अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य


Rashtriya Sahara, 06 Dec 2014, Page-1

-हर पांच वर्ष में संबंधित बार से लगातार वकालत करने का प्रमाण पत्र ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना होगा, तभी मिलेगा बार काउंसिल से वकालत करने का लाइसेंस
-छह माह के भीतर हासिल करना होगा वकालत करने का लाइसेंस
नवीन जोशी, नैनीताल। देश-प्रदेश के ऐसे अधिवक्ताओं के लिए बुरी खबर है जो पार्ट टाइम वकालत करते हैं। अब लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ता आगे वकालत नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल आफ इंडिया के ताजा राजपत्र से ऐसे अधिवक्ताओं में हड़कंप मचना तय है। गत 30 अक्टूबर को जारी ताजा राजपत्र-सर्टिफिकेट आफ प्रेक्टिस तथा नवीनीकरण नियम 2014 को उत्तराखंड बार काउंसिल ने भी बीती 22 नवंबर को सर्वसम्मति से स्वीकृति दे दी है, जिसके अनुसार 12 जून 2010 के बाद विधि स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले या इसके बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं को अभी छह माह के भीतर और आगे हर पांच वर्ष में बार काउंसिल से ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना होगा। गौरतलब है कि ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए उन्हें संबंधित बार एसोसिएशन से प्राप्त इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनके लगातार प्रेक्टिस यानी वकालत करने की पुष्टि की गई हो। साफ है कि लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ताओं का लाइसेंस आगे नवीनीकृत नहीं हो पाएगा, और वह किसी मामले में अपने नाम का वकालतनामा नहीं लगा पाएंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 के बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए पहले ही ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य हैं। यानी सभी नए-पुराने अधिवक्ताओं के लिए ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य हो गया है। यह भी गौरतलब है कि उन्हीं अधिवक्ताओं को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” मिलेगा, जिनकी बार एसोसिएशन की राज्य की बार काउंसिल से संबद्धता होगी। साथ ही राज्य की बार काउंसिल से पंजीकृत सभी बार एसोसिएशनों के अधिवक्ताओं को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य है। फिलवक्त सभी अधिवक्ताओं को गजट जारी होने की तिथि 30 अक्टूबर के छह माह के भीतर यानी अधिकतम 30 अप्रैल से पूर्व ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना जरूरी है। कहने की जरूरत नहीं कि जिन अधिवक्ताओं के पास भले विधि स्नातक यानी एलएलबी की डिग्री हो, बिना ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” किए वकालत करने की अनुमति नहीं होगी। ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए अधिवक्ताओं को उत्तराखंड बार काउंसिल के सचिव के नाम 400 एवं बार काउंसिल आफ इंडिया के सचिव के नाम 100 रुपए के बैंक ड्राफ्ट एवं अपनी बार एसोसिएशन के प्रमाण पत्र के साथ उत्तराखंड बार काउंसिल के सचिव के पास आवेदन करना होगा।
गौरतलब है कि पूर्व में भी सभी अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा 62 के तहत वकालत करने का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है, लेकिन अब तक यह प्रमाण पत्र पूरे अधिवक्ता जीवन में एक बार ही लेने का नियम है। यानी एक बार यह प्रमाण पत्र लेकर अधिवक्ता चाहे वकालत करें या नहीं उनका लाइसेंस जारी रहता था, लेकिन अब हर पांच वर्ष में दुबारा प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता हो गई है। हाईकोर्ट बार काउंसिल के सचिव विजय सिंह ने बताया कि इस बाबत राज्य के सभी बार संघों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उनसे 30 अक्टूबर को जारी भारत का राजपत्र भी पढ़ने को कहा जा रहा है।

हाईकोर्ट के लिए तीन और सुप्रीम कोर्ट के लिए पांच वर्ष की वकालत होगी अनिवार्य

नैनीताल। ताजा राजपत्र के अनुसार नए अधिवक्ता सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में वकालत नहीं कर पाएंगे। राजपत्र की अनुच्छेद सात के अनुसार ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” प्राप्त अधिवक्ता शुरू में केवल सेशन या जिला न्यायाधीश के समकक्ष तथा उनके क्षेत्राधिकार के निचले न्यायालयों में ही वकालत कर पाएंगे। हाईकोर्ट तथा उसके अधिकार के न्यायालयों में वकालत करने के लिए निचले न्यायालयों में कम से कम दो वर्ष की प्रेक्टिस करने तथा सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के लिए उच्च न्यायालय व उसके क्षेत्राधिकार के न्यायालयों में कम से कम तीन वर्ष की प्रेक्टिस करनी अनिवार्य होगी।

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2 responses to “अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य

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