मुक्तेश्वर: जहां होते है प्रकृति के बीच ‘मुक्ति के ईश्वर’ के दर्शन


Chali ki Jali, Mukteshwar
Chali ki Jali, Mukteshwar

देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में घने वनों के बीच प्रकृति की गोद में, सूर्यास्त के दौरान स्वर्णिम आभा से दमकते आकाश चूमते पर्वतों-हिमाच्छादित पर्वत चोटियों के स्वर्ग सरीखे रमणीक सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के दर्शन कराने वाला एक ऐसा खूबसूरत स्थान है जहां प्रकृति के बीच साक्षात मुक्ति के ईश्वर यानी देवों के भी महादेव के दर्शन है। इस बरसात के मौसम में मुक्तेश्वर किसी भी प्रकृति प्रेमी और शांति की तलाश में पहाड़ों की सैर पर आने वाले सैलानी का अभीष्ट हो सकता है। आइए जानते हैं, ऐसा क्या है मुक्तेश्वर में कि यहां हजारों सैलानी वर्ष भर खिंचे चले आते हैं:-

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जितने सवाल-उतने जवाब थे अपने फक्कड़दा-गिर्दा


Late Girish Tiwari 'Girda' , Photo By: Navin Joshi
Late Girish Tiwari ‘Girda’ , Photo By: Navin Joshi

‘बबा, मानस को खोलो, गहराई में जाओ, चीजों को पकड़ो.. यह मेरी व्यक्तिगत सोच है, मेरी बात सुनी जाए लेकिन मानी न जाए….’ प्रदेश के जनकवि, संस्कृतिकर्मी, आंदोलनकारी, कवि, लेखक गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ (जन्म 9 सितंबर, 1945 को अल्मोड़ा के ज्योली हवालबाग गांव में हंसादत्त तिवाडी और जीवंती तिवाडी के घर-मृत्यु 22 अगस्त 2010 को हल्द्वानी में ) जब यह शब्द कहते थे, तो पीछे से लोग यह चुटकी भी लेते थे कि ‘तो बात कही ही क्यों जाए’ लेकिन यही बात जब वर्ष 2009 की होली में ‘स्वांग’ परंपरा के तहत युगमंच संस्था के कलाकारों ने उनका ‘स्वांग’ करते हुए कही तो गिर्दा का कहना था कि यह उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। और शायद इसी सबसे बड़े पुरस्कार के वह इंतजार में थे, और इसे लेने के बाद वह दुनिया के रंगमंच से विदा ही हो लिए।

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नैनीताल के बच्चों ने एपीजे से बनाया था ‘काका कलाम’ का रिश्ता


नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में बोलते डा. कलाम।
नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में बोलते डा. कलाम।

-‘काका कलाम’ ने बच्चों से यहां कहा था- सपने देखो और उन्हें कार्यान्वित करो
– यहां 9-10 अगस्त 2011 नैनीताल के बच्चों से भी एक गुरु की भांति मिले थे दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति को
-कहा था-‘असंभव कल्पनाएें करो और उन्हें पूरा कर अद्वितीय बनो’ , ‘मुझे कुछ लेना है’ के बजाय’ मुझे देश को कुछ देना है’ का भाव रखो
नवीन जोशी, नैनीताल। ‘ड्रीम…. ड्रीम…. ड्रीम, ट्रांसफर देम इन टु थाट्स एंड रिजल्ट्स, एंड मेक एक्शन’ यानी खूब-खूब सपने देखो, उन्हें विचारों और परिणामों में बदलों और फिर कार्यान्वित करो। यह वे अनुकरणीय और प्रेरणादायी शब्द थे, जो दुनिया से ‘रातों को सोने न देने वाले सपने’ देखने का आह्वान करने वाले स्वप्नदृष्टा युगपुरुष दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने नैनीताल के बच्चों से कहे थे। देश के शीर्ष पद व सम्मान प्राप्त करने और दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक होने के बावजूद बच्चों को पढ़ाने, देश के ‘विजन-2020’ के लिए प्रेरणा देने के लिए उनके बीच ही बालसुलभ तरीके से अधिक समय लगाने वाले, वास्तविक अर्थों में सच्चे भारतीय, मां भारती के सच्चे सपूत, चमत्कारिक प्रतिभा के धनी, ज्ञान-विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ ही कला, साहित्य, संस्कृति के साथ ही संगीत के प्रेमी, मानवता के पोषक, देश को स्वदेशी सैन्य ताकत से युक्त करने वाले ‘मिशाइल मैन’, ‘रामेश्वरम के कलाम’ को कदाचित पहली बार नैनीताल के बच्चों ने ही ‘काका कलाम’ नाम से पुकारा था। यहां डा. कलाम से सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में नौ अगस्त 2011 को बच्चों ने घंटे के वार्तालाप में उनसे ढेरों प्रश्न पूछकर अपने बालमन की अनेक जिज्ञासाएं भी शांत की थीं।

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नैनीताल को कमजोर नगर बताना सच्चाई है या कोई साजिश !


