सूखाताल से निकलने वाली नदी से हुआ था नैनी झील का निर्माण


Catchment Area of Sukhatal in Nainital's Survey of India Map (1936)
Catchment Area of Sukhatal in Nainital’s Survey of India Map (1936)

-सेंट जोन्स चर्च व तल्लीताल डांठ के पास नदी का मार्ग अवरुद्ध होने से बनी झीलें
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के सेवानिवृत्त प्रोेफेसर वरिष्ठ भूगोलविद् एवं नैनी झील पर गहन शोधरत प्रो.जीएल साह ने अपने शोध के उपरांत निश्कर्ष निकाला है कि विश्व प्रसिद्ध नैनी झील का निर्माण लाखों वर्ष पूर्व एक नदी का मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से हुआ होगा। संभवतया बलिया नाम की उस नदी का उद्गम स्थल आज की सूखाताल झील के पास रहा होगा। इस नदी में वर्तमान सेंट जोन्स चर्च के पास तथा तल्लीताल डांठ के पास भूगर्भीय हलचलों की वजह से नगर की पूर्वी व पश्चिमी ओर की पहाड़ियां शेर का डांडा और अयारपाटा में विचलन से हुए भूस्खलन की वजह से नदी का मार्ग अवरुद्ध हो गया होगा, और इस प्रकार आज की नैनी झील और सूखाताल झील का निर्माण हुआ होगा।

Pr. G.L.Sah
Pr. G.L.Sah

अपने करीब दो वर्ष पूर्व से नैनी झील पर किए जा रहे शोध के निश्कर्षों का खुलासा करते हुए प्रो. साह ने बताया कि सूखाताल झील, नैनी झील के अस्तित्व के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है इन दिनों उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी सूखाताल झील को पुर्नजीवित करने के लिए प्रयासरत है, जबकि अन्य पक्ष सूखाताल के भूतकाल में झील ही ना होने के तर्क दे रहे हैं। ऐसी स्थितियों में प्रो. साह के खुलासे बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रो. साह ने बताया कि 1872, 1893 व 1899 के अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए नक्शों में भी सूखाताल झील को प्रदर्शित किया गया है, तथा इसे वर्षाकाल में भरने वाली झील बताया गया है। वहीं 1936 के सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र के आधार पर प्रो. साह ने बताया कि तब सूखाताल झील के जल आप्लावित क्षेत्र का क्षेत्रफल 3.3 हेक्टेयर और अधिकतम जल भराव की गहराई वर्तमान में सूखाताल झील में बने मां शाकुंभरी देवी मंदिर के स्थान पर 35 फीट थी। तब सूखाताल झील के पश्चिमी छोर पर ‘वांलिंटियर रायफल रेंज’ यानी चांदमारी थी, जहां लोग एवं अंग्रेज सिपाही निशाना लगाना सीखते थे। सूखाताल झील सितंबर मध्य तक बारिश के पानी से भरी रहती थी, और अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक इसका पानी रिस-रिस कर नैनी झील में जाता रहता था।

Sukhatal in today's era
Sukhatal in today’s era
इसलिए सूखी है सूखाताल झील
नैनीताल। सूखाताल के सूखी होने पर लोग अलग-अलग कयास लगाते हैं। इस बाबत प्रो. जीएल साह ने अनेक कारण बताए। पहला कारण इस झील का जलागम क्षेत्र नैना पीक व हांडी-भांडी की ओर से कुल मिलाकर केवल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल का होना है। इसमें से भी बड़ा हिस्सा नैनी झील के सबसे बड़े, नाला नंबर 23 से और दूसरी ओर स्लीपी हॉलो क्षेत्र से नैनी झील में चला जाता है। दूसरे, चूंकि यह नदी का उद्गम स्थल था, और दुनिया की हर नदी की तरह इस नदी के उद्गम स्थल पर भी कम पानी की धार ही फूटती थी। तीसरे, नैनी झील की तरह ही सूखाताल झील भी वर्षा के जल से भरने वाली यानी ‘इंटरमिटेंट’ झील है। चौथे, इसके जलागम क्षेत्र का 30 फीसद हिस्सा चट्टानों व तीक्ष्ण ढलान वाला है, इस कारण इसमें पानी बारिश के दौरान तत्काल आ जाता है, रिस-रिस कर धीरे-धीरे नहीं पहुंचता। तथा पांचवा, अंग्रेजी दौर से ही इसके जलागम में सर्वाधिक भवन थे, हालिया दौर में यहीं अत्यधिक निर्माण हुए हैं, जिस कारण भी पानी के रिस कर पहुंचने की दर बहुत कम है। तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हालिया वर्षों में सूखाताल झील को बकायदा एक निविदा प्रक्रिया के तहत मलवा डालकर भर दिया गया है। इससे झील की गहराई खत्म हो गई है। इसलिए यह जल्द भर जाती है, और जल्द खाली भी हो जाती है।
कभी आठ कुंए भी थे सूखाताल क्षेत्र में
नैनीताल। प्रो. साह क्षेत्र में आर्डवेल नाम के एक भवन को ‘आठ वेल’ यानी आठ कुंओं का अपभ्रंश मानते हुए यहां पॉलीटेक्निक व एटीआई के बीच मुल्ला पोखर सहित आठ कुंए होने का दावा करते हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के 1932 के नक्शे में भी ऐसे अनेक कुंए दर्शाए गए हैं।
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