साथ नई राहों पर सीआरएसटी

अपनी स्थापना की डेढ़ शताब्दियां पूरी कर चुके नगर के चेत राम साह ठुलघरिया यानी सीआरएसटी इंटर कालेज की स्थापना वर्ष 1857 में राबर्ट पियरसन ने मिशन स्कूल के रूप में की थी। अमेरिकी मिशनरी तब स्कूल को प्रति छात्र के हिसाब से दो पैंसा दिया करते थे, तो भी स्कूल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कहते है कि मिशनरियों ने समस्या के निदान को बरेली से जेएल हम्फ्री को बतौर मैनेजर भेजा, जो स्वयं के पांच हजार रुपऐ लेकर आऐ और प्रधानाचार्य के रूप में भी स्कूल को नवजीवन दिया, विद्यालय तब हम्फ्री स्कूल कहा जाने लगा। उनके पश्चात 1926 में स्कूल की स्थिति एक बार पुन: खराब हो गई। मिशनरी इसे अंग्रेजी सरकार के शिक्षा विभाग को 75 हजार रुपऐ में बेच कलकत्ता चले गऐ, और दो वर्ष बाद 1926 में लौटे तो नैनीताल की बजाय अल्मोड़ा की ओर निकल गऐ। इस बीच स्कूल का प्रबंधन असिस्टेंट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल कुमाऊं डिवीजन के हाथ में रहा, किंतु तो भी स्कूल की स्थितियां न सुधरीं। इस पर 1928 में नगर सेठ चेत राम साह जी ने 50 हजार रुपयों में स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में लिया। इसके बाद से ले़ एमडी पांडे, वर्तमान बिड़ला और तत्कालीन फिलेंडर स्कूल के शिक्षक रहे आरसी बुशर, 1948 में डा़ पी़ पांडे (तत्कालीन बीएससी एमबीबीएस) और सीएल साह जैसी हस्तियां स्कूल की प्रबंधक रहीं। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय छायाकार अनूप साह स्कूल के प्रबंधक हैं। इधर विद्यालय में अमर उदय ट्रस्ट, पूर्व विधायक खड़क सिंह बोहरा और पूर्व मुख्यमंत्री और अपने छात्र रहे नारायण दत्त तिवारी से मिले धन से जीर्णोद्धार के कार्य हुऐ हैं। विद्यालय प्रधानाचार्य मनोज पांडे के निर्देशन में प्रगति की नई राह पर चल पड़ा है।

विदेश में भी शिक्षा और रोजगार के अवसर दिलाता है रॉयल कालेज

रॉयल कालेज ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट व्यवसायिक शिक्षा के क्षेत्र में कुमाऊं का एक प्रतिष्ठित संस्थान है। कालेज पिछले 10 वर्षों से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों की पहली पसंद रहा है। वर्तमान में कालेज हल्द्वानी के निकट रानीबाग में अपने नए परिसर में संचालित हो रहा है। कालेज उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र भी है, तथा इसका सिंंगापुर, साइप्रस, मारीसस स्थित विद्यालयों से भी अनुबंध है। कई विद्यार्थी इन देशों से उच्च शिक्षा प्राप्त भी कर रहे हैं। इन देशों में विद्यार्थियों के प्रवेश की कार्यवाही विद्यालय के ही द्वारा पूरी कराई जाती है। रायल कालेज में होटल मैनेजमेंट व पर्यटन में सम्मिलित एक वर्षीय डिप्लोमा के अलावा पर्यटन व होटल मैनेजमेंट में स्नातक डिग्री के तीन वर्षीय कोर्स भी कराए जाते हैं, साथ ही विद्यालय अपने सभी विद्यार्थियों के लिए रोजगार भी उपलब्ध करवाता है। वर्तमान में कालेज के विद्यार्थी रेडिसन, होली डे इन, क्लार्क, कैम्पेन्सकी, टीजीआई फ्राइडे, ताज, मैक्डोनाल्ड व इंटरग्लोब टैक्नोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भारत वर्ष और विदेशों में सेवारत हैं। कालेज के निदेशक अनुराग भोंसले ने बताया कि कालेज का वर्तमान सत्र अप्रेल में पूरा हो रहा है। मई से नये सत्र के लिए प्रवेश प्रारंभ हो जाएंगे। वर्तमान सत्र में पांच विद्यार्थी अपनी उच्च शिक्षा हेतु मारीशस जा रहे हैं।

