Education


यह भी पढ़ें : गढ़वाली-कुमाउनी आदि मातृभाषाओं में भी पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे, निजी स्कूलों-फीस पर नियंत्रण के लिए हुआ नियामक प्राधिकरण का गठन

गढ़वाली/कुमाउनी भाषा बोलो | Garhwali/ Kumaouni Bhasha Bolo - YouTubeनवीन समाचार, हल्द्वानी, 20 दिसंबर 2021। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में बच्चे जल्द ही प्राथमिक स्तर पर गढ़वाली, कुमाउनी, बंगाली, गुरुमुखी व जौनसारी आदि मातृभाषाओं का ज्ञान भी दिया जाएगा। साथ ही 100 छात्र संख्या वाले सरकारी विद्यालयों में योग शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी। इसके अलावा सरकार राज्य के निजी स्कूल संचालकों द्वारा की जाने वाली फीस वृद्धि पर भी अंकुश लगाएगी।

प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सोमवार को नगर निगम के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य विद्यालय नियामक प्राधिकरण का गठन किया जा रहा है। इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अपनी फीस तो तय कर सकेंगे पर फीस के अनुरूप विद्यालय में सुविधा नहीं मिलती है तो अभिभावक जिलाधिकारी व शिक्षा महानिदेशक से शिकायत कर सकेंगे। की जाने वाली शिकायत मंत्रालय में पहुंचेगी और विद्यालय संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्राधिकरण के अंतर्गत स्कूली बच्चों की ड्रेस, पाठ्य सामग्री, शिक्षकों की समस्या सहित शिक्षा विभाग से जुड़ी तमाम समस्याओं का समाधान हो सकेगा। इससे उन शिक्षकों को भी लाभ मिलेगा, जिन्हें निजी स्कूलों में ज्यादा वेतन दर्शाकर कम दिया जाता है। ऐसे शिक्षकों की सुनवाई प्राधिकरण में होगी और दोषी स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

सभी शिकायतें ऑनलाइन भी प्रदर्शित की जाएंगी, ताकि पूरी पारदर्शिता बरती जा सकी। इसके अलावा श्री पांडे ने कहा कि 100 छात्र संख्या वाले सरकारी विद्यालयों में योग शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से प्रस्ताव व बजट स्वीकृत होने के बाद योग शिक्षकों को स्कूलों में तैनात कर दिया जाएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शिक्षा विभाग में अधिकारियों के पदोन्नति के बाद स्थानांतरण, कई जिलों के सीईओ बदले, सेवानिवृत्त को भी कर दिया पदोन्नत व स्थानांतरण भी…Documents related to forgery of 53 teachers missing in Jaunpur - जौनपुर में  53 शिक्षकों के फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज गायब

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 दिसंबर 2021। उत्तराखंड शासन से बुधवार को शिक्षा विभाग में अधिकारियों को पदोन्नत करते हुए 10 अधिकारियों के स्थानांतरण कर दिए हैं। आज जारी आदेश से प्रभारियों के भरोसे चल रहे चार जिलों को नए मुख्य शिक्षा अधिकारी मिल गए हैं। स्थानांतरण आदेश में एक बड़ी चूक भी दिखाई दी है। दो आदेश जारी करने के बावजूद एक सेवानिवृत्त अधिकारी को भी पदोन्नत कर स्थानांतरित कर दिया है।

अपर सचिव दीप्ति सिंह आदेशों के अनुसार रुद्रप्रयाग के प्रभारी सीईओ चित्रानंद काला को हटाते हुए उन्हें टिहरी स्थित डायट का प्राचार्य बनाया गया है। वहीं पौड़ी के सीईओ मदन सिंह् रॉवत को एससीईआरटी में संयुक्त निदेशक बनाया गया है। जबकि अब तक एससीईएआरटी में संयुक्त निदेशक का कामकाज देख रहे कुलदीप गैरोला को पहले रुद्रप्रयाद डायट का प्राचार्य और कुछ देर बाद जारी नई लिस्ट में अल्मोड़ा डायट भेजा गया है।

इसी तरह पहले रुद्रप्रयाग के सीईओ बनाये गए हरीश चंद्र सिंह रावत को बेसिक शिक्षा निदेशालय में संयुक्त निदेशक बनाया गया है। रावत काफी समय से निदेशायलय में ही हैं। वहीं, रुद्रप्रयाग के सीईओ चित्रानंद काला को पहले पौड़ी डायट का प्राचार्य और फिर टिहरी डायट का प्राचार्य बनाया गया है। रुद्रप्रयाग में अभी सीईओ की तैनाती नहीं की गईं है। नवीन चंद्र पाठक विद्यालयी शिक्षा बोर्ड के नये अपर सचिव होंगे। सीईओ बागेश्वर और अल्मोड़ा बनाए गए सुभाष चंद्र भट्ट और गजेंद्र सौंन के जिले भी दो घंटे में ही परस्पर बदले गए।

इस प्रकार ताजा आदेशों के अनुसार सुभाष चंद्र भट्ट अल्मोड़ा, डॉ. आनंद भारद्वाज पौड़ी, विनोद प्रसाद सिमल्टी उत्तरकाशी व गजेंद्र सिंह सौंन बागेश्वर जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी होंगे। आदेश में गत 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह का चमोली के गौचर स्थित डायट में प्राचार्य बनाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि आज स्थानांतरित सभी अधिकारियों की गत 11 नवम्बर को पदोन्नति हो गयी थी। लेकिन उसी दिन नई तैनाती देने के बजाय शासन स्तर पर मामला लटक गया था। इसलिए आज जारी आदेश में कुंवर सिंह को भी पदोन्नति के लाभ देने के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। इस स्थानांतरण आदेश में जल्द संशोधन होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि उनकी जगह यशवंत सिंह को तैनाती दी जाएगा। लाभ देने को कुंवर की पोस्टिंग दी गई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल के लंबे समय से सेवा से गायब शिक्षकों की सूची तलब

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 दिसंबर 2021। कुमाऊं मंडल के प्रभारी अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा रमेश चंद्र आर्य ने सोमवार को मंडल भर के शिक्षाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दोरान उन्होंने अधिकारियों को शासकीय कार्यो के साथ विद्यालयों में विद्यार्थियों के पठन-पाठन पर ध्यान देने, विद्यालयों का नियमित रूप से निरीक्षण करने, लंबित निर्माण कार्यों में तेजी लाने, जर्जर भवनों में किसी भी दशा में विद्यार्थियों को न बैठाने, अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के फीडर विद्यालयों की व्यवस्था उप शिक्षा अधिकारियों को देने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबे समय से सेवा से गायब चल रहे शिक्षकों की सूची भी तलब की और निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की।

बैठक में नैनीताल जनपद के मुख्य शिक्षाधिकारी केके गुप्ता, रमेश पुरोहित, अशोक गुसाई, पूरन बिष्ट, धीरेंद्र पाठक, जगमोहन रौतेला, नवीन जोशी, संगीता, ललित सती, मोहन फर्त्याल, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला व अनूप साह आदि लोग मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : स्कूलों के खुलने को लेकर आए राज्य सरकार से नए दिशा-निर्देश

नवीन समाचार, देहरादून, 13 दिसंबर 2021। देश एवं राज्य में कोरोना विषाणु मामले घटने के साथ उत्तराखंड सरकार ने इस सप्ताह से अब शनिवार को भी सभी विद्यालय खोलने के आदेश दे दिए हैं। अलबत्ता, विद्यालयों को सभी कोरोना नियमों को अभी भी सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि सोमवार से पहले की तरह स्कूल नियमित रूप से ही चलेंगे।

गौरतलब है कि पूर्व मंे कोरोना संक्रमण को देखते हुए सेनिटाइज करने के लिए सरकार ने हर सप्ताह शनिवार को स्कूल बंद रखने का एलान किया था। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार इससे पहले ही कोरोना से संबंधित सभी पाबंदियों को हटाने का ऐलान किया था।

इधर, उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के साथ बैठक के बाद स्कूल खोलने को लेकर आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे। साथ ही मानदेय आधारित शिक्षा मित्रों का मानदेय औपबंधिक के समान करने और राजीव नवोदय विद्यालय के संविदा शिक्षकों का मानदेय बढोत्तरी के लिए भी प्रस्ताव मांगा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अच्छी पहल: शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हर महीने पूरे दिन एक विद्यालय में पढ़ाना होगा, एडी ने खुद से की शुरुआत

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 नवंबर 2021। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अब हर महीने पूरे दिन एक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना होगा। इसकी शुरुआत माध्यमिक शिक्षा निदेशक लीलाधर व्यास ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पंतनगर में पूरे दिन बालिकाओं को पढ़ाकर की। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं को किताबी ज्ञान के अलावा अन्य पहलुओं पर भी गुरु मंत्र दिए, और उनकी शंकाओं के समाधान भी किए। उल्लेखनीय है कि श्री व्यास पूर्व से भी बच्चों के बीच रहते आए हैं। कोरोना काल में वह राइंका पटवाडांगर में बच्चों का तापमान लेते भी देखे गए थे।

आगे श्री व्यास ने बताया कि शासन से छात्र-छात्राओं के शैक्षिक स्तर में नियोजित सुधार के लिए निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागीय अधिकारियों को हर महीने एक दिन किसी विद्यालय में बच्चों को शिक्षण कार्य कराना होगा। इसके उपरांत उन्हें इसकी आख्या भी नोडल अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी। उन्होने अधिकारियों से आदेश का पालन सुनिश्चित करने को भी कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल के असुरक्षित विद्यालयों के विद्यार्थियों की होगी ऑनलाइन पढ़ाई…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अक्टूबर 2021। कुमाऊं मंडल के आपदा से प्रभावित व खतरे की जद में आए माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य ऑफलाइन नहीं कराया जाएगा, बल्कि ऐसे विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था कराई जाएगी। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा लीलाधर व्यास ने इस हेतु मंडल के अधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए सुरक्षा के प्रबंध देखकर केवल सुरक्षित कक्षा कक्षों में ही विद्यार्थी बैठाए जाएंगे। किसी भी छात्र-छात्राओं को स्थिति सामान्य होने तक विद्यालय आने को प्रेरित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों से कुमाऊं मंडलायुक्त के आदेशों के हवाले से मंडल में इस आपदा से क्षतिग्रस्त हुए विद्यालयों की सूची व नुकसान का आंकलन सहित संपूर्ण विवरण भी तलब किया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों में तैनात व असंगत शिक्षकों के ब्यौरे तलब

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अक्टूबर 2021। कुमाऊं मंडल के शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों एवं मानक से अधिक कार्यरत एवं असंगत शिक्षकों को संबंधित विद्यालयों से हटाया जा सकता है। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा लीलाधर व्यास ने बृहस्पतिवाकर को अधिकारियों की बैठक लेते हुए ऐसे शिक्षकों के ब्यौरे तलब किए हैं। इसके अलावा उन्होंने नई शिक्षा नीति पर विभागीय अधिकारियों से सुझाव मांगे।

