वार्षिक प्रवास पर कजाकिस्तान से नैनीताल पहुंचे खास दीवाने परवाने


-नैनीताल पहुंचे प्रवासी पक्षी स्टीपी ईगल, आगे देश-दुनिया के पक्षी प्रेमियों के भी आने की उम्मीद
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, इश्क हो तो एसा। कजाकिस्तान से बिना नागा किए स्टीपी ईगल नाम का शिकारी और प्राकृतिक स्वच्छक प्रजाति का पक्षी अपने शीतकालीन प्रवास पर ‘पक्षियों के तीर्थ” कहे जाने वाले नैनीताल पहुंच गया है। आगे यह पक्षी यहां करीब दो माह के प्रवास पर रहेगा और सहवास करते हुए अपनी नई संतति को भी जन्म देगा। इसके साथ ही देश-दुनिया के पक्षी प्रेमी भी स्टीपी ईगल तथा उस जैसे अनेकों स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की खूबसूरती को निहारने के लिए नैनीताल और नजदीकी क्षेत्रों का रुख करने लगे हैं। ऐसे में मानव प्रेमियों के साथ ही पक्षियों और उनके प्रेमियों के मिलन स्थल बने नैनीताल में ऐसे और भी नजारे इन दिनों आम बने हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि मूलत: रोमानिया से दक्षिणी रूस मध्य एशिया से मंगोलिया तक हिमाच्छादित क्षेत्रों का मूल निवासी पक्षी स्टीपी ईगल अपनी कठोर हुक जैसी नजर आने वाली चौंच और गले तथा पंखों पर सफेद पट्टियों से पहचाना जाता है। यह एक मांशाहारी एवं प्राकृतिक स्वच्छक के रूप में गंदगी खाने वाला गिद्ध प्रजाति का पक्षी है। सर्दियों में यह अपने मूल स्थान पर अधिक ठंड हो जाने की वजह से हर वर्ष अपेक्षाकृत कम ठंडे स्थानों की ओर प्रवास पर निकल आता है। नैनीताल एवं निकटवर्ती पहाड़ इसके लिए बेहद उपयुक्त साबित होते हैं। भरतपुर पक्षी विहार के सुप्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ बच्चू सिंह बताते हैं कि नैनीताल का सबसे बुरा-शहर भर का कूड़ा डालने वाला स्थान खासकर कजाकिस्तान से आने वाले स्टीपी ईगल की सबसे पसंदीदा जगह है। स्टीपी यहां दो माह से भी अधिक समय प्रवास करते हैं। रानीखेत और अल्मोड़ा भी स्टीपी को काफी पसंद हैं। अंतराष्ट्रीय छायाकार और पक्षी प्रेमी अनूप साह बताते हैं कि खासकर नैनीताल के कूड़ा खड्ड में जहां इसे शहर भर के कूड़े के साथ मिलने वाले चूहे व बचे-खुचे मांस सहित पूरा भोजन मिल जाता है, वहीं ठीक ऊपर इसकी पसंद की तीक्ष्ण चट्टानें भी मिल जाती हैं, जहां यह इस दौरान प्रवास के साथ स्वच्छंद तरीके से सहवास भी कर सकता है, तथा इसकी मादा यहां एक से तीन अंडे दे पाती हैं, और उनसे यहीं इनकी नई संतति भी उत्पन्न हो जाती है। करीब दो माह से अधिक लंबे प्रवास के दौरान इनके बच्चे भी जब उड़ने योग्य हो जाते हैं, तब यह यहां से वापस लौट जाते हैं। देश-दुनिया में गिद्ध प्रजाति के शिकारी पक्षियों की पशुओं में के उपचार में प्रयोग की जाने वाले डायक्लोफिनाइक दवा की वजह से छाऐ खतरे और कई प्रजातियों के विलुप्त प्राय होने की स्थिति में प्रवासी पक्षी स्टीपी ईगल कुछ हद तक अपनी प्रवास पर यहां से वहां जाने और नई संतति पैदा करते जाने के साथ अपनी प्रजाति के कुछ अधिक समय पर जीवित रहने की उम्मीद भी जगाता है। इन्हीं परिप्रेक्ष्यों और विषयों को जानने समझने व अध्ययन के लिए मंगोलिया सहित कई देशों के पक्षी प्रेमी भी इन दिनों नैनीताल आते रहते हैं।

