कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का इतिहास


नाटक प्रतियोगिता 20 के विजेता रहे नाटक 'उरुभंगम' के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार
नाटक प्रतियोगिता 2017 के विजेता रहे नाटक ‘उरुभंगम’ के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार

सरोवरनगरी को कला की नगरी भी कहा जाता है। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती सरोवर नगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक नगर में 1882 में (वर्तमान कैपिटॉल सिनेमा की जगह पर) बने नाचघर में लानटेनों की रोशनी में नाटक खेले जाते थे, जिसे तक अनेकों कमियों की वजह से दुनिया का सबसे खराब स्टेज भी कहा गया था। सचिवालय में तैनात बंगाली मूल के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 1894 में ‘बंगाली एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब’ की नींव रखी थी, जिसके तहत वे बंगाली नाटक करते थे।

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : अबकी बार किसकी सरकार ?


राजनीतिक दलों पर मेरे विचार:

किसी भी संगठन के राजनीतिक दल होने के लिये एक प्रमुख शर्त है, उसका चुनाव लड़ना। यदि कोई राजनीतिक दल चुनाव नहीं लड़ता है तो वह राजनीतिक दल ही नहीं है, वरन केवल एक संगठन है। दूसरी बात, लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल की असली परीक्षा उसकी चुनाव में जीत या हार से ही तय होती है। क्योंकि इसी से तय होता है कि उस दल की विचारधारा का कितनी जनता समर्थन या विरोध करती है। यदि कोई राजनीतिक दल बहुत अच्छी विचारधारा व सिद्धांतों वाला है, किंतु वह चुनाव नहीं जीत पाता है, तो उसका कोई मूल्य नहीं। एक और बात, हर राजनीतिक दल की कोई एक विचार धारा या सिद्धांत होते हैं। लेकिन मेरे विचार से उस दल के विचार या सिद्धांत उसके सत्ता में आने पर किये गये कार्यों से देखे और आंके जाने चाहिये, केवल चुनाव के दौरान वादों, वादों और दावों से नहीं। चुनाव के दौरान कई राजनीतिक नेता और जनता के लोग भी अपना दल या निष्ठा बदलते हैं। मेरे विचार से इसमें कुछ बुरा नहीं है। क्योंकि यही समय होता है जब लोकतंत्र में नेता हों अथवा जनता, किसी दल के पिछले कार्यकाल का मूल्यांकन कर सकते हैं, और दलीय निष्ठा बदल सकते हैं। बेशक, इसमें लोगों अथवा राजनीतिक नेताओं का स्वार्थ, राजनीतिक नफा-नुकसान छुपा हुआ हो। पढ़ना जारी रखें “उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : अबकी बार किसकी सरकार ?”

डा. मुरली मनोहर जोशी हो सकते हैं भारत के अगले राष्ट्रपति !


  • गौरतलब है कि जुलाई माह में देश को नया राष्ट्रपति मिलना तय है। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। हालांकि लंबे अर्से से चर्चा चल रही थी कि मुखर्जी एक कार्यकाल और चाहते हैं। एनडीए की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उनकी नरमी इस चर्चा को बल देती नजर आ रही थी। किंतु अब स्पष्ट हो चला है कि प्रणव दा दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनने जा रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें उनकी मनपसंद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का आवास रहा राजाजी मार्ग स्थित आवास नंबर 10 आवंटित कर दिया है। वर्तमान में केंद्रीय संस्कूति राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा को यह आवास आवंटित है। बताया गया है कि लुटियंस दिल्ली के गलियारों से लेकर नागपुर में संघ मुख्यालय तक इन दिनों नए राष्ट्रपति को लेकर जबरदस्त कयासबाजियों का दौर चालू है। आजादी के बाद पहली बार ऐसी संभावना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नीति और सिद्धांत को मानने वाले और उत्तराखंड निवासी व्यक्ति भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति बन सकते हैं।

    उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

    -देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं

    -अब चाहें तो ये अधिकारी स्थानीय लोकभाषाओं में भी ‘कोडवर्ड’ की तरह बात करके दुश्मन को दाल सकते हैं मुश्किल में 

    नवीन जोशी, नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये हमेशा से अपना सर्वाेच्च बलिदान देने के लिये प्रसिद्ध ‘देश के मस्तक’ कहे जाने वाले छोटे से राज्य उत्तराखंड के लोग हालाँकि हमेशा से अनेक क्षेत्रों में शीर्ष पदों पर रहते रहे हैं, किन्तु इधर उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व से ‘सर ऊंचा’ और ‘सीना चौड़ा’ होने के अनेक कारण एक साथ आ गए हैं। उत्तराखंड के तीन सपूतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एकमुश्त देश के तीन सर्वाेच्च पदों के जरिये देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोंपी गयी है। देश के ‘जेम्स बांड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद अब लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना ‘टीम मोदी’ में भारतीय सेना के शीर्ष पदों पर नियुक्त किये गये हैं। इससे उत्तराखंड में हर्ष होना स्वाभाविक ही है।