साथ ही बैठक में श्री व्यास ने इस पर नाराजगी जताई कि प्रारंभिक शिक्षा के 30 फीसद पदोन्नति कोटे के लिए पात्र शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का कई जिलो ने सत्यापन नहीं किया है। उन्होंने तत्काल सत्यापन करने को कहा। उन्होंने कहा कि शासन एवं विभागीय उच्चाधिकारियों से प्रतिदिन अध्यापकों एवं छात्रों की उपस्थिति का विवरण मांगा जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों से इसकी समीक्षा करने और अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में भौतिक सत्यापन के साथ शिक्षण कार्य के ब्यौरे भी मांगे। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी केके गुप्ता, रमेश चंद्र आर्या, अशोक जुकारिया, एचवी चंद, रमेश पुरोहित, पदमेंद्र सकलानी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट, जगमोहन रौतेला, ललित सती, ललित उपाध्याय व संजय रौतेला आदि मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार ने हटाई अशासकीय विद्यालयों में भर्ती पर लगी रोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में इसी वर्ष अप्रैल महा में कोरोना की दूसरी लहर आने पर अशासकीय स्कूलों में शिक्षक-कार्मिकों की भर्ती पर लगाई गई रोक को वापस ले लिया है। साथ ही नई भर्तियों को भी मंजूरी दे दी है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने भर्ती शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बताया गया है कि राज्य के अशासकीय स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारियों के करीब एक हजार पद रिक्त हैं। श्री पांडे ने बताया कि एक दो दिन के भीतर इसके विधिवत आदेश जारी हो जाएंगे।

शिक्षा मंत्री श्री पांडे ने बताया कि सभी नियुक्तियों में शैक्षिक योग्यता, अनुभव आदि सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। अधिकारियों को इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं कि नियुक्तियों में शत-प्रतिशत पारदर्शिता रहे। किसी स्तर पर यदि अनियमितता या योग्य अभ्यर्थी के साथ नाइंसाफी की बात सामने आएगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 21 शिक्षकों का हुआ चयन

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्टूबर 2021। माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल के अंतर्गत शुक्रवार को राजकीय अटल उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालयों में एलटी संवर्ग के सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों के लिए दूसरे चरण की काउंसिलिंग आयोजित हुई। इस दौरान आमंत्रित किए गए 129 शिक्षकों में से 21 शिक्षकों को विद्यालय आवंटित किए गए।

अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा लीलाधर व्यास ने बताया कि इससे पहले स्क्रीनिंग परीक्षा के आधार पर 12 व 13 अगस्त को देहरादून में पहले चरण की काउंसिलिंग की गई थी। आज काउंसिलिंग में 50 शिक्षक उपस्थित हुए। 29 शिक्षकों ने कोई विकल्प पत्र प्रस्तुत नहीं किया। गणित में 7, हिंदी में 5, विज्ञान, सामान्य, व्यायाम व अंग्रेजी में 2-2 तथा संस्कृत विषय में 1 शिक्षक का चयन किया गया, जबकि कला विषय में किसी शिक्षक का चयन नहीं किया गया। काउंसिलिंग की प्रक्रिया में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट,, जगमोहन रौतेला, ललित उपाध्याय, आलोक जोशी, ललित सती व संजय रौतेला आदि भी शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उच्च न्यायालय ने दिए शिक्षकों के 451 पदों पर 20 अक्टूबर तक विज्ञप्ति निकालने के आदेश

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 22 सितंबर 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ ने प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अंतिम तिथि नहीं बढ़ाने के मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार से 20 अक्टूबर तक विज्ञप्ति जारी करने को कहा है। सुनवाई के दौरान प्रदेश की शिक्षा सचिव राधिका झा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर न्यायालय को बताया कि राज्य में अभी प्राथमिक शिक्षकों के 451 पद रिक्त हैं, इनके लिए सरकार विज्ञप्ति जारी करने जा रही है, याचिकाकर्ता इन पदों पर भर्ती में शामिल हो सकते है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अनु पंत ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सीटीईटी यानी सेंट्रल एलिजिबिलिटी टेस्ट परीक्षा जुलाई 2020 में होनी थी, लेकिन जनवरी 2021 में हो पाई और उसके नतीजे फरवरी 2021 में आये। इस बीच राज्य सरकार ने दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच राज्य के 10 जिलों में प्राथमिक शिक्षकों की 2248 रिक्तियों को भरने हेतु, भर्ती प्रक्रिया को आरंभ कर दिया और सीटीईटी का प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि दिसंबर 2020-जनवरी 2021 रख दी। इसकी वजह से जिन अभ्यर्थियों के नतीजे फरवरी 2021 में आए, उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत हुए नैनीताल के प्रो. साहू गीता, वीना, गौरव व मोनिका

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 5 सितंबर 2021। रविवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर राजधानी देहरादून मे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों नैनीताल जनपद के भी कई शिक्षक सम्मानित हुए हैं। इनमें जैव प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष प्रो. बीना तिवारी, नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी डॉ. नंद गोपाल साहू व उनके शोध छात्र गौरव ततराड़ी तथा रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. गीता तिवारी के साथ मुख्यालय के निकटवर्ती ज्योलीकोट निवासी मोनिका उपाध्याय जोशी शामिल हैं। श्रीमती जोशी राजकीय पॉलीटेक्निक अल्मोड़ा में कम्प्यूटर साइंस विभाग की अध्यक्ष हैं।

उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार दिव्य हिमगिरी संस्थान, यूकॉस्ट व उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के संयुक्त त्रावधान मे दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रो साहू के 105 से अधिक शोध पत्र अन्तर्राष्टीय जरनलों मे प्राकाशित हो चुके हैं, और उनका इम्पैक्ट फेक्टर 42 है तथा वह 2 भारतीय, 3 आस्ट्रेलियाई सहित 7 से अधिक पेटेंट फाइल कर चुके हैं। वहीं शोधाथी गौरव के 5 से अधिक शोध पत्र अन्तर्राष्टीय जरनलों मे प्रकाशित हो चुके हैं, और उनका इम्पैक्ट फैक्टर 15 है, तथा वह 1-1 भारतीय व आस्ट्रेलियाई सहित 5 पेटेट फाइल कर चुके हैं।

उधर बेतालघाट में शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक बुद्विबल्लभ बेलवाल के आवास पर देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 135वीं जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित आयोजित किया गया। इस मौके पर मुंख्य अतिथि अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। शिक्षकों ने अपने शिक्षण के अनुभव सुनाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल के शिक्षा विभाग को आठ वर्ष के बाद मिले पूर्णकालिक अपर निदेशक, मातहत खुश

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 2 सितंबर 2021। कुमाऊं मंडल के मुख्यालय स्थित शिक्षा विभाग के मंडलीय कार्यालय में अपर निदेशक-प्रारंभिक के पद पर अजय कुार नौडियाल एवं अपर निदेशक माध्यमिक के पद पर लीलाधर व्यास ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उल्लेखनीय है कि शासन ने 8 वर्षों के बाद इन पदों पर पूर्णकालिक अपर निदेशकों की नियुक्ति की है।

कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत अधिकारी द्वय ने कार्मिकों की बैठक ली और उनसे लंबित प्रकरणों का यथासमय निराकरण एवं शासकीय कार्यों का निष्पादन करने को कहा। उन्होंने कहा कि विभाग से जो भी सूचनाएं मांगी जाती हैं, उन्हें यथासमय उपलब्ध कराकर शिक्षकों एवं कार्मिकों के प्रकरणों का निराकरण किया जाना चाहिए। इस दौरान कर्मचारियों ने उनकी नियुक्ति पर खुशी जताते हुए उनका स्वागत-अभिनंदन भी किया। बैठक में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट, विधि अधिकारी मदन मोहन मिश्रा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जगमोहन रौतेला, अनूप साह, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला, सुभाष जोशी, कमल फुलारा, कविता पांडेय, दिनेश साह, आलोक जोशी, ललित सती, संगीता, भावना, ज्योत्सना पपोला, प्रमोद वर्मा, मोहन फर्त्याल व संजय कनवाल आदि कर्मी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : NIOS-DElEd अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक भी हटी

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 1 सितंबर 2021। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक को हटाते हुए सरकार को निर्देश दिए है कि एनआईओएस के दूरस्थ शिक्षा माध्यम से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियो को नियुक्ति प्रकिया में सम्मिलित करते हुए भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ करें। ये नियुक्तियां कोर्ट के आदेश के अधीन रहेंगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा है कि इनकी नियुक्ति 2012 की नियमावली व शिक्षा का अधिकार अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत करें। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।

मामले के अनुसार जितेंद्र सिंह व अन्य ने राज्य सरकार के 10 फरवरी 2021 के शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि वे 2019 में एनआईओएस के दूरस्थ शिक्षा माध्यम से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त हैं। किंतु राज्य सरकार ने उन्हें दिसम्बर 2018 में जारी 2600 पदों की विज्ञप्ति में सहायक अध्यापक प्राथमिक की नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने 16 दिसम्बर 2020 व राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 6 जनवरी 2021 को जारी आदेशों में एनआईओएस की दूरस्थ शिक्षा पद्धति से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को अन्य माध्यमों से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के समान माना है। इस प्रकार राज्य सरकार केंद्र सरकार के विरोधाभासी आदेश नहीं कर सकती। इन तर्कों के आधार पर पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार के उक्त शासनादेश पर रोक लगाते हुए इन अभ्यर्थियों को भी सहायक अध्यापक प्राथमिक शिक्षा की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने को कहा था। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कोरोना की वजह से नई परेशानी में राजकीय पॉलीटेक्निक नैनीताल के छात्र, डीएम को भेजा पत्र

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2021। मुख्यालय स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक के छात्र कोरोना की वजह से अपनी पढ़ाई और परिणाम को लेकर परेशान हैं। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा है।

छात्रों का कहना है कि कोरोना की वजह से कॉलेज की ओर से उनकी ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाई। फिर भी जो परीक्षाएं हुईं, उसमें कड़ी मार्किंग हुई, फलस्वरूप 85 फीसद विद्यार्थियों की बैक आई है। इधर 23 अगस्त से पॉलीटेक्निक खुला है, और 6 सितंबर से यानी 15 दिन बाद ही परीक्षाएं शुरू होने का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। लिहाजा परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई है। ऐसे में पूर्व से ही बैक का दबाव झेल रहे विद्यार्थियों को ‘ईयर बैक’ लगने से पूरे वर्ष के लिए पीछे चले जाने का भय सता रहा है। ऐसे में उन्होंने प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के सभी ट्रेडों के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की मांग की है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पुस्तकालय विज्ञान में यूजी व पीजी पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के मौजूदा 2021-22 शैक्षणिक सत्र से एक वर्षीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किये जा रहे हैं। जानकारी देते हुए पाठ्यक्रम समन्वयक केंद्रीय पुस्तकालय के डॉ. युगल जोशी ने बताया कि विश्व के सभी देशों में ज्ञान एवं साहित्य के संग्रहण के लिए बड़े-बड़े पुस्तकालयों की स्थापना की जा रही है।

