राज्य बनने के बाद पहली बार जागी हिल साइड सेफ्टी कमेटी


Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898
Exclusive Photo of Balia Nala Land Slide 17 August, 1898

-नगर के नए खतरनाक स्थानों की पहचान के लिए होगा सर्वेक्षण, नगर की नई महायोजना बनेगी, पुरानी महायोजना का समय पहले ही हो चुका है पूरा
नवीन जोशी, नैनीताल। नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली एवं 1869 एवं 1873 में सरोवरनगरी की सुरक्षा के बाबत महत्वपूर्ण सिफारिशें देने वाली हिल साइड सेफ्टी कमेटी (पूरा नाम रेगुलेशन इन कनेक्शन विद हिल साइड सेफ्टी एंड लेक कंट्रोल, नैनीताल) आखिरी नींद से जाग उठी है। डीएम दीपक रावत ने राज्य बनने के बाद पहली बार नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक के लंबे विराम को तोड़ते हुए १६ वर्षों बाद यह बैठक ली। पूर्व में यह बैठक १९९८ में आयोजित हुई थी, और तभी से आयोजित न होने के कारण जिला प्रशासन नगर के पर्यावरण प्रेमियों के निशाने पर रहता था। इस अवसर पर डीएम ने नगर में नए खतरनाक स्थलों (वल्नरेबल जोन) की जीएसआई व आईआईटी रुड़की से सर्वेक्षण कर पहचान करने, बलियानाला, टूटा पहाड़, राजभवन के पीछे निहाल नाले व आम पड़ाव तथा पर्यटन कार्यालय के पास धंस रही माल रोड जैसे भूस्खलन के हिसाब से सक्रिय खतरनाक स्थानों में सीमेंट-कंक्रीट के बचाव कार्यों में इस कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट-सीएसआईआर व टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन-टीएचडीसी ने अनिवार्य रूप से सलाह लेने तथा साथ पेड़-पौधों के प्रयोग से बायो-सेफ्टी के प्रबंध भी करने के निर्देश दिए। 

इसके अलावा नगर के हृदय कही जाने वाली नैनी झील की धमनियों यानी नालों की नियमित सफाई के लिए आधुनिकतम तकनीकी का प्रयोग करने एवं नियमित सफाई करने तथा भवनों के निर्माण में झील विकास प्राधिकरण द्वारा प्लेंथ निर्माण के स्तर के बाद दूसरी अनुमति में यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि निर्माणकर्ता ने मलवे का निस्तारण कर लिया हो। उन्होंने मलवे के निस्तारण के लिए १५ दिन के भीतर स्थल चयनित करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा नैनी झील के चारों ओर की पहाडि़यों की सुरक्षा व भू-स्खलन को रोकने, पहाडि़यों की स्थिरता बनाये रखने के लिये बनाये गये ड्रेनेज सिस्टम के नियमित रूप से अनुश्रवण करने तथा नगर की पहाडि़यों में हो रहे भू-स्खलन की जांच आईआईटी रूड़की के भू-वैज्ञानिकों से कराने को भी कहा गया। डीएम श्री रावत ने कहा कि नगर की नए शिरे से महायोजना तैयार कराने का भी प्रयास किया जाएगा, क्योंकि पुरानी महायोजना का समय काफी समय पहले समाप्त हो चुका है। नए खतरनाक स्थानों का पता लगाने आदि का लाभ नई महायोजना बनाने में भी मिलेगा।

क्या है हिल साइड सेफ्टी कमेटी

गौरतलब है कि देश-प्रदेश के महत्वपूर्ण व भूकंपीय संवेदनशीलता के लिहाज से जोन-चार में रखे गये नैनीताल नगर की कमजोर भूगर्भीय संरचना के कारण नगर की सुरक्षा पर अंग्रेजों के दौर से ही चिंता जताई रही है। नगर में अंग्रेजी दौर में 1867, 1880,1898 व 1924 में भयंकर भूस्खलन हुआ था। 1880 के भूस्खलन ने तो 151 लोगों को जिंदा दफन करने के साथ ही नगर का नक्शा ही बदल दिया था। इसी दौर में 1867 और 1873 में अंग्रेजी शासकों ने नगर की सुरक्षा के लिए सर्वप्रथम कुमाऊं के डिप्टी कमिश्नर सीएल विलियन की अध्यक्षता में अभियंताओं एवं भूगर्भ वेत्ताओं की हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया था। इस समिति ने समय-समय पर अनेक रिपोर्टे पेश कीं, जिनके आधार पर नगर में बेहद मजबूत नाला तंत्र विकसित किया गया, जिसे आज भी नगर की सुरक्षा का मजबूत आधार बताया जाता है। इस समिति की 1928 में नैनी झील, पहाड़ियों और नालों के रखरखाव के लिए जारी समीक्षात्मक रिपोर्ट और 1930 में जारी स्टैंडिंग आर्डरों को ठंडे बस्ते में डालने के आरोप शासन-प्रशासन पर लगातार रहते हैं, और इसी को नगर के वर्तमान हालातों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

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नैनीताल की संवेदनशीलता संबंधी आलेख यहां क्लिक कर एक साथ पढ़े जा सकते हैं।

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