नगर पालिका के हाथों से छिना ‘शरदोत्सव’, अब ‘सत्ता’ कराएगी ‘नैनीताल शीतोत्सव’


वर्ष 1890 के शरदोत्सव के दौरान विशाल हवा के गुब्बारे को उड़ाने के दौरान जमा भीड़।

‘शीतोत्सव’ के नए अवतार में परिवर्तित हो जाएगी 1890 से जारी ‘शरदोत्सव’परंपरा
-नगर पालिका से राज्य की ‘सत्ता’ के हाथ में चला जायेगा आयोजन
नवीन जोशी, नैनीताल। 1890 से होते आ रहे नैनीताल ‘शरदोत्सव” को इस वर्ष न करा पाना नगर पालिका को महंगा पड़ने जा रहा है। जिला प्रशासन ने ‘शीतोत्सव” या ‘नैनीताल विंटर कार्निवाल” के नए रंग-रूप में इस आयोजन को करने का ऐलान कर दिया है, और बड़ी सफाई से पालिका को इसके आयोजन से कमोबेश दूर रखकर स्थानीय विधायक को आयोजन समिति की मुख्य कार्यकारिणी का अध्यक्ष बना दिया है। इस प्रकार तय माना जा रहा है कि इस प्रकार शरदोत्सव इतिहास की बात हो जाएगा, और इसकी जगह शीतोत्सव ले लेगा, और उसका मुख्य आयोजक राज्य का सत्तारूढ़ दल होगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्षों में नगर पालिका कभी भी शरदोत्सव मनाने को स्वयं उद्यत नजर नहीं आई है। पालिका द्वारा कभी आपदा तो कभी कुछ और, आयोजन न करने के बहाने ही तलाशे जाते रहे। पिछले वर्षों में तत्कालीन राज्यपाल डा़. अजीज कुरैशी ने विशेष प्रयास न किए होते तो यह परंपरा कमोबेश 2012 में ही टूट गई होती। ऐसे में स्थानीय विधायक की अनुपस्थिति में उनकी अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति तय हो गई है। आयोजन में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुख्यतया नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन की प्रमुख भूमिका होने जा रही है। नगर पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण ने कहा कि वास्तव में प्रशासन पालिका को आयोजन से बाहर करना चाहता था, लेकिन नगर में पर्यटन विकास होने की भावना के मद्देनजर पालिका ने इस पर अपना विरोध दर्ज नहीं किया है। कहा कि पालिका को जिम्मेदारी दी जाती तो पिछले वर्ष के शेष बचे देयों की मांग भी की जाती, इसलिए नया रास्ता निकाला गया है। बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि किसी भी स्वरूप में सही, नैनीताल की यह ऐतिहासिक परंपरा जारी रहनी चाहिए। नए स्वरूप में आयोजन को शासन-प्रशासन से धन की कमी सही अर्थों में आढ़े नहीं आने पाएगी।

राज्य बनने के बाद आने लगी धन की कमी

Rashtriya Sahara, 08 Dec. 2015, Page-10नैनीताल। राज्य बनने के बाद महोत्सव का स्वरुप बड़ा होने व अन्य कारणों से आयोजन में धन की कमी आढे आढ़े आने लगी। पालिका 2006 में कराये गए शरदोत्सव के बिलों के भुगतान आज तक नहीं करा पाई है, उल्लेखनीय है कि तब वर्तमान विधायक सरिता आर्य पालिकाध्यक्ष थीं। 2010 में शरदोत्सव की परंपरा टूटी। इसका कारण तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी द्वारा इस वर्ष कुमाऊँ में बड़ी आपदा का आना (खैरना-काकड़ीघाट के पास सड़क बह जाने, बागेश्वर जिले के सुमगड़ गाँव के सरस्वती शिशु मंदिर की कक्षा में मलवा घुसने से 18 बच्चों के जिंदा दबने व अल्मोड़ा में भी भरी तबाही) बताया गया। 2012 में अध्यक्ष श्याम नारायण के नेतृत्व में बनी नयी पालिका बोर्ड शुरू से शरदोत्सव मनाने को उत्सुक नहीं दिखी, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल डा़ अजीज कुरैशी के आगे ‘ना” कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। 2014 में कुरैशी गए तो इस वर्ष की देनदारी पालिका चुका नहीं पाई और इस कारण 2015 में शरदोत्सव नहीं हो पाया। और इसे ‘शीतोत्सव” (नैनीताल विंटर कार्निवाल) के रूप में पहली बार मनाने की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में नगर पालिका कभी भी शरदोत्सव मनाने को स्वयं उद्यत नजर नहीं आई है। पालिका द्वारा कभी आपदा तो कभी कुछ और, आयोजन न करने के बहाने ही तलाशे जाते रहे। पिछले वर्षों में तत्कालीन राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी को फ्लैट्स मैदान में अकेले ‘कव्वाली’ और शेरो-शायरियों पर ‘दाद’ देने का शौक न होता तो यह परंपरा 2010 में टूटने के बाद जुड़ी ही नहीं होती। इससे पूर्व वर्तमान विधायक सरिता आर्य के बतौर पालिकाध्यक्ष 2006 में कराए गए शरदोत्सव में समाचार पत्रों केा दिए गए विज्ञापनों के भुगतान आज तक नहीं हो पाए हैं, तो बीते वर्ष 2014 के बिलों की भी यही स्थिति है।