ओकवुड स्कूल: जहां शिक्षा व्यवसाय नहीं मिशन है

कहते हैं कि नींव मजबूत हो तो उस पर उतनी ही बड़ी इमारत खड़ी की जा सकती है। नैनीताल के विद्यालयों में शिक्षा को बढ़ावा देने में बड़े विद्यालयों के साथ हमेशा से ही छोटे प्रिपेटरी स्कूलों का महत्वपूर्ण व बराबर का योगदान रहा है। जिनकी मेहनत ने आज भी नैनीताल को शिक्षा नगरी के रुप में गौरवान्वित किया है। इन्ही प्रिपेटरी स्कूलों में सर्वप्रमुख है ओवकुड स्कूल, जो इस वर्ष अपने शिक्षा मिशन के 25 वर्ष यानी रजत जयंती वर्ष के पायदान पर खड़ा है। प्राचीन गुरुकुल पंरपरा को संजोए इस विद्यालय की विशेषता है कि यहां शिक्षा व्यवसाय की दृष्टि से नहीं बल्कि मिशन के लिए दी जाती है।इसीलिये नगर के सर्वश्रेष्ठ प्रिपरेटरी स्कूलों में इस स्कूल की बड़ी पहचान है।
नगर के प्रिपेटरी स्कूलों में ओकवुड की बड़ी पहचान रही है। स्व. केके आनंद व पीके आंनद की प्रेरणा से सन् 1989 में प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा-दीक्षा परंपरा से विद्यार्थी में गुणवत्ता युक्त शिक्षा व चहुमुंखी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई। आज उनकी सुपुत्री गीतांजली तिवाना के सफल नेतृत्व में विद्यालय अपनी प्रतिष्ठा के अनुरुप प्रतिवर्ष बेहतर परिणाम दे रहा है। यहां बच्चों को 24 घंटे घर जैसे माहौल में रखा जाता है। बेहतर शिक्षा का परिणाम ही कहेंगे कि इटली, जर्मनी व कनाडा से अभिभावक बच्चों को स्कूल में पढ़ाते हैं। यहां से पढ़ कर निकले बच्चों को प्रसिद्ध वाईन गर्ग, सेंट जार्ज मसूरी, सनावर शिमला, ग्वालियर, मेया कालेज अजमेर सहित नैनीताल के प्रमुख शेरवुड, सेंट जेवियर, सेंट मेरीज व ऑल सेंट जैसे नामी स्कूलों में आसानी से प्रवेश मिल जाता है। विद्यालय में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जाता है, विद्यार्थियों व शिक्षकों का अनुपात 1:9 रखा गया है। विद्यालय में 130 से अधिक बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। विद्यालय में शिक्षकों व विद्यार्थियों का अनुपात 10 रखा जाता है। विद्यालय में बच्चों को घर जैसे माहौल में पढ़ाया जाता है, साथ ही खेलकूद, संगीत, पिकनिक व एचसीएल की डिजिटल कक्षाओं आदि के माध्यम से उनका शारीरिक व मानसिक विकास भी किया जाता है। बच्चों के भोजन का भी विशेश ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष यहां के 100 प्रतिशत विद्यार्थी वाईन बर्ग, सेंट जार्ज मसूरी, मेयो अजमेर, वाईपीएस चंडीगढ़, सिंधिया कालेज ग्वालियर, वेल्हम्स मसूरी, सनावर स्कूल शिमला तथा नैनीताल के शेरवुड, सेंट जेवियर, सेंट मेरीज व ऑल सेंट्स जैसे देश के सर्वाेत्तम शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पा रहे हैं।