Nainital Zone Map
नैनीताल का संवेदनशीलता को प्रदर्शित करता मानचित्र, जिसमें केवल पीला भाग ही भूस्खलनों से कम प्रभावित और शेष खतरनाक बताया गया है।

हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद नैनीताल में फिर ध्वस्तीकरण संकट: कदम-दर-कदम प्रशासनिक अक्षमताएं, और खामियाजा जनता को
फिर वही सवाल – क्या नैनीताल को बचाया नहीं जा सकता ? क्या ध्वस्तीकरण ही है आखिरी विकल्प ?

-2011 में पूरी हो चुकी है 1995 में बनी ‘नैनीताल महायोजना’, प्रशासन चार वर्षों से महायोजना नहीं बना पाया
-नालों की मरम्मत के लिए चार वर्ष पुराने करीब 21 करोड़ के दो प्रस्तावों पर शासन ने नहीं दिया एक ढेला भी, अब सारी गलती जनता पर डालने की तैयारी
-प्रशासन के पास कमजोर घरों का कोई सर्वेक्षण भी नहीं है
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल जिला प्रशासन नगर को ‘बचाने’ के नाम पर नगर के कमजोर, असुरक्षित घरों को ध्वस्त करने का मंसूबा बना रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कथित आदेशों का हवाला देकर नगर के जोन-एक व जोन-दो तथा सूखाताल के डूब क्षेत्र के घरों को ध्वस्त करने की योजना बताई जा रही है। इसके लिए प्रशासन भूमिका बनाने के लिए नगर के चुनिंदा लोगों की बैठक बुला चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नैनीताल को बचाने को अन्य विकल्प आजमाए जा चुके हैं, और क्या ध्वस्तीकरण ही आखिरी विकल्प बचा है।

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नालों को बचाना होगा तभी बचेगा नैनीताल


मल्लीताल में रोप-वे स्टेशन के पास के नाले की आज भी पाइप लाइनों और मलवे से पटी हुई ऐसी है स्थिति।
मल्लीताल में रोप-वे स्टेशन के पास के नाले की आज भी पाइप लाइनों और मलवे से पटी हुई ऐसी है स्थिति।

-नगर में अंग्रेजी दौर में बने 100 शाखाओं युक्त करीब 324 किमी लंबे 50 नालों में पानी की लाइनें, अतिक्रमण और गंदगी है बाधक
-कैचपिटों को हर बारिश के बाद साफ करने की व्यवस्था का नहीं होता पालन, मरम्मत के निर्माण कार्यों की गुणबत्ता बेहद खराब, सफाई के नाम पर भी होती है खानापूरी
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल में सितंबर 1880 में 18 को आए महाविनाशकारी भूस्खलन के बाद वर्ष 1901 तक बने 100 शाखाओं युक्त करीब 324.45 किमी लंबे 50 नालों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। नगर की धमनियां कहे जाने वाले इन नालों को हर किसी ने अपनी ओर से मनमाना इस्तेमाल किया है। नगर वासियों ने इन्हें कूड़ा व मलवा निस्तारण का कूड़ा खड्ड तथा इनके ऊपर तक अतिक्रमण कर अपने घर बनाने का स्थान बनाया है तो जल संस्थान ने इन्हें पानी की पाइप लाइनें गुजारने का स्थान, जबकि इसकी सफाई का जिम्मा उठाने वाली नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग ने इनमें आने वाले कूड़े व गंदगी को उठाने के नाम पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने और सफाई के नाम पर पैंसे बनाने का माध्यम बनाया है। यदि ऐसा न होता तो आज नाले अपना मूल कार्य, नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र का पूरा पानी बिना किसी रोकटोक के ला रहे होते, और नगर को कैसी भी भयानक जल प्रलय या आपदा न डिगा पाती। गनीमत रही कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर नगर के होटलों द्वारा अभी हाल ही में उसी स्थान से छह कमरे हटा दिए गए थे, जहां से रविवार की रात्रि दो हजार टन मलवा माल रोड पर आया है, यह कमरे न हटे होते तो रात्रि में इन कमरों में सोए लोगों के साथ हुई दुर्घटना का अंदाजा लगाना अधिक कठिन नहीं है।

