अब हर कोई दे सकेगा देश की सीमाओं की सुरक्षा में योगदान


-चीन सीमा पर स्थित कुटी गांव की सफलता के बाद अब केएमवीएन शुरू करने जा रहा है दार्मा और ब्यांस घाटियों में भी ‘होम स्टे’ की सुविधा

-ग्रामीणों के साथ घर पर रहकर सैलानी अनुभव कर सकेंगे वहां के जनजीवन का रोमांच

-सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार के साथ ग्रामीणों का पलायन रोककर सीमाओं को सशक्त करने में भी होगी बड़ी भूमिका

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राष्ट्रीय सहारा, 25 अप्रैल 2017, देहरादून संस्करण।

नवीन जोशी, नैनीताल। क्या हम बिना भारतीय सेना में शामिल हुए देश की सीमाओं की रक्षा और सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं ? शायद इस प्रश्न का उत्तर हम ‘नां’ में दें, किंतु कुमाऊं मंडल विकास निगम इस प्रश्न का उत्तर हमारे मुंह से ‘हां’ में देने का प्रबंध करने जा रहा है। निगम के एमडी धीराज गर्ब्यांल अपनी महत्वाकांक्षी ‘सीमांत गांवों की होम स्टे’ योजना के तहत यह प्रबंध करने जा रहे हैं, जिसके तहत सैलानी अब कुमाऊं मंडल के तिब्बत सीमा से लगे प्राकृतिक सुंंदरता से लबरेज हिमालय की गोद में सजी दारमा व ब्यांस घाटियों में जाकर वहां के गांवों में ग्रामीणों के साथ उनके घरों में रहकर न केवल वहां के जनजीवन का अनुभव व रोमांच ले पाएंगे। वरन इन सीमांत गांवों के ग्रामीणों की आर्थिकी में वृद्धि कर उनके समक्ष रोजगार के अभाव में खड़ी पलायन व बेरोजगारी की समस्या का समाधान कर पाएंगे, जिससे अन्तत: यहां के ग्रामीण पलायन करने को मजबूर नहीं होंगे, और देश की सीमाओं पर सेना में रहे बिना भी मानव दीवार के रूप में सीमा के सशक्त प्रहरी की भूमिका का निर्वाह करते रहेंगे, और इसमें इन गांवों में जाने वाले सैलानियों का भी योगदान होगा।

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देश-दुनिया में नाम कमा पहाड़ के लिए काम कर रहे पहाड़ के बेटे


अंडर द स्काई का पार्ट-2 भी उत्तराखंड में फिल्माएंगे डा. एहसान

नवीन जोशी, नैनीताल। कम ही लोग होते हैं जो अपने घर से दूर, दुनिया में प्रसिद्ध होते हैं, लेकिन बाद में घर लौटकर अपनी प्रतिभा का लाभ अपनी मिट्टी को दिलाते हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से निकलकर मुंबई फिल्म उद्योग में देश-दुनिया में अनेक फिल्म फेस्टिवल में आखिरी मुनादी व अंडर द स्काई जैसी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता स्तर की फिल्म बनाने तथा छोटे पर्दे पर ससुराल सिमर का, प्रतिज्ञा व माता की चौकी जैसे चर्चित शो लिख कर नाम कमाने वाले प्रदेश के बेटे, राष्ट्रीय नाटय़ विद्यालय से स्नातक व उत्तराखंड के इतिहास विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त डा. एहसान बख्श फिर उत्तराखंड में काम करने जा रहे हैं। उत्तराखंड के बच्चों को ही लेकर उत्तराखंड में ही बनायी गयी फिल्म अंडर द स्काई को देश के साथ ही दुनिया के फिल्म मेलों में मिली अपार सफलता से उत्साहित एहसान एक बार फिर उत्तराखंड के बच्चों को लेकर इसी फिल्म का पार्ट-2 बनाने जा रहे हैं। पढ़ना जारी रखें “देश-दुनिया में नाम कमा पहाड़ के लिए काम कर रहे पहाड़ के बेटे”