नगर के आम बच्चों की पहली पसंद बिशप शॉ इंटर कॉलेज

नगर का तल्लीताल डांठ जैसे सर्वाधिक सुगम स्थान पर स्थित बिशप शॉ इंटर कालेज नगर के आम निम्न एवं मध्यम वर्ग के बच्चों एवं उनके अभिभावकों की पहली पसंद है। मार्च 1971 में स्थापित विद्यालय चार वर्ष पूर्व से उत्तराखंड बोर्ड के अंतर्गत बेहद कम शुल्क पर सीबीएसई पैटर्न पर इंटरमीडिएट तक की अंग्रेजी माध्यम से गुणवत्ता युक्त शिक्षा दे रहा है। यही नहीं विद्यालय में नैतिक शिक्षा एवं कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जाती है। विद्यालय में विज्ञान वर्ग की शिक्षा भी उपलब्ध है। प्रबंधक नीलम दानी एवं प्रधानाचार्य जे.ए. विल्सन के कुशल निर्देशन में विद्यालय के विद्यार्थियों को खेल तथा नगर में होने वाली निबंध, चित्रकला, भाषण आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने और पढ़ाई के साथ ही चहुमुंखी व सर्वांगीण विकास करने का मौका उपलब्ध होता है। विद्यालय उत्तरोत्तर विकास के पथ पर अग्रसर है।

प्रगति पथ पर वसंत वैली पब्लिक स्कूल

वसंत वैली वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित वसंत वैली पब्लिक स्कूल की स्थापना वर्ष 1998 में की गई थी। विद्यालय कान्वेंट शिक्षित एवं नैनीताल के शेरवुड कालेज के साथ दिल्ली के स्कूलों में शिक्षण कर चुकी एमए, एलएलबी व बीएड की उच्च शिक्षा प्राप्त प्रधानाचार्या श्रीमती नीरज सिंह के सफल निर्देशन में उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्तमान में उत्तराखंड शासन की मान्यता प्राप्त यह स्कूल नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, तथा शीघ्र ही सीबीएसई बोर्ड से दसवीं तक की मान्यता प्राप्त करने जा रहा है। बच्चों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किताबी ज्ञान के अलावा यहां समय समय पर खेल-कूद, वाद-विवाद, कला तथा संगीत की प्रतियोगिताऐं आयोजित की जाती हैं।

सबसे अव्वल है नैनीताल का अम्तुल्स पब्लिक स्कूल

अम्तुल्स पब्लिक स्कूल शिक्षानगरी नैनीताल के बेहतरीन स्कूलों में गिना जाता है। डे बोर्डिंग और को-एड यानी लड़के-लड़कियों की सहशिक्षा सुविधायुक्त इस स्कूल में पीसीईएस के माध्यम से आईआईटी-जेईई, सीपीएमटी व एनडीए आदि की कोचिंग सुविधा मौजूद है, जिस कारण हर साल ही यहां के कई बच्चे मैरिट लिस्ट में रहते हैं, तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थान बनाते हैं। नगर के गिने चुके सीबीएसई पैटर्न के स्कूलों में शुमार अम्तुल्स की स्थापना सन् १९८३ में हाजी अब्दुल वाजिद साहब ने अपनी बेगम शिक्षाविद् अम्तुल हसीब के नाम पर की थी। हाजी साहब और उनकी बेगम के नाम से कई चैरिटेबल इदारे चलते हैं। उनके इंतकाल के बाद पता चला कि उनकी इमदाद से कई छोटे स्कूल भी चलते रहे हैं। उनके बादे उनके साहबजादे अब्दुल राशिद साहब ने स्कूल को नई मंजिलों पर पहुंचाया, और उनके इंतकाल के बाद उनके सुपुत्र यूनिब राशिद स्कूल को देख रहे हैं। इधर दो वर्ष से प्रधानाचार्या आरएन ठाकुर के नेतृत्व में स्कूल दिनों दिन तरक्की की राह पर है। विद्यालय का रिजल्ट हमेशा सौ फीसद रहता है, और साथ ही खेलकूद व अन्य शिक्षणेत्तर गतिविधियों में भी यहां के बच्चे हमेशा से अव्वल रहते हैं।