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उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त


-प्रति एक हजार की जनसंख्या पर आउटसोर्सिंग से अधिकतम दो पर्यावरण मित्र ही होंगे तैनात नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के नगर निकायों के लिए बताए नए ढांचे में सफाई कर्मचारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों, सहायक अध्यापिका एवं लाइब्रेरियन सहित करीब डेढ़ दर्जन पद नामों को समाप्त कर दिया है। इनमें से सफाई कर्मचारियों का नाम परिवर्तित कर उन्हें पर्यावरण मित्र नाम देकर उनकी नियुक्ति केवल मृतक आश्रित कोटे से अथवा आउटसोर्सिंग से करने की नई व्यवस्था कर दी है, जबकि अन्य पद नामों को गैर जरूरी बताते हुए समाप्त कर दिया गया है। चतुर्थ श्रेणी के मृत संवर्ग … पढ़ना जारी रखें उत्तराखंड के निकायों में सफाई कर्मियों, पशु चिकित्साधिकारियों व शिक्षिकाओं सहित डेढ़ दर्जन पद समाप्त

योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?


-क्योंकि इनसे बेहतर सुधर रही उत्तराखंड व इसके चुनिंदा लोगों की आर्थिक सेहत शीर्षक पढ़कर चौंकिएगा नहीं। विश्व के 47 मुस्लिम देशों सहित कुल 192 देशों के द्वारा आगामी 21 जून को मनाए जा रहे ‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाने पर उत्तराखंड राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी की ‘नां’ के बाद यही पहला सवाल मन में उठता है। यदि उत्तराखंड कोई अलग राष्ट्र नहीं वरन भारतीय संघ का एक अंग या राज्य होता तो उसके मुख्यमंत्री कदापि केंद्रीय सरकार की एक वैश्विक पहल पर अपने कदम पीछे नहीं खींचते, और 21 जून को तय अपने ‘जागेश्वर योग महोत्सव’ … पढ़ना जारी रखें योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?

नैनीताल में पारा सारे रिकार्ड तोड़ने की ओर


24NTL-1नवीन जोशी, नैनीताल। देश के मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ों पर भी पारा आसमान उछलता नजर आ रहा है। पिछले एक सप्ताह में नैनीताल में पारे में करीब 10 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, और यह रविवार को यह अधिकतम 31 व न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस के साथ इस वर्ष के अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया है, तथा इस आशंका को भी प्रबल करने लगा है कि नैनीताल में अपने अधिकतम (ऑल टाइम हाई) के स्तर 37 डिग्री को भी छू सकता है।

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नेपाल में चल रही ‘बृहत्तर नेपाल’ के नाम पर भारत के खिलाफ मुहिम


दलिए भागबन्डामा रमाउनु आफन्त आफन्तलाई दुस्मन देख्नु नेपाली नागरिकको कमजोरी हो ! यो अबस्थाको सिर्जना गर्ने नेताहरुनै हुन् ! येस्बाट फाइदा लिने भारतनै हो! सन् १९४७ मा ब्रिटिशले सुगौली सन्धिबाट हडपेको नेपालीको भुमि छोडेकै हो! तत्कालिन नेपाली सासक्ले गुमेको भुमि फिर्ता नलिए पनि त्यो भुमि नेपालकै हो! नेपाली जनता तेती कम्जोर छैनन् ! नेपालीकै छोराहरु भारतीय गोर्खा रैफलमा छन् जसले भारतको सुरक्ष्या गरिरहेका छन्! भारतीय सेनाबाट गोर्खाली सेना नेपाल फिर्ता बोलाउने होभने भारतको अस्तित्तो धरापमा पर्छ ! नेपालीमा एकता छिट्टै पैदा होस् !
फेसबुक पर ‘ग्रेटर नेपाल’ पेज से