गंगा-यमुना के बाद ग्लेशियर, नदी, नाले, झील, जंगल, चरागाह भी अब ‘जीवित मानव’


गंगा माता की आरती के लिए चित्र परिणाम-उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक और एतिहासिक फैसला देते हुए गंगा-यमुना के बाद गंगोत्री, यमुनोत्री सहित नदी, नालों, झीलों, जंगलों, चरागाहों को भी जीवित मानव का दर्जा दिया

– भारतीय मिथकों की कण-कण में ईश्वर होने की परिकल्पना पर लगी एक तरह से मुहर
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक और एतिहासिक फैसला देते हुए गंगा और यमुना नदियों के बाद अब इनके उद्गम स्थलों-गंगोत्री व यमुनोत्री सहित ग्लेशियरों के साथ ही नदियों, छोटी नदियों, घाटियांे, जल धाराओं, ग्लेशियरों, झीलों, हवा, घास के मैदानों, जंगलों, जंगली जलराशियों व झरने इत्यादि को कानूनी वैधता, कानूनी तौर पर जीवित मनुष्य का दर्जा दे दिया है। इन्हें एक कानूनी तौर पर जीवित व्यक्ति की तरह सभी संबंधित मौलिक व कानूनी अधिकार होंगे, साथ ही इनके जीवित मनुष्य की तरह दायित्व और जिम्मेदारियां भी होंगी।

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क्या आपको पता है कौन हैं नैनीताल के पहले ओलंपियन ?


UR2YCD7HJ32gdD5eh1TJ43UQऑस्ट्रेलिया के लिये खेले नैनीताल के पहले ओलंपियन रेमंड, यह ऑस्ट्रेलिया का हॉकी में पदार्पण ओलंपिक भी था 

-कहा-शेरवुड से मिले हॉकी खेलने के ज्ञान और प्रोत्साहन से ही खेल पाये ऑस्ट्रेलिया का हॉकी में पहला ओलंपिक

रेमंड वाइटफील्ड व कोलीन.

सहारा न्यूज ब्यूरो। नैनीताल। बुधवार का दिन शेरवुड कॉलेज के साथ ही यहां के 1941 से 1947 तक छात्र रहे आस्ट्रेलिया के उद्योगपति व पूर्व में देश के लिये हॉकी में पहला ओलंपिक खेली टीम के सदस्य रहे रे ह्वाइटफील्ड के लिये स्मरणीय दिन रहा। अपनी जड़ों को खोजते हुए पत्नी कोलीन के साथ रे के अपने विद्यालय पहुंचने से खुलासा हुआ कि वास्तव में रे नैनीताल से निकले पहले ओलंपिक खिलाड़ी थे, जो आस्ट्रेलिया के लिये हॉकी में पहले ओलंपिक मैच के खिलाड़ी रहे थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में हॉकी के विश्व विजेता, लगातार आठ स्वर्ण पदक हासिल करने वाले भारत की इस धरती से ही उनके भीतर हॉकी का प्रवेश हुआ था, जिसे उन्होंने आस्ट्रेलिया जाकर आगे बढ़ाया और इस मुकाम पर पहुंचे। उल्लेखनीय है कि नैनीताल ने बाद के वर्षों में दो ओर ओलंपियन राजेंद्र रावत और सैयद अली देश को (दोनों हॉकी में ही) दिये।

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कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का इतिहास


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नाटक प्रतियोगिता 20 के विजेता रहे नाटक 'उरुभंगम' के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार
नाटक प्रतियोगिता 2017 के विजेता रहे नाटक ‘उरुभंगम’ के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार

सरोवरनगरी को कला की नगरी भी कहा जाता है। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती सरोवर नगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक नगर में 1882 में (वर्तमान कैपिटॉल सिनेमा की जगह पर) बने नाचघर में लानटेनों की रोशनी में नाटक खेले जाते थे, जिसे तक अनेकों कमियों की वजह से दुनिया का सबसे खराब स्टेज भी कहा गया था। सचिवालय में तैनात बंगाली मूल के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 1894 में ‘बंगाली एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब’ की नींव रखी थी, जिसके तहत वे बंगाली नाटक करते थे।