उत्तराखंड सरकार का उपक्रम: हिल्ट्रान कैल्क

हिल्ट्रान उत्तराखंड सरकार का उपक्रम है, जो कैल्क के माध्यम से विगत कई वर्षों से कंप्यूटर के रोजगारपरक कार्यक्रम चला रहा है। पूर्व में कई प्रशिक्षार्थी हिल्ट्रान कैल्क से कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर सरकारी एवं प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार कर रहे हैं। वर्तमान में उत्तराखंड सरकार ने हिल्ट्रान को उत्तराखंड की प्रशिक्षण दायी एजंेसी घोषित किया हुआ है। हिल्ट्रान कैल्क में हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर दोनों विषयक कोर्स चलाऐ जाते हैं। साथ ही एकाउंटिंग के कोर्स भी करवाये जाते हैं। हिल्ट्रान कैल्क के प्रमाण पत्र धारियों को रोजगार कार्यालय में सीधे पंजीकृत किया जाता है।

समाज को सुसंस्कृत प्रगतिशील नारी देने की राह पर ऑल सेंट्स कालेज

नैनीताल में 1869 में स्थापित ऑल संेट्स कालेज आज देश की जानी मानी शिक्षण संस्थाओं में शामिल है। आईसीएसई बोर्ड से सम्बद्ध यह विद्यालय कक्षा एक से बारहवीं कक्षा तक केवल बालिकाओं के लिए एक आवासीय विद्यालय है। विद्यालय में शिक्षणेत्तर गतिविधियां नाटक, खेलकूद, प्रदर्शनी, आदि समय समय पर आयोजित होती हैं तथा विभिन्न स्थानों पर आयोजित ऐसी प्रतियोगिताओं में विद्यालय की छात्राएं विजयी होकर लौटती हैं। विद्यालय का शैक्षिक रिकार्ड अव्वल दर्जे का है तथा बोर्ड परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहता है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती किरन जनमायाह शिक्षा के प्रसार के पुनीत कार्य पुंज को आगे ले जाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं, जिसके लिए वे साधुवाद की पात्र हैं। बच्चों के चहुंमुखी एवं सर्वांगींण विकास के लिए अनुभवी, सुशिक्षित एवं प्रशिक्षित स्टाफ के साथ अत्याधुनिक संसाधनों को समाविष्ट किया गया है, जिनमें ग्लोबल एजूकेशन, एनसीसी, पूर्ण सुसज्जित स्विमिंग पूल एवं परफार्मिंग आर्ट का अपना एक नया आकर्षण है। विद्यालय की आवासीय व्यवस्था तमाम आधुनिक सुविधाओं से युक्त है, जिसमें उच्च कोटि की भोजन व्यवस्था हेतु आधुनिक संसाधनों युक्त किचन एवं बेकरी उपलब्ध है। छात्राओं में पर्यावरण जागरूकता विद्यालय की प्राथमिकता में है, जिसके लिए विद्यालय स्थानीय प्रशासन से सम्बद्ध होकर कार्यशील है।
प्रधानाचार्या श्रीमती जरमायाह कहती हैं कि उनका मूल उद्देश्य समाज को संस्कारों से परिपूर्ण, सशक्त, सक्षम, कर्मठ, प्रगतिशील एवं आत्मनिर्भर नारी देना है।