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उत्तराखंड के छह फीसद गांव हो गये ‘भुतहा’, नेताओं, देवी-देवताओं ने भी कर दिया पलायन


पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर
पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर

-60 लाख पर्वतीय आबादी में से 32 लाख लोगों ने किया पलायन, 17,793 गांवों में 1,053 गांव हो गये खाली

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड प्रदेश में ‘विकास’ के लिये 409 अरब रुपये कर्ज लेने के बाद भी राज्य की अवधारणा के अनुरूप पलायन नहीं रुका है। 2011 की ताजा जनगणना के अनुसार प्रदेश के 17,793 गांवों में 1,053 यानी करीब छह फीसद गांव खाली हो चुके हैं, बल्कि इन्हें ‘भुतहा गांव’ (घोस्ट विलेज) कहा जा रहा है। वहीं कुल मिलाकर करीब एक करोड़ की आबादी वाले इस राज्य की पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाली 60 लाख की आबादी में से 32 लाख लोगों का पलायन हो चुका है। प्रदेश के अधिकांश बड़े राजनेताओं (कोश्यारी, बहुगुणा, निशंक, यशपाल आर्य) ने भी अपने लिये मैदानी क्षेत्रों की सीटें तलाश ली हैं, वहीं भूमिया, ऐड़ी, गोलज्यू, छुरमल, ऐड़ी, अजिटियां, नारायण व कोटगाड़ी सहित कई देवताओं ने भी पहाड़ों से मैदानों में पलायन कर दिया है।

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उत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सीएम कैंडीडेट के तौर पर पसंद हो सकते हैं पूर्व नौकरशाह सूर्यप्रताप सिंह


  • कैग में एकमात्र आईएएस अधिकारी के तौर पर भी हैं तैनात, प्रधानमंत्री मोदी हैं इनकी इमानदारी से प्रभावित और उनके करीब भी हैं सिंह
  • बेहद चर्चित आईएएस अधिकारी रहे हैं एसपी सिंह, नैनीताल व हल्द्वानी में रहा 90 के दशक में जलवा, जीएमवीएन के एमडी भी रहे
  • भाजपा उत्तराखंड के साथ ही यूपी में भी कर सकती है उपयोग, हल्द्वानी और अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की संभावना
  • आरएसएस के साथ ही यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं

नवीन जोशी, नैनीताल। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत से सत्तारूढ़ होने के बाद से हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा अनपेक्षित निर्णय करती रही है, और बिहार व दिल्ली को छोड़कर उसके ये निर्णय सफल भी रहे हैं। ऐसे ही किसी निर्णय की उत्तराखंड में भी पार्टी रणनीति बना सकती है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री के करीबी, कैग में तैनात एकमात्र प्रशासनिक अधिकारी, 1982 बैच के आईएएस अधिकारी, पूर्ववर्ती यूपी के दौर में 1990 के दशक में तत्कालीन नैनीताल जनपद (वर्तमान ऊधमसिंह नगर जनपद भी शामिल) के डीएम रहते उस दौर में भी मजबूत व राज्य की मौजूदा काबीना मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से टकराने तथा गढ़वाल में जीएमवीएन के एमडी रहते गढ़वाल में एक तत्कालीन मंत्री (जिनके पुत्र वर्तमान में भी मंत्री हैं) के ससुर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बेहद दबंग और चर्चित रहे आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह भाजपा में शीघ्र शामिल हो सकते हैं, और आगामी विस चुनावों में पहले से घोषित अथवा बाद में मुख्यमंत्री के रूप में पेश किये जा सकते हैं। हालांकि बकौल सिंह अभी तक उनकी भाजपा नेताओं से कोई बात नहीं हुई है, और वे यह भी मानते हैं कि किसी भी दल के नेता उन्हें स्वीकार नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने इतना स्पष्ट कहा कि वे उनके एजेंडे को स्वीकार करने वाले किसी भी दल में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल विधायक बनने या सत्ता का आनंद प्राप्त करने के लिये नहीं वरन राजनीति में सुधार करने, समाज के लिये कुछ बेहतर करने के लिये राजनीति में आना चाहते हैं। उनकी ख्वाहिश है कि शिक्षा या किसी क्षेत्र विशेष में मौका मिले तो वे उसे सुधार कर रख दें। उन्होंने यूपी में सपा व बसपा को सांपनाथ व नागनाथ की संज्ञा देने के साथ भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी के विचारों के प्रति स्पष्ट तौर पर झुकाव भी प्रदर्शित किया है।
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विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास


रेडियो के इतिहास पर निगाह डालें तो 1896 में इलेक्ट्रिकल इंजिनियर गुगलियेल्मो मार्कोनी ने पहली बार विद्युत चुंबकीय तरंगो द्वारा दो मील की दूरी तक एक सन्देश भेजने में सफलता प्राप्त की थी, लिहाजा रेडियो के विकास में उनका नाम शुरुवात में लिया जाता है। उन्हें 2 जून 1896 को उन्हें वायरलेस का पेटेंट मिला। आगे उन्होंने ही 1919 में चेम्बर्सफोर्ड में पहला रेडियो प्रसारण का ट्रांसमीटर भी स्थापित किया था। मनुष्य में अपनी आवाज को दूर तक पहुँचाने की चाह न जाने कब से रही है, और न जाने कब से लोग, बच्चे माचिस की डिब्बियों से धागा बांधकर आवाज … पढ़ना जारी रखें विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास

500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !


2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी
2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी

एक 9/11  (यानी 11 सितंबर 2001) को हुए आतंकवादी हमले से न सिर्फ यह महाशक्ति अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ‘ट्विन टावर्स’ पर हुए आतंकवादी हमले से दहल गई थी। वहीँ इस 9/11  यानी नौ सितम्बर 2016 को भी वाकई बड़ा अद्भुत हुआ है। यहाँ भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर की रात (इससे पूर्व 28 सितम्बर 2016 की रात्रि पाक अधिकृत कश्मीर में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर,) काले धन पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ की तो वहां अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ‘वर्ल्ड आर्डर’ को बदलते हुए राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

कुछ भी कहिये, आज देश में साम्यवाद आ गया..
सबकी जेब में बराबर पैसे ! 😄

आज देश में रामराज भी आ गया !
जेल के दरवाजे भी खोल दो तो कोई बाहर जाने को तैयार नहीं 😜
तिजोरी खोल कर रख दो, कोई लूटने को तैयार नहीं 😝 पढ़ना जारी रखें “500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !”

चार गुने से अधिक बढ़कर पांच अरब हुआ टोकियो ओलंपिक का बजट, पदक पहुंचेंगे दहाई में


राजीव मेहता
राजीव मेहता

51 करोड़ बढ़कर 1592 करोड़ हुआ देश में खेलों का बजट, साई व नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन का बजट भी बढ़ा
नवीन जोशी, नैनीताल। देश में पहली बार केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री विजय गोयल खेलों के प्रति इतने अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार की पहल पर भारतीय ओलंपिक संघ ने अभी से 2020 के ओलंपिक खेलों की तैयारी शुरू कर दी है। पहली बार ओलिंपिक खेलों का बजट एक बार में पिछले 120 करोड़ की जगह चार गुना से अधिक बढ़ाते हुए 500 करोड़ कर दिया है, वहीं देश में खेलों का कुल बजट भी पिछले वर्ष से 50.87 करोड़ बढ़ाकर 1592 करोड़ कर दिया गया है। इससे उत्तराखंड सहित अभी भी खेलों की मूलभूत ढांचागत सुविधाओं से वंचित एक दर्जन से अधिक राज्यों में खेल सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। बढ़े हुए खेल बजट से देश में खेल सुविधाएं बढ़ेंगी और आगे टोकियो ओलिंपिक में पदक कम से कम दहाई में पहुचेंगे। उत्तराखंड में 2018 में राष्ट्रीय खेल अपने नियत समय पर होंगे। इनके तहत नैनीताल की नैनी झील में देश की करीब एक दर्जन टीमों को शामिल कर सेलिंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।

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सर्जिकल स्ट्राइक : जिसे सबूत चाहिए , यहाँ देखे


सर्जिकल स्ट्राइक : पक्के वैज्ञानिक http://tpc.googlesyndication.com/safeframe/1-0-5/html/container.html#xpc=sf-gdn-exp-1&p=http%3A//m.navbharattimes.indiatimes.comसबूत हैं, मगर देंगे नहीं !