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : फिर रावत की, पर ‘डबल इंजन’ सरकार


त्रिवेंद्र सिंह रावत होंगे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, कल लेंगे शपथ

आखिर 17 की किशोर वय और चौथी विधानसभा में ही उत्तराखंड को 9वां (बदलते हुए 10वां) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के रूप में मिलना तय हो गया है। आसानी रहेगी कि प्रदेश में लगातार दूसरी बार ‘रावत सरकार’ ही होगी, अलबत्ता दुआ करनी होगी कि यह वाली रावत सरकार पिछली (हरीश रावत वाली) रावत सरकार जैसी ‘राज्य को काट-पीट कर खा जाओ’ और ‘सब कुछ अपनी जेब में भरो’ वाली नहीं होगी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे के अनुरूप ‘डबल इंजन’ वाली सरकार होगी। मालूम हो कि राज्य में भाजपा ने उत्तराखंड में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 70 में से 57 सीटें हासिल की जबकि पिछले बार 2012 में उससे एक सीट अधिक जीतने वाली कांग्रेस 11 सीट पर आकर सिमट गयी है।

डा. मुरली मनोहर जोशी हो सकते हैं भारत के अगले राष्ट्रपति !


पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, फिर सेनाध्यक्ष, फिर रॉ प्रमुख और फिर डीजीएमओ के बाद अब देश के राष्ट्रपति पद की दौड़ में एक और उत्तराखंडी सबसे आगे है। वे हैं भारतीय जनता पार्टी में कभी ‘भारत मां की तीन धरोहर, अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर’ कहे जाने वाले और सार्वजनिक जीवन में अपनी बेदाग छवि, बौद्धिकता और संघनिष्ठ वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी। विदित हो की भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। केंद्र में भाजपा पूरे बहुमत के साथ सत्तासीन है। ऐसे में तय है कि देश के अगले राष्ट्राध्यक्ष भाजपा की ही पसंद के होंगे। बताया गया है कि जोशी भाजपा के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भी पहली पसंद हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा नेतृत्व को अवगत करा दिया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भारतीय गणराज्य का नया राष्ट्रपति देखना चाहता है।

उत्तराखंड के छह फीसद गांव हो गये ‘भुतहा’, नेताओं, देवी-देवताओं ने भी कर दिया पलायन


पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर
पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर

-60 लाख पर्वतीय आबादी में से 32 लाख लोगों ने किया पलायन, 17,793 गांवों में 1,053 गांव हो गये खाली

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड प्रदेश में ‘विकास’ के लिये 409 अरब रुपये कर्ज लेने के बाद भी राज्य की अवधारणा के अनुरूप पलायन नहीं रुका है। 2011 की ताजा जनगणना के अनुसार प्रदेश के 17,793 गांवों में 1,053 यानी करीब छह फीसद गांव खाली हो चुके हैं, बल्कि इन्हें ‘भुतहा गांव’ (घोस्ट विलेज) कहा जा रहा है। वहीं कुल मिलाकर करीब एक करोड़ की आबादी वाले इस राज्य की पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाली 60 लाख की आबादी में से 32 लाख लोगों का पलायन हो चुका है। प्रदेश के अधिकांश बड़े राजनेताओं (कोश्यारी, बहुगुणा, निशंक, यशपाल आर्य) ने भी अपने लिये मैदानी क्षेत्रों की सीटें तलाश ली हैं, वहीं भूमिया, ऐड़ी, गोलज्यू, छुरमल, ऐड़ी, अजिटियां, नारायण व कोटगाड़ी सहित कई देवताओं ने भी पहाड़ों से मैदानों में पलायन कर दिया है।

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 पोस्टरों में मोदी के काशी की राह चला नैनीताल, तो हंस पड़े मोदी


