ढाई हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक थाती से रूबरू कराएगा हिमालय संग्रहालय


हिमालय संग्रहालय के ऐतिहासिक भवन में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरें।
हिमालय संग्रहालय के ऐतिहासिक भवन में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरें।

-ईशा से तीन सदी पूर्व की कुषाण कालीन स्वर्ण मुद्रा सहित उत्तराखंड में मिली और यहां की ऐतिहासिक विरासतें हैं संजोई कुमाऊं विवि के इस संग्रहालय ने
-एशियाई विकास बैंक की ‘हैरिटेज पाथ वॉक” योजना से जुड़ेगा
नवीन जोशी, नैनीताल। ईशा से तीन सदी पूर्व की कुषाण कालीन स्वर्ण मुद्रा सहित उत्तराखंड में मिली और यहां की ऐतिहासिक विरासतें संजोए बैठा कुमाऊं विवि का हिमालय संग्रहालय अब सैलानियों को अधिक बेहतर स्वरूप में सैलानियों को ढाई हजार वर्ष पुरानी प्रदेश ही नहीं देश की ऐतिहासिक थाती और हिमालय की ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू कराएगा। ऐसा संभव होगा एशियाई विकास बैंक की ‘हैरिटेज पाथ वॉक” योजना से, जिसमें हिमालय संग्रहालय को पहले फेस में बाहर-भीतर दोनों स्वरूपों में संजोने-संवारने के लिए शामिल कर लिया गया है। कुमाऊं विवि का हिमालय संग्रहालय का भवन स्वयं में भी ऐतिहासिक धरोहर महत्व का भवन है। १८७८-१८७९ में बना यह भवन तत्कालीन बेलेजली गल्र्स स्कूल (कुमाऊं विवि के मुख्यालय स्थित ठाकुर देव सिंह बिष्ट (डीएसबी) परिसर के वर्तमान भौतिकी विभाग भवन) का चैपल यानी प्रार्थना भवन रहा है। इस भवन की बनावट में उस दौर की सभ्यता व भवन निर्माण कला को साफ तौर पर देखा जा सकता है। इधर उत्तराखंड सरकार ने अंग्रेजों के बसाए शहर नैनीताल को एशियाई विकास बैंक सहायतित हैरिटेज पाथ वॉक” योजना में शामिल किया है, जिसके तहत नगर की ऐतिहासिक विरासत महत्व की अंग्रेजी दौर में बनी इमारतों को एक विरासत पथ के रूप में जोड़ते हुए इन्हें सैलानियों से रू-ब-रू कराए जाने की योजना है। इस योजना में हिमालय संग्रहालय के साथ ही नैनीताल राजभवन (१८९७-९९), नगर का पहला भवन-पिलग्रिम हाउस (१८४१), सेंट जान्स इन द विल्डरनेस (१८४६), एशिया के पहले अमेरिकन मिशनरियों द्वारा १८५८ में निर्मित मैथोडिस्ट चर्च, जिम कार्बेट का घर-गर्नी हाउस (१८८१), रैमजे अस्पताल व कैपिटॉल सिनेमा (१८९२) सहित अनेकों इमारतों को बेहतर स्वरूप व आसान पहुंच उपलब्ध कराकर सैलानियों के लिए नया आकर्षण प्रदान करने की है। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने बताया कि कुमाऊं आयुक्त अवनेंद्र सिंह नयाल के विशेष प्रयासों से हिमालय संग्रहालय को पहले चरण के लिए शामिल कर लिया गया है। सभी ऐतिहासिक विरासतों में से हिमालय संग्रहालय को सबसे बड़े आकर्षण के रूप में विकसित किए जाने की योजना है, क्योंकि यहां भवन की खुद की ऐतिहासिकता और बनावट के साथ यहां मौजूद देश-प्रदेश की ऐतिहासिक विरासतें-थाती व हिमालय की धरोहरें सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होंगी। इसे सैलानियों के साथ ही ऐतिहासिक शोध केंद्र के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने यहां मौजूद ऐतिहासिक सामग्रियों व दस्तावेजों को डिजिटलाइज करने की भी योजना है।

यह होंगे हिमालय संग्रहालय में बड़े आकर्षण

हिमालय संग्रहालय में मौजूद ढाई हजार वर्ष पुरानी कुणिंद राजा हुविस्क द्वितीय की चित्र युक्त स्वर्ण मुद्रा।
हिमालय संग्रहालय में मौजूद ढाई हजार वर्ष पुरानी कुणिंद राजा हुविस्क द्वितीय के चित्र युक्त स्वर्ण मुद्रा।

नैनीताल। हिमालय संग्रहालय में सोमेश्वर के रिस्यारा गांव से मिली ईशा से तीन सदी पूर्व के कुषाण राजा हुविस्क द्वितीय के स्वयं के चित्र युक्त राज चिन्ह वाली स्वर्ण मुद्रा, कुणिंद, कत्यूर व चंद राजवंश कालीन ताम्रपत्र, दिल्ली के बादशाह मोहम्मद शाह के चांदी के सिक्के, कुमाऊं के वीरखंभ, लोक संस्कृति संबंधी बिंणई, बीन बाजे, तुतुरी जैसे लोकवाद्यों के साथ प्रदेश के देवीधूरा के प्रसिद्ध पाषाण युद्ध, पिथौरागढ़ की हिलजात्रा व उत्तरकाशी के जौनसार अंचल के पांडव नृत्य जैसे लोकोत्सवों से संबंधित ऑडियो-वीडियो सामग्री, २७५ के करीब दुर्लभ पांडुलिपियां, स्वतंत्रता संग्राम के दौर के यंग इंडिया, हरिजन, पर्वतीय, शक्ति सहित अनेकों समाचार पत्रों, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, इंद्र सिंह नयाल (उनके द्वारा १९५५ में विधान परिषद सदस्य के रूप में यूपी विधान परिषद में उत्तराखंड राज्य के लिए दिए गए सबसे पहले प्रस्ताव की प्रति), सालम क्रांति के नायक राम सिंह धौनी व प्रताप सिंह बिष्ट जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित साहित्य व उनके व्यक्तिगत पत्र तथा भगवान विष्णु की १२वीं-१३वीं सदी की बनी और सूर्यदेव की कुषाणों की लंबे बूटों जैसी वेषभूषा से मिलती दुर्लभ मूर्तियों सहित और भी बहुत कुछ का ऐसा विशाल भंडार है, जिसे देखना सैलानियों के साथ ही इतिहास के शोध छात्रों के लिए भी दुर्लभ अनुभव होगा।

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