कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की भी मिलती है झलक


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बेमौसम के कफुवा, प्योंली संग मुस्काया शरद, बसंत शंशय में


भवाली के निकट श्याम खेत के जंगलों में खिला बसंत ऋतु का प्रतीक राज्य वृक्ष बुरांश, आगे बसंत रह सकता … अधिक

सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत है कुमाउनी शास्त्रीय होली


-पौष माह के पहले रविवार से ही शुरू हो जाती हैं शास्त्रीय रागों में होलियों की बैठकें और सर्वाधिक लंबे … अधिक

मेरी कुमाउनी कविताओं की पुस्तक-उघड़ी आंखोंक स्वींड़ और कुमाउनी नाटक-‘जैल थै, वील पै’ पीडीएफ फॉर्मेट में


कुमाउनी का पहला PDF फार्मेट में भी उपलब्ध कविता संग्रह-“उघड़ी आंखोंक स्वींण” और खास तौर पर अपने सहपाठियों को समर्पित … अधिक

विभिन्न विषयों पर पुराने अधिक पसंद किए गए पोस्ट


यहां हैं, हमारे ब्लॉग-ऊंचे पहाड़ों से जीवन के स्वर, मन कही, उत्तराखंड समाचार, प्रकृति मां और पत्रकारिता के गुर हमारे दिल में बसता है, हमारा नैनीताल, … अधिक