-दिसंबर-जनवरी माह में काशी में प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेसडर अमिताभ बच्चन की फिल्मों के पोस्टरों की मदद से अभियान के प्रचार की हुई थी पहल, इसे नैनीताल-हल्द्वानी ने भी स्वीकारा
-प्रधानमंत्री मोदी के लिखा- हा हा, स्वच्छता के लिये फिल्मों से विचार लेने का अभिनव प्रयोग
नवीन जोशी, नैनीताल। अच्छा विचार कभी रुकता नहीं, आगे बढ़ता जाता है। बीते दिसंबर-जनवरी माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी-वाराणसी में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किये ‘स्वच्छ भारत अभियान” के ब्रांड एंबेसडर-सदी के महानायक कहे जाने वाले सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की दीवार, शोले, डॉन, सिलसिला व डॉन जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के पोस्टरों और संवादों को थोड़ा बदलकर अभियान के प्रचार के लिये प्रयोग करने का अनूठा प्रयोग किया। यह प्रयोग नैनीताल से होते हुए वापस प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा तो वे भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाये, और इसे एक अभिनव प्रयोग बताया है।
उल्लेखनीय है कि देश में पिछले कुछ समय से पूरे देश भर में खुले में शौच ना करने की एक मुहिम सी चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014में प्रधानमंत्री के गद्दी पर बैठने के बाद गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर से ‘स्वच्छ भारत अभियान” की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य वर्ष 2019 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक देश की 1.04 करोड़ लक्षित आबादी को शौचालयों से जोड़कर देश की खुले में शौच की समस्या को खत्म कर देना है। नैनीताल नगर पालिका ने भी इस पहल को अपने यहां प्रयोग किया। नैनीताल में लगे ऐसे फिल्मी पोस्टरों के फोटो इंटरनेट पर वायरल होते हुए मुंबई में रहने वाले लेखक, गायक व संगीतकार आशुतोष साहू को भी पसंद आये तो उन्होंने यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित 1975 में बनी फिल्म दीवार के एक पोस्टर को अपने ‘साहूकर” ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर दिया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मोदी जी कृपया ध्यान दें, जिसने भी ये पोस्टर तैयार किया किया है वो पुरस्कार का हकदार है।” पोस्टर में फिल्म दीवार में अपराधी बने अमिताभ और पुलिस इंस्पैक्टर बने शशि कपूर अपनी मां बनी निरूपा रॉय को अपने साथ रहने चलने को कहते हैं, जिस पर निरूपा राय को फिल्मी संवाद के इतर कहते दिखाया गया है, ‘नहीं, तो पहले शौचालय बनायेगा, मैं उसके साथ रहूंगी।” ट्वीट के जरिये बात प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंची तो वे भी मुस्कुराये बिना नहीं रह सके, और आशुतोष के ट्वीट को नैनीताल में लगे पोस्टर के साथ रिट्वीट करते हुए लिखा, ‘हा हा, बॉरोज फ्रॉम सिनेमा टु मेक ए पॉइंट ऑन क्लीनलीनेस, इनोवेटिव” यानी, ‘स्वच्छता के लिये फिल्मों से विचार लेने का अभिनव प्रयोग”। यह पहल करने वाले नैनीताल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि उन्होंने हल्द्वानी नगर निगम के साथ ऐसे 14-15पोस्टर तैयार करवाकर नगर के प्रमुख स्थानों पर लगाये हैं।

मुहिम के पोस्टरों से धरातल पर उतरने की जरूरत

नैनीताल। नैनीताल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रचार में पोस्टरों के स्तर पर तो मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का अनुकरण कर लिया है। लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि पहले से ही सफाई के प्रति काफी संवेदनशील रहे इस नगर में वाराणसी के घाटों की तरह नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के घाटों, यहां गिरने वाले नालों की भी सफाई किये जाने की जरूरत है। नैनी झील के लिये पानी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण नगर की धमनियां कहे जाने के बावजूद गंदगी से पटे नाले और नगर भर में आवारा कुत्तों की फैली पड़ी गंदगी के ढेर भी शर्मशार करने वाले हैं। इधर स्थानीय विधायक संजीव आर्य ने नालों की सफाई से अपने कार्यों की शुरुआत कर एक संदेश दिया है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद जताने वाला है।