1890 के ‘मीट्स एंड स्पेशल वीक’ से शुरू हुई थी शरदोत्सव की परंपरा

-कुछ अवसरों को छोड़कर लगातार रहा है जारी, यहीं से प्रेरणा लेकर देश-प्रदेश में भी शुरू हुए हैं ऐसे आयोजन
-अंग्रेजी दौर में इंग्लॅण्ड, फ्रांस, जर्मनी व इटली के लोक-नृत्य होते थे, तथा केवल अंग्रेज और आर्मी व आईसीएस अधिकारी ही भाग लेते थे, और भारतीयों की भूमिका केवल तालियां बजाने तक सीमित रहती थी
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी में नैनीताल शरदोत्सव का बिगुल एक बार फिर देर से सही लेकिन आगामी पांच नवंबर से शुरू होने जा रहा है। नैनीताल शरदोत्सव प्रदेश ही नहीं देश में अपनी तरह के महोत्सवों का प्रणेता माना जाता है। इतिहास में केवल तीन-चार बार ही पैदा हुए अवरोधों वाले इस ऐतिहासिक आयोजन का आयोजन पूर्व में दशहरे और खासकर दो अक्टूबर के करीब होता था, लेकिन इस वर्ष का संस्करण देर से ही सही लेकिन आगामी पांच नवंबर से शुरू होने जा रहा है, और नौ नवंबर यानी राज्य स्थापना दिन के दिन तक चलेगा।
आयोजन के गौरवमयी इतिहास की बात करें तो 1890 में ‘मीट्स एंड स्पेशल वीक” के रूप में वर्तमान ‘नैनीताल शरदोत्सव” की शुरुआत हो गई थी। अंग्रेजी दौर में इस आयोजन में इंग्लॅण्ड, फ्रांस, जर्मनी व इटली के लोक-नृत्य होते थे, तथा केवल अंग्रेज और आर्मी व आईसीएस अधिकारी ही भाग लेते थे। 6 सितम्बर 1900 में इस आयोजन को ‘वीक्स” और ‘मीट्स” नाम दिया गया, ताकि इन तय तिथियों पर अन्य आयोजन न हों। 1925 में इसे ‘रानीखेत वीक” और ‘सितम्बर वीक” के नए नाम मिले। 1937 तक यह आयोजन वर्ष में दो बार, जून माह में रानीखेत वीक तथा सितम्बर-अक्टूबर माह में आईसीएस वीक के रूप में होने लगे। इस दौरान थ्री-ए-साइड पोलो प्रतियोगिता भी होती थी। इन्हीं ‘वीक्स” में हवा के बड़े गुब्बारे भी उडाये जाते थे, तथा झील में पाल नौकायन प्रतियोगिताएं भी होती थीं। साथ ही डांडी रेस, घोडा रेस व रिक्शा दौड़ तथा इंग्लॅण्ड, फ्रांस व हॉलैंड आदि देशों के लोक नृत्य व लोक गायन के कार्यक्रम वेलेजली गर्ल्स (वर्तमान डीएसबी कॉलेज), रैमनी व सेंट मेरी कॉलेजों की छात्राओं व अंग्रेजों द्वारा होते थे, इनमें भारतीयों की भूमिका केवल दर्शकों के रूप में तालियाँ बजाने तक ही सीमित होती थी़। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नैनीताल पालिका के प्रथम पालिकाध्यक्ष राय बहादुर जसौद सिंह बिष्ट ने ती सितम्बर 1952 को पालिका में प्रस्ताव पारित कर ‘सितम्बर वीक” की जगह ‘शरदोत्सव” मनाने का निर्णय लिया, जो वर्तमान तक जारी है। वर्ष 1970-71 से पर्यटन विभाग द्वारा इस आयोजन को अपनी ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की गई। 1997 में तत्कालीन यूपी सरकार ने नैनीताल के शरदोत्सव को पूरे कुमाऊं मंडल का आयोजन बनाते हुए इसे ‘कुमाऊं महोत्सव” का नाम दिया। इधर राज्य गठन के बाद वर्ष 2003-04 से इसे वापस ‘नैनीताल महोत्सव” के रूप में मनाया जाने लगा, जबकि आगे यह ‘नैनीताल शरदोत्सव” के रूप में मनाया जाने लगा। आगे महोत्सव का स्वरुप बड़ा होने व अन्य कारणों से आयोजन में धन की कमी आढे आढ़े आने लगी। पालिका 2006 में कराये गए शरदोत्सव के बिलों के भुगतान आज तक नहीं करा पाई है। 2010 में शरदोत्सव की परंपरा टूटी। इसका कारण तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी द्वारा इस वर्ष कुमाऊँ में बड़ी आपदा का आना (खैरना-काकड़ीघाट के पास सड़क बह जाने, बागेश्वर जिले के सुमगड़ गाँव के सरस्वती शिशु मंदिर की कक्षा में मलवा घुसने से 18 बच्चों के जिन्दा दबने व अल्मोड़ा में भी भरी तबाही) बताया गया। 2012 में अध्यक्ष श्याम नारायण के नेतृत्व में बनी नयी पालिका बोर्ड शुरू से शरदोत्सव मनाने को उत्सुक नहीं दिखी, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी के आगे ‘ना’ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। 2014 में कुरैशी गए तो इस वर्ष की देनदारी पालिका चुका नहीं पाई और इस कारण 2015 में शरदोत्सव नहीं हो पाया। और इसे ‘शीतोत्सव’ (नैनीताल विंटर कार्निवाल) के रूप में पहली बार मनाने की तैयारियां शुरू हो गयी हैं।

