उत्तराखंड में 50 वर्षों के बाद होंगे ‘भूमि बंदोबस्त”, साथ में चकबंदी भी


-पांच करोड़ तक के कार्यों में राष्ट्रीय निविदा नहीं होगी
-मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं के समक्ष मुख्यमंत्री रावत ने प्रकट की राज्य की व्यवस्थाएं, कहा-2017 नहीं राज्य की चिंता
नवीन जोशी, नैनीताल । उत्तराखंड राज्य में जमीनों की 1965 के बाद पहली बार ‘भूमि बंदोबस्ती” की जाएगी। इसकी शुरुआत अल्मोड़ा व पौड़ी जिलों से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। इस हेतु राज्य सरकार ने सलाहकारों की नियुक्ति कर दी है। इसके अलावा राज्य सरकार राज्य के खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के जमीनों की ‘चकबंदी” भी करने जा रही है। इसके लिए सलाहकारों की तलाश शुरू कर दी गई है। राज्य में चकबंदी के लिए अलग कैडर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने ठेकेदारों के एक शिष्टमंडल को उनकी सात करोड़ तक की मांग पर हल्का संसोधन करते हुए पांच करोड़ रुपए तक के कार्य राष्ट्रीय निविदा के बिना ही कराने की व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया।

यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। पार्टी कार्यकर्ताओं के द्वारा उनके नेतृत्व में पार्टी के 2017 में भी वापस सत्ता में लौटने की अपेक्षा पर रावत ने कहा कि उन्हें वास्तव में 2017 की नहीं वरन राज्य की चिंता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह किसी तरह मायूस न हों। सरकार के कार्यों व निर्णयों को सकारात्मक तरीके से लें, तथा उन्हें मिली जिम्मेदारियों का निर्वाह करें। सरकार की योजनाओं का लाभ संबंधित जरूरतमंद वर्ग को पहुंचाने में मदद करें। कार्य होने पर कुछ कमियां रह जाती हैं, तथा कुछ समस्याओं भी आती हैं, लेकिन वह 2017 तक कार्यकर्ताओं को जनता को बताने व लाभान्वित करने के लिए अनेक योजनाएं देने जा रहे हैं। बताया कि इस वर्ष राज्य में (हल्द्वानी व देहरादून में) दो अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम, दो स्पोर्टस कॉलेज, मुन्स्यारी में ‘हाई एल्टीट्यूट” खेल प्रशिक्षण संस्थान (इसके लिए 17 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए हैं), तीन प्राइवेट विश्व विद्यालय, भवाली में उत्तरी भारत का पहला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय व अल्मोड़ा में जेएनयू की तर्ज पर आवासीय अकादमिक विश्व विद्यालय स्थापित करने, आठ नर्सिंग कॉलेज, 4 पशु महाविद्यालय, 700 सड़कें एवं 1200 करोड़ रुपए के बाढ़ राहत कार्य करने की बात भी कही। कहा कि राज्य में 30 फीसद लोग बहुत सुखी हैं, और उनके बल पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय 18 फीसद की दर से बढ़ रही है, और राज्य प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश का आठवां एवं जीडीपी के मामले में देश का सातवां सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा राज्य है, लेकिन अब भी ४० फीसद आबादी (जिसमें बड़ा हिस्सा पर्वतीय क्षेत्रवासियों और 50 फीसद महिलाओं का हिस्सा है) की प्रति व्यक्ति आय स्थिर अथवा गिर रही है। कहा कि राज्य के 60 फीसद पहाड़वासियों को तत्काल मदद की जरूरत है, जिसकी उन्हें चिंता है, और उसके लिए कार्य कर रहे हैं। इसी हेतु राज्य की चार फीसद बंजर पड़ी भूमि पर राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से चारा प्रजाति के पौधे लगाने, अखरोट के पेड़ लगाने पर 400 व भीमल लगाने पर प्रति पेड़ 300 रुपए देने, पेंशन को 400 से बढ़ाकर 800 करने व इसके नियमों को शिथिल करने, परित्यक्तता महिलाओं को केवल उनके अपने शपथ पत्र से तथा बौने, अशक्त लोगों, 60 से अधिक उम्र केओढ़-मिस्त्री आदि को भी पेंशन व छोलिया नर्तकों जैसे समूहों को आर्थिक मदद देने के प्राविधान किए हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम में रावत को नगर कांग्रेस कमेटी व अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की ओर से फूल मालाओं, जैकेट व शॉल आदि भेंट कर सम्मानित किया गया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नहीं चाहिए अब जैसा हरीश रावत

Harish Rawatनैनीताल। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष डा. रमेश पांडे के संबोधन पर सर्वाधिक तालियां बजीं, और इस पर अनेक कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय विधायक सरिता आर्या ने भी सहमति व्यक्त की कि पार्टी कार्यकर्ताओं को वर्तमान कार्यशैली वाले सीएम हरीश रावत नहीं चाहिए, वरन 1980 के दशक से 90 और वर्ष 2000 तक कार्य करने वाले तेज तर्रार हरीश रावत की जरूरत है। बाद में इस पर टिप्पणी करते हुए रावत ने कहा कि वह राज्य में आई दैवीय आपदा से घिरे राज्य की स्थितियों में सत्ता में आए। लिहाजा वह परिस्थितियों के अनुरूप टेस्ट मैच तरीके से बैटिंग कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर वह 20-20 के स्टाइल में भी बैटिंग करेंगे। राज्य में नौकरशाहों के बेलगाम होने और मुख्यमंत्री की घोषणाआंे पर भी अमल व शासनादेश जारी न करने पर भी सीएम बोले। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है, और अधिकारी भी सीमित हैं। उन्हें केवल यहां से वहां स्थानांतरित किया जा सकता है, बर्खास्त नहीं किया जा सकता। यूपी ने अधिकारियों पर बीते दौर में कड़ाई की, जिसका परिणाम नकारात्मक ही रहा है। इसलिए वह अधिकारियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। इसका परिणाम इस वर्ष जिला योजना में हर जिले में 80 से 85 फीसद तक खर्च होने के रूप में देखा जा सकता है, जबकि बीते वर्षों में केवल 50-60 फीसद धन ही खर्च हो पाता था।

कांग्रेस में नेता, भाजपा में कार्यकर्ता खुश

नैनीताल। कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन में एक सदस्य राजेंद्र व्यास ने टिप्पणी की कि कांग्रेस और भाजपा में फर्क को रेखांकित करते हुए कहा कि कांग्रेस में नेता और भाजपा में कार्यकर्ता खुश रहते हैं। आगे स्पष्ट करते हुए उनका कहना था कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की बात न केवल सरकार में वरन अधिकारी भी सुनते हैं, लेकिन कांग्रेस में केवल नेता ही आनंद उठाते हैं। इस पर भी सीएम रावत ने पूरा स्पष्टीकरण दिया। कहा कि भाजपा में कार्यकर्ता संगठित होकर अधिकारियों के पास जाते हैं, और संगठित होकर ही अपनी सरकार और मुख्यमंत्री को कोई संदेश देते हैं, जबकि कांग्रेस में कार्यकर्ता अकेले-अकेले जाते हैं। लिहाजा उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठित होकर अपनी बात रखने का संदेश दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘जगरिया” की संज्ञा भी दी, तथा पुराने कार्यकर्ताओं को सुसंगत तरीके से अपनी बात रखने का संदेश भी दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मल्लीताल कोतवाली पर निर्दोष लोगों को छुड़वाने के लिए धनराशि वसूलने एवं लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

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