इनके लिए पुस्तकालय विज्ञान में प्रशिक्षितों की आवश्यकता पड़ती है। यह पाठ्यक्रम इस आवश्यकता को पूरी करेगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन कुमाऊं विश्वविद्यालय की वेबसाइट से किया जा सकता है। अधिक जारकारी के लिए डॉ. जोशी के मोबाइल नंबर 7982948730 पर संपर्क कर सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ‘टीचर आफ द ईयर-2021’ के लिए नामांकन शुरू, यहां से करें नामांकन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अगस्त 2021। आगामी 5 सितंबर यानी अध्यापक दिवस को उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् तथा सोसायटी फॉर रिसर्च एंड डेवललेपमेंट इन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एग्रीकल्चर के संयुक्त तत्वाधान में ‘चतुर्थ टीचर ऑफ द ईयर-2021 अवॉर्ड‘ दिया जाएगा। इसके लिए 20 अगस्त तक चलने वाली नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

यह जानकारी देते हुए कार्यक्रम के संयोजक एवं गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी, टनकपुर के निदेशक प्रो. अमित अग्रवाल तथा स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य-सचिव एवं उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव ई. आरपी गुप्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि ‘टीचर ऑफ द ईयर-2021’ के तहत चार श्रेणियों टीचर ऑफ द ईयर, प्रिंसिपल ऑफ द ईयर, वाइस चांसलर ऑफ द ईयर एवं एक्सीलेंस इन रिसर्च ऑफ द ईयर में नामांकन की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नामांकन फॉर्म bit.ly/nomination-2021 लिंक के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। 25 अगस्त को सभी नामांकन की स्क्रीनिंग हाई पॉवर स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की जायेगी एवं 31 अगस्त को सभी चयनित अध्यापकों को मेल द्वारा सूचना प्रेषित कर दी जाएगी।

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय एवं उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डा.) पीपी ध्यानी की अध्यक्षता में हाईपॉवर स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया है जिसमें एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डा.) अन्न्पूर्णा नौटियाल, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डा.) सुनील जोशी, डीआईटी विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति एन रविशंकर आईएएस (रि.), ग्राफिक ईरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) राकेश शर्मा, पेट्रोलियम एवं ऊर्जा अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) सुनील रॉय, डा. सीमा जौनसारी, निदेशक (माध्यमिक) विद्यालय शिक्षा उत्तराखंड, जेएम नेगी, संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं सेवायोजन) बतौर सदस्य समिति में शामिल हैं, जबकि कार्यक्रम के समन्वयक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. अश्वनी काम्बोज होंगे। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में प्रेक्षाग्रह में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ का विमोचन भी किया जाएगा।

बताया गया है कि ‘टीचर ऑफ द ईयर’ शिक्षकों को उत्कृष्टता के आधार पर सम्मानित करने वाला उत्तराखंड का सबसे बड़ा आयोजन है। पिछले वर्ष 2020 में 154 अध्यापकों को विभिन्न श्रेणियों एवं उपश्रेणियों में यह अवार्ड प्रदान किया गया था। पिछले वर्ष भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग ने इस पूरे आयोजन को प्रायोजित किया था। इस वर्ष यह आयोजन हाइब्रिड मोड (वर्चुअल एवं फिजिकल) में आयोजित किया जाएगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : प्राथमिक से माध्यमिक में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू

-आज हुई हिंदी विषयाध्यापकों से शुरुआत
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अगस्त 2021। प्रारंभिक शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों की 30 फीसद पदोन्नति कोटे के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा में पदोन्नति के लिए अभिलेखों की जांच का कार्य मंगलवार को प्रारंभ हुआ। पहले दिन स्थानीय जीजीआईसी में हिंदी विषय के शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन किया गया। आगे पदोन्नति हेतु पात्र शिक्षकों को सुगम एवं दुर्गम की उनकी सेवाओं के आधार पर माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थापित किया जाएगा।

कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक माध्यमिक रघुनाथ लाल आर्या ने बताया कि सात अगस्त तक विषयवार आवेदन करने वाले प्राथमिक शिक्षकों के अभिलेखों की जांच की जानी है। आज बुलाए गए 89 शिक्षकों में से 18 को छोड़कर शेष उपस्थित रहे। बुधवार को गणित व संस्कृत विषयाध्यापकों के अभिलेखों की जांच की जाएगी। इस कार्य में प्रधानाचार्य सावित्री दुग्ताल, राजेंद्र अधिकारी, अंसारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट, ललित उपाध्याय, आलोक जोशी, जगमोहन रौतेला, राजेंद्र अधिकारी, संजय रौतेला, ललित सती, दिनेश साह, मनोज चौधरी व हेमंत चंदोला आदि विभागीय कर्मियों ने योगदान दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में 2 अगस्त से स्कूलों के खुलने के लिए आई नई एसओपी, हुआ बड़ा बदलाव

नवीन समाचार, देहरादून, 30 जुलाई 2021। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच प्रदेश में दो अगस्त से स्कूलों के खुलने के लिए नई एसओपी आ गई है। राज्य सरकार ने पहले कक्षा 6 से 12 के विद्यालय खोलने की बात कही थी, लेकिन अब 2 अगस्त से राज्य में केवल कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए ही स्कूल खुलेंगे। जबकि कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों के लिए भौतिक रूप से कक्षाएं 16 अगस्त से शुरू होंगी। इस दौरान बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी।

कक्षा 9 से 12वीं तक की कक्षाएं अधिकतम चार घंटे एवं 6 से 8 तक की कक्षाएं अधिकतम तीन घंटे चलेंगी, लेकिन जिन स्कूलों में कक्षाएं दो पालियों में चलेंगी, उन स्कूलों के प्रबंधन समय सारणी में बदलाव कर सकेंगे। पढ़ाई के लिए स्कूल सोमवार से शुक्रवार तक ही खुलेंगे। शनिवार एवं रविवार को जिला प्रशासन, नगर प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से नियमित सैनिटाइजेशन एवं फौगिंग करवाई जाएगी।

स्कूलों का संचालन हाईब्रिड मोड में किया जाएगा। भौतिक शिक्षण के साथ ही ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। अध्यापन के दौरान शिक्षक मोबाइल से शिक्षण कार्य को ऑनलाइन लाइव प्रसारित करेंगे। जिससे ऐसे छात्र जो स्कूल में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं वे घर पर रहकर ही कक्षा में चल रहे शिक्षण से जुड़ सकेंगे।

शुक्रवार को शासन में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हर स्कूल में सामाजिक दूरी, मास्क, सैनिटाइजर का प्रयोग करना अनिवार्य होगा। इसका पालन कराने के लिए हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। सचिव विद्यालयी शिक्षा राधिका झा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई निर्णय लिए गए।

नये नियमों के अनुसार अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को दो पालियों में चलाया जाएगा। बच्चों को सम और विषम अनुक्रमांक के क्रम में बुलाया जा सकता है। स्कूल खुलने पर किसी भी छात्र को स्कूल में उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। बच्चों को स्कूल बुलाने से पहले उनके अभिभावकों की सहमति ली जाएगी। स्कूल खुलने के दौरान सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र बिना मास्क के आता है तो स्कूल उसके लिए मास्क की व्यवस्था करेंगे। बच्चों को सुबह स्कूल में प्रवेश के समय और छुट्टी के समय एक साथ नहीं छोड़ा जाएगा। बच्चों के वाहनों में सामाजिक दूरी का पालन होगा, हर दिन वाहन को सैनिटाइज करना होगा। प्रार्थनासभा, बाल सभा, खेल, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य सामूहिक गतिविधियां नहीं होंगी। स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों से ट्यूशन फीस के अलावा कोई अन्य फीस नहीं ली जाएगी। बच्चों को अगले आदेशों तक पका हुआ भोजन भी नहीं दिया जाएगा।

इसके अलावा स्कूलों को आंतरिक एसओपी भी तैयार करनी होगी, जिसके अनुसार स्कूल का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा सचिव ने निर्देश दिए कि बोर्डिंग एवं डे-बोर्डिंग स्कूलों में आवासीय परिसर में निवास करने वाले छात्र-छात्राओं एवं स्कूल स्टाफ को अधिकतम 48 घंटे पहले की आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करनी जरूरी होगी। इसके बाद ही उन्हें स्कूल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। साथ ही बोर्डिंग एवं डे बोर्डिंग स्कूलों के प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य, समस्त शिक्षक, कर्मचारी, मैट्रन, आवासीय परिसर के समस्त स्टाफ एवं स्कूल में अन्य सेवाओं से जुड़े समस्त कर्मचारियों की वैक्सीनेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि किसी का वैक्सीनेशन न हुआ हो तो संबंधित स्कूल प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य स्वास्थ्य विभाग को ऐसे शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराएंगे। साथ ही डेंगू के खतरे को देखते हुए स्कूल में छात्रों को फुल बाजू की पेंट, शर्ट एवं छात्राओं को सलवार कमीज पहनकर स्कूल आने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि भोजन माताओं को स्कूल आना होगा, लेकिन अगले आदेशों तक बच्चों को पका हुआ भोजन नहीं दिया जाएगा। स्कूल परिसर में छात्र-छात्राओं को लंच बॉक्स एवं खाने की अन्य चीजें लाने की अनुमति नहीं होगी। स्कूल प्रबंधन की ओर से इसकी निगरानी की जाएगी। प्रदेश के क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों में कक्षाएं नहीं चलेंगी। इसके अलावा स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था करनी होगी। शौचायल ऐसे होने चाहिए, जो उपयोग में लाए जाने योग्य हों। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : स्कूल खोलने का तय दिन 2 अगस्त करीब, सरकार की योजना कुछ हद तक आई सामने

नवीन समाचार, देहरादून, 30 जुलाई 2021। उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल आगामी दो अगस्त से स्कूल खोलने का प्रस्ताव पारित कर चुका है। लेकिन लगता है कि मंत्रिमंडल की बैठक के बाद देश-प्रदेश में एक बार फिर कोरोना के मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी से सरकार के कदम ठिठका दिए हैं। दो अगस्त आने में केवल 3 दिन बचे हैं, बावजूद शासन अभी तक स्कूल खोलने के लिए एसओपी जारी नहीं कर सका है। गौरतलब है कि एसओपी देखने के बाद ही खासकर निजी स्कूल खोलने या न खोलने पर निर्णय हो सकेगा और इसके बाद भी नैनीताल-देहरादून व मसूरी जैसे शहरों के प्रतिष्ठित विद्यालय देश ही नहीं विदेशों से भी आकर पढ़ने वाले अपने आवासीय छात्रों को सूचित कर विद्यालय आने को कहेंगे।

अब सरकार ने तय किया है कि बच्चे अपने अभिभावकों की अनुमति के बाद ही स्कूल आ सकेंगे। सरकार ने तय किया है कि अभिभावक की सहमति के बिना छात्रों को स्कूल आने की इजाजत नहीं होगी। शिक्षा सचिव राधिका झा ने बताया कि स्कूलों को खोलना जरूरी है, लेकिन छात्र और शिक्षकों का जीवन भी जरूरी है। इसके लिए स्कूल के संचालन, छात्रों की सुरक्षा को लेकर सामूहिक विचार-विमर्श के बाद ही एसओपी तय की जाएगी। स्कूल खोलने को लेकर शुक्रवार को दून के प्रमुख निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य, अभिभावक प्रतिनिधियों को स्कूल खोलने की एसओपी पर चर्चा के लिए आंमत्रित किया।