उत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सीएम कैंडीडेट के तौर पर पसंद हो सकते हैं पूर्व नौकरशाह

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विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली


जब से मानव पृथ्वी पर आया है, तभी से वह स्वयं को भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता रहा है। प्रारम्भ में वह संकेतों या ध्वनि के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुँचाता रहा, समय बीतते उसने भाषा की खोज की और आसानी से अपनी बात कहने लगा। जैसे-जैसे मानव का विकास होता गया उसने परिवार बसाया, समाज का अंग बना। फिर उसकी दुनिया और बड़ी होती चली गई, और उसे अपनी बात ज्यादा दूर तक पहुँचाने की जरूरत पड़ने लगी। मनुष्य में अपनी आवाज को दूर तक पहुँचाने की चाह न जाने कब से रही है, और न … पढ़ना जारी रखें विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली

500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !


2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी
2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी

एक 9/11  (यानी 11 सितंबर 2001) को हुए आतंकवादी हमले से न सिर्फ यह महाशक्ति अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ‘ट्विन टावर्स’ पर हुए आतंकवादी हमले से दहल गई थी। वहीँ इस 9/11  यानी नौ सितम्बर 2016 को भी वाकई बड़ा अद्भुत हुआ है। यहाँ भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर की रात (इससे पूर्व 28 सितम्बर 2016 की रात्रि पाक अधिकृत कश्मीर में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर,) काले धन पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ की तो वहां अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ‘वर्ल्ड आर्डर’ को बदलते हुए राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

कुछ भी कहिये, आज देश में साम्यवाद आ गया..
सबकी जेब में बराबर पैसे ! 😄

आज देश में रामराज भी आ गया !
जेल के दरवाजे भी खोल दो तो कोई बाहर जाने को तैयार नहीं 😜
तिजोरी खोल कर रख दो, कोई लूटने को तैयार नहीं 😝 पढ़ना जारी रखें “500-1000 नोट बंदी से देश में साम्यवाद और रामराज साथ-साथ !”

चार गुने से अधिक बढ़कर पांच अरब हुआ टोकियो ओलंपिक का बजट, पदक पहुंचेंगे दहाई में


राजीव मेहता
राजीव मेहता

51 करोड़ बढ़कर 1592 करोड़ हुआ देश में खेलों का बजट, साई व नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन का बजट भी बढ़ा
नवीन जोशी, नैनीताल। देश में पहली बार केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री विजय गोयल खेलों के प्रति इतने अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार की पहल पर भारतीय ओलंपिक संघ ने अभी से 2020 के ओलंपिक खेलों की तैयारी शुरू कर दी है। पहली बार ओलिंपिक खेलों का बजट एक बार में पिछले 120 करोड़ की जगह चार गुना से अधिक बढ़ाते हुए 500 करोड़ कर दिया है, वहीं देश में खेलों का कुल बजट भी पिछले वर्ष से 50.87 करोड़ बढ़ाकर 1592 करोड़ कर दिया गया है। इससे उत्तराखंड सहित अभी भी खेलों की मूलभूत ढांचागत सुविधाओं से वंचित एक दर्जन से अधिक राज्यों में खेल सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। बढ़े हुए खेल बजट से देश में खेल सुविधाएं बढ़ेंगी और आगे टोकियो ओलिंपिक में पदक कम से कम दहाई में पहुचेंगे। उत्तराखंड में 2018 में राष्ट्रीय खेल अपने नियत समय पर होंगे। इनके तहत नैनीताल की नैनी झील में देश की करीब एक दर्जन टीमों को शामिल कर सेलिंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।

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सर्जिकल स्ट्राइक : जिसे सबूत चाहिए , यहाँ देखे


सर्जिकल स्ट्राइक : पक्के वैज्ञानिक http://tpc.googlesyndication.com/safeframe/1-0-5/html/container.html#xpc=sf-gdn-exp-1&p=http%3A//m.navbharattimes.indiatimes.comसबूत हैं, मगर देंगे नहीं !