संस्कारों के साथ आधुनिकता की राह पर पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार

24 जुलाई 1983 को श्री गुरु पूर्णिमा के पावन दिन छात्रों में संस्कारों का बीजारोपण करने के उद्देश्य से विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के द्वारा पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार की वरिष्ठ माध्यमिक पूर्ण आवासीय विद्यालय की स्थापना की गई थी। विद्यालय अनवरत अपनी स्थापना के मूलोद्देश्य के अनुरूप बालकों में भारतीय जीवन मूल्यों एवं संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन करने वाली संस्कारवान, चरित्रवान व सर्वगुण संपन्न पीढ़ी के निर्माण यज्ञ में ‘वसुधैव कुटुंबकम्” व ‘माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:’ की उदात्त भावना के साथ जुटा हुआ है। विद्यालय को 11वीं व 12वीं कक्षाओं में उपलब्ध इंजीनियरिंग व मेडिकल कोचिंग की व्यवस्था, व्यवहार कुशलता के लिए ‘छात्र संसद’ व छात्र परिषदों का गठन, प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश के लिए दिल्ली की ‘संकल्प” संस्था में छात्रों का पंजीकरण करने, कमजोर छात्रों के शैक्षिक उन्नयन के लिए ‘ट्यूटोरियल क्लासेज’, अभिभावक दिवसों व सम्मेलनों के आयोजन जैसी व्यवस्थाऐं अन्य विद्यालयों से मीलों आगे खड़ा कर देती हैं। इसी का प्रतिफल है कि विद्यालय में देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के छात्र भी अध्ययनरत हैं, जबकि एक पूर्व छात्र आईएएस, दो पूर्व छात्र पीसीएस अधिकारी हैं, और एक पूर्व छात्र का मस्कट (ओमान) में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहते हुऐ अमेरिका की ‘नेचर एंड साइंस’ पत्रिका में शोध प्रबंध प्रकाशित हुआ है। इसके अतिरिक्त एक अन्य छात्र विश्व बैंक व यूएनओ द्वारा संचालित 140 करोड़ डालर के बागवानी एवं कृषि क्षेत्र में एवं दो छात्र वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत है। प्रधानाचार्य डा. किशन वीर सिंह शाक्य अपनी टीम को साथ लेकर विद्यालय को पारंपरिकता व संस्कारिकता के साथ अत्याधुनिकता की राह पर भी आगे बढ़ा रहे हैं।

बच्चों में समाज-देश के विकास की भावना भी भरता है सेंट जेवियर स्कूल

नगर के अयारपाटा क्षेत्र में चार एकड़ क्षेत्र में फैले सेंट जेवियर स्कूल की स्थापना 1991 में हुई थीं। 19वर्षों की इस यात्रा में विद्यालय ने तेजी से विकास किया। वर्तमान में यहां सीबीएसई बोर्ड के तहत 12वीं तक छात्रों व छात्राओं को सह शिक्षा दी जाती है। यहां बोर्डिंग के साथ ही नगर के बच्चों के लिए डे स्कालर सुविधा भी उपलब्ध है। विद्यालय हमेशा ही शत-प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम प्राप्त करता है। स्कूल में आधुनिक कम्प्यूटर लैब, इंडोर व आउट डोर खेलों के विशाल मैदान सहित विशाल ऑडिटोरियम भी उपलब्ध हैं। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना मात्र ही शिक्षा नहीं है, वरन उनके संपूर्ण व चहुमुंखी व्यक्तित्व विकास के लिए उनमें हर तरह की परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता पैदा करने के साथ ही उनमें समाज व देश का विकास करने की भावना पैदा करना भी शिक्षा का उद्देष्य है।

