‘दुश्यंत’ के बाद गजल का मतलब हैं ‘बल्ली’


बल्ली सिंह चीमा के कविता संग्रह ‘तय करो किस ओर हो तुम’ का विमोचन

बल्ली सिंह चीमा के कविता संग्रह ‘तय करो किस ओर हो तुम’ का विमोचन

जनकवि बल्ली सिंह चीमा के कविता संग्रह ‘तय करो किस ओर हो तुम’ के पुर्नप्रकाशन का मनीश सिसोदिया की उपस्थिति में हुआ विमोचन
नैनीताल (एसएनबी)। ‘ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के’ जैसी रचनाओं के रचनाकार, प्रदेश के जनकवियों में शुमार, आम आदमी पार्टी नेता बल्ली सिंह चीमा के पूर्व में 1998 में प्रकाशित कविता संग्रह ‘तय करो किस ओर हो तुम’ का पुर्नप्रकाशन किया गया है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफेसर प्रो. आनंद कुमार ने पार्टी के अन्य बड़े नेता मनीश सिसोदिया एवं जेएनयू के प्रो. गोपाल प्रधान के साथ पुस्तक का विमोचन किया। अपने संबोधन में प्रो. कुमार ने चीमा को प्रखर जनवादी कवि दुश्यंत कुमार के बाद गजल के क्षेत्र में दूसरा नाम करार दिया। वहीं सिसोदिया ने कविता संग्रह के नाम के बहाने आम जन का आह्वान किया कि वह तटस्थ ना रहें, सच व सही का साथ दें।
मंगलवार को नैनीताल क्लब स्थित शैले हॉल में चीमा के 62वें जन्म दिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो. कुमार ने कहा कि चीमा की कविताएं धुंध से रोशनी की तरफ ले जाती हैं। व्यक्ति को आंदोलनकारी बनने और आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने की राह दिखाती हैं। वह अंधेरे के बीच प्रकाश की तलाश के साथ ही सौंदर्य व चेतना का बोध भी कराती हैं। मनीश सिसोदिया ने कहा कि आज पूरा देश सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद आदि अनेकों लकीरों में बंटा है। चीमा की पुस्तक इन लकीरों को खत्म करने का रास्ता दिखाती है। तटस्थता को सबसे बड़ा खतरा बताने के साथ ही उन्होंने आज के अधिकांश साहित्य को ‘कूड़ा’ बताया, कहा कि ऐसे साहित्य लिखे जाने के लिए सैकड़ों पेड़ों की बलि दिए जाने पर वह बेहद आहत होते हैं। कहा-चीमा की कविता लड़ते हुए लाठियों से निकली तथा खुद झेली हुई हैं। वह गारंटी के साथ जीत की उम्मीद दिलाती हैं। प्रो.गोपाल प्रधान ने चीमा की कविताओं को आजादी के बाद बने जनतांत्रिक माहौल में बामपंथी तेवरों वाली, स्वतंत्रता के बावजूद अधिकार विहीन समाज की भाषा में पैंसे की सत्ता के खिलाफ अछूते नए प्रयोगों, प्रतिमानों के साथ के पैंसे की सत्ता के खिलाफ सीधे आक्षेप लगाने वाली बताया। कहा-वह सीधे बिना लाग-लपेट के पूछते हैं-तुम आदमी के पक्ष में हो या आदमखोर हो, तय करो किस ओर हो। इस दौरान बल्ली ने अपनी कविताएं, झोपड़ी से उठ रही आवाज है मेरी गजल, प्यार करने का नया अंदाज है मेरी गजल, धूप से सर्दियों में खफा कौन है, उन दरख्तों के पीछे खड़ा कौन है तथा बपर्फ से ढक गया पहाड़ी नगर-चांदी चांदी हुए पत्थर के घर जैसी रुमानी गजलें भी पढ़ीं। उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल, वरिष्ठ रंगकर्मी जहूर आलम, कवि मनोज आर्य आदि ने भी विचार रखे। संचालन डा. प्रकाश चौधरी ने किया। इस अवसर पर सविंदन जीत सिंह कलेर, विनोद पांडे, डीएस कोटलिया, पीजी शिथर व राजा साह सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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