-1816 की सुगौली की संधि को नकारते हुए भारत के उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार व पश्चिम बंगाल तथा बांग्ला देश के कुछ हिस्सों को बताया जा रहा ग्रेटर नेपाल का हिस्सा
-नेपाली संविधान सभा से इसे देश के संविधान में जोड़ने का भी किया जा रहा आह्वान
नवीन जोशी, नैनीताल। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हजारों करोड़ रुपए की मदद के साथ नेपाल को साधने की मुहिम को पलीता लगाने की तैयारी हो रही है। हमेशा से पड़ोसी मित्र राष्ट्र कहे जाने वाले नेपाल में ‘बृहत्तर नेपाल राष्ट्रवादी मोर्चा’ सरीखे कुछ संगठनों के द्वारा भारत विरोधी छद्म युद्ध की जमीन तैयार की जा रही है। यह संगठन 2 दिसंबर 1815 को हस्ताक्षरित और 4 मार्च 1816 को पुष्टि होने वाली अंग्रेजों व गोर्खाओं के बीच हुई सुगौली की संधि से इतर भारत के हिमांचल, उत्तराखंड, बिहार व पश्चिम बंगाल तक गंगा नदी के उत्तर के क्षेत्रों और बांग्ला देश के भी एक हिस्से को जोड़कर ‘बृहत्तर नेपाल’ बनाने का दिवा स्वप्न पाल रहे हैं। नेपाल का संविधान बनाने में जुटी नेपाली संविधान सभा पर भी इस हेतु दबाव बनाया जा रहा है।

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वाह क्या खूब, मोबाइल फोन से बना डाली पूरी फिल्म


-नगर के युवाओं ने किया कारनामा, करीब आठ मिनट की फिल्म ‘एक दूर घटना” को छोटी फिल्मों की श्रेणी के पुरस्कारों के लिए भेजने की कोशिश भी
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी को कला की नगरी भी यूं ही नहीं कहा जाता। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती के चार युवाओं ने बीती गुड फ्राइडे की एक दिन की छुट्टी का उपयोग करते हुए अपने मोबाइल फोन से पूरी फिल्म बनाने का संभवतया देश-दुनिया में पहला सफल प्रयोग कर डाला है। सात मिनट की इस फिल्म को अब छोटी फिल्मों की श्रेणी में पुरस्कारों के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है।  पढ़ना जारी रखें “वाह क्या खूब, मोबाइल फोन से बना डाली पूरी फिल्म”

आज भी सड़क से दो से 15 किमी पैदल दूर हैं नैनीताल के 130 गांव


-सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित हर तरह की सरकारी सुविधा से दूर आदिम युग का जीवन जीने को मजबूर हैं इन गांवों के हजारों ग्रामीण
नवीन जोशी, नैनीताल। सुदूर मंगल तक कदम बढ़ाकर तथा अमेरिका से दोस्ती गांठ कर चीन, पाकिस्तान सहित अन्य देशों को अपनी बढ़ती शक्ति व ऐश्वर्य से चिढ़ा रहे, तथा आज भी कभी गांवों का देश कहे जाने वाले भारत में सैकड़ों गांव आदिम युग में जीने को अभिशप्त हैं। उत्तराखंड राज्य के सुविधासंपन्न व सुगम की श्रेणी में आने वाले नैनीताल जनपद के आंकड़े गवाह हैं, आज भी यहां 130 गांव ऐसे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए कच्ची पथरीली सड़क के बाद भी दो से 15 किमी तक पैदल चलना पड़ता है। बताने की जरूरत नहीं, कि जब इन गांवों में विकास की बुनियाद मानी जाने वाली सड़क ही नहीं होगी तो शिक्षा व स्वास्थ्य तथा अन्य विकास योजनाओं की भी कोई व्यवस्था यहां नहीं होगी। होगी भी तो वहां इन सेवाओं को पहुंचाने के लिए तैनात सरकारी कारिंदे अपनी काहिली से न खुद वहां पहुंचते होंगे, और ना ही सेवाओं को पहुंचने देते होंगे। पढ़ना जारी रखें “आज भी सड़क से दो से 15 किमी पैदल दूर हैं नैनीताल के 130 गांव”

एशिया का पहला जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और ब्याघ्र अभयारण्य


Elephants by Balbeer Singh
जिम कॉर्बेट पार्क में हाथियों का झुण्ड 

देश में राष्ट्रीय पशु-बाघों की ताजा गणना के अनुसार बाघों को बचाने के मामले में देश में नंबर-एक घोषित तथा भारत ही नहीं एशिया के पहले राष्ट्रीय पार्क-जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और ब्याघ्र अभयारण्य को 1973 से देश का ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत पहला राष्ट्रीय वन्य जीव अभयारण्य होने का गौरव भी प्राप्त है। उत्तराखंड राज्य की तलहटी में समुद्र सतह से 400 (रामनगर) से 1100 मीटर (कांडा) तक की ऊंचाई तक, पातली दून, कोसी व रामगंगा नदियों की घाटियों और राज्य के दोनों मंडलों कुमाऊं और गढ़वाल के नैनीताल व पौड़ी जिलों में 1288 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले दुनिया के इस चर्चित राष्ट्रीय उद्यान में प्रकृति ने दिल खोल कर अपनी समृद्ध जैव विविधता का वैभव बिखेरा है। हरे-भरे वनों से आच्छादित पहाडियां, कल-कल बहते नदी नाले, चौकड़ी भरते हिरनों के झुंड, संगीत की तान छेडते पंछी, नदी तट पर किलोल भरते मगर, चिंघाड़ते हुए हाथियों के समूह और सबसे रोमांचक रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड की गूंज जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व की सैर को अविस्मरणीय बना देते हैं।

