समय से पता लग जाएगा कैंसर, और हो सकेगा सस्ता इलाज


प्रो. रवींद्र कुमार पांडे

प्रो. रवींद्र कुमार पांडे

-अमेरिका के रोजवैल पार्क कैंसर इंस्टिट्यूट के निदेशक प्रो.पांडे ने खोजी प्रविधि
-नैनीताल में सस्ती दरों पर सुविधा उपलब्ध कराने की चल रही है तैयारी
नवीन जोशी, नैनीताल। आज के दौर की सबसे भयावह बीमारी कैंसर के रोगियों के साथ भारत में अधिकांशतया यह समस्या आती है कि उन्हें रोग का पता आखिरी अथवा काफी आगे की स्थिति में लगता है, और तब तक अच्छे महंगे उपचार के बावजूद रोगी बच नहीं पाते, साथ ही उपचार में रोगी के परिवार जन भी कंगाल हो जाते हैं। इन दोनों समस्याओं का हल सामने नजर आ रहा है। यदि सब कुछ सही रहा तो न केवल कैंसर रोग का पता शुरुआती चरण में लग जाएगा, वरन उपचार भी सस्ता (कमोबेश तिहाई अथवा चौथाई कीमत में) हो जाएगा।
अमेरिका के न्यूयार्क प्रांत के बोफैलो शहर स्थित रोजवैल पार्क कैंसर इंस्टिट्यूट के फार्मास्युटिकल कैमिस्ट्री डिवीजन के निदेशक व फोटो-डायनेमिक थेरेपी सेंटर के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रवींद्र कुमार पांडे तीन अलग-अलग प्रकार के कैंसर रोग के विषाणुओं से निपटने के लिए तीन कंपाउंड विकसित करने के अलग-अलग चरणों में हैं। मूलतः उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के निवासी प्रो. पांडे ने मुंह के कैंसर के उपचार से संबंधित कंपाउंड का पहले चरण का परीक्षण भी पूरा कर लिया है, तथा अपनी फोटो लाइटेक कंपनी के जरिए इसकी दवा विकसित करने के लिए सूरत गुजरात की कंपनी-एएमआई ऑर्गेनिक्स से दवा को बाजार में लाने के लिए करार कर लिया है। वहीं फेफड़ों के कैंसर के उपचार के कंपाउंड के परीक्षण का पहला चरण जनवरी माह तक एवं एक तीसरा कंपाउंड अगले दो वर्ष के भीतर प्रयोगशाला से परीक्षण के स्तर तक पहंुचने जा रहा है। प्रो. पांडे ने बताया कि उनके पहले कंपाउंड का पहला परीक्षण अमेरिका में चूहों के साथ ही मनुश्य पर हो चुका है, और अब दूसरे चरण के परीक्षण को भारत में करने की योजना है। चूंकि यह परीक्षण का चरण है, इसलिए उपचार का खर्च कीमोथेरेपी के खर्च का तिहाई या चौथाई तक ही आने की उम्मीद है।

इस तरह पहले ही पता लग जाएगा कैंसर

नैनीताल। प्रो. पांडे ने बताया कि उनकी परिकल्पना अपने कंपाउंड को अधिक मात्रा में उत्पादित कर कैंसर के उपचार को अत्यधिक सस्ता बनाने तथा इसे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर कराने की है। इससे ग्रामीण, गरीब लोग भी कैंसर की जांच करा सकेंगे। यह जांचें नियमित अंतराल में कराई जाएंगी, जिससे कि किसी भी व्यक्ति को शुरुआत में ही कैंसर रोग का पता लग पाएगा। उनकी प्रविधि के अनुसार रोगी को कंपाउंड की मात्रा दी जाएगी। कंपाउंड व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर शरीर में कहीं भी टृयूमर यानी गांठ होने की सूचना ‘इमेजिंग’ व ‘फोटो थेरेपी’ प्रक्रिया के जरिए दे देगा, और इस तरह रोगी को किसी भी तरह का कैंसर होने की जानकारी पहले ही लग जाएगी। ऐसे में रोगियों को कीमोथेरेपी की जरूरत भी नहीं पड़ सकती है, और छोटे ऑपरेशनों से भी कैंसर का इलाज हो सकेगा। बताया कि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में ऐसी सुविधा दिलाने के लिए वह प्रयासशील हैं।

कुमाऊं विवि में बनेगा देश का पहला फोटो डायनेमिक व इमेजिंग थेरेपी संस्थान

करार के दौरान रोजवैल पार्क अमेरिका के निदेशक प्रो. पांडे का पुष्पगुच्छ से स्वागत करते कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी।

करार के दौरान रोजवैल पार्क अमेरिका के निदेशक प्रो. पांडे का पुष्पगुच्छ से स्वागत करते कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी।

