कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का इतिहास


नाटक प्रतियोगिता 20 के विजेता रहे नाटक 'उरुभंगम' के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार
नाटक प्रतियोगिता 2017 के विजेता रहे नाटक ‘उरुभंगम’ के एक भावपूर्ण दृश्य में कलाकार

सरोवरनगरी को कला की नगरी भी कहा जाता है। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती सरोवर नगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक नगर में 1882 में (वर्तमान कैपिटॉल सिनेमा की जगह पर) बने नाचघर में लानटेनों की रोशनी में नाटक खेले जाते थे, जिसे तक अनेकों कमियों की वजह से दुनिया का सबसे खराब स्टेज भी कहा गया था। सचिवालय में तैनात बंगाली मूल के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 1894 में ‘बंगाली एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब’ की नींव रखी थी, जिसके तहत वे बंगाली नाटक करते थे।

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उत्तराखंड के छह फीसद गांव हो गये ‘भुतहा’, नेताओं, देवी-देवताओं ने भी कर दिया पलायन


पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर
पहाड़ के एक गाँव में पलायन के बाद वीरान पड़ा एक संभ्रांत परिवार का घर और मंदिर

-60 लाख पर्वतीय आबादी में से 32 लाख लोगों ने किया पलायन, 17,793 गांवों में 1,053 गांव हो गये खाली

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड प्रदेश में ‘विकास’ के लिये 409 अरब रुपये कर्ज लेने के बाद भी राज्य की अवधारणा के अनुरूप पलायन नहीं रुका है। 2011 की ताजा जनगणना के अनुसार प्रदेश के 17,793 गांवों में 1,053 यानी करीब छह फीसद गांव खाली हो चुके हैं, बल्कि इन्हें ‘भुतहा गांव’ (घोस्ट विलेज) कहा जा रहा है। वहीं कुल मिलाकर करीब एक करोड़ की आबादी वाले इस राज्य की पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाली 60 लाख की आबादी में से 32 लाख लोगों का पलायन हो चुका है। प्रदेश के अधिकांश बड़े राजनेताओं (कोश्यारी, बहुगुणा, निशंक, यशपाल आर्य) ने भी अपने लिये मैदानी क्षेत्रों की सीटें तलाश ली हैं, वहीं भूमिया, ऐड़ी, गोलज्यू, छुरमल, ऐड़ी, अजिटियां, नारायण व कोटगाड़ी सहित कई देवताओं ने भी पहाड़ों से मैदानों में पलायन कर दिया है।

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देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन


Coverनैनीताल। अमेका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट व परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता तथा पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. गिरीश रंजन तिवारी आदि के हाथों पत्रकार नवीन जोशी की पुस्तक देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन किया गया। लेखक नवीन जोशी ने बताया कि पुस्तक कुमाऊं -उत्तराखंड की भावी पीढि़यों और यहां आने वाले वाले सैलानियों को इस उम्मीद के साथ समर्पित है कि उन्हें इस पुस्तक के माध्यम से इस अंचल को समग्रता में समझने में मदद मिलेगी। पुस्तक तीन खंडों- देवभूमि उत्तराखंड व कुमाऊं के इतिहास, यहां के धार्मिक, आध्यात्मिक व पर्यटन महत्व के स्थलों तथा यहां के तीज-त्योहारों, लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और विशिष्टताओं का वर्णन करती है। यह देवभूमि के खास तौर पर ‘देवत्व’ को एक अलग अंदाज में देखने का प्रयास है। उनका मानना है कि देवभूमि का देवत्व केवल देवताओं की धरती होने से नहीं, वरन इस बात से है कि यह भूमि पूरे देश को स्वच्छ हवा, पानी, जवानी व उर्वरा भूमि के साथ प्राकृतिक व आध्यात्मिक शांति के साथ और भी बहुत कुछ देती है, और वास्तव में देवता शब्द देता या दाता शब्दों का विस्तार है। पढ़ना जारी रखें “देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन”