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राष्ट्रीय सहारा 06 अक्टूबर 2016

-वैज्ञानिकों ने कहा भारत उपग्रह आधारित सुदूर संवेदी में विश्व में अग्रणी, मगर पाकिस्तान कहीं ठहरता नहीं, सामरिक दृष्टिकोण से सबूत देना हो सकता है आत्मघाती
नवीन जोशी, नैनीताल। बीती 29 मई को भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में किये गये ‘सर्जिकल स्ट्राइक” के बाद देश के चंद नेताओं द्वारा सबूत मांगने की स्थितियों के बीच वैज्ञानिक पूरी तरह सेना की कार्रवाई के साथ ही सेना व सरकार के पास कार्रवाई के पक्के वैज्ञानिक सबूत होने के प्रति भी मुतमईन हैं। बहुत संभावना है कि यह सबूत मानव द्वारा की गई फोटोग्राफी या वीडियो ग्राफी से इतर उपग्रह आधारित पृथ्वी पर निगरानी रखने वाले उपकरणों आधारित सुदूर संवेदी यानी रिमोट सेंसिंग के भी हो सकते हैं, जिसमें भारत विश्व में अग्रणी है। भारत अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अपने उपग्रहों से एक फिट तक के रिजोल्यूशन के फोटो और वीडियो खींचने में सक्षम हैं। अलबत्ता, यह सबूत किसी भी कीमत पर, नेताओं के कैसे भी आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद सार्वजनिक नहीं किये जा सकते हैं, क्योंकि इनसे देश की सामरिक रणनीति आदि बेपर्दा हो सकती है, और यह देश की सुरक्षा के लिये आत्मघाती हो सकता है। पढ़ना जारी रखें “सर्जिकल स्ट्राइक : जिसे सबूत चाहिए , यहाँ देखे”

रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !


रोहित शेखर -करीब एक वर्ष से राहुल-सोनिया को भी साधने के बावजूद कांग्रेस से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने से हैं नाखुश, कहा था-पिता के जन्म दीं के बाद होंगे ‘खुले पंछी’ -भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट व सांसद भगत सिंह कोश्यारी के हुई है बात, लालकुआ, भीमताल, किच्छा और काशीपुर सीटों से चुनाव लड़ने के दिए हैं विकल्प, समाजवादी पार्टी से भी हैं बेहतर संबंध नवीन जोशी, नैनीताल। कभी प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति के शीर्ष पुरुष रहे यूपी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर पिता की 80 वर्ष से सेवित … पढ़ना जारी रखें रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !

देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन


Coverनैनीताल। अमेका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट व परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता तथा पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. गिरीश रंजन तिवारी आदि के हाथों पत्रकार नवीन जोशी की पुस्तक देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन किया गया। लेखक नवीन जोशी ने बताया कि पुस्तक कुमाऊं -उत्तराखंड की भावी पीढि़यों और यहां आने वाले वाले सैलानियों को इस उम्मीद के साथ समर्पित है कि उन्हें इस पुस्तक के माध्यम से इस अंचल को समग्रता में समझने में मदद मिलेगी। पुस्तक तीन खंडों- देवभूमि उत्तराखंड व कुमाऊं के इतिहास, यहां के धार्मिक, आध्यात्मिक व पर्यटन महत्व के स्थलों तथा यहां के तीज-त्योहारों, लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और विशिष्टताओं का वर्णन करती है। यह देवभूमि के खास तौर पर ‘देवत्व’ को एक अलग अंदाज में देखने का प्रयास है। उनका मानना है कि देवभूमि का देवत्व केवल देवताओं की धरती होने से नहीं, वरन इस बात से है कि यह भूमि पूरे देश को स्वच्छ हवा, पानी, जवानी व उर्वरा भूमि के साथ प्राकृतिक व आध्यात्मिक शांति के साथ और भी बहुत कुछ देती है, और वास्तव में देवता शब्द देता या दाता शब्दों का विस्तार है। पढ़ना जारी रखें “देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन”

मनुष्य की तरह पैदा होते, साँस लेते, गुनगुनाते और मरते भी हैं तारे


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प्रो. क्रिस एंजिलब्रेथ्ट

-जोहान्सवर्ग यूनिवर्सिटी के प्रो. क्रिस एंजिलब्रेथ्ट ने अपने ‘म्यूजिक ऑफ दि स्टार’ लेक्चर के जरिये समझाया तारों का संगीत
नवीन जोशी, नैनीताल। कहा जाता है मानव और पृथ्वी की उत्पत्ति मूलत: तारों से हुई। आज भी जब किसे प्रियजन की मृत्यु होती है तो बच्चों को समझाया जाता है, की वह तारा बन गया है। तारे टिमटिमटाते हैं तो लगता है कि वे सांस ले रहे हैं, और उनका दिल धड़क रहा है। लेकिन अब वैज्ञानिक भी यह कहने लगे हैं कि तारे न केवल टिमटिमाते हुए सांस ही लेते हैं, वरन गुनगुनाते भी हैं। वैज्ञानिकों ने इनके गीतों यानी सुरों को समझने का भी दावा किया है। दक्षिण अफ्रीका के विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिये कार्य करने वाले जोहान्सवर्ग यूनिवर्सिटी में कार्यरत अंतरिक्ष विशेषज्ञ प्रोफेसर क्रिस एंजिलब्रेथ्ट बकायदा जगह-जगह जाकर अपने ‘म्यूजिक ऑफ दि स्टार’ लेक्चर के जरिये तारों के संगीत को समझाते हैं।