-अमेरिका के रोजवैल पार्क कैंसर संस्थान से हुआ करार, इंटीग्रेटेड कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित होगा
नैनीताल। कुमाऊं विवि में इंटीग्रेटेड कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी, जो कि जानलेवा कैंसर रोग के उपचार की फोटो डायनेमिक व इमेजिंग थेरेपी उपलब्ध कराने वाला देश का पहला संस्थान होगा। इस हेतु कुमाऊं विवि एवं अमेरिका के रोजवैल पार्क कैंसर संस्थान के बीच बृहस्पतिवार को करार हो गया है। इस संस्थान को नैनीताल मुख्यालय के पास ही पटवाडांगर में अथवा विवि के डरहम हाउस स्थित परिसर में स्थापित किये जाने की योजना है।
बृहस्पतिवार को कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी एवं अमेरिका के रोजवैल पार्क कैंसर इंस्टिट्यूट के फार्मास्युटिकल कैमिस्ट्री डिवीजन के निदेशक प्रो. रवींद्र कुमार पांडे के बीच एक करार पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. धामी ने बताया कि इस संस्थान में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में कैंसर बायलॉजी विभाग की स्थापना होगी। इस विभाग में बायो-टेक्नोलॉजी, कैमिस्ट्री सहित विज्ञान संकाय से संबंधित कमोबेश सभी विभागों का समन्वय रहेगा। यहां छात्र-छात्राओं को कैंसर रोग के उपचार की फोटो डायनेमिक व इमेजिंग थेरेपी में स्नातकोत्तर डिग्री व पी.एचडी की सुविधा उपलब्ध होगी। बताया कि अभी केवल गुजरात के कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यूट में ही कैंसर बायलॉजी विभाग है, लेकिन वहां भी फोटो डायनेमिक व इमेजिंग थेरेपी में पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए कुमाऊं विवि का संस्थान अपनी तरह का देश में पहला होगा। बताया कि इस संस्थान को पटवाडांगर स्थित पंतनगर विवि के अधीन चल रहे जैव प्रौेद्योगिकी संस्थान में स्थापित किए जाने की योजना है। इस हेतु विवि काफी समय से प्रयासशील है। जैव प्रौेद्योगिकी संस्थान को पंतनगर विवि से कुमाऊं विवि को हस्तांतरित किए जाने की फाइल कृषि सचिव से स्वीकृत होकर कृषि मंत्री के पास पहुंच चुकी है। साथ ही यह संस्थान स्थापित किए जाने की जरूरी औपचारिकता के तहत ‘आईसीएमआर’ के महानिदेशक से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया है, तथा मेडिकल विवि से भी करार कर लिया गया है। वहीं प्रो. पांडे ने उम्मीद जताई कि आगे कुमाऊं विवि में यह पाठ्यक्रम पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अमेरिका के रोजवैल पार्क संस्थान में कुछ अवधि के प्रशिक्षण भी दिए जा सकते हैं। इस अवसर पर पूर्व में अमेरिका के रोजवैल पार्क में कार्य कर चुके और अब कुमाऊं विवि की डा.पेनी जोशी व डा. संतोश कुमार, कुलसचिव डा.दिनेश चंद्रा, डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो.एसपीएस मेहता, डा. बीना पांडे, डा.नंदन सिंह, डा. मुकेश जुयाल, प्रो.संजय पंत, योगेश जोशी, सुभाष कुमार, धनी आर्या व बलवंत कुमार आदि लोग भी उपस्थित रहे।

रोजवेल पार्क विवि का कुमाऊं विवि से कैंसर संस्थान बनाने को होगा एमओयू

नैनीताल। कुमाऊं विवि ने गत सितंबर माह में अमेरिका के रोजवैल पार्क कैंसर इंस्टिट्यूट के निदेशक प्रो. रवींद्र कुमार पांडे के साथ कुमाऊं विवि में कैंसर रोग की समय से पहचान के लिए फोटो डायनेमिक व इमेजिंग थेरेपी की सुविधा युक्त इंटीग्रेगेड कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यूट की स्थापना के लिए बात हुई थी। इधर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने बताया कि वह रोजवैल पार्क कैंसर इंस्टिट्यूट से अनुबंध होने के लिए शीघ्र अमेरिका जाएंगे। प्रस्तावित संस्थान में कैंसर बायोलॉजी के साथ ही विवि के भौतिकी, रसायन आदि अन्य विभाग भी जुड़ेंगे। बताया कि इस प्रस्तावित संस्थान में यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जीव-जंतुओं को काटे (डिसेक्सन) के बिना एनीमेशन के जरिए उन पर प्रयोग करने की सुविधा होगी। इसके अलावा एक अन्य योजना के तहत विवि में म्यूजियोलॉजी यानी संग्रहालय संबंधी विधा तथा हिमालय की संस्कृतियों के संरक्षण एवं उसे दुनिया के सामने लाने के कार्य भी होंगे।

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