मनुष्य की तरह पैदा होते, साँस लेते, गुनगुनाते और मरते भी हैं तारे


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प्रो. क्रिस एंजिलब्रेथ्ट

-जोहान्सवर्ग यूनिवर्सिटी के प्रो. क्रिस एंजिलब्रेथ्ट ने अपने ‘म्यूजिक ऑफ दि स्टार’ लेक्चर के जरिये समझाया तारों का संगीत
नवीन जोशी, नैनीताल। कहा जाता है मानव और पृथ्वी की उत्पत्ति मूलत: तारों से हुई। आज भी जब किसे प्रियजन की मृत्यु होती है तो बच्चों को समझाया जाता है, की वह तारा बन गया है। तारे टिमटिमटाते हैं तो लगता है कि वे सांस ले रहे हैं, और उनका दिल धड़क रहा है। लेकिन अब वैज्ञानिक भी यह कहने लगे हैं कि तारे न केवल टिमटिमाते हुए सांस ही लेते हैं, वरन गुनगुनाते भी हैं। वैज्ञानिकों ने इनके गीतों यानी सुरों को समझने का भी दावा किया है। दक्षिण अफ्रीका के विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिये कार्य करने वाले जोहान्सवर्ग यूनिवर्सिटी में कार्यरत अंतरिक्ष विशेषज्ञ प्रोफेसर क्रिस एंजिलब्रेथ्ट बकायदा जगह-जगह जाकर अपने ‘म्यूजिक ऑफ दि स्टार’ लेक्चर के जरिये तारों के संगीत को समझाते हैं।

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15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !


Gaurav Siddarth
बाइकर गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का उत्साह बढ़ाने उन्हें बाइक पर पीछे बैठाकर चलते योगगुरु बाबा रामदेव।

-एक देश में सर्वाधिक बाइकिंग का अमेरिकी बाइकर डेनेल लिन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा

-आगे अप्रैल 2017 तक 1.2 लाख किमी का अजेय रिकॉर्ड बनाने की है योजना
-बाइक, ग्लब्स व सुरक्षा उपकरणों से लेकर जीपीएस व हाईवे पर स्थानों की पहचान के लिए मोबाइल ऐप सहित सबकुछ भारतीय प्रयोग कर ‘मेक इन इंडिया’ को भी दे रहे बढ़ावा
नवीन जोशी, नैनीताल। देश के खिलाड़ी आज जहां रियो ओलंपिक में विश्व के खिलाड़ियों से रिकॉर्डों के लिए जूझ रहे हैं, वहीं देश में 70वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नैनीताल के गौरव सिद्धार्थ बिष्ट  एक विश्व रिकार्ड को तोड़कर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया है। एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। गौरव ने इस रिकॉर्ड को स्वतंत्रता दिवस पर तोड़ दिया है, साथ ही यह  भी साफ़ कर दिया है कि वह रिकॉर्ड बनाकर थमने वाले नहीं हैं, वरन आगे उनका इरादा फरवरी 2017 तक 1.2लाख किमी चलकर अजेय रिकार्ड बनाने का भी है। पढ़ना जारी रखें “15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !”

नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद

भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका तलाश रहे उन्मुक्त ने नैनीताल में गोल्फ स्टिक से उड़ाये छक्के


नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद

नवीन जोशी, नैनीताल। अपने कॅरियर की शुरुआत में दिल्ली के लिए ओपनर के रूप में 425 रनों की पारी और अंडर-19 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 रनों की नाबाद व कप्तानी पारी खेलकर आस्ट्रेलियाई दिग्गज पूर्व कप्तान इयान चैपल से प्रशंसा प्राप्त कर चुके उत्तराखण्ड मूल के युवा क्रिकेटर उन्मुक्त चंद भारतीय क्रिकेट टीम में ओपनर के रूप में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। बीती 5 फ़रवरी 2016 की शाम नैनीताल पहुंचे थे, और 6 की सुबह नैनीताल राजभवन स्थित गोल्फ कोर्स में उन्होंने गोल्फ खेलकर अपना दैनिक अभ्यास करते हुए पसीना बहाया। इस दौरान उन्होंने यहाँ नैनीताल राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक (क्लब) पर पहली बार हाथ आजमाते हुए कई ‘उन्मुक्त छक्कों’ सरीखे लम्बे शॉट भी खेले। साथ ही अपने दोस्तों के साथ नगर की प्राकृतिक सुंदरता में खोकर कई सेल्फी लीं। इस दौरान उन्होंने अपने कॅरियर, भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने की संभावनाओं, इसके लिए की जा रही मेहनत आदि पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन के अवकाश पर अपने घर-कुमाऊं आये हैं।

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नैनीताल नगरपालिका के हाथ से रिक्शे भी ‘जायेंगे’, तभी ई-रिक्शा आयेंगे


02NTL-1-पूर्व में शरदोत्सव का आयोजन, फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगी भी जा चुकी है हाथ से, होगा आर्थिक नुकसान
नवीन जोशी, नैनीताल। नगरवासियों, यहां आने वाले सैलानियों के लिये यह खबर अच्छी है कि नगर में मौजूदा तीन पहिया रिक्शों की जगह बैटरी से चलने वाले ईको-फ्रेंडली ई-रिक्शा चलेंगे। इनमें अपेक्षाकृत तेज गति से एक साथ दो की जगह चार से अधिक सवारियां एक से दूसरे स्थान पर पहुंच पायेंगे, वहीं कुछ हद तक यात्रियों को महंगी टैक्सियों की जगह सस्ता और प्रदूषण मुक्त यातायात का साधन भी उपलब्ध होगा। लेकिन देश की दूसरी प्राचीनतम नगर पालिका नैनीताल के लिये यह खबर इतनी अच्छी शायद न हो। उसके हाथ से रिक्शों का नियंत्रण, लाइसेंस, नियमों का पालन न करने पर चालान आदि करने का अधिकार चला जायेगा। यह खबर इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि यह सरकार के आय बढ़ाने की उलाहनाओं और 74वें संविधान संसोधन के जरिये पालिकाओं को अधिक स्वतंत्र व मजबूत बनाने के संकल्प के विपरीत होगा। साथ ही पूर्व में वन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत व पेयजल आदि विभागों और हालिया दौर में फांसी गधेरा और बारापत्थर की चुंगियों व शरदोत्सव के आयोजन को खोने के बाद पालिका वर्तमान में नगर में चलने वाले 82 पंजीकृत रिक्शों के संचालन का अधिकार भी खो देगी।

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मलेशिया में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनना सीखेगा नैनीताल


शुक्रवार 5 फ़रवरी को मल्लीताल बोट स्टैंड पर नैनी झील का जलस्तर गिरने से उभरा मलबे का पहाड़ सरीखा डेल्टा।
शुक्रवार 5 फ़रवरी को मल्लीताल बोट स्टैंड पर नैनी झील का जलस्तर गिरने से उभरा मलबे का पहाड़ सरीखा डेल्टा।
मलयेशिया में यहाँ होगी संगोष्ठी
मलयेशिया में यहाँ होगी संगोष्ठी

-दो से चार मार्च तक मलयेशिया के मेलाका प्रांत में होने जा रही है एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने की अंतरमहाद्वीपीय संगोष्ठी में नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी किये गए हैं आमंत्रित

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल नगर मलयेशिया में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनना सीखेगा। इसके लिये स्थानीय नगर पालिका के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी को दो से चार मार्च तक मलयेशिया के मेलाका प्रांत में आयोजित होने जा रही एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने की ‘रेजीलियेंट सिटीज एशिया-पैसिफिक 2016 कांग्रेस’ विषयक अंतरमहाद्वीपीय कार्यशाला में प्रतिभाग करने के लिये आमंत्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में देश के कुछ ही ऐसे चुनिंदा शहरों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, जिन्हें आयोजक संस्था आईसीएलईआई ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के ‘रेजीलियेंट’ यानी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीले शहरों की सूची में शामिल किया है।बताया गया है कि आईसीएलईआई दक्षिण एशिया के स्थानीय निकायों यानी शहरों में स्थायित्व के लिये कार्य करने वाली एक नियंत्रण संस्था है। इसका सूत्र वाक्य है-लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबिलिटी।

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राष्ट्रीय सहारा 16 जून 2016

नैनी झील में मलबा सफाई: बिना काम ख़तम-पैसा हजम


नवीन जोशी, नैनीताल। काम खत्म होने के बाद पैसा हजम हो जाए तो कोई बात नहीं, किंतु नैनीताल जिला प्रशासन नैनी झील का मलबा हटाने के लिए वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहा है। वह भी बिना काम खत्म पैसा हजम के फार्मूले पर चलकर। यहां यह बताना जरूरी है कि नैनी झील से मलबा हटाने के लिए प्रशासन ने तीन मदों से 80 लाख रपए तो खर्च कर दिए गए, किंतु झील में आया पूरा मलबा हटाना दूर, स्वयं इकट्ठा किया गया मलबा भी बारिश आने पर झील में वापस जाने के लिए छोड़ दिया गया और ऐसा बहुत सारा मलबा झील में वापस चला भी गया है। वहीं झील में दोबारा मलबा न आए, इस के लिए नालों की सफाई जैसे कार्य पिछले एक वर्ष से लंबित पड़े हैं। नालों की मरम्मत के भी पिछले वर्ष जुलाई माह में आई बारिश के बाद ध्वस्त हुए कार्य आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं, जिस कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, और हालातों में पिछले वर्ष से कोई सुधार नहीं देखने को मिला है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 31 मई 2016 को सर्वाधिक रिकॉर्ड -7.1 फीट के स्तर तक नैनी झील का जल स्तर गिरा, जबकि इससे पूर्व मई 2012 में -2.5 फीट तक जल स्तर गिरा था। इधर झील में -12 फीट तक जल स्तर मापने का प्रबंध भी किया जा रहा है।