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राष्ट्रीय सहारा 06 अक्टूबर 2016

-वैज्ञानिकों ने कहा भारत उपग्रह आधारित सुदूर संवेदी में विश्व में अग्रणी, मगर पाकिस्तान कहीं ठहरता नहीं, सामरिक दृष्टिकोण से सबूत देना हो सकता है आत्मघाती
नवीन जोशी, नैनीताल। बीती 29 मई को भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में किये गये ‘सर्जिकल स्ट्राइक” के बाद देश के चंद नेताओं द्वारा सबूत मांगने की स्थितियों के बीच वैज्ञानिक पूरी तरह सेना की कार्रवाई के साथ ही सेना व सरकार के पास कार्रवाई के पक्के वैज्ञानिक सबूत होने के प्रति भी मुतमईन हैं। बहुत संभावना है कि यह सबूत मानव द्वारा की गई फोटोग्राफी या वीडियो ग्राफी से इतर उपग्रह आधारित पृथ्वी पर निगरानी रखने वाले उपकरणों आधारित सुदूर संवेदी यानी रिमोट सेंसिंग के भी हो सकते हैं, जिसमें भारत विश्व में अग्रणी है। भारत अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अपने उपग्रहों से एक फिट तक के रिजोल्यूशन के फोटो और वीडियो खींचने में सक्षम हैं। अलबत्ता, यह सबूत किसी भी कीमत पर, नेताओं के कैसे भी आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद सार्वजनिक नहीं किये जा सकते हैं, क्योंकि इनसे देश की सामरिक रणनीति आदि बेपर्दा हो सकती है, और यह देश की सुरक्षा के लिये आत्मघाती हो सकता है। पढ़ना जारी रखें “सर्जिकल स्ट्राइक : जिसे सबूत चाहिए , यहाँ देखे”

रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !


रोहित शेखर -करीब एक वर्ष से राहुल-सोनिया को भी साधने के बावजूद कांग्रेस से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने से हैं नाखुश, कहा था-पिता के जन्म दीं के बाद होंगे ‘खुले पंछी’ -भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट व सांसद भगत सिंह कोश्यारी के हुई है बात, लालकुआ, भीमताल, किच्छा और काशीपुर सीटों से चुनाव लड़ने के दिए हैं विकल्प, समाजवादी पार्टी से भी हैं बेहतर संबंध नवीन जोशी, नैनीताल। कभी प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति के शीर्ष पुरुष रहे यूपी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर पिता की 80 वर्ष से सेवित … पढ़ना जारी रखें रोहित शेखर झटकेंगे पिता एनडी का ‘हाथ’, थामेंगे भाजपा का दामन !

देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन


Coverनैनीताल। अमेका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट व परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता तथा पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. गिरीश रंजन तिवारी आदि के हाथों पत्रकार नवीन जोशी की पुस्तक देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन किया गया। लेखक नवीन जोशी ने बताया कि पुस्तक कुमाऊं -उत्तराखंड की भावी पीढि़यों और यहां आने वाले वाले सैलानियों को इस उम्मीद के साथ समर्पित है कि उन्हें इस पुस्तक के माध्यम से इस अंचल को समग्रता में समझने में मदद मिलेगी। पुस्तक तीन खंडों- देवभूमि उत्तराखंड व कुमाऊं के इतिहास, यहां के धार्मिक, आध्यात्मिक व पर्यटन महत्व के स्थलों तथा यहां के तीज-त्योहारों, लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और विशिष्टताओं का वर्णन करती है। यह देवभूमि के खास तौर पर ‘देवत्व’ को एक अलग अंदाज में देखने का प्रयास है। उनका मानना है कि देवभूमि का देवत्व केवल देवताओं की धरती होने से नहीं, वरन इस बात से है कि यह भूमि पूरे देश को स्वच्छ हवा, पानी, जवानी व उर्वरा भूमि के साथ प्राकृतिक व आध्यात्मिक शांति के साथ और भी बहुत कुछ देती है, और वास्तव में देवता शब्द देता या दाता शब्दों का विस्तार है। पढ़ना जारी रखें “देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन”