योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?


-क्योंकि इनसे बेहतर सुधर रही उत्तराखंड व इसके चुनिंदा लोगों की आर्थिक सेहत

शीर्षक पढ़कर चौंकिएगा नहीं। विश्व के 47 मुस्लिम देशों सहित कुल 192 देशों के द्वारा आगामी 21 जून को मनाए जा रहे ‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाने पर उत्तराखंड राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी की ‘नां’ के बाद यही पहला सवाल मन में उठता है। यदि उत्तराखंड कोई अलग राष्ट्र नहीं वरन भारतीय संघ का एक अंग या राज्य होता तो उसके मुख्यमंत्री कदापि केंद्रीय सरकार की एक वैश्विक पहल पर अपने कदम पीछे नहीं खींचते, और 21 जून को तय अपने ‘जागेश्वर योग महोत्सव’ को आखिरी समय में अचानक न टालते। ऐसा नहीं कि उन्हें पता ना हो कि अंतराष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम भारत सरकार का नहीं वरन संयुक्त राष्ट्र का है। भारत सरकार का कार्यक्रम भी होता तो राष्ट्रीय योग दिवस जैसा कोई कार्यक्रम होता, अंतराष्ट्रीय नहीं। इसलिए उत्तराखंड की ‘नां’ एक राज्य की नहीं हो सकती, वरन उसकी ‘नां’ एक ‘राष्ट्र’ के रूप में संयुक्त राष्ट्र की पहल की अवहेलना करने जैसी है। शायद वह उत्तराखंड को एक राज्य नहीं एक राष्ट्र ही मानते हों। ऐसे में यही सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड एक राष्ट्र के रूप में संयुक्त राष्ट्र से अंतराष्ट्रीय योग दिवस की जगह ‘अंतराष्ट्रीय खनन’ या ‘अंतराष्ट्रीय मदिरा दिवस’ मनाने की मांग करेगा, जिनसे उत्तराखंड और उत्तराखंड के चुनिंदा लोगों की आर्थिक सेहत में सर्वाधिक सुधार हो रहा है। मालूम हो कि उत्तराखंड की आय राज्य बनने के बाद अकेले आबकारी विभाग से करीब 100 करोड़ से बढ़कर करीब 1700 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि राज्य में खनन का कारोबार भी करीब 2000 करोड़ रुपए का बताया जाता है, और यह दो क्षेत्र ही राज्य की आर्थिक सेहत को सर्वाधिक सुधार रहे हैं।

Harish Rawat2यदि अंतराष्ट्रीय योग दिवस की पहल को भारत की केंद्र सरकार की पहल भी मान लिया जाए, तो भी उसका कोई राज्य केवल इसलिए इंकार नहीं कर सकता कि उसके मुख्यमंत्री स्वयं को एक राज्य के मुख्यमंत्री के बजाय एक विरोधी विचारधारा की पार्टी-कांग्रेस का मुख्यमंत्री कहना अधिक पसंद करते हैं। बीती 14 जून को नैनीताल के नैनीताल क्लब में रात्रि करीब एक बजे अधिकारियों की बैठक को समाप्त करते हुए बिलकुल आखिर में वह बिना किसी संकोच व लाग-लपेट के स्वयं को कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री एवं अपनी कांग्रेस हाईकमान के प्रति और अधिकारियों की उनके (हरीश रावत) के प्रति जिम्मेदारी बताकर यह साफ भी कर चुके हैं। अलबत्ता, भारत सरकार का कार्यक्रम उस सरकार को चलाने वाली पार्टी का कदापि नहीं हो सकता है, वरन वह पूरे देश का और उसकी सरकार का कार्यक्रम होता है। ना ही देश का प्रधानमंत्री किसी पार्टी विशेष का प्रधानमंत्री और ना ही किसी राज्य का मुख्यमंत्री किसी पार्टी विशेष का मुख्यमंत्री होता है। हरीश रावत जैसे मंझे हुए और अनुभवी राजनेता को इसका भान नहीं होगा, कोई नहीं मानेगा। लिहाजा उनके बारे में केवल इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि वह पार्टी हाईकमान के प्रति अपनी चाटुकारिता प्रदर्शित करने के लिए इस हद तक ना गिरें। 2017 में उन्हें उत्तराखंड में सत्ता दुबारा हासिल करनी है तो इसके लिए जनता का विश्वास जीतें। यदि यह कर लिया तो ना उनकी पार्टी की ओर से कोई उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने से कोई रोक पाएगा, ना ही उन्हें उतना धन खर्च करने की नौबत आएगी, जितनी उन्होंने राज्य में खनन और आबकारी विभागों के अलावा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी कर अपने लोगों को लूटने की खुली छूट देकर धनराशि जुटाने के प्रबंध कर रखे हैं।
दूसरे एक पार्टी के राजनेता से इतर एक व्यक्ति के रूप में पग-पग पर ‘विघ्न संतोषियों’ से परेशान रहने वाले हरीश रावत महसूस करें कि अंतराष्ट्रीय योग दिवस की जनता को बिना किसी शुल्क निरोग रखने की पहल से हाथ पीछे खींचकर, अपने पहले से 21 जून को घोषित जागेश्वर योग महोत्सव को आखिरी समय में स्थगित कर, कहीं वह स्वयं भी ‘विघ्न संतोषी’ ही तो नहीं बन गए हैं ? एक व्यक्ति के रूप में यह राजनीतिक व्यवस्था के सम्मुख उनकी स्वयं की हार तो नहीं है, और एक ‘कल्याणकारी’ राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने अपनी रियाया को निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ से वंचित रखकर क्या अपनी भूमिका से न्याय किया है ? और ‘योग’ की बजाय स्वयं में से काफी कुछ ‘घटा’ दिया है। वह भी तब जबकि उनके उत्तराखंड को योग की इस विधा की जन्मदात्री देवभूमि भी कहा जाता है।

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13 responses to “योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ?

  1. योग और राम जैसे सार्वभौम कल्याणकारी शक्तियों का सदुपयोग होना चाहिए न कि नुमाइश. जिसे लाभ उठाना है करेगा ही. अपने लिए करेगा न कि दूसरों के लिये. फिर विवाद कैसा.

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  2. कांग्रेस के उपर ” विनाश काले विपरीत बुदधि “हावी हो गयी है भारतीय संस्क्रति को छोड़ कर इटेलियन स्वामी भक्ति जरूरी है ।प्रभु इन्हें सही राह दिखाए ।

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