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उत्तराखण्ड में 10 वर्ष में दोगुने हो गये मुस्लिम, इसलिए दोगुने जा पाएंगे हज पर


Mohammadan (4)-हज यात्रा के लिए आवेदन के साथ ही मेडिकल कराने, आल इंडिया हज कमेटी के सूटकेस ले जाने और कुर्बानी के लिए पहले इस्लामिया बैंक से कूपन लेने संबंधी नियमों में मिली छूट

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड से इस वर्ष 1406 यात्री हज के लिए जा सकेंगे। यह संख्या पिछले वर्ष के 772 की करीब दो गुनी होगी। ऐसा प्रदेश में वर्ष 2011 की जनसंख्या में मुस्लिमों की संख्या के वर्ष 2001 की जनगणना के मुकाबले करीब दो गुना हो जाने की वजह से संभव हुआ है। इसके अलावा ऑल इंडिया हज कमेटी के साथ गत माह हुई बैठक के फलस्वरूप तीन महत्वपूर्ण निर्णयों में छूट मिल गयी है। अब हज के लिए आवेदन करने वाले सभी को मेडिकल नहीं कराना होगा, बल्कि केवल चयनित होने वाले यात्रियों की ही मेडिकल जांच करायी जायेगी। कुर्बानी के लिए इस्लामिया बैंक से कूपन लेने और ऑल इंडिया हज कमेटी से 5100-5100 रुपये में दो सूटकेस लेने के नियम में भी छूट मिल गयी है। अब यात्री अपनी मर्जी से तय आकार के सूटकेस ले पायेंगे तथा कुर्बानी भी अपनी मर्जी से कर पायेंगे।

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हद है, राज्य बनने के बाद औसतन सवा फीसद ही बढ़े नैनीताल में विदेशी सैलानी


English Tourists (1)-पिछले पांच वर्षों में तो विदेशी सैलानियों की संख्या में हो गयी करीब 27 फीसद की कमी 

-कुल आने वाले सैलानियों में भी राज्य बनने के बाद औसतन सवा आठ फीसद की दर से ही बढ़त
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, पर्यटन प्रदेश कहे जाने वाले उत्तराखंड प्रदेश में पर्यटन शहरों में सर्वप्रमुख सरोवरनगरी नैनीताल में भले सीजन में पर्यटकों की जितनी बढ़ी संख्या, भीड़-भाड़ दिखाई देती हो, पर पर्यटन विभाग के आंकड़े गवाह हैं कि प्रकृति के स्वर्ग कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में अपार संभावनाओं के बावजूद विदेशी सैलानियों की संख्या राज्य बनने के डेढ़ दशक में औसतन महज सवा फीसद (1.26 फीसद) की दर से ही बढ़ रही है। वहीं इधर तो हालात और भी बुरे हैं। पिछले पांच वर्षों में तो विदेशी सैलानियों की संख्या में करीब 27 फीसद की कमी हो गयी है। नगर में कुल आने वाले सैलानियों की बात भी करें तो राज्य बनने के बाद औसतन सवा आठ फीसद की दर से बढ़ रही है।

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‘जिन्ना’ के प्यारे ‘राजा अमीर’ अब न ‘राजा’ रहे न ‘अमीर’


Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • राष्ट्रपति ने किए शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश पर हस्ताक्षर
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की ‘शत्रु संपत्ति’ के मालिक राजा महमूदाबाद यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा देश के राष्ट्रपति द्वारा केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा पेश किये गये 47 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी शत्रु-संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 को पर हस्ताक्षर करने से हुआ है। इस संशोधन अध्यादेश के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों जिन्हें शत्रु संपत्ति कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे। नए अध्यादेश से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें हो सकती हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों की लागत वाले 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्तियों सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को 10 सितंबर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था।

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Rashtriya Sahara 19 01 2016

नैनीताल के नवीन समाचार 



केन्द्रीय बजट में सुनी जाएगी नैनीताल की आवाजें ?