छोटे समय में बड़ा नाम: रामा मांटेसरी

नैनीताल के पब्लिक स्कूलों में रामा मांटेसरी का नाम प्रशंसा के साथ लिया जाता है। विद्यालय की स्थापना वर्ष 2000 में श्रीमती नीलू एलहंस ने की थी। उनके द्वारा शिक्षण कार्य के प्रति अत्यधिक समर्पण भाव से किऐ गऐ कार्याें का ही परिणाम है कि अल्प समय में ही विद्यालय ने स्वयं को शिक्षा नगरी के उच्च कोटि के शिक्षण संस्थानों में शामिल कर लिया है। आज विद्यालय में 300 से अधिक बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। विद्यालय के बच्चों का नगर में होने वाली सांस्कृतिक, खेल-कूद सहित विभिन्न बौद्धिक प्रतियोगिताओं में भी हमेशा उल्लेखनीय प्रदर्शन रहता है। बच्चों पर यहां हमेशा प्रधानाचार्या की नजर रहती है, साथ ही शिक्षिकाऐं भी बहुत अधिक मेहनत करती हैं। इसीलिऐ बौद्धिक स्तर पर यहां के बच्चे नगर के बड़े स्कूलों से भी आगे रहते हैं।

शैक्षणिक उत्कृष्टता के नित नऐ मानदंड स्थापित करता बिड़ला विद्या मंदिर

शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं मूल्यों पर आधारित शिक्षा के समन्वय के बिना एक अच्छे समाज एवं उन्नत देश के निर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। 1877 में स्थापित नगर के बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल का सतत प्रयास है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास के भरपूर अवसर दिऐ जाऐं। यही कारण है कि यहां से पढ़े हुऐ विद्यार्थी अपने निजी जीवन में अत्यंत सफल रहने के साथ ही प्रशासनिक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सैन्य बलों तथा रंगमंच, राजनीति एवं अभिनय जैसे क्षेत्रों में अपनी सफलता के झंडे गाड़ते रहते हैं। यह विद्यालय अत्यंत योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों से युक्त होने के साथ-साथ बच्चों के विकास के लिए जरूरी सभी खेल-कूद सुविधाओं से संपन्न हैं। यहां कक्षा दस एवं बारह के बोर्ड परिणाम प्रति वर्ष अत्यंत उत्कृष्ट कोटि के होते हैं। यहां के विद्यार्थी हर वर्ष ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की मेरिट में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करते हैं। विद्यालय में एक बार पुन: पदार्पण करने वाले विद्वान एवं लंबा शैक्षणिक अनुभव रखने वाले प्रधानाचार्य एके शर्मा का मानना है कि बच्चों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, मनचाहा विकास एवं अनुशासन बच्चों को अनुकूल शैक्षणिक माहौल देकर प्राप्त किया जा सकता है। आजादी के बाद से यह विद्यालय बच्चों को संस्कारों के साथ अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा भी देते हुेए सफलता के नऐ आयाम स्थापित अपनी सतत यात्रा पर अग्रसर है।

यूजीसी-एकेडेमिक स्टाफ कालेज, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के एकेडमिक स्टाफ कालेज ने 2006 में अपनी स्थापना से अब तक देश में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। यह उत्तराखण्ड राज्य का प्रथम तथा अकेला ऐसा संस्थान है, जहां भारतवर्ष के विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के शैक्षणिक उन्नयन व शैक्षणिक सशक्तीकरण हेतु वर्ष पर्यंत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
एकेडमिक स्टाफ कॉलेज द्वारा अब तक 17 ओरियंटेशन कार्यक्रम, 38 रिफ्रैशर कार्यक्रम, 1 समर स्कूल, 4 शार्ट टर्म कोर्स, 2 प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम, 3 कार्यशाला तथा 8 राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संचालित किये जा चुके है। इसके अतिरिक्त सात पुस्तकों का भी प्रकाशन एकेडेमिक स्टाफ कालेज द्वारा किया गया है।
एकेडमिक स्टाफ कालेज ने यूजीसी से निर्धारित मानकों से कहीं आगे जाकर दूसरी रचनात्मक गतिविधियों पर जीवंत चर्चा के लिए थिंंक टैंक ”आईडियाज” की स्थापना की है। वार्षिक शोध पत्रिका ”क्वैस्ट” के माध्यम से ऑनलाइन किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अध्ययन मॉड्यूल व कई रिर्पाेट भी प्रकाशित की गयी हैं।एकेडमिक स्टाफ कालेज द्वारा पुलिस के जवानों व इंटेल के सहयोग से बी.एड. अध्यापकों के लिये भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इिस प्रकार यूजीसी के ध्येय, सबको बेहतर उच्च शिक्षा, को सफल करने में यू०जी०सी०-एकेडेमिक स्टाफ कॉलेज नैनीताल महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है।

