कैसे-कैसे कायदे कानून-कोयला-लकड़ी लेने को पैनकार्ड हुआ जरूरी, कीमतें भी आसमान चढ़ी


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-ऐसे में लोगों को मजबूरन करना पड़ता है जंगलों का अवैध और अनियंत्रित  कटान 

नैनीताल। जी हां, यह ऐसे प्राविधान करने वालों के दिमाग का फितूर ही कहा जाएगा कि बिना आयकर के पैन कार्ड और राशन कार्ड के जलौनी लकड़ी और कोयला देने का प्राविधान नहीं है। आज के समय में जबकि गरीब व कमजोर तबके के लोग ही कोयले व लकड़ी का प्रयोग ईधन या जलौनी लकड़ी के लिए करते हैं, वह राशन कार्ड और पैन कार्ड नहीं होने की वजह से लकड़ी-कोयला नहीं ले पा रहे हैं। इसके अलावा भी विभाग ने कोयले की दर 1500 रुपए मूल तथा पांच फीसद वैट मिलाकर कुल 1575 रुपए प्रति कुंतल तथा जलौनी बांज की लकड़ी की दर 475 में ढाई फीसद मंडी शुल्क,पांच फीसद वैट व 2.64 फीसद आयकर मिलाकर 520 रुपए तय की है। जानकारों के अनुसार यह दर बिजली, गैस या केरोसीन के मुकाबले काफी अधिक है। उल्लेखनीय है कि इन दरों के बाद भी वर्ष भर निगम के टालों में कोयला व जलौनी लकड़ी उपलब्ध नहीं होती। साफ है कि ऐसे में व्यवस्था ने उनके समक्ष छुप-छुपाकर जंगलों में कीमती वन संपदा का अवैधानिक दोहन करने का विकल्प ही शेष रख छोड़ा है। इस कारण बीते वर्षों में लगातार कोयला व जलौनी लकड़ी की खपत भी घट रही है।

गनीमत है मिलने लगा कोयला, पर उपलब्ध नहीं जलौनी लकड़ी

नैनीताल । पहाड़ों पर बर्फवारी होने के साथ गनीमत है कि जलाने के लिए कोयला मिलने लगा है, लेकिन पूरे मंडल भर में जलौनी लकड़ी उपलब्ध नहीं है। वन विकास निगम के टालों में केवल शवदाह के लिए ही जरूरी कुकाठ की लकड़ी ही बची है। उल्लेखनीय है कि आज भी समाज के कमजोर तबकों के लोगों के लिए लकड़ी या कोयले जलाकर आग तापने का ही विकल्प है, लेकिन प्रभागीय वन विकास प्रबंधक नैनीताल के नैनीताल जनपद से लेकर अल्मोड़ा के चौखुटिया तक के क्षेत्र में स्थित नौ लकड़ी टालों में से कहीं भी जलौनी लकड़ी के रूप में प्रयुक्त की जाने वाली बांज की लकड़ी उपलब्ध नहीं है। नैनीताल के मल्लीताल स्थित टाल में केवल छह कुंतल लकड़ी उपलब्ध है, जिसे नगर पालिका को अलाव जलाने के लिए सुरक्षित रखा गया है। बाकी बचे रानीबाग, भवाली, गरमपानी, बेतालघाट, काकड़ीघाट, चौखुटिया, बिमांडेश्वर और सिलोर महादेव के टालों में केवल शवदाह के लिए कुकाठ की लकड़ी ही बमुश्किल उपलब्ध है। वहीं कोयले की बात करें तो केवल मुख्यालय के तल्लीताल और रानीखेत के दो टालों में करीब 10 से 15 कुंतल कोयला ही उपलब्ध है। इससे गरीब-गुरबा की शीत कैसे कटेगी, भगवान ही मालिक है।

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निकायों को बिना कीमत चुकाए मिलेगी अलाव के लिए जलौनी लकड़ी, सीएम ने दिये निर्देश

नैनीताल। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘नवीन जोशी समग्र’ ने गत 18 अक्टूबर को अलाव जलाने के लिए जलौनी लकड़ी उपलब्ध न होने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस समाचार का मुख्यमंत्री के स्तर से असर हुआ है। इस बाबत समस्त जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक डा. एस चंदोला ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी कश्बों में रियायती दर पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराने के लिए वन विकास निगम को निर्देशित किया है। निगम के पास लकड़ी उपलब्ध न होने की समस्या के निदान के लिए निगम के लालकुआं और खटीमा के बड़े डिपो में बड़ी मात्रा में उपलब्ध पेड़ों का विकल्प सुझाया गया है, जो कि 450 रुपये प्रति कुंतल की रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा निकायों के लिए यह भी व्यवस्था की गई है कि सभी निकायों को निर्धारित मात्रा में निगम द्वारा जलौनी लकड़ी उपलब्ध करा दी जाए और इसका मूल्य निगम को शासन स्तर से सीधे मिल जाएगा।

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