2014 का समाचार : पांच से नौ नवंबर तक होगा नैनीताल शरदोत्सव, कमेटियां गठित

नैनीताल (एसएनबी)। अपनी तरह के आयोजनों का प्रणेता ‘नैनीताल शरदोत्सव” आगामी पांच नवम्बर से प्रारंभ होगा, और राज्य स्थापना दिवस यानी नौ नवंबर को इसका समापन होगा। प्रदेश के राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी द्वारा गत दिवस देहरादून में ली गई बैठक के सााि की गई पहल के परिणामस्वरूप मंगलवार को नगरपालिका सभागार में इसकी तैयारियों के लिए पहली बैठक आयोजित हुई, जिसमें शरदोत्सव के सफल संचालन हेतु 10 कमेटीयों का गठन किया गया।
क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या, नगरपालिका अध्यक्ष श्याम नारायण व एसडीएम आशीष चौहान तथा समस्त सभासदों एवं अन्य गणमान्य जनों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में कमेटियों का गठन किया गया। कोर कमेटी पालिका अध्यक्ष के संयोजकत्व में होगी तथा इसमें सीडीओ ललित मोहन रयाल, एडीएम यूएस राणा, उपनिदेशक पर्यटन जेसी बेरी, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा, सभासद जेके शर्मा, डीएन भट्ट, मारुति नंदन साह व सुरेश गुरुरानी होंगे। इसी प्रकार व्यय समिति में एडीएम, पालिकाध्यक्ष, एसडीएम, सभासद भारती साह, भूपाल कार्की, सपना बिष्ट, जितेंद्र बिष्ट, ईशा साह व ईओ, सांस्कृतिक समिति में सीडीओ, सभासद त्रिभुवन फत्र्याल, मारुति साह, नीतू बोहरा, किरन साह, जहूर आलम, इदरीश मलिक, सुरेश गुरुरानी, भारती साह, केएमवीएन के जीएम विनोद गिरि गोस्वामी तथा गीत एवं नाटक प्रभाग, संस्कृति विभाग व सूचना विभाग के अधिकारी, मंच संचालन में एसडीएम, सीओ, मुकेश जोशी, अधिशासी अभियंता लोनिवि प्रांतीय व निर्माण खंड तथा विद्युत वितरण खंड, ईओ तथा सभी सभासद, प्रदर्शनी-स्टॉल समिति में सीडीओ, एडीएम, परियोजना प्रबंधक-डीआरडीओ, जीएम उद्योग, खादी व ग्रामोद्योग, सभासद असीम बख्श, सुमित कुमार व नगर स्वास्थ्य अधिकारी विमलेश जोशी, प्रकाशन समिति में अपर आयुक्त राजीव साह, डा. अजय रावत, महेश गुरुरानी, जिला सूचना अधिकारी, उप निदेशक पर्यटन, सुरेश गुरुरानी, नवीन जोशी, किशोर जोशी, राजीव लोचन साह, गंगा प्रसाद साह व डा. गिरीश रंजन तिवारी तथा फोटो प्रदर्शनी समिति में एडीएम, जीएम केएमवीएन, अनूप साह, ईओ, बृजमोहन जोशी, एएन सिंह, नवीन जोशी, अमित साह, प्रदीप पांडे, दिनेश लोहनी, दामोदर लोहनी व सभासद अजय भट्ट होंगे। पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण ने बताया कि शरदोत्सव में स्टार नाईट के साथ ही कुमाउनी-गढ़वाली व स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाएंगे। साथ ही गत वर्षाे की भांति कव्वाली-मुशायरा भी होंगे।

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2 responses to “नगर पालिका के हाथों से छिना ‘शरदोत्सव’, अब ‘सत्ता’ कराएगी ‘नैनीताल शीतोत्सव’

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