शिक्षा सचिव ने कहा कि स्कूलों के खुलने के बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। व्यवस्था की जा रही है कि स्कूल न आने वाले छात्र मोबाइल, लैपटॉप से कक्षा से जुड़ें। शिक्षक ह्वाट्सएप ग्रुप तैयार कर छात्रों को कक्षा से जोड़ सकते हैं। जहां ऑनलाइन सुविधा नहीं है, वहां ह्वाट्सएप और वर्कशीट से पढ़ाई जारी रखी जाएगी। साथ ही मासिक परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : प्राथमिक से माध्यमिक में पदोन्नति में गैर बीएड प्रशिक्षितों को भी शामिल करने की मांग

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जुलाई 2021। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन ने प्राथमिक शिक्षकों की माध्यमिक में पदोन्नति हेतु जारी विज्ञप्ति में गैर बीएड प्रशिक्षितों को शामिल न करने पर आपत्ति जताई है। संगठन ने इसे एक बड़ा पक्षपातपूर्ण और अवसर से वंचित करने वाला निर्णय बताया है।

राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन जिला मंत्री डिकर सिंह पडियार ने कहा कि अगस्त 2019 में प्राथमिक से एलटी में पदोन्नति हेतु अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल द्वारा जो विज्ञप्ति जारी की गई थी, उसमें बीएड की अनिवार्यता का जिक्र नहीं था। न ही इससे पूर्व कोई ऐसी अनिवार्यता व बाध्यता थी। वर्तमान में जो वरिष्ठता सूची अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल द्वारा बेसिक शिक्षकों की माध्यमिक में समायोजन हेतु जारी की गई हैं उनमें गैर बीएड प्रशिक्षित शामिल नहीं किए गए हैं। संगठन मांग करता है कि समायोजन में गैर बीएड प्रशिक्षितों को भी पूर्व की भांति इस बार भी शामिल किया जाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: प्राइमरी शिक्षकों के लिए एलटी में पदोन्नति का रास्ता साफ़, प्रक्रिया 3 से

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जुलाई 2021। प्रारंभिक शिक्षा मंे कार्यरत शिक्षकों के लिए एलटी स्नातक वेतनक्रम में 30 फीसद पदोन्नति कोटे के अंतर्गत पदोन्नति का लंबे समय से अटका रास्ता साफ हो गया है। कुमाऊं मंडल के ऐसे शिक्षकों के अभिलेखों की जांच आगामी 3 अगस्त से नैनीताल में की जाएगी और पात्र शिक्षकों को उनकी सुगम व दुर्गम की सेवा के आधार पर विद्यालयों में पदस्थापित किया जाएगा।

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक रघुनाथ लाल आर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत हिंदी, गणित, संस्कृत, अंग्रेजी, व्यायाम, विज्ञान, कला, सामान्य, गृह विज्ञान, संगीत व वाणिज्य विषयों के 926 शिक्षकों ने 30 फीसद कोटे के तहत पहले से मंडलीय कार्यालय को आवेदन भेजे हैं। इनमें से हिंदी में सर्वाधिक 71 सहित विभिन्न विषयों में उपलब्ध 292 पदों पर पदोन्नति की जानी है। तीन अगस्त को हिंदी, 4 को गणित व संस्कृत, 5 को अंग्रेजी व व्यायाम, 6 को विज्ञान व कला तथा सात अगस्त को सामान्य, गृह विज्ञान, संगीत व वाणिज्य विषय के शिक्षकों के मूल अभिलेखों की सुबह 10 बजे से जांच की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तो ‘नख-दंत विहीन’ होगा उत्तराखंड का नया फीस एक्ट !

-स्कूल खुद तय करेंगे अपनी फीस, शिकायत केवल वास्तविक अभिभावक कर सकेंगे
नवीन समाचार, देहरादून, 17 जुलाई 2021। उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए बन रहे फीस एक्ट के बारे में आ रही खबरों के अनुसार एक्ट में दो ऐसे प्राविधान किए जा रहे हैं, जिनसे एक्ट का ‘नख-दंत विहीन’ होना तय है। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग की ओर से फीस एक्ट का जो ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा गया है, उसके बाद स्कूलों के खिलाफ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के अलावा कोई भी शिकायत नहीं कर सकेगा। साथ ही स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार खुद फीस तय करेंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब स्कूल खुद ही फीस तय करेंगे तो सरकार कैसे उनकी फीस पर नियंत्रण करेगी और केसे फीस को लेकर स्कूलों की मनमानी रुकेगी। फीस एक्ट में यह प्राविधान भी किया जा रहा है कि स्कूलों के खिलाफ राज्य स्तरीय कमेटी तभी जांच करेगी, जब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के वास्तविक अभिभावक शिकायत करेंगे।

प्रस्तावित फीस एक्ट में किए जा रहे प्राविधानों के अनुसार राज्य स्तरीय कमेटी में लोक निर्माण व वित्त आदि विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे। स्कूलों के खिलाफ शिकायत आने पर राज्य स्तरीय कमेटी सीए से ऑडिट करा सकेगी। जांच में यदि गड़बड़ी मिली तो सीए के ऑडिट का खर्च स्कूल वहन करेगा। वहीं यदि जांच में स्कूल के खिलाफ गड़बड़ी नहीं मिली तो ऑडिट पर आने वाले खर्च को राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी होगी।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में फीस एक्ट को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में तत्कालीन शिक्षा सचिव एमसी जोशी ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया गया था। लेकिन सरकार इसे कैबिनेट में ही नहीं लायी। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कुछ ऐसा ही हुआ और एक्ट का प्रस्ताव कैबिनेट में आते-आते रह गया। अब प्रदेश को नए मुख्यमंत्री मिलने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने एक्ट के प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान: पांचवी तक मातृभाषा और आगे अंग्रेजी में पढ़ेंगे राज्य के बच्चे

-शिक्षा मंत्री ने किया मुख्यालय में राबाइंका का अटल उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में शुभारंभ
-बताया 15 जुलाई के बाद अटल उत्कृष्ट विद्यालयों को मिल जाएंगे योग्य शिक्षक
-आगे और 500 अटल आदर्श विद्यालय तथा 2500 प्राथमिक विद्यालय योजना में लिए जाएंगे
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 09 जुलाई 2021। प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, खेल, युवा कल्याण एवं पंचायती राज मंत्री अरविन्द पांडे ने शुक्रवार को अटल उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में चयनित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज तल्लीताल का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री पांडे ने उम्मीद जताई कि विद्यालय में अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त होने के साथ यहां पड़ने वाले कमजोर आय वर्ग के परिवारों के बच्चे भी अंग्रेजी भाषा में और स्मार्ट क्लास सहित अन्य अत्याधुनिक पद्धति से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि हम नई शिक्षा नीति का आकलन करते हुए अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में कक्षा पांच तक मातृ भाषा में पढ़ायेंगे तथा कक्षा 6 से शत-प्रतिशत अंग्रेजी माध्यम में पढ़ायेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 190 अटल उत्कृष्ट विद्यालय चयनित हैं। इन विद्यालयों में 797 पदों की आवश्यकता है। इस आवश्यकता की पूर्ति हेतु विभाग के 3950 शिक्षकों ने आवेदन किया है। इनकी जांच 15 जुलाई को की जाएगी। इससे अटल उत्कृष्ट विद्यालयों को योग्य शिक्षक प्राप्त होंगे। उन्हांेने कहा कि आगे द्वितीय चरण में 500 अटल आदर्श विद्यालय और इनके साथ 5-5 यानी कुल 2500 प्राथमिक विद्यालय भी बनाए जाएंगे, ताकि उनके बच्चे यहां पढ़ने आयें। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार, राज्य में सभी को समान अवसर प्रदान करने, सबको शिक्षा-अच्छी शिक्षा प्रदान करने, शैक्षणिक कार्यों में उत्कृष्टता लाने, शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने और शिक्षा के उन्नयन के लिए कार्य कर रही है। इसके परिणाम स्वरूप ही नीति आयोग के सर्वे में राज्य उत्कृष्ठ शिक्षा में देश में चौथे पायदान पर पहुंच गया है, आगे सरकार का लक्ष्य पहले पायदान पर पहुचने का है। उल्लेखनीय है कि आज ही श्री पांडे ने शहीद बहादुर सिंह मटियाली राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज पतलोट, जीआईसी भीमताल, जीआईसी ढोकाने, जीआईसी जितुआ पीपल का भी शुभारंभ किया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने ग्रामीण एवं कमजोर आय वर्ग के बच्चों के लिए भी आज के दौर में अंग्रेजी भाषा में पढ़ाई को बुनियादी आवश्यकता बताया। ब्लॉक प्रमुख डॉ.हरीश बिष्ट ने भी विचार रखे। कार्यर्क्रम में उप जिलाधिकारी प्रतीक जैन, राज्य अपर परियोजना निदेशक डॉ. मुकुल सती, अपर निदेशक रघुनाथ आर्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता, उप निदेशक खेल अख्तर अली, प्रधानाचार्या सावित्री दुग्ताल, सभासद तारा राणा, गजाला कमाल, विश्वकेतु वैद्य, अरविंद पडियार, आनंद बिष्ट, दीपिका बिनवाल, हरीश भट्ट, पीसी साह, रोहित भाटिया, रेखा आर्या, राधा तोलिया, आयुष भंडारी, सलमान जाफरी आदि उपस्थित रहे।

बड़ा समाचार : ऑनलाइन प्रवेश के लिए वेबसाइट का भी किया शुभारंभ
नैनीताल। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने इस मौके पर कोविड-19 के कारण ऑफ लाईन प्रवेश नहीं हो पाने के कारण आज ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल educationportal.uk.gov.in का भी शुभारंभ किया। साथ ही विद्यालय में स्थापित माता सरस्वती की प्रतिमा का भी अनावरण किया, एवं विद्यालय में एक पौधा भी रोपा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शिक्षा महकमे में जबर्दस्त फर्जीवाड़ा ! गैर कानूनी तरीके से किया 300 से अधिक पदों का सृजन, हाईकोर्ट ने किया सरकार का जवाब तलब