केवल आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही वास्तव में लौटाए पुरस्कार

Brajendra
डा. बृजेंद्र त्रिपाठी

-इनसे से भी आधों ने लौटाई पुरस्कार की राशि
नैनीताल (एसएनबी)। पिछले दिनों साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने की खूब चर्चाएं रहीं, और अनेक साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने की खबरें मीडिया में आर्इं। लेकिन सच्चाई यह है कि मुश्किल से आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही साहित्य अकादमी को औपचारिक तौर पर अपने पुरस्कार लौटाने के पत्र भेजे, वहीं इनमें से भी करीब आधों ने ही साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रुपए की धनराशि लौटाने की हिम्मत दिखाई।

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आस्था के साथ ही सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर भी हैं ‘जागर’


इस तरह 'जागर' के दौरान पारलौकिक शक्तियों के वसीभूत होकर झूमते हें 'डंगरिये'
इस तरह ‘जागर’ के दौरान पारलौकिक शक्तियों के वसीभूत होकर झूमते हें ‘डंगरिये’

कुमाऊं के जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संगीत की मौखिक परम्पराओं के अनेक विशिष्ट रूप प्रचलित हैं। उत्तराखंड के इस अंचल की संस्कृति में बहुत गहरे तक बैठी प्रकृति यहां की लोक संस्कृति के अन्य अंगों की तरह यहां लोक गीतों में भी गहरी समाई हुई है। इन गीतों का मानव पर अद्भुत चमत्कारिक ईश्वरीय प्रभाव भी दिखाई देता है। ‘जागर’ गीत इसके प्रमाण हैं, जो मानव को इन कठिन परिस्थितियों में युग-युगों से परा और प्राकृतिक शक्तियों की कृपा के साथ आत्मिक संबल प्रदान करते आए हैं, और आज भी यह पल भर में मानव का न केवल झंकायमान कर देते हैं, वरन दुःख-तकलीफों, बीमारियांे की हर ओर से गहरी हताशा जैसी स्थितियों से बाहर भी निकाल लाते हैं। इसीलिए पुरानी पीढ़ियों के साथ ही संस्कृति के अन्य रूपों से दूर हो रही और प्रवास में रहने वाली आधुनिक विज्ञान पढ़ी-लिखी पीढ़ी के लोग भी इन्हें खारिज नहीं कर पाते हैं, और पारिवारिक अनुष्ठान के रूप में इसमें अब भी शामिल होते हैं। जागर के गीतों में लोक देवताओं का कथात्मक शैली में गुणगान करते हुए आह्वान किया जाता है, साथ ही इनमें कुमाऊं के सदियों पुराने प्राचीन इतिहास खासकर कत्यूरी शासकों का जिक्र भी आता है, इस प्रकार यह कुमाऊं के इतिहास के मौखिक परंपरा के प्रमाण भी साबित होते हैं, और इस तरह यह ऐतिहासिक धरोहर भी हैं।

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पहाड़ पर कहीं से आ-जा नहीं रहे, यहीं के स्थायी निवासी हैं बाघ, संख्या हुई 400 पार


-कैमरे लगाने से हुई पुष्टि, कुमाऊं में बेहद समृद्ध है वन्य जीवन, व्यापक स्तर पर इनकी गणना किये जाने की जरूरत -कैमरा ट्रैप में तराई डिवीजन में भी मिले 30 से अधिक नये बाघ, इससे उत्साहित वनाधिकारी पहाड़ पर बाघों की संख्या की गणना किये जाने की जता रहे हैं जरूरत, स्थायी होने की वजह से डरने की जरूरत नहीं नवीन जोशी, नैनीताल। अब तक माना जाता रहा है कि देश के राष्ट्रीय पशु बाघ (रॉयल बंगाल टाइगर) पहाड़ पर नहीं होते, यह तराई के मूल निवासी हैं, और वहां से यहां चढ़ आते हैं। वन्य जीवों तथा प्रकृति-पर्यावरण प्रेमियों … पढ़ना जारी रखें पहाड़ पर कहीं से आ-जा नहीं रहे, यहीं के स्थायी निवासी हैं बाघ, संख्या हुई 400 पार