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15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !


Gaurav Siddarth
बाइकर गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का उत्साह बढ़ाने उन्हें बाइक पर पीछे बैठाकर चलते योगगुरु बाबा रामदेव।

-एक देश में सर्वाधिक बाइकिंग का अमेरिकी बाइकर डेनेल लिन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा

-आगे अप्रैल 2017 तक 1.2 लाख किमी का अजेय रिकॉर्ड बनाने की है योजना
-बाइक, ग्लब्स व सुरक्षा उपकरणों से लेकर जीपीएस व हाईवे पर स्थानों की पहचान के लिए मोबाइल ऐप सहित सबकुछ भारतीय प्रयोग कर ‘मेक इन इंडिया’ को भी दे रहे बढ़ावा
नवीन जोशी, नैनीताल। देश के खिलाड़ी आज जहां रियो ओलंपिक में विश्व के खिलाड़ियों से रिकॉर्डों के लिए जूझ रहे हैं, वहीं देश में 70वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नैनीताल के गौरव सिद्धार्थ बिष्ट  एक विश्व रिकार्ड को तोड़कर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया है। एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। गौरव ने इस रिकॉर्ड को स्वतंत्रता दिवस पर तोड़ दिया है, साथ ही यह  भी साफ़ कर दिया है कि वह रिकॉर्ड बनाकर थमने वाले नहीं हैं, वरन आगे उनका इरादा फरवरी 2017 तक 1.2लाख किमी चलकर अजेय रिकार्ड बनाने का भी है। पढ़ना जारी रखें “15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !”

21 जून ‘विश्व योग दिवस’ को आएगा ऐसा अनूठा पल, गायब हो जाएगी आपकी छाया !


21 June

नवीन जोशी, नैनीताल। यूं माना जाता है कि जब भी सूर्य किसी लंबवत वस्तु या खड़े मनुष्य के ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तो उस वस्तु या मनुष्य की छाया सैद्धांतिक तौर पर नहीं दिखाई देती। किंतु ऐसा होता नहीं है। सूर्य कभी भी पूरी तरह ठीक सिर के ऊपर लंबवत नहीं होते, वरन थोड़ा-बहुत इधर-उधर होते हैं, और इस कारण लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया भी थोड़ी-बहुत दिखाई देती है। लेकिन आगामी 21 जून को जब पूरी दुनिया भारत वर्ष के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुमोदन पर विश्व योग दिवस मना रही होगी, तब कर्क रेखा पर स्थित स्थानों पर ऐसा अनूठा पल आएगा, जबकि लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया स्वयं उनमें ही समाहित हो जाएगी और दिखाई नहीं देगी।

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उत्तराखंड में ‘दावानल’ की राष्ट्रीय आपदा : न खुद भड़की आग, न उकसाया हवा ने


  पूरी तरह मानव जनित थी आग  !

-सभी आग कहीं न कहीं लोगों द्वारा ही लगाई गई हैं, तापमान कम होने से प्राकृतिक कारणों से आग लगने का अभी कोई कारण नहीं
-आग को भड़काने में प्राकृतिक हालात बने मददगार, अलबत्ता लकड़ी माफिया द्वारा आग लगाने की संभावनाओं से इन्कार
नवीन जोशी, नैनीताल। पहली बार ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित उत्तराखंड की वनाग्नि पूरी तरह मानव जनित है, और इसके प्राकृतिक कारणों से शुरू होने के कहीं कोई सबूत या स्थितियां नहीं हैं। अलबत्ता पिछले तीन-चार दिनों में जब यह आग दावानल के रूप में दिखाई दी, तब प्राकृतिक हालातों ने जरूर इसे इस हद तक भड़काने में ‘आग में घी डालने’ जैसा कार्य किया। वहीं वन माफिया द्वारा आग लगाने के दावों को खारिज तो नहीं किया जा रहा है, पर इसकी स्पष्ट वजह भी नहीं बताई जा रही है।

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