रवीन्द्र देवलियाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जून 2021। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग में उच्चाधिकारियों की नियुक्ति के मामले में एक जबर्दस्त फर्जीवाड़ा सामने आया है। उत्तराखंड स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2006 का उल्लंघन कर प्रदेश में गैर कानूनी तरीके से उच्चाधिकारियों के 300 से अधिक पद सृजित कर दिये गये हैं। मजेदार बात यह कि कई साल पहले हुए इस फर्जीवाड़े को लेकर प्रदेश में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी ने आंखें मूंद ली हैं। यहां तक कि पक्ष व विपक्ष सभी इस मामले में खामोश हैं। इस फर्जीवाड़े से राज्य के कोष पर भी जबर्दस्त असर पड़ा है। इससे प्रदेश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस मामले का खुलासा हुआ है सतीश चंद्र लखेड़ा की ओर से उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका से। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले को सुनने के बाद गत बुधवार को प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। पता चला है कि उच्च न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद अब शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और इन नियुक्तियों को निरस्त करने की कवायद शुरू होने लगी है।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा के लिये वर्ष 2006 में उत्तराखंड स्कूल शिक्षा अधिनियम वजूद में आया। इस अधिनियम के तहत शिक्षा का एक ढांचा तैयार किया गया। लेकिन वर्ष 2011 में एक आदेश जारी कर शिक्षा विभाग में गैर कानूनी तरीके से लगभग 300 से अधिक नये पद सृजित कर दिये गये। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि शिक्षा अधिनियम, 2006 की धारा 2(सी) के तहत प्रदेश में शिक्षा महकमे में शिक्षा निदेशक के एक पद का प्रावधान है लेकिन 14 जून, 2011 को जारी शासनादेश के बाद गैर कानूनी तरीके से निदेशक के तीन नये पद सृजित कर दिये गये। जिनमें निदेशक प्राथमिक शिक्षा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा व निदेशक एससीईआरटी शामिल हैं। जबकि अधिनियम की धारा 2(डी) के तहत जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी के एक पद का प्रावधान है लेकिन अधिनियम में बिना संशोधन किये प्रत्येक जिले में मुख्य शिक्षा अधिकारी का एक और पद सृजित कर दिया गया। मतलब 13 जनपदों में मुख्य शिक्षा अधिकारी के 13 नये पद सृजित कर दिये गये। साथ ही इन पदों के लिये नये वेतन का भी निर्धारण कर दिया गया। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गैर कानूनी तरीके से ब्लाकों में भी खंड शिक्षा अधिकारी के 97 पद सृजित कर दिये। इसका भी अधिनियम में कहीं कोई प्रावधान या जिक्र नहीं है और न ही इसके लिये अधिनियम में संशोधन की जेहमत उठायी गयी। और तो और सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर प्रदेश में ग्रुप बी के 100 पद भी बढ़ा दिये। इसका भी शिक्षा अधिनियम में कोई उल्लेख नहीं है।

शिक्षा विभाग की कहानी यही खत्म नहीं होती। याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया है कि अधिनियम की धारा 2(पी) में प्रावधान है कि प्रदेश में दो मंडलों में एक-एक अतिरिक्त निदेशक (एडी) तैनात होंगे लेकिन सरकार ने एडी के पदों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी है। इसी प्रकार संयुक्त निदेशक के 39 पद व उप निदेशक के 48 नये पद भी सृजित कर दिये गये। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रदेश में जहां कम छात्र संख्या के चलते एक ओर सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं वहीं शिक्षा महकमे में अधिकारियों की फौज बढ़ा दी गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि इससे प्रदेश पर जबर्दस्त वित्तीय बोझ बढ़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से शिक्षा महकमे के 14 जून, 2011 के आदेश को निरस्त करने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने और अभी तक वेतन पर खर्च धन को वसूल करने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सीके शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अदालत ने सरकार से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अन्य शुल्कों को भी ट्यूशन फीस में शामिल कर अधिक फीस वसूलने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जून 2021। अनेक पब्लिक स्कूलों के द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर अन्य मदों की फीस भी ट्यूशन फीस में शामिल कर वसूली जा रही है। साथ ही स्कूलों ने गत वर्ष से कोरोना लॉक डाउन के दौरान स्कूल न खुलने के बावजूद अपनी फीस काफी बढ़ा दी है। ऐसी शिकायतों शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी मिल रही हैं, पर अधिकारी शासन के आदेशों के बावजूद आपसी मिलीभगत की वजह से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अब मंडलीय अपर शिक्षा निदेशक-माध्यमिक रघुनाथ लाल आर्या ने जिलों के अधिकारियों को इस बारे में आदेश जारी ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं।
आदेश में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद कतिपय निजी विद्यालयों द्वारा विगत वर्षों में विभिन्न मदों (खेल कंप्यूटर आदि) में ली जाने वाली फीस को भी शिक्षण शुल्क में सम्मिलित कर शिक्षण शुल्क में वृद्धि की गई है जो उक्त निर्देशों का उल्लंघन है। जबकि खंड शिक्षा अधिकारी एवं उप शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। आर्या ने निर्देश दिए हैं कि तत्काल ऐसे निजी विद्यालयों को चिह्नित कर जांच करें। दोषी पाये जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कर उसकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय एवं मंडलीय कार्यालय को भेजी जाए। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोविड-19 के संक्रमण की दूसरी लहर की रोकथाम के दृष्टिगत विद्यालय बंद रहने के दौरान निजी एवं पब्लिक स्कूलों की फीस भुगतान की प्रक्रिया के संबंध में शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने 26 अप्रैल को विस्तृत आदेश जारी किए थे।

यह भी पढ़ें : कोरोना काल में वेतन से वंचित निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने लगाई आर्थिक सहायता की गुहार…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मई 2021। उत्तराखंड एनआईओएस डीएलएड संगठन से जुड़े निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग उठाई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नंदन बोहरा ने कहा कि उत्तराखंड के निजी विद्यालयों में कार्यरत्त शिक्षक देश के प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक, सभी निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भारत सरकार द्वारा कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शुरू किए गए एनआईओएस-डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त हैं। लेकिन इधर वर्तमान में निजी विद्यालयों के कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से बंद होने के कारण उन्हें अपने विद्यालयों से मिलने वाला मानदेय भी पिछले वर्ष से बंद हो चुका है। इस कारण उनके समक्ष परिवार के भरण पोषण का बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। इसके निवारणार्थ कई बार अपने क्षेत्र के विधायकों व जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत करवाया परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा, उन्होंने मुख्यमंत्री से निजी विद्यालयों के शिक्षकों को आर्थिक सहायता प्रदान कर राहत दिलाने की मांग की है।

यह भी पढ़ें : एनआईओएस-डीएलएड अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट से आया बड़ा फैसला 

नवीन समाचार, नैनीताल, 03 मार्च 2021। दूरस्थ शिक्षा के जरिए एनआईओएस यानी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान से द्विवर्षीय डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिल गई है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने इस संबंध में राज्य सरकार के 10 फरवरी के शासनादेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके बाद राज्य में करीब 37 हजार एनआईओएस-डीएलएड अभ्यर्थी राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पदों की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल निवासी एनआईओएस-डीएलएड संघ के प्रदेश अध्यक्ष नंदन सिंह बोहरा व अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि उन्होंने दूरस्थ शिक्षा माध्यम से डीएलएड किया है, और केंद्र सरकार के शासनादेश के तहत राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पदों की विज्ञप्ति में जारी पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया है, मगर सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश को दरकिनार कर दस फरवरी को जारी शासनादेश में एनआइओएस से डीएलएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले साल 16 दिसंबर 2020 को और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने छह जनवरी 2021 को जारी आदेशों में दूरस्थ शिक्षा से डीएलएड अभ्यर्थियों को नियमित डीएलएड अभ्यर्थियों के समान माना गया है। मामले को सुनने के बाद एकलपीठ ने प्रदेश सरकार के शासनादेश पर फिलहाल रोक लगा दी।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: नैनीताल जनपद में पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित करने की घोषणा…

-केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. निशंक ने की रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित करने की घोषणा
-160 करोड़ रुपए के कार्य होने की संभावना
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2021। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने उद्बोधन में रामगढ़, उत्तराखंड में विश्वभारती का परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। इससे रामगढ़ सहित नैनीताल जनपद एवं कुमाऊं मंडल में खुशी की लहर है। इस अवसर पर डॉ. निशंक ने कहा कि गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर को एशिया में साहित्य के लिए प्रथम नोबेल पुरुस्कार दिलाने वाले कालजयी ग्रन्थ ‘गीतांजलि’ की रचना रामगढ़ उत्तराखंड में हुई थी। आज भी रामगढ़ स्थित उनका आवास गुरुदेव की विरासत का जीता जागता प्रमाण है। विश्वभारती के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रामगढ़ में केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक परिसर के रूप में विकसित गुरुदेव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। दीक्षांत समारोह को इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी विडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित किया गया। समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी उपस्थित रहे।

रामगढ़ में विश्वभारती के परिसर की स्थापना की घोषणा करने के लिए शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया के प्रन्यासी देवेन्द्र ढैला, प्रो. अतुल जोशी, नवीन वर्मा, डॉ. एसडी तिवारी, डॉ. सुरेश डालाकोटी, हेमंत डालाकोटी आदि ने डॉ निशंक एवं विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विद्युत चक्रबर्ती सहित विवि प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया द्वारा विगत छह वर्षों से गुरुदेव की रामगढ़ स्थित विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, तथा प्रत्येक वर्ष 7 मई को गुरुदेव का जन्मोत्सव धूम धाम के साथ मनाया जाता रहा है। विगत वर्ष 10 जून को विश्वभारती विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् द्वारा रामगढ़, उत्तराखंड में विश्वभारती के परिसर की स्थापना का प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया था। इसके तहत रामगढ़ में सामाजिक विज्ञान और ग्रामीण विकास केंद्र, भाषा विज्ञान केंद्र, पब्लिक पालिसी और गुड गवर्नेंस केंद्र तथा हिमालयी अध्ययन केंद्र की स्थापना हेतु लगभग 160 करोड़ रुपए की डीपीआर का प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन है।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: कुमाऊं मंडल में 82 सहित राज्य के 188 सरकारी स्कूलों की बदलेगी सीरत, CBSE पैटर्न पर होंगे संचालित 

-अटल उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में होंगे संचालित
-सीबीएसई पैटर्न में संचालित होंगे, आगामी 1 मार्च से इन विद्यालयों में प्रवेश के लिए पंजीकरण के लिए वेबसाइट होगी प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2021। कुमाऊं मंडल की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी है। मंडल में नये शिक्षा सत्र से अटल उत्कृष्ट विद्यालय योजना के अंर्तगत 82 अटल उत्कृष्ट विद्यालय सीबीएसई पैटर्न में संचालित होंगे। आगामी 1 मार्च से इन विद्यालयों में प्रवेश के लिए पंजीकरण भी प्रारंभ हो जाएंगे। इस हेतु सीबीएसई दिल्ली इन चयनित अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में विद्यार्थियों के पंजीकरण के लिए अपनी बेबसाइट भी उपलब्ध करा देगी।