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तीसरी कोशिश में बन पाया था बकिंघम पैलेस जैसा नैनीताल राजभवन


Governor House, Nainital
Governor House, Nainital

नवीन जोशी नैनीताल। लंदन के बकिंघम पैलेस की प्रतिकृति के रूप में 1899 में गौथिक शैली में बने नैनीताल राजभवन का नाम अपने अद्भुद शिल्प के लिये न केवल नगर की प्रसिद्ध इमारतों में सबसे ऊपर आता है, वरन इसकी गिनती देश ही नहीं दुनिया की सबसे सुंदर और बेजोड़ इमारतों में की जाती है, अपने कुल करीब 220 एकड़ क्षेत्रफल में से आठ एकड़ क्षेत्रफल में बने इसके मुख्य भवन के साथ 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैला विश्व का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित 18 होल का गोल्फ मैदान और गोल्फ क्लब तथा शेष 160 एकड़ भूमि पर घना खूबसूरत जंगल भी है। इसका निर्माण गहन भूगर्भीय जांचों के उपरांत बड़ी मजबूती के साथ किया गया, क्योंकि इससे पूर्व नैनीताल में दो और राजभवन बनाए गए थे, जिनमें नगर और उनके स्थानों की कमजोर भूगर्भीय स्थितियों की वजह से की बहुत कम समय में ही दरारें आने लगीं। लिहाजा यह तीसरी कोशिश में बन पाया।

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नैनीताल जनपद में एक साथ बने सर्वाधिक उम्र तक जीवित रहने के पांच विश्व रिकार्ड !


-126 वर्षीय बताए गए हैं जिले के सबसे बुजुर्ग मतदाता परमानंद पुरी महाराज
-जनपद में कुल 38 शतायु मतदाता
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल जनपद गौरवान्वित हो सकता है कि उसके यहां न केवल 38 शतायु मतदाता हैं, वरन एक मतदाता-परमानंद पुरी महाराज की उम्र 126 वर्ष बताई गई है। यही नहीं यहां विश्व रिकार्ड उम्रदराज व्यक्तियों के मामले में एक साथ पांच विश्व रिकार्ड बनने जा रहे हैं। जी हां, कोई विश्वास करे, अथवा नहीं, लेकिन जनपद के भरोसेमंद निर्वाचन विभाग के आंकड़े यही कहानी बयां कर रहे हैं।  पढ़ना जारी रखें “नैनीताल जनपद में एक साथ बने सर्वाधिक उम्र तक जीवित रहने के पांच विश्व रिकार्ड !”

नैनीताल देखने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया हाथियों का झुंड


Elephants by Balbeer Singh
(इस पोस्ट में प्रतीकात्मक तौर पर जोड़ा जा रहा यह चित्र मूलतः दिवंगत, देश के अपनी तरह के इकलौते विकलांग छायाकार बलवीर सिंह द्वारा जिम कार्बेट पार्क में लिया गया है। )

-पूर्व में भी सूखाताल एवं नैनी झील के पास हाथियों के पहुंचने हैं प्रमाण
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, आश्चर्य होगा। किंतु क्षेत्रीय ग्रामीणों के दावों पर यकीन किया जाए तो यह सच है।

नैनीताल के निकटवर्ती बल्दियाखान क्षेत्र में समुद्र सतह से करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बसगांव के बुड़ भूमिया मंदिर के पास गत दिवस हाथियों का झुंड देखे जाने का दावा किया गया है। वन विभाग के आला अधिकारी भी इस दावे पर न केवल यकीन कर रहे हैं, वरन पूर्व के संदर्भों व प्रमाणों के आधार पर इसे हाथियों का यहां पहली बार आना नहीं वरन अपने पुराने रास्तों पर वापस लौटना मान रहे हैं। यानि, कह सकते हैं कि हाथियों का झुंड नैनीताल को देखने अथवा पुरानी यादें ताजा करने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया होगा।

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