पक्षियों का भी मानो पर्यटन स्थल और तीर्थ है नैनीताल

White Peacockनैनीताल। गौरतलब है कि मनुष्य जिस तरह अपने जीवन में एक बार अपने धार्मिक तीर्थों की यात्रा जरूर करना अपने जीवन का उद्देश्य मानता है, कुछ इसी तरह कहा जाता है कि दुनिया भर के प्रवासी प्रकृति के पक्षी भी जीवन में एक बार नैनीताल जरूर जाना चाहते हैं। इस आधार पर भरतपुर पक्षी विहार के सुप्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ नैनीताल को पक्षियों के तीर्थ की संज्ञा देने में संकोच नहीं करते। बच्चू बताते हैं देश भर में पाई जाने वाली 1100 पक्षी प्रजातियों में से 600 तो यहां प्राकृतिक रूप से हमेशा मिलती हैं, जबकि देश में प्रवास पर आने वाली 400 में से आधी यानी 200 से अधिक विदेशी पक्षी प्रजातियां भी यहां आती हैं। इनमें ग्रे हैरोन, शोवलर, पिनटेल, पोचर्ड, मलार्ड, गागेनी टेल, रूफस सिबिया, बारटेल ट्री क्रीपर, चेसनेट टेल मिल्ला, 20 प्रकार की बतखें, तीन प्रकार की क्रेन, स्टीपी ईगल, अबाबील प्रमुख हैं, जबकि अनेक प्रकार की जमीन पर फुदकने वाली चिड़िया-वाइट थ्राटेड लाफिंग थ्रस, स्ट्राइटेड लाफिंग स्ट्रीट थ्रस, चेस नेट वैली रॉक थ्रस, ब्लेक ईगल, टोनी ईगल, फेल्कुनेट, कॉमन कैसटल व पैराग्रीन फैल्कन सरीखी अनेक स्थानीय पक्षी प्रजातियां भी आसानी से मिल जाती हैं।

दार्जिलिंग जू से नैनीताल जू पहुंचे रेड पांडा के नर-मादा

Red Pandaनैनीताल। दार्जिलिंग चिड़ियाघर से दो नर व मांदा राहुल और सोनम नाम के रेड पांडा को भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल जू लाया गया है। यहां फिलहाल इन दोनों को उनके बंद बाड़ों में रखा गया है, आगे एक-दो दिन के भीतर उन्हें जू में खास तौर पर बनाए गए मचानों युक्त खुले बाड़ों में रखा जाएगा। नैनीताल जू के कर्मचारी यहां आए दो बेहद खूबसूरत नए मेहमानों के आने से प्रफुल्लित हैं।

मंगलवार सुबह दार्जिलिंग जू के डा. उत्तम प्रधान, शिरोमणि सेंग्दन व प्रदीप कुमार सिंह नैनीताल से गए जू कीपर नवीन मनराल व चंदन सिंह रावत के साथ दार्जिलिंग जू से १० वर्ष के राहुल व ढाई वर्ष की सोनम नाम के रेड पांडा जोड़े को बागडोगरा एयरपोर्ट से दिल्ली होते हुए नैनीताल जू लेकर पहुंचे। दार्जिलिंग जू के कर्मियों ने बताया कि रिंगाल रेड पांडा का प्रिय भोजन है, जो कि दार्जिलिंग जैसी ही जैव विविधता एवं ऊंचाई वाले नैनीताल जू में भी मिलता है। नैनीताल जू के रेंज आफीसर मनोज साह ने बताया कि नैनीताल जू की निदेशक डा. तेजस्विनी अरविंद पाटिल व दार्जिलिंग जू के निदेशक एके झा के प्रयासों से केंद्रीय जू प्राधिकरण की लंबी अदला-बदली प्रक्रिया के बाद रेड पांडा को नैनीताल लाना संभव हुआ है।

बदले में जाएंगे चीड़ पक्षी, आगे स्नो लेपर्ड, थार व मारखोर के भी आने की उम्मीद

Cheer Pheasentनैनीताल। एक से दूसरे चिड़ियाघर में पशु-पक्षी अदला-बदली के तहत ही और दोनों के एक-दूसरे के जू में सुरक्षित रह सकने की लंबी प्रक्रिया के बाद ही भेजे जाते हैं। अभी हाल में दार्जिलिंग जू से ब्लू शीप तथा पूर्व में स्नो लेपर्ड और साइबेरियन टाइगर लाए गए थे, और इनके बदले में घुरल व चीड़ फीजेंट आदि भेजे गए हैं। जू के अधिकारियों ने बताया कि आगे दार्जिलिंग से स्नो लेपर्ड तथा बकरी प्रजाति के हिमालयन थार और पाकिस्तानी मूल के मारखोर नाम के वन्य जीवों के जोड़ों को भी लाने की योजना है।

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3 responses to “वार्षिक प्रवास पर कजाकिस्तान से नैनीताल पहुंचे खास दीवाने परवाने

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