इस सन्दर्भ में शुक्रवार को सीबीएसई दिल्ली के अधिकारियों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियांे के साथ बैठक की। बैठक के उपरान्त अटल उत्कृष्ट विद्यालय योजना के नोडल अधिकारी एवं अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल डा. मुकुल कुमार सती ने बताया कि उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंर्तगत प्रत्येक विकासखण्ड में दो यानी राज्य में 188 एवं कुमाऊं मंडल में 82 अटल उत्कृष्ट विद्यालय चयनित किये गये हैं। इनमें नैनीताल में 16, अल्मोडा में 22, पिथौरागढ में 16, ऊधमसिंहनगर में 14, चम्पावत मे 8 तथा बागेश्वर में 6 अटल उत्कृष्ट विद्यालय शामिल हैं। उन्होंनंे बताया कि यह अटल उत्कृष्ट विद्यालय सीबीएसई से मान्यता प्राप्त होंगे। डा. सती ने इसके लिये सीबीएसई दिल्ली का आभार व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें : नैनीताल व निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों को पुनः ‘एजुकेशन हब’ बनाएगी ‘सोपसोन’, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने व मूल्यों युक्त शिक्षा पर भी रहेगा जोर

-गुणवत्तापूर्ण एवं मूल्यों युक्त शिक्षा के लिए कार्य करेगा नैनीताल एवं निकटवर्ती क्षेत्रों के प्राइवेट स्कूलों का विधिवत अस्तित्व में आया संगठन

-संगठन के द्वारा सदस्यों को दी गई नई शिक्षा नीति की विस्तृत जानकारी

पत्रकार वार्ता करते प्राइवेट स्कूलों के संगठन ‘सोपसोन’ के सदस्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 05 अक्टूबर 2020। पिछले करीब एक वर्ष की कवायद के फलस्वरूप नैनीताल एवं निकटवर्ती क्षेत्रों के प्राइवेट स्कूलों का संगठन ‘सोपसोन’ यानी ‘सोसायटी ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ नैनीताल’ गत 21 सितंबर को पंजीकरण के साथ विधिवत अस्तित्व में आ गया है। सोमवार को संगठन के द्वारा नगर के लांग व्यू पब्लिक स्कूल में अपने सदस्यों को संगोष्ठी आयोजित कर नई शिक्षा नीति पर विस्तृत जानकारी दी गई एवं विश्वास जताया गया कि नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा व्यवस्था में बडे सकारात्मक बदलाव लाने वाली साबित होगी। इसके साथ ही संकल्प जताया कि नैनीताल व अन्य पर्वतीय क्षेत्रों को पूर्व की तरह ‘एजुकेशन हब’ यानी शिक्षा का केंद्र बनाने पर जोर दिया जाएगा।
संगोष्ठी के उपरांत आयोजित पत्रकार वार्ता में सोपसोन के पीआरओ व वृंदावन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक आलोक साह ने कहा कि नगर में शिक्षा के उत्कृष्ट संस्थानों का वर्ष 1869 से गौरवशाली इतिहास है। सचिव वुडब्रिज स्कूल भवाली के विनय केर ने बताया कि संगठन में नगर के बिड़ला विद्या मंदिर, ऑल सेंट्स कॉलेज, लांग व्यू पब्लिक स्कूल, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, रामा मांटेसरी, सेंट जोसफ कॉलेज, सेंट मेरी कान्वेंट कॉलेज, अम्तुल्स पब्लिक स्कूल, सनवाल स्कूल, ओकवुड स्कूल व द होली एकेडमी, भीमताल के लेक्स इंटरनेशनल, नौकुचियाताल के जीडी गोयनका इंटरनेशनल स्कूल, दोगांव का डॉन बॉस्को स्कूल व भवाली के संेट एंड्रूज व ग्रीन माउंट ग्लोबल स्कूल आदि शामिल हैं। अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा ने नयी शिक्षा नीति के बारे में बताया कि इसमें प्री नर्सरी कक्षाओं से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर तक, सभी भागेदारों के आपसी सामंजस्य, अधिक भाषाओं एवं बच्चों में वोकेशनल विषयों के साथ दक्षता विकास पर जोर दिया गया है। इसमें बच्चों का पहले वह स्वयं, फिर उनके सहपाठी और अंत में शिक्षक मूल्यांकन करेंगे। 12 तक की शिक्षा व्यवस्था पूर्व की 10 प्लस 2 की जगह 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 पर चलेगी। यानी इसमें यूकेजी से दूसरी कक्षा तक एक यूनिट, तीसरी से पांचवीं, छठी से आठवीं एवं नौवीं से 12 तक की कक्षाओं तक एक-एक यूनिटें होंगी। इस दौरान श्री शर्मा एवं संगठन की उपाध्यक्ष केई जरमायाह ने लॉक डाउन में फीस पर उच्च न्यायालय एवं सरकार के आदेशों के आधार पर स्पष्ट किया कि गैर आवासीय विद्यालयों में बच्चों से शिक्षण शुल्क लिया जाएगा, अलबत्ता आवासीय विद्यालयों के लिए आदेशों में स्पष्टता नहीं है। साथ ही स्कूल खोले जाने पर सरकार से उम्मीद की कि बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सर्वोपरि रखकर ही निर्णय लिया जाएगा। साथ ही यह टिप्पणी भी कि यदि सरकार छह माह की शुल्क मुक्ति के आदेश जारी करते हैं तो वह अपनी बेहद बुरी आर्थिक स्थिति के बावजूद आदेशों को मानेंगे। इस मौके पर संगठन के सत्येंद्र नेगी, भुवन त्रिपाठी, विनय साह, नीलू एल्हेंस, ब्रदर हैक्टर पिंटो, गीतांजलि आनंद, मधु विग, बीके विग, डा. मनोज बिष्ट, राखी साह व अनुपमा साह सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : सर्वे में सामने आई ऑनलाइन पढ़ाई की जमीनी हकीकत: 60% से अधिक बच्चों के पास नहीं मिले एंड्राइड फोन, 78% गांवों में नेटवर्क की दिक्कत

-वीरांगना वाहिनी ने प्रदेश के चार जिलों के 10 विकासखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में सर्वे कर निकले निष्कर्श से प्रदेश के शिक्षा मंत्री को अवगत कराया
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, 09 सितंबर 2020। केंद्र व राज्य सरकारें जहां बच्चों से कोविद-19 की महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई को अपनाने की सलाह दे रही हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के 60 फीसद से अधिक बच्चों के पार ऑनलाइन पढ़ाई करने योग्य एंड्राइड फोन ही नहीं हैं, जबकि 78 फीसद ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की अत्यधिक दिक्कत है। यह दावा वीरांगना ग्राम पंचायत स्तरीय महिला जनप्रतिनिधि संगठन ने राज्य के चार जिलों-अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व नैनीताल के 10 विकासखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में सर्वे करने से प्राप्त निष्कर्श के आधार पर किया है। संगठन ने इस निष्कर्श की जानकारी प्रदेश के शिक्षा मंत्री को दी है।
संगठन ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को भेजे पत्र में सर्वे के आधार पर कहा है कि अल्मोड़ा जिले के ताकुला ब्लॉक की 51 ग्राम पंचायतों में सरकारी स्कूलों में कुल 3720 विद्यार्थियों में से 2252 यानी 60.5 फीसद विद्यार्थियों के पास एंड्राइड फोन नहीं हैं, जबकि 51 में से 40 यानी 78 फीसद ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की अत्यधिक दिक्कत है। सर्वे में यह भी दावा किया गया है कि बागेश्वर जिले में कहीं भी ऑनलाइन कक्षाएं नहीं चल रही हैं। केवल 2 प्रतिशत बच्चों को शिक्षकों द्वारा गृहकार्य दिया जा रहा है व इतने ही बच्चे दूरदर्शन से जुड़े हैं। 10 प्रतिशत के पास टेलीविजन भी नहीं हैं। 50 प्रतिशत ग्राम प्रचायतों में विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है। अलबत्ता 60 प्रतिशत बच्चों को ह्वाट्सएप के द्वारा गृहकार्य दिया जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति अन्य जिलों की भी है। ऐसे में उन्होंने बच्चों को छोटे समूह में ऑफलाइन पढ़ाने, उचिन कनेक्टिविटी की व्यवस्था करने, स्कूल प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने सहित अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : शिक्षक दिवस : यहाँ किया गया गुरुवंदन-गुरु पूजन

नवीन समाचार, नैनीताल, 05 सितंबर 2020। शिक्षक दिवस कोविद-19 की महामारी के बावजूद उत्साहपूर्वक अलबत्ता छात्र-छात्राओं के बिना मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुर्गापुर में विद्यालय परिवार के छात्रों द्वारा गुरुवंदन कर गुरुपूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के 11वीं के छात्र सुदर्शन सौराड़ी सहित अन्य छात्रांे के गुरुजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भेजे गए वीडियो का प्रदर्शन तथा देश के दूसरे राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने कहा कि डा. राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, महान शिक्षाविद, महान दार्शनिक, चिंतक व महान वक्ता होने के साथ-साथ विज्ञानी व हिंदू विचारक भी थे। उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप मे बिताया। उन्होंने सभी अध्यापकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

शिक्षण के इतर अन्य कार्यों में लगाए जाएं सरकारी स्कूलों के शिक्षक: डा. जंतवाल

नैनीताल। पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का भावपूर्ण स्मरण किया। उनका मानना था कि शिक्षा के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास व सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। उन्होंने इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि पूर्व में आश्वासनों के अनुरूप सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों से इतर अन्य कार्यों में न लगाया जाए

यह भी पढ़ें : दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, यूपी से 8 से 10 गुना हो गई दून एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज की फीस… विरोध में सरकार को जगाने की तैयारी

