उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी-रत्नगर्भा अल्मोड़ा


चंद शासकों की राजधानी रहे अल्मोड़ा की मौजूदा पहचान निर्विवाद तौर पर उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में है। … अधिक

राजुला-मालूशाही और उत्तराखंड की रक्तहीन क्रांति की धरती, कुमाऊं की काशी-बागेश्वर


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कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की भी मिलती है झलक


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बैरन (18 नवंबर 1841) से पहले ही 1823 में नैनीताल आ चुके थे कमिश्नर ट्रेल


-नैनीताल की आज के स्वरूप में स्थापना और खोज को लेकर ऐतिहासिक भ्रम की स्थिति नवीन जोशी, नैनीताल। इतिहास जैसा … अधिक

नगर पालिका के हाथों से छिना ‘शरदोत्सव’, अब ‘सत्ता’ कराएगी ‘नैनीताल शीतोत्सव’


‘शीतोत्सव’ के नए अवतार में परिवर्तित हो जाएगी 1890 से जारी ‘शरदोत्सव’परंपरा -नगर पालिका से राज्य की ‘सत्ता’ के हाथ … अधिक

इतिहास होने की ओर शेरशाह सूरी के जमाने की ‘गांधी पुलिस’ पर अब ‘नो वर्क-नो पे’ की तलवार


पटवारियों के लिए ‘नो वर्क-नो पे’ लागू करने में सरकार भी आएगी कटघरे में -‘तदर्थ” आधार पर चल रही प्रदेश … अधिक

विभिन्न विषयों पर पुराने अधिक पसंद किए गए पोस्ट


यहां हैं, हमारे ब्लॉग-ऊंचे पहाड़ों से जीवन के स्वर, मन कही, उत्तराखंड समाचार, प्रकृति मां और पत्रकारिता के गुर हमारे दिल में बसता है, हमारा नैनीताल, … अधिक