Kumaon University’s UGC Staff College: The pursuit of excellence in higher education by introducing innovation and creativity in academics.

BRIEF HISTORY : The UGC-Academic Staff College, Kumaun University, Nainital the first and only Academic Staff College in the state of Uttarakhand, was sanctioned by the UGC, New Delhi on 10th October 2006,constituted by the University on 28th October 2006 and organized its first Orientation Programme on 12th February 2007. It shares the vision of making quality the defining element of higher education in India. It is envisaged that the UGC-ASC engages not only in its primary task of teaching-training empowerment of teachers of higher education institutions, but also undertake varied innovative extension activities in the academic arena. It is playing a leading role in the pursuit of excellence in higher education. Till date UGC-ASC, Nainital had organized and successfully conducted 26 OP, 57 RC, 02 Special Summer School,03 Workshops of Academic Administrators, 09 Short Term  Courses &  04 Professional Development Programmes, 02 Workshop of Ph. D. Students.

ABOUT US : The UGC-ASC is located in a heritage site-The Hermitage, in quiet seclusion amidst lush natural surroundings in the lake city of Nainital. In the zest to establish a truly unique environment several Best Practices have been evolved.

  • Restoration and reuse of old discarded furniture; Restoration of Summer House to create a serene meditation room; Donor’s programme to enrich the for Library; Rain Water Harvesting System; Plans to develop an open air Amphitheater over the rain water tanks; Eco-friendly campus; The infrastructure includes a well-equipped Computer Lab, Conference Hall, Guest House, Library and Hostel facility soon infrastructure for participants accommodation and equipped conference hall be completed.

The UGC-ASC conducts Refresher Courses, Orientation Programmes and Short Term Courses for teachers; workshops for academic administrators; and Professional Development Programmes for non-teaching staff of institutions of higher education.

INNOVATIVE CURRICULAR ACTIVITIES

To foster innovation in ideas and creativity in presentation:

Group Project Activity – to study relevant local problems; Study Tour-to hone observational analytical skills & Group Discussions-on burning issues

Seminars on contemporary themes in all disciplines are being organized by us. Between 2007 and 2013, 18 seminars were organized.

PUBLICATION PROGRAMME : QUEST is an inter-disciplinary, registered, peer reviewed research journal it is published biannually both in Hindi and English. QUEST is first online research journal in the state of Uttarakhand. QUEST is online at indianjournals.com.For author guidelines and submission details see our website- http://www.ascnainital.org. Under publication programme of ASC Nainital till date thirteen books have been published. These books are compilation of papers/articles/essays presented during the Seminars and Refresher Courses. Till date 4 Study Modules containing useful concise reading material also been published by us.

OTHER OUTREACH ACTIVITIES :

  • MOU with Intel Teach Programme for training of University teachers (29th September 2009)
  • MOU with Indian Journals.Com for online publication (10th March 2010)
  • Collaboration with Uttarakhand Police Department Training Programme for Tourist-Police Brigade, 2008 2013 and 2014.
  • So far three Popular Lectures have been organized and 02 monographs of the same has been published.

4 thoughts on “शिक्षा एवं रोजगार समग्र

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