-यहां साढ़े बाइस लाख हो गई है फीस, जबकि मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में मात्र 1200 और लेडीज हार्डिग मेडिकल कालेज दिल्ली में मात्र 6,500 है पांच साल की फीस
सोशल मीडिया में जुड़े सैकड़ों छात्र, ऑनलाइन पढ़ाई के बीच आधा घंटा आंदोलन को समर्पित
गणेश पाठक @ नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 अगस्त 2020। दून एवं सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में डाक्टरी की पढ़ाई के लिए फीस सरकार ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों के मुकाबले 10 गुना से कुछ कम कर दी गई है। भारी भरकम फीस के खिलाफ हल्द्वानी मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों के आंदोलन को सोशल मीडिया में आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अब इस आंदोलन में दून मेडिकल कालेज के छात्र भी जुड़ने लगे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उत्तराखंड के दो सरकारी मेडिकल कालेज में डाक्टरी की पढ़ाई के लिए पांच साल में साढ़े बाइस लाख रुपए खर्च करने पढ़ रहे हैं। पड़ोसी राज्य यूपी में केवल दो लाख तिरहत्तर हजार में डाक्टरी की पढ़ाई की जा रही है। इस असमानता से छात्र आहत हैं और सीएम त्रिवेंद्र रावत से दोनों मेडिकल कालेज में डाक्टरी की लिए बढ़ाई गई फीस को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को आने वाले विधान सभा सत्र में उठाने का भरोसा दिया है।
इस समय पूरा विश्व कोरोना के संकट से त्राहिमाम कर रहा है। सत्ता शीर्ष में बैठे नेता एवं नौकरशाहों को अस्पताल, डाक्टर एवं मेडिकल स्टाफ की कीमत याद आ रही है। कहने को इनको कोरोना योद्धा कहा जा रहा है, पर उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में डाक्टर एवं मेडिकल स्टाफ को समय पर पगार तक नहीं मिल रही है। यह अलग मुद्दा है। असली बात भाजपा की नीति का है। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के दौर पर सरकारी मेडिकल कालेज से डाक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पांच साल में पचास हजार की फीस रखी गई थी। तब भाजपा ने दस हजार में डाक्टरी पढ़ाई का नारा दिया था। ठीक इसके उलट २०१९ में त्रिवेंद्र सरकार ने दून एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज से बॉन्ड सिस्टम को खत्म करने के साथ ही प्रति साल की फीस साढ़े चार लाख तय कर दी।
यह फीस हरियाणा में (५२ हजार ७०), यूपी ( ५४ हजार ६००), हिमाचल ( साठ हजार), पंजाब ( अस्सी हजार) है। इस का तब भारी विरोध भी हुआ। हाईकोर्ट में भी मामला गया। इसके वाबजूद अभी तक छात्रों को राहत नहीं मिली है। एक साल का लंबा सफर तय करने के बाद ठीक लॉकडाउन में सोशल मीडिया में हल्द्वानी मेडिकल कालेज के छात्रों का आंदोलन नए कदम बड़ा रहा है। शुरू में करीब १२५ छात्र छात्राओं से शुरू हुआ यह आंदोलन व्यापक रुप में सामने में आ रहा है। अभी इससे सीधे तौर पर तीन सौ मेडिकल के ही छात्र जुड़ गए हैं। हरेक दिन छात्र बारह बजे के बाद आधा घंटा आंदोलन कर रहे हैं। यह आनलाइन आंदोलन मीडिया की सुर्खिया नहीं बटोर रहा है, लेकिन भीतर ही भीतर ज्वालामुखी का रुप धारण करने लगा है।
इस आंदोलन से जुड़े हल्द्वानी मेडिकल कालेज के एक दर्जन छात्र छात्राओं ने बताया कि पूरे देश में केवल उत्तराखंड के दो मेडिकल कालेजों में भारी भरकम फीस ली जा रही है। छात्रों ने बताया कि दिल्ली में यह फीस काफी कम है। मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में प्रतिवर्ष मात्र दो सौ पचास रुपए की फीस है। लेडीज हार्डिग मेडिकल कालेज दिल्ली में मात्र तेरह सौ, तमिलनाडू में चालीस हजार, महाराष्ट्र में औसस सत्तर हजार नौ सौ रुपए फीस है। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में बहुत कम फीस है। आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को आंदोलन के दो माह पूरे हो गए हैं। अब तक सीएम को कई प्रत्यावेदन भेजे जा चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने इस मामले को विस में उठाने का भरोसा दिया है। इसके अलावा राज्य के कई मंत्री एवं विधायकों को आंदोलनकारी छात्र फेस बुक, टिवटर, इस्ट्राग्राम में पोस्ट कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि यदि सीएम ने डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे छात्र एवं उनके अभिभावकों की पीड़ा के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखायी तो २०२२ के विस चुनाव में त्रिवेंद्र सिंह रावत को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें : स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने पर हटना पड़ेगा अतिथि शिक्षकों को… परंतु…

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2020। उत्तराखंड के विद्यालयों में तैनात अतिथि शिक्षकों को स्थायी प्रवक्ताओं की नियुक्ति होने होने पर नौकरी से हटना पडेगा। वहीं अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वाले प्रवक्ताओं के पद रिक्त ही माने जाएंगे। स्थायी शिक्षकों के विरोध को देखते हुए सरकार ने प्रवक्ताओं की काउंसलिंग के लिए जारी अपने 17 जुलाई के आदेश को पलट दिया है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षीसुंदरम ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। नए शासनादेश में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर को प्रवक्ताओं के पदों पर काउंसलिंग और नियुक्ति करने के आदेश दिए गए हैं।
शिक्षा सचिव ने बताया कि यदि स्थायी शिक्षक अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वाले पद के लिए विकल्प भरता है और उसे वह मिल जाता है तो अतिथि शिक्षक को वहां से हटना पड़ेगा। लेकिन सरकार ने अतिथि शिक्षकों के लिए भी विकल्प रखा है। ऐसे अतिथि शिक्षक को दूसरे विद्यालय में रिक्त पद पर नियुक्ति पाने का विकल्प मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मई 2020 में एलटी से प्रवक्ता पद पर 1300 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नतियां हुई थीं। इनमें मौलिक पदोन्नति वाले 600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर विवाद बन गया था। तब प्रवक्ताओं को अतिथि शिक्षकों की तैनाती वाले पदों को छोड़कर बाकी स्कूलों के लिए विकल्प देने की छूट दी गई थी। जबकि शिक्षकों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने अतिथि शिक्षकों को अस्थायी पद माना है। स्थायी शिक्षक के आने पर अतिथि शिक्षक को हटना होगा। इस मुद्दे को तूल पकड़ता देख शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा सचिव को पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे। अब इस पर शासन ने निर्णय ले लिया है।

यह भी पढ़ें : एक भारत-श्रेष्ठ भारत के स्वप्न को साकार करेगी नई शिक्षा नीति: नरेंद्र सिंह

नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अगस्त 2020। पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नैनीताल के प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने ‘नई शिक्षा नीति 2020’ का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा नीति का शिक्षा जगत को वर्षों से इंतजार था। 34 वर्षों के बाद आई इस नीति से एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने’ का सपना साकार होगा।
पहले शिक्षा नीति 10$ 2 पर आधारित थी नई शिक्षा नीति 5$3$3$4 के फॅार्मूले के आधार पर बनाई गई है। नई शिक्षा नीति के तहत 3 से 7 वर्ष के बच्चों को पहले 5 वर्षों में आधारभूत शिक्षा दी जायेगी जिसमें बच्चे खेल-कूद व क्रियाकलापों के माध्यम से अधिगम करेंगें। इसमें पहले तीन साल प्री-प्राईमरी के, इसके बाद कक्षा एक व 2 तथा अगले तीन वर्षों में कक्षा 3 से 5 तक की पढा़ई होगी जिसमें 8 से 10 वर्ष के बच्चे होंगें। अगले तीन वर्षों में कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा दी जायेगी। इस वर्ग के छात्र को वोकेशनल विषयों से भी अवगत कराया जाएगा। उदाहरण के लिए किसी छात्र की रुचि यदि कला में है तो वह छात्र स्कूल के समय में अपनी इच्छानुसार प्रतिष्ठित संस्था में जा सकेगा व इन्टर्नशिप कर सकेगा। अगले 4 वर्षों में 9 से 12 तक की शिक्षा प्रदान की जाऐगी। इस ग्रुप में स्ट्रीम व्यवस्था को समाप्त किया गया है। अब विज्ञान वर्ग का छात्र कला व कला वर्ग का छात्र विज्ञान के विषय भी पढ़ सकता है। नई शिक्षा नीति में विषयों की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। इस नीति में रटने की प्रवृति को दूर किया गया है। नई शिक्षा नीति में कक्षा पांच तक की शिक्षा मातृ भाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा में दी जाएगी। यह भी नई शिक्षा नीति की एक बड़ी विशेषता है।
इसके अलावा अब वर्षभर छात्रों को पढा़ई करनी पडे़गी। दोंनों सेमेस्टर के अंकों को जोडकर परीक्षा परिणाम घोषित होंगें। इससे छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम होगा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बोर्ड के अंको पर निर्भर नहीं होना होगा। अपितु कैट कॅामन एप्टीट्यूट टेस्ट के अंको को भी सम्मिलित किया जाऐगा। उच्च शिक्षा में प्रवेश मिलेगा या नहीं इसका निर्णय बोर्ड व कैट के अंको को जोड़कर निर्धारित किया जाएगा। यदि कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं मंे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो उसका प्रभाव उच्च शिक्षा के प्रवेश पर नहीं पडेगा। अब छात्र को रटने की पद्धति छोडनी होगी केवल सीखना होगा तथा विषय का ज्ञान प्राप्त करना ही होगा। नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड 360 अंश पर आधारित होगा। 360 अंश का अर्थ है कि अब छात्र का रिपोर्ट कार्ड केवल शिक्षक द्वारा ही नहीं बनाया जाऐगा अपितु शिक्षक के साथ छात्र स्वयं भी व उसके सहपाठी छात्र भी मूल्यांकन करेंगें। इसके बाद छात्र कॉलेज में प्रवेश कैट के माध्यम से ही होगा। कॉलेज में प्रवेश की इस विधि को ‘मल्टी एन्ट्री एण्ड एक्जिट पॉलिसी’ कहा गया है। किसी भी कारण से छात्र पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता था तो छात्र का वह समय नष्ट हो जाता था अब ऐसा नहीं होगा। इसमें यदि कोई ग्रेजुएशन में पहले एक वर्ष ही पढा़ई कर पाता है तो वह सर्टीफिकेट प्राप्त करेगा। दो वर्षो की पढ़ाई के बाद डिप्लोमा, तीन वर्षों की पढ़ाई कर पाता है तो बैचलर का प्रमाण पत्र प्राप्त करेगा। और यदि चार वर्षों तक की पढा़ई पूरी की जाती है तो ‘बैचलर विद् रिसर्च’ का प्रमाण पत्र छात्रों को मिलेगा।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भ्रष्टाचार के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हुए निलंबित

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अगस्त 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने हरिद्वार के जिला शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सैनी द्वारा पद का दुरुपयोग करने के सम्बंध में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की और सुनवाई के लिए अगली तिथि एक सप्ताह बाद की नियत की। वहीं खंडपीठ के इस मामले में पिछली तिथि को कड़े रुख को देखते हुए सरकार ने सैनी को आज की निलंबित कर दिया और न्यायालय को इसकी जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि पिछली तिथि में खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि अभी तक इनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है। अगर नहीं की गई है तो इनको नोटिस देकर इनके खिलाफ आरोप तय करें। इसके प्रत्युत्तर में आज राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है और अपराह्न दो बजे न्यायालय को बताया कि उनको निलंबित कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखण्ड के कार्यालय में सम्बद्ध कर दिया है।
उल्लेखलीय है कि हरिद्वार निवासी पदम कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जिला शिक्षा अधिकारी सैनी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई शिक्षकों को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ दिया है। वह नियमावली के विरुद्ध अपने गृह जनपद में कार्यरत हैं। इसकी शिकायत उन्होंने जिला अधिकारी से की। इस पर जांच भी हुई। जांच में उनके ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए परन्तु अभी तक उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: सभी ग्राम पंचायतों को बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मिलेगी 30 जीबी इंटरनेट संयोजन की सुविधा

-अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने जानकारी देते हुए घर लौटे प्रवासियों के बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के दिये निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 04 अगस्त 2020। कुमाऊं मंडल की सभी ग्राम पंचायतों को भारत सरकार की ओर से ‘एफटीटीएच’ यानी ‘फाइबर टु दि होम’ योजना के अंतर्गत एक वर्ष के लिए 30 जीबी इंटरनेट संयोजन की सुविधा मिलेगी। राजकीय विद्यालयों को इस योजना से जोड़ने के लिए सचिव विद्यालयी शिक्षा ने जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया है। यह जानकारी कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती ने मंगलवार को मंडल के सभी जनपद स्तरीय अधिकारियेां के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक लेते हुए दी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस सुविधा के बाद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करने में इंटरनेट की तकनीकी समस्या नहीं आएगी। उन्होंने अधिकारियों से दूरदर्शन, ज्ञानदीप, अध्यापकों के वीडियो एवं ह्वाट्सएप ग्रुपों तथ स्वयंप्रभा चैनल आदि के माध्यम से बच्चों का ऑनलाइन पठन-पाठन कराने पर विशेष जोर देने को भी कहा। इस दिशा में उन्होंने कोरोना की महामारी के दौरान गांव लौटे प्रवासियों के बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवासियों के बच्चों को प्रवेश देने को विशेष प्राथमितका बरतने को भी कहा। इसके अलावा बैठक में डा. सती ने अधिकारियों से शून्य तथा 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों एवं असंगत विषयों में कार्यरत शिक्षकों का ब्यौरा तथा प्रधानाचार्य, प्रवक्ता एवं एलटी संवर्ग के पदों की सही-सही स्थिति से तत्काल अवगत कराने के निर्देश भी दिये। उन्होंने अधिकारियों से शिक्षकों व कार्मिकों के प्रकरणों को यथासमय निस्तारित करने को भी कहा। बैठक में जिलों के शिखा अधिकारियों के साथ ही विधि अधिकारी एमएम मिश्रा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट, जगमोहन रौतेला, ललित उपाध्याय, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला व दिनेश साह आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : महत्वपूर्ण समाचार : निजी विद्यालयों की फीस पर उच्च न्यायालय का अंतिम फैसला, याचिका निस्तारित 

-केवल ऑनलाइन पढ़ने वाले बच्चों से ही ट्यूशन फीस की मांग कर सकेंगे निजी विद्यालय
नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ से शुक्रवार को निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए साफ कहा है कि शिक्षा सचिव के 22 जून 2020 के आदेशानुसार स्कूल प्रबंधन जबरन फीस का दबाव नहीं बनाएंगे। केवल ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ने वालों से ही स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। साथ ही अभिभावकों की शिकायतों के निस्तारण के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश देते हुए याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया है।

देखें निजी स्कूलों की फीस सम्बन्धी शासनादेश यहाँ क्लिक करके   
उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी कुंवर जपेंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय मे ंजनहित याचिका दायर कर प्रदेश के स्कूलों के द्वारा जबरन ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ाए जाने व ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर जबरन अभिभावकों से फीस मांगने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यह भी कहा है कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को ऑन लाइन पढ़ाई में कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है। साथ ही राज्य में कई स्थानों पर इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है और कई लोगों के पास मोबाइल व अन्य गैजेट नहीं है, जिससे कई बच्चे पढ़ाई से वंचित हो जा रहे हैं, लिहाजा ऑनलाइन पढ़ाई के स्थान पर दूरदर्शन के माध्यम से सभी बच्चों की पढ़ाई की जाए।

यह भी पढ़ें : कोरोना काल में स्कूलों में फीस जमा करने पर हाई कोर्ट से आया निर्णायक आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जून 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोरोना संकट काल मे सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से ली जा रही फीस के खिलाफ दायर कुंवर जपिन्द्र सिंह व अन्य की तरफ से दायर जनहित याचिकाओ को निस्तारित करते हुये निजी विद्यालय संचालकों से शिक्षा सचिव को प्रत्यावेदन देने व सरकार को 2 मई 2020 के शासनादेश में 1 सप्ताह के भीतर आवश्यक संशोधन कर नया शासनादेश जारी करने को कहा है, जिससे कि स्कूलों व अभिभावकों के बीच फीस से सम्बंधित सामंजस्य बन सके। 

कोरोना संकट काल के यकचिकर्ताओ का कहना है कि कोरोना काल मे सरकारी व गैर सरकारी स्कूलो की तरफ से अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य क्रियाकलापो के लिये फीस की मांग की जा रही थी। 2 मई को शासन ने एक शासनादेश जारी कर निजी व अर्द्ध सरकारी विद्यालयों को ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी थी। इस शासनादेश को देहरादून निवासी कुंवर जपिन्द्र सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए ऑन लाइन पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए थे । इस याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को जबरन फीस के लिये बाध्य नहीं करेगा । साथ ही  सरकार को निर्देश दिया था कि वो जिलेवार शिक्षा अधिकारियों को इस पूरे मामले में नोडल अधिकारी बनाये तांकि उनके जरिये अभिभावकों की समस्त शिकायतें दर्ज कराई जा सके। इस आदेश के अनुपालन में सरकार ने शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर शिकायतों को सुना और जो स्कूल फीस को लेकर दवाब बना रहे थे उनको नोटिस जारी कर उचित कार्यवाही की। आज मामला दोबारा सुनवाई पर आया। आज आज कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में दायर याचिका को निस्तारित करते हुये विद्यालय संचालकों को अपना प्रत्यावेदन शिक्षा सचिव के समक्ष रखने व सरकार को एक सप्ताह  के भीतर नया शासनादेश जारी करने को कहा।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के स्कूलों ने शुरू कीं ऑनलाइन क्लासेज.. 

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2020। समस्याएं समाधान का रास्ता भी दिखा देती हैं। कोरोना की महामारी के दृष्टिगत लागू लॉक डाउन में बच्चों की पढ़ाई को पहुंच रहे नुकसान से उबरने का रास्ता भी नजर आने लगा है। नगर के सेंट जोसफ कॉलेज ने मंगलवार को 11वीं कक्षा के विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए एक मोबाइल ऐप के जरिये वीडियो कांफ्रेंस कराकर ऑनलाइन वर्चुअल यानी आभासी कक्षा शुरू की। इस दौरान पूर्वाह्न 11 से साढ़े 11 बजे तक छात्र-छात्राओं को शिक्षिका अनुपा जॉर्ज ने भौतिकी विषय के पाठ पढ़ाए। उधर सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज में मंगलवार को ही अलग-अलग कक्षाओं व वर्गों के ह्वाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें शिक्षिकाएं विभिन्न पाठों के वीडियो, विभिन्न लिंक तथा प्रश्नोत्तरी आदि भेज रही हैं, तथा छात्राओं को इन वीडियो के जरिये पाठ पढ़ने को कह रही हैं, एवं प्रश्नों के उत्तर कॉपी में करने को कहा जा रहा है। इसी तरह नगर के ओकवुड स्कूल व रामा मांटेसरी स्कूल व पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार माध्यमिक विद्यालय दुर्गापुर के प्रधानाचार्यों ने बताया कि उनके विद्यालयों में भी लॉक डाउन के कारण स्कूल न आ पा रहे बच्चों को यथासंभव ऑनलाइन माध्यम से ह्वाट्सएप ग्रुप बनाकर विभिन्न कार्य देते हुए पढ़ाया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : 72 शिक्षकों को मिला शैलेश मटियानी पुरस्कार, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानित

नवीन समाचार, देहरादून, 29 जनवरी 2020। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रदेश के 72 टीचरों को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बुधवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने 10 हजार की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र देकर टीचरों को पुरस्कृत किया।

इन शिक्षकों को मिला शैलेश मटियानी शैक्षिक
पुरस्कार (2015 में चयनित शिक्षक) : रीता सेमवाल, प्रमिला भंडारी, डॉ. मंजू कपरवाण, वीरेंद्र सिंह राणा,
डॉ. कुसुम रानी नैथानी, वीरेंद्र सिंह राणा, कुंवर सिंह गुसांई,
वीरेंद्र सिंह नेगी, रामाश्रय सिंह, रामशंकर सिंह, नीलम नेगी,
जीवन चंद्र दुबे, ललित मोहन बोहरा, रेखा रानी कोटियाल,
कुसुमलता, ममता डिमरी, किशन पाल महर, पुष्पा जोशी, रामलाल, भानुप्रकाश गुप्त, विमला जोशी, दीपा कालाकोटी, महेश गिरी, गीता लोहनी, दरपान राम टम्टा, स्वतंत्र कुमार मिश्रा, सत्ये सिंह राणा व दिनेश प्रसाद बड़ोनी।

2016 में चयनित शिक्षक : डॉ. सुशील सिंह राणा,
डॉ. राजकुमारी मनराल, सुकन्या थपलियाल, राकेश कुमार असवाल, विजया रावत, डॉ. दिनेश चंद्र बडोनी, पुष्पा रावत, शशि कंडवाल, मोहम्मद अनीस, चंपा कोरंगा, डोरी लाल लोधी, आशीष चौहान, गजपाल सिंह जगवाण, शैलेंद्र कुमार नौटियाल, किशोरी सिंह, सुरेश चंद्र पाठक, उम्मेद सिंह रावत, डॉ. दिग्विजय सिंह चौहान, कौस्तुभ चंद्र जोशी, कृष्ण गोपाल पाठक व दीपक रतूड़ी।

2017 में चयनित शिक्षक : माधव सिंह नेगी, चंद्रकला शाह, डॉ. यशवंत सिंह नेगी, जमुना प्रसाद तिवारी, शोभा, सुरेंद्र सिंह रौतेला, उषा त्रिवेदी, सर्वेश्वरी, ममता मिश्रा, उर्मिला सिंह पुंडीर, इमराना परवीन, नीता अल्मिया, लक्ष्मी काला, प्रमोद कुमार कर्नाटक, संजीव कुमार पांडेय, पुष्कर सिंह नेगी, सुधा सेमवाल, गोविंद सिंह रावत, भास्करानंद डिमरी, रोहिताश्व कुंवर चौहान, किशोर चंद्र पाटनी, राधेश्याम खर्कवाल, डॉ. वीर सिंह रावत, कीर्तिबल्लभ जोशी।

रायपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय स्कूल तपोवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्राथमिक, माध्यमिक, संस्कृत शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के कुल 72 टीचरों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार दिया गया। इसमें वर्ष 2015 में 27 टीचरों, वर्ष 2016 में 21 और वर्ष 2017 के लिए 24 टीचरों को पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार से सम्मानित टीचरों को दो साल का सेवा विस्तार मिलेगा।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि बेसिक शिक्षा में अभी भी कई कमियां हैं। जिनको दूर करने की चुनौती है।  विभागीय अधिकारियों और टीचरों को मिल कर शिक्षा में और सुधार करना होगा। शिक्षा में कमियों के लिए सिर्फ टीचर को दोषी मानना उचित नहीं है। इसके लिए हम सब दोषी हैं। उन्होंने प्राथमिक स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि नए शैक्षिक सत्र से बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन मोहन बिष्ट ने किया। इस मौके पर शिक्षा निदेशक आरके कुंवर, निदेशक शिक्षा एवं प्रशिक्षण अकादमी सीमा जौनसारी, अपर निदेशक प्राथमिक बीएस रावत, अपर निदेशक माध्यमिक आरके उनियाल, संस्कृत शिक्षा निदेशक एसपी खालिद आदि मौजूद रहे।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.